प्रधानमंत्री Narendra Modi ने महिला आरक्षण बिल को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि देश की संसद एक ऐतिहासिक फैसले के करीब है और दशकों से चली आ रही प्रतीक्षा अब समाप्त होने वाली है। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से सरकार 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुला रही है, जहां इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।
प्रधानमंत्री ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा अवसर बताते हुए कहा कि इससे संसद और विधानसभाओं तक महिलाओं की पहुंच आसान होगी। उन्होंने यह भी जोर दिया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं ने महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कई सरकारी योजनाओं का जिक्र किया, जिनमें ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, ‘सुकन्या समृद्धि योजना’, ‘मिशन इंद्रधनुष’, ‘स्वच्छ भारत अभियान’, ‘उज्ज्वला योजना’ और ‘आयुष्मान भारत’ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का सबसे ज्यादा लाभ देश की बेटियों और महिलाओं को मिला है, जिससे उनका आत्मविश्वास और भागीदारी दोनों बढ़े हैं।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि देश में 3 करोड़ से अधिक महिलाएं अब अपने घर की मालिक बन चुकी हैं, जो आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा संकेत है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भूमिका आज हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण होती जा रही है और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना समय की मांग है।
उन्होंने महिला आरक्षण पर लंबे समय से चल रही चर्चा का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 40 सालों से इस पर विमर्श हो रहा है और सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने स्तर पर इसके लिए प्रयास किए हैं। 2023 में इस अधिनियम को सर्वसम्मति से पारित किया जाना लोकतंत्र की ताकत को दर्शाता है।
साथ ही उन्होंने देश की महिलाओं से अपील की कि वे अपने सांसदों से मिलकर अपनी अपेक्षाएं रखें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उनका कहना था कि जब जनप्रतिनिधि महिलाओं का आशीर्वाद लेकर संसद जाएंगे, तो वे उनके हित में फैसले लेने के लिए और अधिक प्रेरित होंगे।
महिला आरक्षण को लागू करने के लिए 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया है, लेकिन जनगणना में देरी के कारण अब 2011 के आंकड़ों के आधार पर आगे बढ़ने की तैयारी है। प्रस्तावित बदलावों के बाद लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 तक हो सकती है।
सरकार इस कानून को लागू करने के लिए दो बड़े संशोधनों की योजना बना रही है, जिनमें परिसीमन से जुड़ा अलग विधेयक भी शामिल है। इन दोनों संशोधनों को संवैधानिक प्रक्रिया के तहत पारित करना आवश्यक होगा। वर्तमान व्यवस्था के तहत SC/ST आरक्षण जारी रहेगा, जबकि OBC आरक्षण को लेकर अभी कोई प्रावधान नहीं किया गया है।