Delhi में 24 मई को जनजातीय संस्कृति का भव्य आयोजन देखने को मिलेगा, जब देशभर से आए करीब 1.5 लाख आदिवासी पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्रों के साथ शोभायात्रा निकालते हुए Red Fort पहुंचेंगे। इस विशाल सांस्कृतिक समागम को “मिनी भारत” की झलक माना जा रहा है।
जनजातीय समाज के लोग अलग-अलग राज्यों से अपनी सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक नृत्य-गीतों के साथ राजधानी की सड़कों पर नजर आएंगे। यह आयोजन न सिर्फ आदिवासी संस्कृति की विविधता और प्रकृति से उनके जुड़ाव को प्रदर्शित करेगा, बल्कि देश की एकता और सांस्कृतिक विरासत का संदेश भी देगा।
शोभायात्रा के लिए लालकिले के आसपास पांच प्रमुख मार्ग तय किए गए हैं। इनमें अजमेरी गेट, रामलीला मैदान, राजघाट, श्यामगिरि मंदिर और कुदेसिया पार्क शामिल हैं। इन सभी स्थानों से जनजातीय समूह अलग-अलग टोलियों में लालकिला मैदान की ओर बढ़ेंगे। कुल यात्रा मार्ग लगभग 13.3 किलोमीटर का होगा।
सबसे लंबा मार्ग श्यामगिरि मंदिर से लालकिला तक करीब 3.5 किलोमीटर का रखा गया है, जबकि सबसे छोटा रास्ता कुदेसिया पार्क से लालकिला तक लगभग 2 किलोमीटर लंबा होगा। गर्मी को देखते हुए यात्रा मार्गों को अपेक्षाकृत छोटा रखा गया है।
आयोजन में विभिन्न राज्यों के जनजातीय समुदाय अपने-अपने बैनर और पारंपरिक प्रतीकों के साथ हिस्सा लेंगे। इसके अलावा लालकिला मैदान में जनजातीय समाज की 75 महान विभूतियों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें स्वतंत्रता आंदोलन और देश के विकास में उनके योगदान को प्रदर्शित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम का आयोजन Janjati Suraksha Manch और Janjati Jagruti Samiti द्वारा किया जा रहा है। आयोजकों के मुताबिक, यह दिल्ली में अब तक का सबसे बड़ा जनजातीय जुटान होगा।
समागम में देशभर की करीब 500 जनजातियों की भागीदारी देखने को मिलेगी। इसमें पद्मश्री सम्मानित व्यक्तियों, डॉक्टरों, अधिकारियों, अधिवक्ताओं और समाजसेवियों समेत करीब 100 विशिष्ट जनजातीय प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
देश के अलग-अलग राज्यों से जनजातीय समूह शुक्रवार से दिल्ली पहुंचना शुरू कर देंगे। प्रतिभागियों के ठहरने के लिए स्कूलों और धर्मशालाओं में विशेष व्यवस्था की गई है। आयोजन की तैयारियों के लिए 20 अलग-अलग विभाग बनाए गए हैं।