डोनाल्ड ट्रम्प के एयरफोर्स-1 विमान में तकनीकी खराबी, उड़ान में आई बाधा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का विमान दावोस जाते समय टेकऑफ के कुछ देर बाद ही वॉशिंगटन लौट आया। व्हाइट हाउस के मुताबिक विमान में तकनीकी खराबी सामने आई थी, जिसके चलते सुरक्षा कारणों से उड़ान रद्द करने का फैसला लिया गया।

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लीविट ने बताया कि टेकऑफ के तुरंत बाद क्रू को विमान में एक मामूली इलेक्ट्रिकल खराबी का संकेत मिला। एहतियात के तौर पर पायलट ने विमान को वापस लाने का निर्णय लिया।

हालांकि इस घटना से राष्ट्रपति ट्रम्प के कार्यक्रम में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। कुछ देर बाद वे एक अन्य विमान से स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो गए। ट्रम्प आज दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में हिस्सा लेंगे।

चार दशक पुराने विमान का इस्तेमाल

फिलहाल ट्रम्प की आधिकारिक यात्राओं के लिए बोइंग 747-200B को एयर फोर्स वन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस फ्लीट में मौजूद दोनों विमान करीब 40 साल पुराने हैं। अमेरिकी विमान निर्माता बोइंग इनके नए विकल्प तैयार कर रहा है, लेकिन यह परियोजना लगातार देरी का शिकार रही है।

पिछले साल कतर के शाही परिवार ने ट्रम्प को एक लग्जरी बोइंग 747-8 जंबो जेट उपहार में दिया था, जिसे भविष्य में एयर फोर्स वन फ्लीट में शामिल किया जाना है। इस फैसले पर उस वक्त काफी विवाद हुआ था। फिलहाल उस विमान को अमेरिकी सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

ग्रीनलैंड और वैश्विक राजनीति पर नजर

राष्ट्रपति ट्रम्प आज ग्रीनलैंड के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर दुनिया को संबोधित करेंगे। यह भाषण ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक राजनीति में तनाव, व्यापार युद्ध और सुरक्षा चिंताएं तेजी से बढ़ रही हैं।

दावोस में ट्रम्प की मौजूदगी को बेहद अहम माना जा रहा है। उनके हर बयान पर दुनिया की नजर रहेगी। भाषण के बाद वे एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम की मेजबानी भी करेंगे, जिसमें भारत के सात बड़े कारोबारी नेताओं को आमंत्रित किया गया है।

WEF 2026 की प्रमुख बातें

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में ट्रम्प अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल लेकर पहुंचे हैं, जिसमें पांच कैबिनेट मंत्री शामिल हैं। पहली बार दावोस में अमेरिका के लिए अलग ‘USA हाउस’ बनाया गया है।

इस बैठक में 130 से ज्यादा देशों के लगभग 3,000 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इनमें 64 देशों के राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख, 1,700 से ज्यादा कारोबारी नेता और करीब 400 बड़े राजनीतिक नेता शामिल हैं।

भारत से चार केंद्रीय मंत्री, छह राज्यों के मुख्यमंत्री और 100 से ज्यादा उद्योगपति इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं, जिससे वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका साफ दिखाई देती है।

छह साल बाद दावोस में वापसी

डोनाल्ड ट्रम्प करीब छह साल बाद दावोस लौटे हैं। इससे पहले उन्होंने जनवरी 2020 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान यहां भाषण दिया था। इस बार उनका दौरा इसलिए ज्यादा अहम माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका की विदेश और व्यापार नीति में आक्रामक बदलाव साफ नजर आ रहे हैं।

ट्रम्प के सलाहकारों के मुताबिक, वे दावोस में यह स्पष्ट संदेश देंगे कि अमेरिका अब पुराने वैश्विक नियमों से आगे बढ़ चुका है और व्यापार को रणनीतिक दबाव के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करेगा।




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अमेरिका में भीषण हादसा: 100 से ज्यादा गाड़ियां आपस में टकराईं, कई घायल

अमेरिका के मिशिगन राज्य में बर्फीले तूफान की वजह से बड़ा सड़क हादसा हुआ है। सोमवार को एक इंटरस्टेट हाईवे पर 100 से ज्यादा गाड़ियां आपस में टकरा गईं। कई गाड़ियां सड़क से फिसल गईं।

फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक 30 से ज्यादा सेमी-ट्रेलर ट्रक फंसे हुए हैं। हादसे के बाद पुलिस को हाईवे के दोनों तरफ का ट्रैफिक बंद करना पड़ा।

यह दुर्घटना मिशिगन के ग्रैंड रैपिड्स शहर के दक्षिण-पश्चिम में इंटरस्टेट 196 पर हुई। मिशिगन स्टेट पुलिस के मुताबिक, हादसे में कई लोग घायल हुए हैं, लेकिन अब तक किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस ने बताया कि फंसे हुए वाहनों को हटाने के लिए राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया।

सड़क पर गाड़ियां मुश्किल से दिखीं

फॉक्स न्यूज से बात करते हुए लोगों ने बताया कि बर्फीली हवा के चलते आगे चल रही गाड़ियां भी मुश्किल से दिख रही थीं। एक पिकअप ड्राइवर ने बताया कहा कि वह 20 से 25 मील प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ी चला रहे थे और किसी तरह अपना वाहन ट्रक रोक पाए।

उन्होंने कहा

पीछे से लगातार टकराने की आवाजें आ रही थीं। आगे तो दिख रहा था, लेकिन पीछे क्या हो रहा है, यह साफ नजर नहीं आ रहा था। हालात काफी डरावने थे।

सैकड़ों लोग फंसे, स्कूल में ठहराया गया

मिशिगन के ओटावा काउंटी शेरिफ ऑफिस ने बताया कि इलाके में कई जगह दुर्घटनाएं हुईं और कई ट्रक जैकनाइफ हो गए। कई कारें सड़क से फिसलकर बाहर चली गईं।

फंसे हुए यात्रियों को बसों के जरिए हडसनविल हाई स्कूल ले जाया गया, जहां वे मदद के लिए कॉल कर सके या अपने घर जाने की व्यवस्था कर सके।

अधिकारियों का कहना है कि सफाई और वाहनों को हटाने का काम पूरा होने तक सड़क कई घंटों तक बंद रह सकती है।

प्रशासन ने चेतावनी दी कि क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाने और जमी हुई सड़क का ट्रीटमेंट करने में कई घंटे लग सकते हैं, इस दौरान इंटरस्टेट-196 बंद रहेगी।

अमेरिका में कई राज्यों में बर्फीले तूफान का असर

अमेरिका के कई राज्य इन दिनों बर्फीले तूफान का सामना कर रहे हैं। नेशनल वेदर सर्विस ने चेतावनी जारी की है कि उत्तरी मिनेसोटा से लेकर विस्कॉन्सिन, इंडियाना, ओहायो, पेंसिल्वेनिया और न्यूयॉर्क तक बेहद ठंडा मौसम या बर्फीले तूफान की स्थिति बन सकती है।

मौसम विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक नॉर्थ-सेंट्रल फ्लोरिडा और साउथईस्ट जॉर्जिया में तापमान जीरो डिग्री तक गिर सकता है।



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डेनमार्क पर कब्जे को लेकर ‘वॉर मोड’ में ट्रंप! ग्रीनलैंड में लड़ाकू विमानों की तैनाती का एलान

ग्रीनलैंड पर ट्रंप के बयान ने पूरी दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है। खासकर यूरोपिय देशों में बेचैनी का माहौल है। ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी दे रहे हैं। इसी बीच अमेरिका ने ग्रीनलैंड में स्थित पिटुफ्फिक अंतरिक्ष बेस पर उत्तरी अमेरिकी एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) का लड़ाकू विमान तैनात करने का फैसला किया है।

NORAD ने बताया कि ग्रीनलैंड में अमेरिका की दीर्घकालिक योजनाबद्ध गतिविधियों को पूरा करने के लिए एयरक्राफ्ट की तैनाती की गई है। अमेरिका का दावा है कि ग्रीनलैंड और डेनमार्क से संपर्क करने के बाद ये एक्शन लिया गया है।

NORAD ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा, "NORAD का एयरक्राफ्ट जल्द ही ग्रीनलैंड स्थित पिटुफ्फिक स्पेस बेस पर पहुंच जाएगा। ये एयरक्राफ्ट ग्रीनलैंड में पहले से तैनात अमेरिका और कनाडा के एयरक्राफ्ट बेड़े में शामिल होगा। ये NORAD की दीर्घकालिक योजनाबद्ध गतिविधियों का समर्थन करेगा। इससे अमेरिका और कनाडा के बीच रक्षा सहयोग में मजबूती आएगी।"

NORAD ने आगे कहा-

ग्रीनलैंड में मौजूद डेनमार्क समेत सभी सहयोगी सेनाओं से कूटनीतिक मंजूरी के बाद ही ये गतिविधियां प्लान की गई हैं। ग्रीनलैंड की सरकार को भी इसकी सूचना दे दी गई है।

डेनमार्क ने किया था सैन्य अभ्यास

बता दें कि हाल ही में डेनमार्क की सेना ने भी ग्रीनलैंड पर बहुराष्ट्रवादी सैन्य अभ्यास किया था। इस अभ्यास के लिए जर्मनी, स्वीडन, फ्रांस, नॉर्वे, नीदरलैंड और फिनलैंड ने भी अपनी सेनाएं भेजी थीं। डेनमार्क ने अमेरिकी सेना को भी अभ्यास में शामिल होने का निमंत्रण भेजा था।

ट्रंप ने दी टैरिफ की धमकी

वेनेजुएला पर सफल सैन्य कार्रवाई के बाद डोनल्ड ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड हथियाने की धमकी दे रहे हैं। कई यूरोपिय देशों ने इसका विरोध किया है, जिसपर ट्रंप ने अमेरिका का समर्थन न करने वाले देशों पर 1 फरवरी 2026 से 10 प्रतिशत का टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ट्रंप का कहना है कि 1 जून 2026 से टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया जा सकता है।


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स्पेन में दो हाई-स्पीड ट्रेनों की भिड़ंत, 39 लोगों की मौत और 73 घायल

रविवार को दक्षिणी स्पेन में एक तेज रफ्तार ट्रेन के पटरी से उतरने के बाद बड़ा रेल हादसा हो गया। इस दुर्घटना में कम से कम 39 लोगों की मौत हो गई, जबकि 73 लोग घायल हो गए। अधिकारियों के मुताबिक, ट्रेन गलत दिशा में ट्रैक पर चली गई और सामने से आ रही दूसरी ट्रेन से टकरा गई।

स्पेन की रेल अवसंरचना संस्था ADIF ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि मलागा से मैड्रिड जा रही शाम की ट्रेन पटरी से उतर गई और मैड्रिड से हुएल्वा जा रही दूसरी ट्रेन से उसकी टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों ट्रेनें पटरी से उतर गईं।

यह हादसा स्पेन के कॉर्डोबा शहर में एडम्यूज स्टेशन के पास शाम 5:40 बजे GMT (रात 11:10 बजे भारतीय समय) हुआ। ADIF के अनुसार, इर्यो 6189 मालागा–मैड्रिड ट्रेन के पटरी से उतरने के बाद वह पास वाली पटरी पर चली गई, जहां सामने से आ रही ट्रेन से उसकी भिड़ंत हो गई।

हादसे के बाद मैड्रिड और अंडालूसिया के बीच हाई-स्पीड रेल सेवाएं अस्थायी रूप से बाधित कर दी गई हैं। हालांकि मैड्रिड, टोलेडो, स्यूदाद रियल और पुएर्टोल्लानो के बीच कमर्शियल रेल सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं। इर्यो एक इटली द्वारा संचालित निजी रेल ऑपरेटर है।

अंडालूसिया इमरजेंसी सर्विसेज ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि एहतियातन सभी रेल यातायात रोक दिए गए हैं और राहत व बचाव दल मौके पर पहुंचकर घायलों की मदद में जुटे हुए हैं।

गौरतलब है कि इस सप्ताह की शुरुआत में थाईलैंड में भी ट्रेन के पटरी से उतरने की एक घटना सामने आई थी, जहां क्रेन गिरने से हादसा हुआ था। उस दुर्घटना में भी 39 लोगों की मौत और 73 लोग घायल हुए थे।


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वेनेजुएला की नेता मारिया मचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार ट्रंप को सौंपा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चाहत है कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिले। वह साल 2025 में नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर कई बार बयान भी दे चुके थे। उन्होंने उस दौरान कहा था कि वह भारत-पाकिस्तान सैन्य झड़प सहित कई जंग रोके, इसलिए वह शांति पुरस्कार के हकदार हैं। लेकिन, उनके दावों को खारिज करते हुए नोबेल पीस प्राइज समिति ने वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को चुना। मारिया ने नोबेल मिलने के बाद ट्रंप का शुक्रिया भी अदा किया था। अब मारिया ने ट्रंप को अपना नोबेल पुरस्कार भेंट किया है।

माचाडो और ट्रंप की मुलाकात

दरअसल, वेनेजुएलाई राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दक्षिणी अमेरिकी देश में उथल पुथल है। ऐसे में वेनेजुएलाई नेता मारिया माचाडो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात किया। उन्होंने दावा किया कि मीटिंग में उन्होंने ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक भेंट किया, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि क्या डोनाल्ड ट्रंप ने उनका नोबेल स्वीकार किया या नहीं। हालांकि, नोबेल शांति पुरस्कार देने वाली संस्था पहले ही साफ कर चुकी है कि नियमों के अनुसार पुरस्कार को हस्तांतरित या साझा नहीं किया जा सकता है।


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भारत-अमेरिका ट्रेड डील जल्द संभव, कॉमर्स सेक्रेटरी बोले—दोनों देश समझौते के बेहद करीब

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर लगातार सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। इस बीच कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने कहा है कि अमेरिका के साथ भारत का व्यापार मजबूत स्थिति में है और दोनों देश एक ट्रेड डील के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने बताया कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के साथ इस समझौते को लेकर बातचीत लगातार जारी है और डील जल्द हो सकती है, हालांकि इसकी कोई तय समय-सीमा नहीं बताई जा सकती।

लेटेस्ट ट्रेड डेटा जारी करते हुए राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत कभी रुकी नहीं थी। उन्होंने कहा कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ग्रीर के बीच वर्चुअल मीटिंग भी हो चुकी है और कुछ मुद्दों पर चर्चा जारी है। डील काफी नजदीक है, लेकिन घोषणा तभी होगी जब दोनों पक्ष पूरी तरह तैयार होंगे।

हायर टैरिफ के बावजूद भारत का एक्सपोर्ट मजबूत बना हुआ है। कॉमर्स सेक्रेटरी ने बताया कि भारत हर महीने करीब 7 बिलियन डॉलर का निर्यात अमेरिका को कर रहा है। टेक्सटाइल, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण जैसे सेक्टर ऊंचे टैरिफ के दबाव के बावजूद डाइवर्सिफिकेशन के चलते अच्छी ग्रोथ दिखा रहे हैं।

फार्मा सेक्टर को लेकर उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर उभर रहे हैं। भारत का फार्मा एक्सपोर्ट विविध बाजारों की ओर बढ़ रहा है, जिसमें ब्राज़ील और नाइजीरिया जैसे उभरते देश ग्रोथ को आगे बढ़ा रहे हैं।


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थाईलैंड: हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट की क्रेन गिरने से ट्रेन पर बड़ा हादसा, दर्जनों मौतें और घायल

थाईलैंड में बुधवार को एक भीषण रेल हादसा हुआ, जब तेज रफ्तार से चल रही एक पैसेंजर ट्रेन पर करीब 65 फीट ऊंचाई से एक क्रेन गिर गई। हादसे में ट्रेन के कई डिब्बे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।

BBC के मुताबिक, इस दुर्घटना में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 80 यात्री घायल हुए हैं। घायलों में कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे के समय ट्रेन में कुल 195 यात्री सवार थे, जिनमें से अधिकांश स्कूल के छात्र थे।

यह क्रेन रेलवे ब्रिज के निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही थी। दुर्घटना के समय ट्रेन लगभग 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। न्यूज वेबसाइट ‘नेशन थाईलैंड’ के अनुसार, क्रेन अचानक गिरने के कारण ट्रेन के ड्राइवर को ब्रेक लगाने का मौका तक नहीं मिल पाया।

टक्कर के बाद क्रेन का भारी मलबा ट्रेन के कोचों पर गिर पड़ा, जिससे कई डिब्बे पटरी से उतर गए। पटरी से उतरते ही कुछ डिब्बों में आग लग गई। हादसे के कुछ ही मिनटों बाद राहत और बचाव दल मौके पर पहुंच गया और आग पर काबू पा लिया गया।

कई यात्री डिब्बों में फंसे रह गए थे, जिन्हें कटिंग और स्प्रेडिंग उपकरणों की मदद से बाहर निकाला गया। बचाव दल ने अब तक 12 शव बरामद किए हैं, जबकि अन्य की तलाश जारी है।

घटनास्थल पर मौजूद एक स्थानीय निवासी ने AFP समाचार एजेंसी को बताया कि उसने पहले एक तेज आवाज सुनी, जिसके बाद दो विस्फोट हुए। उसने कहा,

“जब मैं मौके पर पहुंचा तो देखा कि एक क्रेन यात्री ट्रेन पर गिरी हुई थी। क्रेन से निकला मेटल का टुकड़ा ट्रेन के बीचों-बीच जा टकराया, जिससे एक डिब्बा दो हिस्सों में कट गया।”

प्रशासन और रेलवे अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्रेन गिरने का कारण क्या था और क्या निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था। इस दर्दनाक हादसे से स्थानीय लोग और पीड़ित परिवार गहरे सदमे में हैं।


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भारत को वेनेजुएला का तेल सप्लाई करेगा अमेरिका: रिपोर्ट

अमेरिका ने भारतीय सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है और इसे 500 प्रतिशत तक बढ़ाने की चेतावनी भी दी है। इसकी मुख्य वजह भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद बताई जा रही है। भारत फिलहाल रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाला देश है, हालांकि बीते छह महीनों में इसमें कमी आई है। जनवरी में रूस से तेल आयात चार साल के निचले स्तर पर पहुंचने का अनुमान है, इसके बावजूद अमेरिका संतुष्ट नहीं है। हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे विधेयक को मंजूरी दी है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। इसी बीच दोनों देशों के बीच समाधान की राह भी निकलती दिख रही है, क्योंकि अमेरिका ने भारत को वेनेजुएला का तेल देने की पेशकश की है।

व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अमेरिका एक नए ‘कंट्रोल्ड फ्रेमवर्क’ के तहत भारत और चीन को वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए तैयार है। हालांकि यह पूरी व्यवस्था अमेरिकी नियंत्रण में होगी। अमेरिका वेनेजुएला में स्टोरेज में रखे 3 करोड़ से 5 करोड़ बैरल कच्चे तेल को बेचने की योजना बना रहा है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है और भारत की रिफाइनरियां इस तेल को प्रोसेस करने में सक्षम हैं। यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर वेनेजुएला से तेल लेना शुरू करता है, तो अमेरिका टैरिफ घटाकर 25 प्रतिशत तक ला सकता है।

भारतीय कंपनियां भी इस विकल्प के लिए तैयार नजर आ रही हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा है कि वह वेनेजुएला का कच्चा तेल खरीदने को तैयार है, लेकिन यह तभी संभव होगा जब अमेरिका के बाहर की कंपनियों को इसकी स्पष्ट अनुमति दी जाए। रिलायंस जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स संचालित करती है। कंपनी का कहना है कि किसी भी फैसले से पहले वह नियमों की स्पष्टता का इंतजार कर रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस मुद्दे पर रिलायंस अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में है।

कंपनी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भारत की सरकारी तेल कंपनियां—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन—भी वेनेजुएला से तेल खरीदने के लिए तैयार हैं। रिलायंस ने मार्च 2024 में वेनेजुएला से तेल खरीदना बंद कर दिया था और आखिरी शिपमेंट उसे मई 2024 में मिला था। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ, जिसके तहत वेनेजुएला करीब 2 अरब डॉलर तक, यानी 3 से 5 करोड़ बैरल कच्चा तेल निर्यात कर सकता है, जिसे अमेरिका भेजा जाना था।

गुजरात स्थित रिलायंस की रिफाइनिंग यूनिट्स की कुल क्षमता लगभग 14 लाख बैरल प्रतिदिन है और यह सभी प्रकार के कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम हैं। जानकारों का मानना है कि यदि वेनेजुएला का तेल वैश्विक बाजार में लौटता है तो यह रियायती दरों पर मिल सकता है, जिससे उन रिफाइनरियों को आर्थिक लाभ होगा जो इसे प्रोसेस कर सकती हैं। एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी, नायरा एनर्जी, इंडियन ऑयल कॉर्प और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स पहले भी वेनेजुएला से तेल खरीद चुकी हैं।

अमेरिका और पश्चिमी देशों का दबाव लगातार बढ़ रहा है कि भारत रूस से तेल की खरीद कम करे। अमेरिका का आरोप है कि इससे रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए आर्थिक मदद मिल रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत रूस से करीब 144 अरब यूरो का तेल खरीद चुका है। युद्ध से पहले भारतीय आयात में रूस की हिस्सेदारी काफी कम थी, लेकिन पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस ने भारत और चीन जैसे देशों को भारी छूट पर तेल देना शुरू किया।

पिछले साल के मध्य में भारत रूस से रोजाना करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल आयात कर रहा था, जो दिसंबर में घटकर 12 लाख बैरल रह गया। अनुमान है कि जनवरी में यह आंकड़ा 10 लाख बैरल तक आ सकता है। वेनेजुएला के पास 303 अरब बैरल कच्चे तेल का ज्ञात भंडार है, जो वैश्विक भंडार का लगभग 20 प्रतिशत है, हालांकि वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी काफी कम है। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि बड़ी अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियां वेनेजुएला में निवेश बढ़ाएं।


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‘नेतन्याहू को किडनैप करें अमेरिका-तुर्की’, पाकिस्तानी रक्षा मंत्री की ट्रंप और एर्दोगन से अपील

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने गुरुवार को अमेरिका और तुर्की से इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को किडनैप करने की अपील की है। जियो टीवी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिका को नेतन्याहू को “किडनैप” कर अदालत में पेश करना चाहिए। आसिफ ने यह भी कहा कि तुर्की भी नेतन्याहू को अगवा कर सकता है। उन्होंने नेतन्याहू को “मानवता का सबसे बड़ा अपराधी” बताते हुए उनके खिलाफ इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट का हवाला दिया।

यह बयान जियो न्यूज पर लाइव टेलीकास्ट के दौरान दिया गया। आसिफ ने कहा कि यदि अमेरिका या तुर्की नेतन्याहू को पकड़ता है तो पाकिस्तान इसका समर्थन करेगा। उन्होंने कहा, “तुर्की नेतन्याहू को अगवा कर सकता है और हम पाकिस्तानी इसके लिए प्रार्थना कर रहे हैं।” रक्षा मंत्री का यह बयान वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी कार्रवाई में पकड़े जाने की घटना के संदर्भ में आया है। अमेरिका ने मादुरो पर नार्को टेररिज्म के आरोप लगाए हैं।

ख्वाजा आसिफ ने बार-बार आईसीसी के गिरफ्तारी वारंट का हवाला देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने भी नेतन्याहू के खिलाफ कार्रवाई की है और न्याय सुनिश्चित करने के लिए देशों को कदम उठाने चाहिए। गौरतलब है कि नवंबर 2024 में ICC ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे, हालांकि इजरायल ने इन वारंटों को अवैध बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई थी।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने 3 जनवरी को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निवास पर कार्रवाई कर वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी थी। इस दौरान अमेरिकी बलों ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर देश से बाहर निकाला। मादुरो को अमेरिका ले जाया गया, जहां उन पर नार्को टेररिज्म के आरोपों में मुकदमा चलाया जा रहा है। हालांकि मादुरो ने खुद को वेनेजुएला का राष्ट्रपति बताते हुए आरोप लगाया है कि अमेरिका ने उन्हें अवैध रूप से अगवा किया।


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फोन कॉल न होने से अटकी भारत-अमेरिका ट्रेड डील, ट्रंप का फैसला

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील इसलिए आगे नहीं बढ़ सकी, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया। यह दावा अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लटनिक ने किया है। लटनिक ने एक पॉडकास्ट में कहा कि उन्होंने ट्रेड डील की रूपरेखा तैयार कर ली थी, लेकिन अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप से सीधे बात करनी थी, जिसे लेकर भारत असहज था। इसी वजह से फोन कॉल नहीं हो सका और डील आगे नहीं बढ़ पाई।

लटनिक यह बयान ‘ऑल-इन पॉडकास्ट’ में दे रहे थे, जिसे सिलिकॉन वैली के चार वेंचर कैपिटलिस्ट और उद्यमी होस्ट करते हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्होंने अन्य देशों के साथ व्यापारिक बातचीत को प्राथमिकता दी, क्योंकि उन्हें भरोसा था कि भारत के साथ समझौता तो आसानी से हो जाएगा। हालांकि बाद में भारत ने बातचीत के लिए तैयार होने की बात कही, जिस पर लटनिक ने कहा कि तब तक परिस्थितियां बदल चुकी थीं।

लटनिक के अनुसार, जिन शर्तों पर भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को अंतिम रूप दिया जाना था, वे अब बातचीत की मेज पर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका उस समझौते से पीछे हट चुका है, जिस पर पहले सहमति बनी थी और अब उस डील पर विचार भी नहीं किया जा रहा है।

लटनिक के ये बयान ऐसे समय में सामने आए हैं, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले द्विदलीय रूस प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दी है। इस कानून के तहत ट्रंप को रूस के व्यापारिक साझेदार देशों पर प्रतिबंध लगाने का व्यापक अधिकार मिल गया है। रूस के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में भारत, चीन और ब्राजील शामिल हैं। इस विधेयक के अनुसार, यदि कोई देश रूस से तेल, पेट्रोलियम उत्पाद या यूरेनियम की खरीद जारी रखता है, तो अमेरिका उस देश से आयात होने वाले सभी उत्पादों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकता है।


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