अमेरिकी कोर्ट में मादुरो का दावा— मुझे किडनैप किया गया

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सोमवार रात न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में पेश किया गया। उन्होंने कोर्ट में अपने खिलाफ लगे ड्रग्स और हथियार तस्करी से जुड़े सभी आरोपों से इनकार किया।

CNN के मुताबिक, मादुरो ने अदालत में अपनी गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताया और कहा कि मुझे किडनैप किया गया है। पहली सुनवाई में मादुरो ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा,

मैं अपराधी नहीं हूं। मैं एक सम्मानित व्यक्ति हूं और अब भी अपने देश का राष्ट्रपति हूं।

मादुरो के वकीलों ने अमेरिकी कार्रवाई को सैन्य अपहरण बताया है। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है। अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी।

दूसरी तरफ वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया मचाडो ने ऐलान किया है कि वे जल्द ही देश वापस लौटेंगीं। मचाडो ने दावा किया कि अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को वेनेजुएला की जनता का समर्थन नहीं है और देश की जनता विपक्ष के साथ है।

मादुरो की पत्नी सीलिया फ्लोरेस भी पेश हुईं

मादुरो की पत्नी सीलिया फ्लोरेस भी अदालत में पेश हुईं। उनके चेहरे पर चोट के निशान और पट्टी बंधी थी। उन्होंने खुद को वेनेजुएला की प्रथम महिला बताया और सभी आरोपों से इनकार किया।

मादुरो और उनके सहयोगियों पर नशा तस्करों और आतंकी गिरोहों के साथ मिलकर अमेरिका में कोकीन पहुंचाने की साजिश रचने का आरोप है। मादुरो पर मशीनगन रखने का भी आरोप है, जिसके लिए लंबी सजा हो सकती है।

चार्जशीट में मादुरो के बेटे निकोलस मादुरो गुएरा, गृह मंत्री डियोसडाडो काबेलो और कुख्यात गैंग ‘त्रेन दे अरागुआ’ के सरगना हेक्टर गुरेरो फ्लोरेस का नाम भी शामिल है। अमेरिका इस गैंग को विदेशी आतंकी संगठन मानता है।

मादुरो के पैरों में बेड़ियां थीं

सुनवाई के दौरान मादुरो के पैरों में बेड़ियां लगी हुई थीं। वह और उनकी पत्नी एक ही मेज पर बैठे थे और दोनों ने हेडफोन लगाए थे ताकि अदालत में कही जा रही बातों को अपनी भाषा में समझ सकें। जज ने अदालत में दोनों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को पढ़कर सुनाया।

इससे पहले मादुरो को लेकर एक हेलिकॉप्टर से अदालत के पास बने हेलिपैड पर उतरा गया था। हेलिकॉप्टर से उतरते ही उन्हें तुरंत एक वैन में बैठाया गया और वहां से सीधे अदालत ले जाया गया।

सुनवाई के दौरान अदालत के बाहर प्रदर्शन

मादुरो के खिलाफ सुनवाई के दौरान अदालत के बाहर सैकड़ों लोग जमा हुए। एक तरफ अमेरिका की कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन हुआ, तो दूसरी ओर मादुरो विरोधी लोगों ने उनके खिलाफ नारे लगाए।

सुनवाई खत्म होने के बाद जब मादुरो बाहर निकलने के लिए उठे, तो गैलरी में बैठे एक व्यक्ति ने उनसे कहा कि उन्हें अपने अपराधों की कीमत चुकानी पड़ेगी। मादुरो ने जवाब दिया कि वह अपनी आजादी हासिल करेंगे।

वेनेजुेएला की राजधानी कराकस में फायरिंग

वेनेजुएला की राजधानी कराकस में सोमवार शाम अचानक गोलियों और एंटी-एयरक्राफ्ट फायरिंग की आवाजें सुनाई दीं।

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक एक वीडियो में कराकस के आसमान में एंटी-एयरक्राफ्ट गन फायरिंग करते दिखाई दी। एक दूसरी वीडियो में गोलियों की आवाजें भी सुनी जा सकती हैं। बताया जा रहा है कि राजधानी में तैनात अलग-अलग सिक्योरिटी यूनिट्स के बीच भ्रम और गलतफहमी के चलते ऐसा हुआ।

एक स्थानीय निवासी ने नाम न बताने की शर्त पर CNN को बताया कि मिराफ्लोरेस राष्ट्रपति भवन के पास उर्दानेता एवेन्यू के आसपास उन्होंने गोलियों की आवाजें सुनीं।

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिका इन खबरों पर नजर बनाए हुए है, लेकिन उन्होंने साफ किया कि इस घटना में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं है।

बाद में यह भी दावा किया गया कि इलाके में उड़ रहे एक ड्रोन पर मिराफ्लोरेस पुलिस और राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा में तैनात जवानों ने फायरिंग की थी, जिसके बाद स्थिति सामान्य हो गई।

CIA रिपोर्ट- मादुरो समर्थक ही वेनेजुएला की सत्ता संभाले

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के सीक्रेट एनालिसिस में कहा गया है कि अगर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो सत्ता से हटते हैं, तो उनके करीबी और वफादार नेता ही देश में स्थिरता बनाए रखने के लिए सबसे बेहतर में होंगे।

इस एनालिसिस में उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज का भी नाम शामिल है।रिपोर्ट में दो सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि इसकी जानकारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को दी गई थी। इसे उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के सीमित सदस्यों के साथ साझा किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, यही वजह थी कि ट्रम्प ने विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो के बजाय डेल्सी रोड्रिगेज का समर्थन करने का फैसला किया।हालांकि व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट की पुष्टि करने से इनकार किया है।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प को दुनिया भर की राजनीतिक परिस्थितियों पर नियमित रूप से जानकारी दी जाती है। उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम वेनेजुएला को अमेरिका के हितों के मुताबिक लाने और वहां के लोगों के लिए बेहतर हालात बनाने के लिए व्यावहारिक फैसले ले रही है।

अमेरिकी हमले का समर्थन करने वालों को गिरफ्तार करने के आदेश

वेनेजुएला सरकार ने अमेरिकी हमले के बाद देश में आपातकाल लागू करते हुए पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं। सरकार ने आदेश दिया है कि अमेरिका के हमले को का समर्थन करने वाले हर व्यक्ति की तुरंत तलाश कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।

सोमवार को जारी सरकारी डिक्री के मुताबिक, पुलिस को पूरे देश में ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने को कहा गया है। इस डिक्री में साफ लिखा गया है कि अमेरिकी हमले से जुड़े किसी भी तरह के समर्थन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हालांकि यह आपातकालीन आदेश शनिवार से ही लागू था, लेकिन इसे पूरी तरह सार्वजनिक सोमवार को किया गया।

मादुरो को 2 जनवरी को पकड़ा गया

अमेरिकी सैनिकों ने 2 जनवरी की रात वेनेजुएला पर हमला कर मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को पकड़ा था। इसके बाद उन्हें न्यूयॉर्क लाया गया है, जहां उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा गया था।

उन पर हथियार-ड्रग्स से जुड़े मामलों में मुकदमा चलाया जाना है।। मादुरो ने ड्रग तस्करी से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है।


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ट्रम्प का दावा: मोदी जानते थे मैं नाखुश था, इसलिए भारत ने रूस से तेल आयात घटाया

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत द्वारा रूस से तेल आयात कम किए जाने को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रम्प ने दावा किया कि भारत ने यह फैसला उन्हें खुश करने के लिए लिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते थे कि वह इस मुद्दे पर नाखुश हैं, इसलिए भारत ने कदम उठाया। ट्रम्प ने कहा, “वे मुझे खुश करना चाहते थे। प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। हम व्यापार करते हैं और अगर जरूरत पड़ी तो टैरिफ बढ़ाए जा सकते हैं।”

यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया था। इस पर अमेरिका की ओर से लगातार आपत्ति जताई जा रही थी। अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद से यूक्रेन पर हो रहे हमलों को अप्रत्यक्ष रूप से फंडिंग मिल रही है। इसी वजह से ट्रम्प प्रशासन ने भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था।

इस बीच अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने खुलासा किया कि करीब एक महीने पहले वह भारतीय राजदूत के घर गए थे। उस बैठक में सबसे अहम मुद्दा भारत द्वारा रूस से तेल की खरीद कम करना रहा। ग्राहम के मुताबिक, भारतीय राजदूत ने उनसे राष्ट्रपति ट्रम्प तक यह संदेश पहुंचाने को कहा था कि भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ हटाया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि भारत अब पहले की तुलना में रूस से काफी कम तेल खरीद रहा है।

भारत ने चार साल बाद रूस से कच्चे तेल के आयात में कटौती की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर में भारत ने रूस से करीब 17.7 लाख बैरल प्रति दिन कच्चा तेल आयात किया था, जो दिसंबर में घटकर लगभग 12 लाख बैरल प्रति दिन रह गया। आने वाले महीनों में यह आंकड़ा 10 लाख बैरल प्रति दिन से भी नीचे जा सकता है। नवंबर 2021 से रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने के बाद भारत का रूसी तेल आयात लगातार घट रहा है।

यूक्रेन युद्ध के शुरुआती दौर में रूस ने भारत को 20 से 25 डॉलर प्रति बैरल तक सस्ता कच्चा तेल उपलब्ध कराया था, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। उस समय यह छूट भारत के लिए काफी फायदेमंद थी। लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटकर करीब 63 डॉलर प्रति बैरल रह गई है। इसके साथ ही रूस ने भी अपनी छूट घटाकर 1.5 से 2 डॉलर प्रति बैरल कर दी है।

कम छूट, ज्यादा शिपिंग और बीमा लागत की वजह से रूसी तेल भारत के लिए पहले जैसा फायदेमंद नहीं रह गया है। इसी कारण भारत अब फिर से सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अमेरिका जैसे स्थिर और भरोसेमंद देशों से तेल खरीद की ओर लौट रहा है, जहां कीमतों में अब ज्यादा अंतर नहीं बचा है।

अमेरिका अब तक भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगा चुका है। इसमें 25 प्रतिशत ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ और 25 प्रतिशत रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया गया अतिरिक्त टैरिफ शामिल है। इन टैरिफ्स की वजह से भारत को अमेरिका में अपने उत्पादों के निर्यात में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

भारत चाहता है कि कुल 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 15 प्रतिशत किया जाए और रूसी तेल की खरीद पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को पूरी तरह हटाया जाए। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर ट्रेड डील को लेकर बातचीत जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि नए साल में इस पर कोई ठोस फैसला सामने आ सकता है।


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वेनेजुएला की राजधानी में जोरदार धमाके, हवा में फाइटर जेट

नेजुएला की राजधानी काराकास में शनिवार, 3 जनवरी की रात एक के बाद एक कई जोरदार धमाके सुनाई दिए। इस दौरान आसमान में तेज आवाज करते हुए एयरक्राफ्ट के उड़ने की भी खबर है। हालांकि, इन घटनाओं को लेकर वेनेजुएला सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, धमाकों और एयरक्राफ्ट की तेज आवाजों से घबराकर राजधानी के कई लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। इन घटनाओं को अमेरिका की हालिया चेतावनियों से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे हालात को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

अमेरिका से जोड़कर देखे जा रहे हमले

वेनेजुएला में ये धमाके ऐसे समय हुए हैं, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में वेनेजुएला के खिलाफ जमीनी सैन्य कार्रवाई की आशंका जताई थी। 29 दिसंबर को ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका ने वेनेजुएला की ड्रग नौकाओं के डॉकिंग क्षेत्र पर हमला कर उसे नष्ट कर दिया है।

वहीं वेनेजुएला के राष्ट्रपति ने आरोप लगाया है कि वॉशिंगटन उनकी सरकार को सत्ता से हटाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञात तेल भंडार मौजूद है।

डोनाल्ड ट्रंप बीते कई हफ्तों से वेनेजुएला में सक्रिय मादक पदार्थों के गिरोहों के खिलाफ जमीनी हमले की धमकी देते आ रहे हैं। उन्होंने कहा है कि ये हमले जल्द शुरू होंगे, जिनका संकेत हालिया घटनाओं में देखा जा सकता है।

अमेरिकी सेना ने सितंबर से कैरेबियन सागर और पूर्वी प्रशांत महासागर में कई नौकाओं को निशाना बनाया है। अमेरिका का दावा है कि ये नौकाएं मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल थीं, हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने इस संबंध में अब तक कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया है। इसी वजह से इस सैन्य अभियान की वैधता पर सवाल उठने लगे हैं।


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स्विट्जरलैंड में नए साल का जश्न मातम में बदला, बार में जोरदार धमाका; कई लोगों की मौत

स्विट्जरलैंड के एक लग्जरी अल्पाइन स्की रिजॉर्ट में नए साल के पहले ही दिन जश्न उस वक्त मातम में बदल गया, जब एक बार में जोरदार धमाका हो गया। इस हादसे में कई लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। स्विस पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि फिलहाल विस्फोट के कारणों का पता नहीं चल पाया है, हालांकि इसमें कई लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस के अनुसार, यह विस्फोट स्विट्जरलैंड के क्रान्स-मोंटाना स्की रिसॉर्ट स्थित कॉन्स्टेलेशन बार में स्थानीय समयानुसार रात करीब 1:30 बजे हुआ। हादसे में कई लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए अपुष्ट वीडियो में बार में आग लगी दिखाई दे रही है, जहां नए साल की पूर्व संध्या का जश्न मनाया जा रहा था। पुलिस ने प्रभावित परिवारों की मदद के लिए एक हेल्पलाइन भी शुरू की है। बता दें कि क्रान्स-मोंटाना, स्विस आल्प्स के मध्य में स्थित एक प्रमुख स्की रिजॉर्ट शहर है, जो राजधानी बर्न से लगभग दो घंटे की दूरी पर है।


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ट्रंप ने 7 देशों और फलस्तीनियों पर लगाया यात्रा प्रतिबंध, अमेरिका में प्रवेश पर रोक

ट्रंप ने सात और देशों के साथ-साथ फलस्तीनियों पर पूर्ण यात्रा प्रतिबंध लगा दिए हैं। 16 दिसंबर 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा और वेटिंग प्रक्रिया में कमियों का हवाला देते हुए अमेरिका में प्रवेश पर लगे यात्रा प्रतिबंधों का विस्तार कियाहै। यह कदम उनके पहले कार्यकाल की नीतियों की बहाली का हिस्सा है और हाल की सुरक्षा घटनाओं के बाद लिया गया।

व्हाइट हाउस की एक घोषणा में कहा गया है कि वह संयुक्त राज्य अमेरिका में ऐसे विदेशियों को भी रोकना चाहता है जो "हमारी संस्कृति, सरकार, संस्थानों या संस्थापक सिद्धांतों को कमजोर या अस्थिर कर सकते हैं"।

ट्रंप का यह कदम सीरिया में दो अमेरिकी सैनिकों और एक नागरिक की मौत के कुछ दिनों बाद आया है, जिसे ट्रंप ने लंबे समय तक शासक रहे बशर अल-असद के पतन के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुनर्स्थापित करने के प्रयास किए हैं। सीरियाई अधिकारियों ने कहा कि अपराधी सुरक्षा बलों का एक सदस्य था जिसे "चरमपंथी इस्लामी विचारों" के कारण बर्खास्त किया जाना था।

व्हाइट हाउस ने कहा कि ट्रंप जो लंबे समय से आव्रजन को प्रतिबंधित करने के लिए अभियान चला रहे हैं और लगातार कड़े शब्दों में बोल रहे हैं, ने उन विदेशियों पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम बढ़ाया है जो अमेरिकियों को "धमकाने का इरादा रखते हैं"।

ट्रंप प्रशासन ने पहले ही अनौपचारिक रूप से फलस्तीनी प्राधिकरण पासपोर्ट धारकों की यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया था, क्योंकि वह फ्रांस और ब्रिटेन सहित अन्य प्रमुख पश्चिमी देशों द्वारा फलस्तीनी राज्य को मान्यता देने के खिलाफ इजरायल के साथ एकजुटता दिखा रहा था।

जिन अन्य देशों पर पूर्ण यात्रा प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें अफ्रीका के कुछ सबसे गरीब देश - बुर्किना फासो, माली, नाइजर, सिएरा लियोन और दक्षिण सूडान - के साथ-साथ दक्षिणपूर्व एशिया का लाओस भी शामिल हैं।

व्हाइट हाउस ने कहा कि नए कदमों की एक श्रृंखला में, ट्रंप अन्य अफ्रीकी देशों के नागरिकों पर भी आंशिक यात्रा प्रतिबंध लगा रहे हैं, जिनमें सबसे अधिक आबादी वाला देश नाइजीरिया और साथ ही अश्वेत बहुल कैरेबियन देश शामिल हैं।


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ट्रंप का दावा: भारत को सुपरपावर समूह में ऊपर लाने की वकालत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक नए ‘कोर-5’ (हार्ड-पावर समूह) गठबंधन की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें अमेरिका, भारत, चीन, रूस और जापान को शामिल करने का प्रस्ताव है। इस समूह का उद्देश्य प्रमुख वैश्विक शक्तियों का एक नया मंच तैयार करना है, जो मौजूदा यूरोप-प्रधान जी-7 और अन्य पारंपरिक लोकतांत्रिक तथा आर्थिक समूहों के प्रभाव को पीछे छोड़ सकता है।

हालांकि इस विचार को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। व्हाइट हाउस ने ऐसे किसी दस्तावेज के अस्तित्व से इनकार किया है, लेकिन अमेरिकी प्रकाशन पॉलिटिको के अनुसार, इस नए हार्ड-पावर समूह का उल्लेख राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के एक विस्तृत, अप्रकाशित संस्करण में किया गया था, जिसका एक संक्षिप्त संस्करण हाल ही में व्हाइट हाउस ने जारी किया।

क्या है अमेरिका का नया ‘कोर-5’ प्लान?

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, रणनीति में एक ‘कोर फाइव’ या C-5 समूह का प्रस्ताव है, जिसमें अमेरिका, चीन, रूस, भारत और जापान शामिल होंगे—इनमें से अधिकांश देशों की आबादी 10 करोड़ से अधिक है। यह समूह जी-7 की तर्ज पर नियमित शिखर सम्मेलन आयोजित करेगा। प्रस्तावित C-5 का पहला एजेंडा मध्य पूर्व में सुरक्षा मुद्दों पर केंद्रित है, विशेष रूप से इज़रायल और सऊदी अरब के बीच संबंधों के सामान्यीकरण पर।

ट्रंपवादी झलक

पॉलिटिको के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने दस्तावेज की मौजूदगी को नकार दिया है। प्रेस सचिव हन्ना केली ने बयान जारी करते हुए कहा कि 33-पृष्ठों की आधिकारिक योजना का कोई ‘वैकल्पिक, निजी या गुप्त संस्करण’ मौजूद नहीं है। बावजूद इसके, राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक मानते हैं कि इस विचार में ट्रंपवादी विदेश नीति की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।

यह रिपोर्ट उस समय सामने आई है जब अमेरिका में इस बात पर जोरदार बहस चल रही है कि अगर ट्रंप प्रशासन फिर सत्ता में आता है तो वैश्विक व्यवस्था में किस हद तक बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ‘कोर-5’ की अवधारणा मौजूदा वैश्विक मंचों—जैसे जी-7 और जी-20—को बहुध्रुवीय दुनिया के लिए अपर्याप्त मानती है और दुनिया की बड़ी आबादी व सैन्य-आर्थिक शक्ति वाले देशों के बीच सीधे समझौते को प्राथमिकता देती है।


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ट्रेड डील पर बड़ा खुलासा: अमेरिका बोला—भारत ने पेश किया अत्यंत आकर्षक प्रस्ताव

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील (India-US Trade Deal) पर दो दिवसीय वार्ता दिल्ली में शुरू हो गई है। इस बीच अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने अमेरिकी सांसदों को सूचित किया कि अमेरिकी कृषि उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़ाने को लेकर जारी वार्ताओं में भारत ने “वाशिंगटन को अब तक के सर्वोत्तम प्रस्ताव” दिए हैं। मंगलवार को वाशिंगटन डीसी में सीनेट विनियोग उपसमिति की सुनवाई के दौरान ग्रीर ने बताया कि अमेरिकी दल फिलहाल नई दिल्ली में मौजूद है और कृषि सम्बंधी संवेदनशील बाधाओं को दूर करने पर विशेष जोर दे रहा है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल, उप अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत रिक स्विट्जर के नेतृत्व में भारत पहुँचा है, जबकि भारतीय पक्ष की अगुवाई ज्वाइंट सेक्रेटरी दर्पण जैन कर रहे हैं।

किन फसलों पर विवाद?

ग्रीर के अनुसार, कुछ कृषि उत्पादों को लेकर भारत में अभी भी आपत्तियाँ बनी हुई हैं, लेकिन नई दिल्ली द्वारा भेजे गए नवीनतम प्रस्ताव इस बार वार्ता में सकारात्मक और अप्रत्याशित शुरुआत का संकेत देते हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ते स्टॉक्स और चीन से घटती मांग के बीच भारत अमेरिकी उत्पादकों के लिए एक संभावित वैकल्पिक बाजार बन सकता है।

ध्यान रहे कि भारत-अमेरिका के बीच इस ट्रेड डील पर कई महीनों से बातचीत जारी है और अब तक छह दौर पूरे हो चुके हैं। पिछले महीने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौते पर “अच्छी खबर तभी मिलेगी, जब यह पूरी तरह उचित, समानता आधारित और संतुलित” होगा।


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भारत-रूस के बीच कई अहम समझौते, पीएम मोदी-पुतिन की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस जारी

पीएम मोदी ने भारत और रूस की दोस्ती को ध्रुव तारे की तरह स्थिर बताया। उन्होंने कहा, “पिछले आठ दशकों में दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। मानवता ने कई तरह की चुनौतियों और संकटों का सामना किया है, लेकिन इन सबके बावजूद भारत-रूस की मित्रता हमेशा अटल और भरोसेमंद रही है।”

मोदी ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते हर कसौटी पर खरे उतरे हैं और 2030 तक आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की नई रणनीति भी तैयार की गई है। वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भरोसा दिया कि रूस भारत को बिना किसी रुकावट के तेल की सप्लाई जारी रखेगा।

भारत दौरे पर आए पुतिन का राष्ट्रपति भवन में 21 तोपों की सलामी और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ औपचारिक स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।

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अमेरिका ने बदले नियम: H-1B वीज़ा से पहले होगी सोशल मीडिया स्क्रूटनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने H-1B वीजा नियमों को और सख्त करने का आदेश दिया है। अब H-1B वीजा के आवेदकों को अपना सोशल मीडिया अकाउंट सार्वजनिक करना होगा, ताकि अमेरिकी अधिकारी उनकी प्रोफाइल, पोस्ट और लाइक्स की जांच कर सकें। यदि किसी भी आवेदक की सोशल मीडिया गतिविधि अमेरिकी हितों के खिलाफ पाई जाती है, तो वीजा जारी नहीं किया जाएगा। यही नियम H-1B आश्रितों—जैसे पत्नी, बच्चे और पेरेंट्स—के H-4 वीजा पर भी लागू होगा।

पहली बार सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच को H-1B वीजा प्रोसेस में अनिवार्य बनाया गया है। नए निर्देश 15 दिसंबर से लागू होंगे और इसके लिए सभी अमेरिकी दूतावासों को गाइडलाइन भेजी जा चुकी है। इससे पहले अगस्त से स्टडी वीजा (F-1, M-1, J-1) और विज़िटर वीजा (B-1, B-2) के लिए भी सोशल मीडिया प्रोफाइल को पब्लिक करना अनिवार्य किया गया था।

H-1B वीजा उच्च कौशल वाले प्रोफेशनल्स—जैसे डॉक्टर, इंजीनियर और सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ—को जारी किया जाता है। हर साल जारी होने वाले H-1B वीजा में से करीब 70% भारतीयों को मिलता है, इसलिए नए नियमों का सबसे ज्यादा असर भी भारतीय आवेदकों पर पड़ेगा। पहले इस वीजा की फीस लगभग 9,000 डॉलर थी, लेकिन सितंबर 2025 में इसे बढ़ाकर करीब 90 लाख रुपए कर दिया गया। वीजा 3-3 साल की दो अवधि के लिए जारी होता है और 6 साल बाद आवेदक ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकता है।

ट्रम्प का H-1B पर रुख पिछले 9 सालों में कई बार बदला है। 2016 में उन्होंने इसे अमेरिकी हितों के खिलाफ बताया और 2019 में इसके एक्सटेंशन को निलंबित कर दिया। हालांकि हाल ही में उन्होंने फिर यू-टर्न लिया और कहा कि अमेरिका को बड़े पैमाने पर टैलेंट की जरूरत है।

H-1B में बदलावों के साथ ही ट्रम्प प्रशासन ने तीन नए वीजा कार्ड—‘ट्रम्प गोल्ड कार्ड’, ‘ट्रम्प प्लेटिनम कार्ड’ और ‘कॉर्पोरेट गोल्ड कार्ड’—भी लॉन्च किए हैं। इनमें से ट्रम्प गोल्ड कार्ड (कीमत 8.8 करोड़) धारक को अमेरिका में अनलिमिटेड रेसीडेंसी का अधिकार देगा।

अमेरिकी टेक कंपनियों—जैसे इंफोसिस, TCS, विप्रो, कॉग्निजेंट और HCL—द्वारा भारतीय कर्मचारियों को सबसे ज्यादा H-1B वीजा स्पॉन्सर किया जाता है। कहा जाता है कि भारत अमेरिका को सामान से ज्यादा इंजीनियर, डेवलपर्स और छात्र ‘एक्सपोर्ट’ करता है। लेकिन बढ़ी हुई फीस के बाद संभावना है कि भारतीय टैलेंट अब यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और मिडिल ईस्ट की ओर शिफ्ट हो सकता है।


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हॉन्गकॉन्ग के रिहाइशी कॉम्प्लेक्स में भीषण आग, 44 लोगों की मौत

हॉन्गकॉन्ग के ताई पो जिले में बुधवार को एक बड़े रिहायशी कॉम्प्लेक्स में भीषण आग लग गई। इस दुर्घटना में अब तक 44 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 279 लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह कॉम्प्लेक्स आठ इमारतों से मिलकर बना था, जिनमें प्रत्येक में 35 मंजिलें और कुल लगभग दो हजार अपार्टमेंट थे। वांग फुक कोर्ट के ये टावर बांस की मचान से ढंके हुए थे, जहां मरम्मत का काम चल रहा था। आग की शुरुआत इन्हीं बाहरी मचानों से हुई और तेज हवा के कारण जलता हुआ मलबा एक इमारत से दूसरी में फैलता चला गया। 20 घंटे बीत जाने के बाद भी आग पूरी तरह काबू में नहीं आ सकी है।


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