भारत एक बार फिर भीषण लू की चपेट में है और अत्यधिक तापमान के कारण गर्मी से जुड़ी बीमारियों और मौतों का खतरा तेजी से बढ़ गया है। मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के बड़े हिस्सों में इस समय लू से लेकर भीषण लू जैसी स्थितियां बनी हुई हैं। कई इलाकों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रह सकती है, जिससे हीटस्ट्रोक और गर्मी से जुड़ी दूसरी गंभीर बीमारियों का खतरा और बढ़ जाएगा। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब देश में लू लगने से होने वाली मौतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
साल 2024 में लू लगने से 1,832 लोगों की मौत हुई थी
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में साल 2024 के दौरान लू लगने से 1,832 लोगों की मौत हुई। यह पिछले दो दशकों में दर्ज सबसे ज्यादा वार्षिक मौतों में से एक है। इससे पहले 2015 में अत्यधिक गर्मी के कारण 1,908 लोगों की जान गई थी।
कोरोना महामारी के दौरान लू से मौतों में कुछ गिरावट देखने को मिली थी। साल 2021 में यह संख्या घटकर 374 रह गई थी, लेकिन उसके बाद आंकड़े फिर तेजी से बढ़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक अत्यधिक तापमान के संपर्क में रहना लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो लू से होने वाली मौतों का असर सभी वर्गों पर समान रूप से नहीं पड़ा। पुरुषों में मौतों की संख्या महिलाओं की तुलना में काफी ज्यादा दर्ज की गई। खासकर कामकाजी उम्र के लोगों में इसका असर सबसे अधिक देखने को मिला। 30 से 44 साल के आयु वर्ग में लू लगने से 525 पुरुषों की मौत हुई, जबकि 45 से 59 साल के आयु वर्ग में यह आंकड़ा बढ़कर 577 तक पहुंच गया।
29 मई के बाद तापमान में आएगी धीरे-धीरे गिरावट
वहीं, इन दोनों आयु वर्गों में महिलाओं की मौतें काफी कम दर्ज की गईं। विशेषज्ञ इसकी सबसे बड़ी वजह बाहरी संपर्क और कामकाजी परिस्थितियों को मानते हैं। इन आयु वर्गों के पुरुषों के बाहर काम करने, धूप में ज्यादा समय बिताने और शारीरिक मेहनत वाले कामों में लगे होने की संभावना अधिक होती है। यही कारण है कि भीषण गर्मी के दौरान उनके प्रभावित होने का खतरा भी ज्यादा रहता है।
यह अंतर कम उम्र के युवाओं में भी साफ दिखाई देता है। 18 से 29 साल के आयु वर्ग में 152 पुरुषों की मौत दर्ज की गई, जबकि महिलाओं की मौतों का आंकड़ा केवल 23 रहा। इससे साफ संकेत मिलता है कि बाहर के वातावरण में लंबे समय तक रहना और शारीरिक सक्रियता का स्तर, गर्मी से होने वाले खतरों में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
हालांकि मौसम विभाग ने 29 मई से तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आने की संभावना जताई है, जिससे लोगों को कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन कुल मिलाकर देश में बढ़ती लू की घटनाएं और उनका तीव्र होता असर अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी की घटनाएं ज्यादा बार और ज्यादा तीव्र होती जाएंगी, वैसे-वैसे इसका मानवीय नुकसान भी बढ़ेगा। खासकर उन लोगों के लिए खतरा ज्यादा रहेगा, जो लंबे समय तक धूप और अत्यधिक तापमान के संपर्क में रहते हैं।
