विश्वविद्यालयों में संचालित यूजीसी नेट की तैयारी के लिए करियर गाइडेंस सेंटर में नए नामांकन पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। इस संबंध में बिहार स्टेट बैकवर्ड क्लासेज फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कार्पोरेशन के निदेशक ने पटना विश्वविद्यालय सहित राज्य के सात विश्वविद्यालयों को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि बिना विभागीय अनुमति के यदि किसी विश्वविद्यालय द्वारा इस सत्र में दाखिला लिया जाता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विश्वविद्यालय की होगी। साथ ही सेंटर के संचालन का खर्च भी विश्वविद्यालय को स्वयं वहन करना पड़ेगा।
गौरतलब है कि पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग के छात्रों को यूजीसी नेट की मुफ्त तैयारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में राज्य के सात विश्वविद्यालयों में करियर गाइडेंस सेंटर की शुरुआत की गई थी। यहां छह महीने का कोर्स चलाया जाता था, जिसमें प्रत्येक सत्र में करीब 120 छात्रों का नामांकन होता था। पहला सत्र जून और दूसरा दिसंबर से शुरू होता था, जबकि दाखिले की प्रक्रिया अप्रैल से प्रारंभ होती थी।
इन केंद्रों के मार्गदर्शन में अब तक 42 छात्र यूजीसी नेट परीक्षा में सफल भी हो चुके हैं। नामांकन पर रोक की सूचना देने से पहले विभाग द्वारा सेंटर के संचालन का ऑडिट कराया गया था, जिसकी रिपोर्ट पटना विश्वविद्यालय प्रशासन ने विभाग को सौंप दी है।
पटना विश्वविद्यालय के करियर गाइडेंस सेंटर में वर्तमान में 240 छात्र नामांकित हैं, जिनमें से 120 छात्रों का कोर्स जून में पूरा हो जाएगा। इसी तरह की स्थिति राज्य के अन्य छह विश्वविद्यालयों में भी बनी हुई है।
इन विश्वविद्यालयों में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, तिलका मांझी विश्वविद्यालय (भागलपुर), मधेपुरा विश्वविद्यालय और बिहार विश्वविद्यालय (मुजफ्फरपुर) शामिल हैं। पटना विश्वविद्यालय को छोड़कर अन्य विश्वविद्यालयों में भी प्रति सत्र लगभग 100 छात्रों का नामांकन होता है।
इन सेंटरों का संचालन पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा किया जाता है, जिसके तहत प्रत्येक सत्र के लिए लगभग 10 लाख रुपये का खर्च वहन किया जाता है। इसी राशि से सेंटर की गतिविधियां संचालित होती हैं।