राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण और ट्रैफिक चुनौतियों से निपटने के लिए हरियाणा की सैनी सरकार ने एप आधारित टैक्सी और डिलीवरी सेवाओं पर बड़ा फैसला लिया है।
पहली जनवरी 2027 से एनसीआर क्षेत्र में एग्रीगेटर, डिलीवरी सेवा प्रदाता और ई-कामर्स कंपनियां अपने बेड़े में केवल सीएनजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी), बैटरी आपरेटेड व्हीकल (बीओवी) या अन्य स्वच्छ ईंधन आधारित वाहन ही शामिल कर सकेंगी।
नए ऑटो रिक्शा भी केवल सीएनजी या इलेक्ट्रिक ही होंगे। कैबिनेट ने सोमवार को हरियाणा मोटर व्हीकल रूल्स-1993 में संशोधन को मंजूरी दे दी।
इसका मुख्य उद्देश्य प्रदूषण कम करना, यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना और हरियाणा में ‘क्लीन मोबिलिटी माडल’ को तेजी से लागू करना है। एग्रीगेटर और डिलीवरी सेवा प्रदाताओं के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
ये नियम होंगे लागू
ड्राइवर आनबोर्डिंग, वाहन सत्यापन, साइबर सुरक्षा, किराया निर्धारण और शिकायत निवारण से जुड़े सख्त नियम लागू होंगे। एग्रीगेटर कंपनियों को यात्रियों के लिए कम से कम पांच लाख रुपये का बीमा कवर देना होगा।
इसके अलावा ड्राइवरों के लिए पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और दस लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस अनिवार्य किया गया है। नई नीति के तहत वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी), पैनिक बटन, फर्स्ट एड किट और फायर एक्सटिंग्विशर लगाना जरूरी होगा।
कंपनियों को करने होंगे ये काम
कंपनियों को 24x7 कंट्रोल रूम और कॉल सेंटर स्थापित करने होंगे, ताकि यात्रियों की शिकायतों का तुरंत समाधान किया जा सके। ड्राइवर और वाहनों का सत्यापन ‘वाहन’ और ‘सारथी’ पोर्टल के जरिए किया जाएगा।
कंपनियों को आनबोर्ड किए गए सभी ड्राइवरों और वाहनों का डिजिटल रिकार्ड रखना अनिवार्य होगा। नई नीति में दिव्यांगजन अनुकूल वाहनों को शामिल करने और चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ने का भी प्रविधान रखा गया है।