अमेरिका में बर्फीले तूफान का असर — 11 हजार फ्लाइट रद्द

अमेरिका में भीषण तेज हवाओं और भारी बर्फबारी के कारण एयरपोर्ट पर रनवे बंद करने पड़े और कई जगह उड़ानों पर रोक लगानी पड़ी है। यहां रविवार से मंगलवार के बीच 11,055 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गईं।

सिर्फ सोमवार को ही करीब 5,600 से 5,700 उड़ानें कैंसिल हुईं, जो देशभर की उड़ानों का लगभग 20% था। यह जानकारी फ्लाइट ट्रैकिंग कंपनी फ्लाइटअवेयर ने दी। नेशनल वेदर सर्विस के मुताबिक, रोड आइलैंड और मैसाचुसेट्स के कुछ हिस्सों में लगभग 37 इंच तक बर्फ गिरी।

बर्फबारी की वजह से उत्तर-पूर्वी राज्यों में 6 लाख से ज्यादा घरों की बिजली चली गई। सोमवार शाम तक 5 लाख 19 हजार 232 घर और ऑफिस बिना बिजली के थे। भारी बर्फबारी के कारण द बोस्टन ग्लोब अपने 153 साल के इतिहास में पहली बार अखबार नहीं छाप सका क्योंकि कर्मचारी प्रिंटिंग प्रेस तक नहीं पहुंच पाए।

बर्फबारी से कई राज्यों में इमरजेंसी घोषित

न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क में रविवार से सोमवार के बीच करीब 20 इंच बर्फ दर्ज की गई, जबकि लॉन्ग आइलैंड के इस्लिप इलाके में 22 इंच से ज्यादा बर्फ पड़ी। प्रोविडेंस, रोड आइलैंड में 32.8 इंच बर्फबारी हुई, जिसने 1978 के पुराने रिकॉर्ड 28.6 इंच को तोड़ दिया।

हालात इतने खराब हो गए कि कई राज्यों में इमरजेंसी घोषित करनी पड़ी। न्यूयॉर्क सिटी में स्कूलों, सड़कों, पुलों और हाईवे को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। बाद में हालात सुधरने पर मेयर जोहरान ममदानी ने यह आदेश हटा लिया और कहा कि स्कूल मंगलवार को खुलेंगे।

वहीं मैसाचुसेट्स की गवर्नर मॉरा हीली ने कुछ इलाकों में ट्रैवल बैन लागू किया और लोगों से घर में रहने की अपील की। रोड आइलैंड के गवर्नर डैन मैकी ने भी पूरे राज्य में ट्रैवल बैन लगा दिया। न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल ने भी पूरे राज्य में इमरजेंसी की घोषणा की और नेशनल गार्ड को अलर्ट पर रखा है।

न्यूयॉर्क में ट्रेन सेवा भी सस्पेंड रही

तूफान का असर सिर्फ सड़कों और हवाई सेवाओं तक सीमित नहीं रहा। न्यूयॉर्क और बोस्टन के बीच ट्रेन सेवा सोमवार रात तक सस्पेंड रही। थिएटर ब्रॉडवे के सभी शो रविवार शाम रद्द कर दिए गए।

मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने कहा कि यह पिछले लगभग एक दशक का सबसे शक्तिशाली नॉरईस्टर तूफान है। कई इलाकों में प्रति घंटे 2 से 3 इंच तक बर्फ गिरने की चेतावनी दी गई है और हवा की रफ्तार कुछ जगह 110 मील प्रति घंटे तक पहुंच गई।

नॉरईस्टर एक तरह का तेज तूफान होता है जो अमेरिका के पूर्वी तट पर आता है। इसे नॉरईस्टर इसलिए कहते हैं क्योंकि इसमें हवाएं आमतौर पर उत्तर-पूर्व (नॉर्थ-ईस्ट) दिशा से चलती हैं।

गर्म और नम हवा मिलकर बनाती है यह तूफान

अमेरिका के उत्तर-पूर्व में आने वाला यह विंटर स्टॉर्म इसलिए बनता है क्योंकि वहां मौसम की कुछ खास स्थितियां एकसाथ बन जाती हैं। सर्दियों में कनाडा की तरफ से बहुत ठंडी हवा नीचे की ओर आती है।

उसी समय समुद्र की तरफ से हल्की गर्म और नम हवा ऊपर उठती है। जब ये दोनों आमने-सामने आती हैं तो मौसम अचानक बिगड़ जाता है और तेज बर्फीला तूफान बन जाता है।

समुद्र भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है। अटलांटिक महासागर का पानी ठंड के मुकाबले थोड़ा गर्म रहता है। इससे हवा में नमी बढ़ती है। जब यह नमी ठंडी हवा से मिलती है तो भारी बर्फ गिरने लगती है।

आसमान में तेज रफ्तार से चलने वाली हवाएं भी इस सिस्टम को और ताकत देती हैं। इन हवाओं को जेट स्ट्रीम कहते हैं।


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घरों से टकराती लहरें, बर्फबारी और बाढ़ — Massachusetts में बर्फीले तूफान का कहर

यूनाइटेड स्टेट्स के राज्य मैसाचुसेट्स में आए बर्फीले तूफान ने तबाही मचा दी है। घरों की छत से लेकर सड़क तक हर तरफ सिर्फ बर्फ जमी हुई है।

मैसाचुसेट्स में चारों तरफ बर्फ के साथ ही तेज हवाएं भी चल रही हैं। तटीय इलाकों में लहरें उफान पर हैं और तेज बारिश के साथ बर्फ की बाढ़ आ गई है। इंटरनेट पर्सनेलिटी जोनाथन पेट्रामाला ने इस तूफान का ड्रोन वीडियो बनाया।

मैसाचुसेट्स में बर्फ की बाढ़

अमेरिका के साउथ शोर पर स्थित मैसाचुसेट्स के सिचुएट में सोमवार 23 फरवरी की सुबह आसमान में गरज के साथ तेज बारिश हुई। इस इलाके में कई बार बिजली गिरी। इसके साथ ही तेज बर्फीला तूफान भी देखा गया।

नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, सर्दियों के तूफानों में गर्म हवा की हल्की परतें ऊपर उठती हैं, जिससे बर्फबारी बढ़ती है और बिजली गिरते वक्त काफी इलेक्ट्रिक चार्ज अलग होता है।

जोनाथन पेट्रामाला के शेयर किए वीडियो में देखा जा सकता है कि लहरें घरों से टकरा रही हैं और कई मंजिला इमारतों को ढक रही हैं।

सिचुएट, प्लायमाउथ काउंटी, मैसाचुसेट्स, यूनाइटेड स्टेट्स में साउथ शोर पर बोस्टन और प्लायमाउथ के बीच में एक समुद्र तटीय शहर है। ये शहर पूरी तरह से बर्फ से ढक गया है।

अमेरिका में बर्फीले तूफान से लगी 'इमरजेंसी'

अमेरिका में इस समय कई इलाकों में भारी बर्फबारी हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, पिछले दस सालों में ये सबसे तेज तूफान है। भारी बर्फबारी के चलते अधिकारियों ने कई शहरों में इमरजेंसी घोषित कर दी है और स्कूल भी बंद कर दिए गए हैं।


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मेक्सिको: ड्रग माफिया की मौत के बाद 20 राज्यों में हिंसा

मेक्सिको में ड्रग माफिया सरगना एल मेंचो की मौत के बाद सोमवार को भी हिंसक प्रदर्शन हुए। BBC के मुताबिक मेंचो के समर्थकों ने 20 राज्यों में हिंसा फैला दी। कई जगह रोडब्लॉक लगाए, गाड़ियों और 20 से ज्यादा सरकारी बैंक शाखाओं में आग लगा दी गई।

जालिस्को में लॉकडाउन के हालात हैं। ये शहर फीफा 2026 के मेजबान शहरों में शामिल है। अलग-अलग शहरों में कम से कम 32 मौतें हुईं हैं, जिसमें 25 सैनिक शामिल है। ऑपरेशन के दौरान सेना ने बख्तरबंद गाड़ियां और रॉकेट लॉन्चर सहित बड़ी संख्या में हथियार जब्त किए।

दरअसल, मेक्सिको में सेना ने रविवार को एक ऑपरेशन चलाकर देश के सबसे बड़े ड्रग माफिया सरगना एल मेंचो को मार गिराया। सेना के ऑपरेशन के दौरान वह घायल हो गया था। उसे एयरलिफ्ट कर मेक्सिको सिटी ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। इस ऑपरेशन में मेंचो के अलावा अन्य 8 अपराधी भी मारे गए।

मेक्सिको के रक्षा मंत्री रिकार्डो ट्रेविला के मुताबिक मेंचो की लोकेशन का पता उसकी गर्लफ्रेंड के जरिए चला। सेना उसे लंबे समय से ट्रैक कर रही थी।

गर्लफ्रेंड का पीछा कर मेंचो तक पहुंची थी सेना

ट्रेविला ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि खुफिया एजेंसियों ने एल मेंचो की गर्लफ्रेंड से जुड़े एक भरोसेमंद साथी की पहचान की थी। उसकी गतिविधियों पर नजर रखी गई।

इसी व्यक्ति ने एल मेंचो की प्रेमिका को जालिस्को के पास एक कंपाउंड में पहुंचाया था, जिसका पीछा करते-करते सेना कैंपस तक पहुंच गई। जब महिला वहां से निकली तो अधिकारियों को यकीन हो गया कि भारी सुरक्षा के बीच एल मेंचो कंपाउंड के अंदर ही मौजूद है।

इसके बाद सुरक्षाबलों ने तुरंत ऑपरेशन शुरू कर दिया और एक दिन बाद पूरे इलाके को घेर लिया। उन्होंने बताया कि सेना की घेराबंदी के दौरान मेंचो के वफादार बंदूकधारियों ने सेना पर फायरिंग शुरू कर दी।

सेना ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें मेंचो घायल हो गया। उसके साथी उसे लेकर पास के जंगल में भाग गए। काफी मशक्कत के बाद सैनिकों ने उसे खोज निकाला। घायल माफिया को हेलिकॉप्टर से मेडिकल सेंटर ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसने और उसके दो बॉडीगार्ड ने दम तोड़ दिया।

136 करोड़ रुपए का इनामी था मेंचो

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक एल मेंचो, जालिस्को न्यू जनरेशन कार्टेल (CJNG) का प्रमुख था। जालिस्को कार्टेल मेक्सिको में ड्रग्स बनाने और बेचने, स्थानीय कारोबारियों से वसूली करने और कई इलाकों में लोगों को डराकर रखने के लिए कुख्यात रहा है।

इस कार्टेल की मौजूदगी अमेरिका के 50 राज्यों में है। अमेरिकी सरकार ने अल मेंचो के ऊपर 136 करोड़ रुपए का इनाम रखा था। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प काफी समय से मेक्सिको पर एल मेंचो पर एक्शन लेने का दबाव बना रहे थे।

पहले भी ऐसी हिंसक घटनाएं हुईं

मेक्सिको में पहले भी जब किसी बड़े कार्टेल नेता को पकड़ा गया या मारा गया है, तब सरकार और कार्टेल के बीच हिंसक टकराव हुआ है। कई बार गिरोह के अंदर ही सत्ता की लड़ाई छिड़ जाती है, जिससे हालात और बिगड़ जाते हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि एल मेंचो की मौत से पहले 2016 में सिनाओला कार्टेल के सरगना एल चापो की गिरफ्तारी और 2024 में अल मायो की गिरफ्तारी के वक्त भी देश में ऐसा ही हुआ था।

2019 में जब अल चापो के बेटे ओविदियो गुजमान को पकड़ा गया था, तब उसके गुर्गों ने कुलियाकान शहर को घंटों तक बंधक बना लिया था और सरकार को उसे छोड़ना पड़ा था। इसलिए अब भी डर है कि हालात और बिगड़ सकते हैं।

अब यह इस बात पर निर्भर करेगा कि जालिस्को कार्टेल के पास नया नेता साफ तौर पर तय है या नहीं। अगर अंदरूनी लड़ाई शुरू हुई तो खून-खराबा और बढ़ सकता है।

मेक्सिको पर एक्शन लेने को दबाव बना रहे थे ट्रम्प

जालिस्को कार्टेल (CJNG) कार्टेल 2009 में बना था। एल मेंचो की लीडरशिप में यह मेक्सिको का सबसे बड़ा ड्रग नेटवर्क बन गया था। यह कोकीन, मेथामफेटामिन और हाल के वर्षों में फेंटानिल जैसी सिंथेटिक ड्रग्स अमेरिका भेजता था।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मेंचों की मौत से मेक्सिको और अमेरिका के रिश्तों में सुधार हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प मेक्सिको पर दबाव बना रहे थे कि वह कार्टेल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।

ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर सख्त कदम नहीं उठाए गए तो वह सैन्य कार्रवाई पर भी विचार कर सकते हैं। इसी साल फरवरी में ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ने कार्टेल को विदेशी टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन घोषित किया।

मेक्सिको सरकार ने साफ कहा है कि अमेरिकी हमले से देश की संप्रभुता का उल्लंघन होगा, लेकिन खुफिया जानकारी के स्तर पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ा है।

मेक्सिको से अमेरिका में होती है ड्रग तस्करी

मेक्सिको दुनिया के सबसे बड़े ड्रग तस्करी नेटवर्क का गढ़ माना जाता है, जहां से कोकीन, हेरोइन, मेथ और फेंटेनाइल जैसे बेहद खतरनाक ड्रग अमेरिका तक पहुंचते हैं। अमेरिकी एजेंसियों के मुताबिक देश में ड्रग्स की सबसे बड़ी सप्लाई मेक्सिकन कार्टेल्स के जरिए होती है।

अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा ड्रग मार्केट है। हर साल लाखों लोग नशे की लत के शिकार होते हैं और फेंटेनाइल जैसी दवाओं से हजारों मौतें होती हैं। अमेरिकी सरकार पर लगातार दबाव रहता है कि ड्रग तस्करी पर सख्त कदम उठाए जाएं और इसी वजह से उसकी नजर मेक्सिको में मौजूद कार्टेल्स पर रहती है।

दूसरी तरफ, कार्टेल्स मेक्सिको में इतने शक्तिशाली बन चुके हैं कि कई इलाकों में वे पुलिस और सरकार को चुनौती देते हैं। हथियारबंद गिरोह, धमकी, भ्रष्टाचार और हिंसा के चलते स्थानीय प्रशासन भी कई बार उन्हें रोक नहीं पाता। कई कार्टेल्स तो अपने को शेडो गवर्नमेंट की तरह चलाते हैं।

ट्रम्प भी ड्रग कार्टेल को खत्म करने की धमकी दे चुके

वेनेजुएला पर कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने धमकी देते हुए कहा कि उनका प्रशासन जल्द ही जमीन पर मौजूद ड्रग कार्टेल को निशाना बनाने के लिए कार्रवाई शुरू करेगा।

ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया था कि मेक्सिको पर ड्रग कार्टेल का कब्जा है। यह अमेरिका में हर साल 2.5 लाख से 3 लाख लोगों की मौत का कारण बन रहे हैं।

उन्होंने कहा कि समुद्र के रास्ते से ड्रग्स की तस्करी को 97% तक रोक दिया है, इसलिए अब जमीन पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उन्होंने योजनाओं के बारे में और कोई जानकारी नहीं दी।

मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लॉडिया शीनबॉम ने ट्रम्प के बयानों का कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने मादुरो की गिरफ्तारी के बाद कहा कि अमेरिका किसी भी क्षेत्र का मालिक नहीं है।

न्यू जेनरेशन कार्टेल के पास मशीन गन, टैंक भी मौजूद

द गार्डियन की एक रिपोर्ट के अनुसार मेक्सिको के सबसे बड़े सिनालोआ कार्टेल के पास 600 से ज्यादा विमान और हेलिकॉप्टर हैं। ये संख्या मेक्सिको की सबसे बड़ी एयरलाइंस एयरो मेक्सिको से पांच गुना ज्यादा है।

कार्टेल्स अब ड्रोन और आर्मर्ड व्हीकल्स पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। जैसे जलिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल (CJNG) के पास मशीन गन, टैंक और बॉडी आर्मर से लैस ग्रुप्स हैं। कुल मिलाकर, कार्टेल्स की प्राइवेट सेना या मेंबर्स की संख्या 2022-2023 में 160,000 से 185,000 अनुमानित थी, जो मेक्सिको में पांचवीं सबसे बड़ी एम्प्लॉयर बनाती है

मेक्सिको गृह मंत्रालय की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार कार्टेल के पास एके-47 और एम-80 जैसे असॉल्ट राइफलों का जखीरा है। हर साल सुरक्षा एजेंसियों के द्वारा ड्रग कार्टेल के कब्जे से 20 हजार से ज्यादा असॉल्ट राइफलों की बरामदगी की जाती है।

भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी जारी की

मेक्सिको में हालात बिगड़ने पर भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। जालिस्को (पुएर्तो वालार्टा, चापाला, ग्वाडलाहारा), तमाउलिपास (रेनोसा), मिचोआकान, गुरेरो और न्यूवो लियोन राज्यों में रह रहे भारतीयों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।

दूतावास ने नागरिकों से सुरक्षित स्थान पर रहने, अनावश्यक आवाजाही से बचने और भीड़ से दूर रहने की अपील की है। साथ ही परिवार और मित्रों को अपनी स्थिति की जानकारी देने को कहा है।

इमरजेंसी में 911 पर संपर्क करने और सहायता के लिए +52-55-4847-7539 पर भारतीय दूतावास से संपर्क करने की सलाह दी गई है। फिलहाल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों का ऑपरेशन जारी है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।


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आज से डोनाल्ड ट्रम्प के इमरजेंसी टैरिफ की वसूली बंद

अमेरिकी सरकार आज से राष्ट्रपति ट्रम्प की तरफ से लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ की वसूली बंद कर देगी। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को टैरिफ समझौते से पीछे हटने वाले देशों को चेतावनी दी है।

उन्होंने कहा कि ट्रेड डील के नाम पर यदि किसी देश ने अमेरिका के साथ 'गेम' खेलने की कोशिश की उसके नतीजे बुरे होंगे साथ ही और ऊंचे टैरिफ लगाए जाएंगे। दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 3 दिन पहले इन टैरिफ को गैरकानूनी बताया गया था। अमेरिकी US कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CPB) ने एक बयान में कहा-

1977 के कानून इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ की वसूली मंगलवार रात 12 बजकर 1 मिनट (भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे) से बंद कर दी जाएगी। एजेंसी ने इम्पोर्ट्स को निर्देश दिया है कि इन टैरिफ से जुड़े सभी कोड उसके कार्गो सिस्टम से हटा दिए जाएंगे।

पेन व्हार्टन बजट मॉडल के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक कोर्ट से इस फैसले से अमेरिकी सरकार को 175 अरब डॉलर (15.75 लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा की कमाई वापस करनी पड़ सकती है।

रॉयटर्स के मुताबिक, IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ से अमेरिका की हर दिन 50 करोड़ डॉलर (4,500 करोड़ रुपए) से ज्यादा की कमाई हो रही थी। अब इन्हें रद्द किए जाने के बाद कंपनियां रिफंड की मांग कर सकती हैं।

ट्रम्प बोले- कई देशों ने अमेरिका को नुकसान पहुंचाया

टूथ सोशल पर ट्रम्प ने कहा, ‘कई देशों ने अमेरिका को व्यापार में बरसों तक नुकसान पहुंचाया है।’ ट्रम्प का बयान ऐसे समय पर आया है, जब मंगलवार से भारत समेत सभी देशों पर 15% टैरिफ शुरू हो जाएगा।

दरअसल, कुछ देश 15% टैरिफ का विरोध कर रहे हैं। ट्रम्प ने ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों से ट्रेड डील कर 10% अमेरिकी बेस लाइन टैरिफ चुकाने पर सहमति जताई थी।

अब 15% टैरिफ चुकाना पड़ेगा। इन देशों का कहना है कि ट्रेड डील में जब 10% टैरिफ पर करार हुआ है तो वे ज्यादा टैरिफ नहीं चुकाएंगे। इस पर ट्रम्प प्रशासन ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है।

ट्रम्प बोले- सुप्रीम कोर्ट ने मुझे पहले से ज्यादा अधिकार दे दिए

राष्ट्रपति ट्रम्प ने ग्लोबल टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद सोमवार को कहा कि इस फैसले से उल्टा उनकी ताकत और बढ़ गई है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि सुप्रीम कोर्ट ने अनजाने में उन्हें पहले से ज्यादा अधिकार दे दिए हैं।

ट्रम्प ने कहा, 'मैं कुछ समय तक 'सुप्रीम कोर्ट' स्माल लेटर में लिखूंगा, क्योंकि मुझे इस फैसले का सम्मान नहीं रहा।' उन्होंने फैसले को मूर्खतापूर्ण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बांटने वाला बताया।

इसके बावजूद ट्रम्प का कहना है कि इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि वह दूसरे कानूनों के तहत टैरिफ लगाने की अपनी ताकत का और ज्यादा इस्तेमाल कर सकते हैं। कोर्ट ने बाकी बचे टैरिफ को कानूनीतौर पर मजबूत कर दिया है और अब वह उन्हें और ज्यादा सख्त तरीके से लागू कर सकते हैं।

ट्रम्प ने यह भी कहा कि वह लाइसेंस जैसे तरीकों का इस्तेमाल करके देशों के खिलाफ कड़े कदम उठा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि कोर्ट ने बाकी सभी टैरिफ को मंजूरी दे दी है और ऐसे टैरिफ की संख्या काफी ज्यादा है।

वसूला गया टैरिफ वापस होगा या नहीं इसकी जानकारी नहीं

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के तीन दिन से ज्यादा समय बाद लागू किया जा रहा है। एजेंसी ने यह नहीं बताया कि इन तीन दिनों में टैरिफ क्यों वसूले जाते रहे। यह भी साफ नहीं किया गया है कि जिन लोगों से पैसा लिया गया है, उन्हें वह वापस मिलेगा या नहीं।

यह आदेश सिर्फ IEEPA कानून के तहत लगाए गए टैरिफ पर लागू होगा। जबकि नेशनल सिक्टोरिटी के नाम पर ‘सेक्शन 232’ के तहत और अनफेयर ट्रेड केस के ‘सेक्शन 301’ के तहत लगाए गए टैरिफ जारी रहेंगे और उन पर इस फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा।

CBP ने कहा है कि वह व्यापार से जुड़े लोगों को आगे की जानकारी आधिकारिक संदेशों के जरिए देती रहेगी।

अमेरिकी कानून के सेक्शन 232 और सेक्शन 301 को जानिए

अमेरिका के व्यापार कानून में सेक्शन 232 और सेक्शन 301 ऐसे नियम हैं, जिनके जरिए सरकार दूसरे देशों से आने वाले सामान पर टैरिफ लगा सकती है।

सेक्शन 232- यह 1962 के कानून का हिस्सा है। अगर अमेरिकी सरकार को लगे कि किसी देश से ज्यादा सामान आने से देश की राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा हो सकता है, तो राष्ट्रपति उस सामान पर टैरिफ लगा सकते हैं। मतलब, अगर इम्पोर्ट से सेना, डिफेंस इंडस्ट्री या जरूरी घरेलू इंडस्ट्री कमजोर पड़ते दिखें, तो इस नियम का इस्तेमाल किया जाता है।

ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल में स्टील और एल्युमिनियम पर इसी सेक्शन के तहत टैरिफ लगाए थे। उनका कहना था कि ज्यादा इम्पोर्ट से अमेरिकी इंडस्ट्री कमजोर हो रही है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है।

सेक्शन 301- यह 1974 के कानून का हिस्सा है। अगर अमेरिका को लगे कि कोई देश उसके साथ गलत तरीके से व्यापार कर रहा है, जैसे नियमों का उल्लंघन, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) की चोरी या भेदभाव तो वह उस देश के सामान पर टैरिफ लगा सकता है।

चीन के खिलाफ लगाए गए कई टैरिफ इसी सेक्शन 301 के तहत लगाए गए थे।

ट्रम्प ने दुनियाभर पर 15% ग्लोबल टैरिफ लगाया

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को ने 6-3 के बहुमत से फैसला दिया कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने IEEPA कानून का इस्तेमाल करते हुए हद से ज्यादा ताकत ले ली थी। कोर्ट ने साफ कहा कि इस कानून में राष्ट्रपति को इतने बड़े स्तर पर इंपोर्ट पर टैरिफ लगाने की इजाजत नहीं है।

कोर्ट का फैसला आते ही कुछ ही घंटों में ट्रम्प ने नए ग्लोबल टैरिफ का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि मंगलवार से अमेरिका में आने वाले हर सामान पर एक जैसा टैरिफ लगेगा। पहले यह 10% बताया गया, लेकिन बाद में अचानक इसे बढ़ाकर 15% कर दिया गया। अचानक हुए इस बदलाव से कुछ अधिकारी भी हैरान रह गए।

यह नया टैरिफ अमेरिकी व्यापार कानून के सेक्शन 122 के तहत लगाया गया है। इस नियम के तहत सरकार 15% तक टैरिफ लगा सकती है, लेकिन अगर इसे 150 दिनों से ज्यादा जारी रखना है तो कांग्रेस (संसद) की मंजूरी लेनी पड़ेगी।

भारत भी 15% वाले टैरिफ के दायरे में

इस फैसले का असर भारत पर भी पड़ेगा। पिछले एक साल में अमेरिका ने भारतीय सामान पर लगने वाला टैक्स कई बार बदला है। पहले करीब 26% था, फिर बढ़ाकर 50% तक कर दिया गया। उसके बाद इसे घटाकर 18% किया गया और अब कोर्ट के फैसले के बाद यह 15% वाले ग्लोबल टैरिफ में आ गया है।

अब आगे भारतीय सामान पर असली असर क्या होगा, यह कुछ बातों पर टिका है। जैसे कि क्या अमेरिका की संसद 150 दिन की इस व्यवस्था को आगे बढ़ाती है या नहीं, भारत और अमेरिका के बीच जो अस्थायी व्यापार समझौता चल रहा है वह कब लागू होता है।

इसके अलावा क्या अमेरिकी सरकार आगे कोई दूसरा कानूनी रास्ता अपनाती है या नहीं। मतलब अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है आगे और बदलाव हो सकते हैं।

1974 के कानून का हिस्सा है सेक्शन 122

सेक्शन 122 अमेरिका के एक कानून का हिस्सा है, जिसे ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 कहा जाता है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि अगर देश को अचानक व्यापार घाटे या आर्थिक संकट का खतरा हो, तो वे तुरंत आयात पर टैरिफ लगा सकते हैं।

इसके तहत राष्ट्रपति बिना लंबी जांच प्रक्रिया के अस्थायी तौर पर टैरिफ लगा सकते हैं। आमतौर पर यह टैरिफ 150 दिनों तक लागू रह सकता है। इस दौरान सरकार स्थिति की समीक्षा करती है और आगे का फैसला लेती है।

NBC न्यूज के मुताबिक दुनिया के सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर 15% का एक जैसा ग्लोबल टैरिफ लगाने का मतलब होगा कि जिन देशों पर ज्यादा टैरिफ लगा है वह खुद घट जाएगा।

कुछ उत्पादों को छूट दी गई है, जैसे कुछ कृषि उत्पाद (बीफ, टमाटर, संतरा), महत्वपूर्ण खनिज, दवाइयां, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स और पैसेंजर वाहन। ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि यह टैरिफ पुराने वाले की जगह लेगा और वे अधिक पैसा कमाने की कोशिश जारी रखेंगे।

निक्सन ने 55 साल पहले लगाया था 10% ग्लोबल टैरिफ

साल 1971 में अमेरिका और दुनिया के बीच व्यापार और भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट) में भारी असंतुलन हो गया था। अमेरिका लगातार ज्यादा आयात कर रहा था और निर्यात कम कर पा रहा था, जिससे डॉलर पर दबाव बढ़ रहा था।

इसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने दुनियाभर के देशों पर 10% का ग्लोबल टैरिफ लगा दिया था। इसके बाद यह महसूस किया गया कि भविष्य में अगर ऐसी आर्थिक आपात स्थिति आती है, तो राष्ट्रपति के पास ऐसी चीजों से निपटने के लिए कानूनी अधिकार होने चाहिए। इसी मकसद से 1974 में “ट्रेड एक्ट 1974” पारित किया गया था।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सेक्शन 122 का पहले कभी इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसलिए यह भी साफ नहीं है कि अगर इसे अदालत में चुनौती दी गई, तो अदालतें इसकी व्याख्या किस तरह करेंगी।


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ट्रम्प को झटका: सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ फैसले को गैरकानूनी बताया

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी करार देते हुए रद कर दिया है। इस फैसले से ट्रंप प्रशासन की आर्थिक और विदेशी नीति को बड़ा झटका लगा है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार पहले ही वसूले जा चुके 133 अरब डॉलर का क्या होगा?

इलिनोइस के गवर्नर जेबी प्रिट्जकर ने ट्रंप को एक पत्र लिखकर अपने राज्य के परिवारों के लिए करीब 9 अरब डॉलर की वापसी की मांग की है। उन्होंने कहा कि टैरिफ की वजह से किसानों को नुकसान हुआ, सहयोगी देशों में नाराजगी बढ़ी और किराने का सामान महंगा हो गया।

येल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले साल औसतन हर अमेरिकी परिवार ने टैरिफ के कारण लगभग 1700 डॉलर अतिरिक्त चुकाए। इसी आधार पर प्रिट्जकर ने प्रति परिवार मुआवजे की मांग की है।

किसे मिलेगा रिफंड?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आम उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि उन्हें महंगाई के बदले पैसे वापस मिल सकते हैं। लेकिन ऐसा होना मुश्किल माना जा रहा है। क्योंकि टैरिफ सीधे कंपनियों से वसूला गया था, इसलिए रिफंड भी संभवत: उन्हीं कपनियों को मिलेगा।

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी संकेत दिया है कि आम लोगों को सीधा मुआवजा मिलना मुश्किल है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने औपचारिक और अनौपचारिक रूप से रिफंड का वादा किया है, लेकिन इसकी प्रक्रिया क्या होगी, यह अभी साफ नहीं है।

पेन-व्हार्टन बजट मॉडल के मुताबिक, कुल रिफंड 175 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। हालांकि, अंतिम रूप से कितनी राशि लौटाई जाएगी और किसे मिलेगी, यह अभी तय नहीं है।

जटिल हो सकती है रिफंड की प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट के जज ब्रेट कैवनॉ ने अपने असहमति वाले मत में कहा कि अदालत ने यह नहीं बताया कि सरकार इन अरबों डॉलर को कैसे और कब लौटाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि रिफंड प्रक्रिया काफी जटिल हो सकती है।

अमेरिकी कस्टम एजेंसी के पास शुल्क वापसी की पहले से एक प्रक्रिया है, जब आयातक साबित कर दें कि उनसे गलती से शुल्क लिया गया था। संभव है कि उसी व्यवस्था का इस्तेमाल ट्रंप के टैरिफ लौटाने में किया जाए।

1990 के दशक में भी अदालत ने निर्यात पर लगाए गए हार्बर मेंटेनेंस शुल्क को असंवैधानिक ठहराया था और कंपनियों को पैसा लौटाने की व्यवस्था की गई थी। लेकिन इस बार मामला बहुत बड़ा है- हजारों आयातक और अरबों डॉलर दांव पर हैं।

कंपनियों की कतार, आगे और मुकदमे

ट्रेड वकीलों का मानना है कि अंततः आयातकों को पैसा मिल सकता है, लेकिन इसमें समय लगेगा। यह प्रक्रिया अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन, न्यूयॉर्क की कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड और अन्य निचली अदालतों के जरिए तय हो सकती है।

कॉस्टको, रेव्लॉन और बम्बल बी फूड्स जैसी कई कंपनियां पहले ही रिफंड के लिए मुकदमा दायर कर चुकी हैं। वे चाहती हैं कि अगर टैरिफ रद हों तो उन्हें प्राथमिकता मिले।

विशेषज्ञों का कहना है कि आगे और कानूनी लड़ाइयां हो सकती हैं। कुछ निर्माता कंपनियां भी उन सप्लायर्स के खिलाफ दावा कर सकती हैं, जिन्होंने टैरिफ के नाम पर कच्चे माल की कीमतें बढ़ा दी थीं। साफ है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी यह मामला लंबे समय तक अदालतों में चलता रह सकता है।


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ट्रम्प का बड़ा फैसला: दुनिया भर के आयात पर 10% टैरिफ लागू

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के फैसले के 3 घंटे के अंदर डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनियाभर पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगा दिया है। उन्होंने शुक्रवार को एक आदेश पर हस्ताक्षर कर इसे लागू कर दिया है। यह टैरिफ 24 फरवरी को आधी रात से लागू होगा।

इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, सिर्फ संसद को है।

ट्रम्प ने इसकी आलोचना करते हुए कहा- यह बहुत निराशाजनक है। मुझे कोर्ट के कुछ जजों पर शर्म आ रही है। वे देश के लिए कलंक हैं, उनमें हमारे देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है। भारत के साथ ट्रेड डील पर ट्रम्प ने कहा कि, इस डील में कोई बदलाव नहीं होगा। पीएम मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं।

हालांकि, BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया ब्रिटेन, भारत और यूरोपीय यूनियन समेत अमेरिका के साथ व्यापार समझौते करने वाले देशों को अब 10% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। यानी कि भारत पर अब टैरिफ 18% की जगह घटकर 10% रह जाएगा।

ट्रम्प बोले- जजों में सही काम करने की हिम्मत नहीं

ट्रम्प ने कहा कि जज ‘कट्टर वामपंथियों के पालतू’ हैं। वे देशभक्ति नहीं दिखा रहे हैं और संविधान के प्रति वफादार भी नहीं हैं। जज कुछ लोगों से डरते हैं इसलिए सही फैसला लेना नहीं चाहते।

ट्रम्प ने इस फैसले को “बहुत निराशाजनक” बताया और कहा, “मुझे अदालत के कुछ लोगों पर शर्म आती है। बिल्कुल शर्म आती है कि उनमें हमारे देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है।”

उन्होंने उन तीन कंजरवेटिव जजों की तारीफ की, जिन्होंने इस फैसले से असहमति जताई थी। जिन जजों ने टैरिफ को रद्द किया, उनकी आलोचना करते हुए ट्रम्प ने कहा, “वे हर उस चीज के खिलाफ हैं जो अमेरिका को मजबूत और फिर से महान बनाती है। वे हमारे देश के लिए शर्म की बात हैं। वे हर बार ‘ना’ कहने वाले जज हैं।”

ट्रम्प के प्रेस कॉन्फ्रेंस की 5 अहम बातें…

सुप्रीम कोर्ट के रद्द किए गए टैरिफ लागू करने के लिए मुझे संसद की जरूरत नहीं है। मैं इन्हें राष्ट्रपति के मिले अधिकारों के जरिए लागू कर सकता हूं।

सुप्रीम कोर्ट में रिफंड को लेकर कोई साफ बात नहीं कही गई है। इसलिए अमेरिकी सरकार किसी भी कंपनी को टैरिफ के रूप में वसूला गया पैसा वापस नहीं करेगी।

जज ने बहुत ही घटिया फैसला सुनाया है। मुझे लगता है कि अब इस मामले पर अगले दो साल तक कोर्ट में मुकदमा चलेगा। हम अगले 5 साल तक कोर्ट में ही रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विदेशी ताकतों का असर पड़ा है। अगर टैरिफ नहीं लगाए गए, तो विदेशी देश कुछ उद्योगों में अमेरिका से आगे निकलते रहेंगे।

टैरिफ लगाने का यह कदम कई साल पहले के राष्ट्रपतियों को उठा लेना चाहिए था। उन्होंने हमारे देश को कमजोर होने दिया और दूसरे देशों को फायदा उठाने दिया।

सेक्शन 122 के जरिए टैरिफ लगाएंगे ट्रम्प

सेक्शन 122 अमेरिका के एक कानून का हिस्सा है, जिसे ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 कहा जाता है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि अगर देश को अचानक व्यापार घाटे या आर्थिक संकट का खतरा हो, तो वे तुरंत आयात पर टैरिफ लगा सकते हैं।

इसके तहत राष्ट्रपति बिना लंबी जांच प्रक्रिया के अस्थायी तौर पर टैरिफ लगा सकते हैं। आमतौर पर यह टैरिफ 150 दिनों तक लागू रह सकता है। इस दौरान सरकार स्थिति की समीक्षा करती है और आगे का फैसला लेती है।

NBC न्यूज के मुताबिक दुनिया के सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर 10% का एक जैसा ग्लोबल टैरिफ लगाने का मतलब होगा कि जिन देशों पर ज्यादा टैरिफ लगा है वह खुद घट जाएगा।

कुछ उत्पादों को छूट दी गई है, जैसे कुछ कृषि उत्पाद (बीफ, टमाटर, संतरा), महत्वपूर्ण खनिज, दवाइयां, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स और पैसेंजर वाहन। ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि यह टैरिफ पुराने वाले की जगह लेगा और वे अधिक पैसा कमाने की कोशिश जारी रखेंगे।

यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ने बताया कि अधिकांश प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर सेक्शन 301 के तहत जांच शुरू की जाएगी।

निक्सन ने 55 साल पहले लगाया था 10% ग्लोबल टैरिफ

साल 1971 में अमेरिका और दुनिया के बीच व्यापार और भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट) में भारी असंतुलन हो गया था। अमेरिका लगातार ज्यादा आयात कर रहा था और निर्यात कम कर पा रहा था, जिससे डॉलर पर दबाव बढ़ रहा था।

इसके बाद निक्सन ने दुनियाभर के देशों पर 10% का ग्लोबल टैरिफ लगा दिया था। इसके बाद यह महसूस किया गया कि भविष्य में अगर ऐसी आर्थिक आपात स्थिति आती है, तो राष्ट्रपति के पास ऐसी चीजों से निपटने के लिए कानूनी अधिकार होने चाहिए। इसी मकसद से 1974 में “ट्रेड एक्ट 1974” पारित किया गया था।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सेक्शन 122 का पहले कभी इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसलिए यह भी साफ नहीं है कि अगर इसे अदालत में चुनौती दी गई, तो अदालतें इसकी व्याख्या किस तरह करेंगी।

कोर्ट की ट्रम्प को फटकार, कहा- हर देश से युद्ध की स्थिति में नहीं

इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को फटकारते हुए कहा था कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है। हालांकि फैसले को लेकर 3 जजों जस्टिस सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ ने इस फैसले से असहमति जताई।

कैवनॉ ने अपने नोट में लिखा कि टैरिफ नीति समझदारी भरी है या नहीं, यह अलग सवाल है, लेकिन उनके मुताबिक यह कानूनी तौर पर वैध थी। कैवनॉ ने अपने नोट में भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर लगाए गए टैरिफ का भी जिक्र किया।

उन्होंने लिखा कि ये टैरिफ विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों के तहत लगाए गए थे।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में कुल 9 जज हैं। इनमें से 6 जजों को रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किया है, जबकि 3 जज डेमोक्रेटिक राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किए। फैसले के खिलाफ वोट करने वाले तीनों जज रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किए थे।

कोर्ट के फैसले से सभी टैरिफ खत्म नहीं हुए हैं

कोर्ट के आदेश से ट्रम्प के सभी टैरिफ खत्म नहीं हुए हैं। स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए टैरिफ अलग कानूनों के तहत लगाए गए थे, इसलिए वे अभी भी लागू रहेंगे।

हालांकि, दो बड़े कैटेगरी के टैरिफ पर रोक लग गई है। पहली कैटेगरी रेसिप्रोकल टैरिफ की है, जो ट्रम्प ने अलग-अलग देशों पर लगाए थे। इसमें चीन पर 34% और बाकी दुनिया के लिए 10% बेसलाइन टैरिफ तय किया गया था। कोर्ट के फैसले के बाद ये टैरिफ अमान्य हो गए हैं।

दूसरी कैटेगरी 25% टैरिफ की है, जो ट्रम्प ने कनाडा, चीन और मैक्सिको से आने वाले कुछ सामान पर लगाया था। ट्रम्प प्रशासन का कहना था कि इन देशों ने अमेरिका में फेंटेनाइल की तस्करी रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। कोर्ट के फैसले ने इस 25% टैरिफ को भी निरस्त कर दिया है।

अमेरिका ने टैरिफ से 200 अरब डॉलर वसूले, रिफंड पर सस्पेंस

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल की शुरुआत से अब तक ट्रम्प प्रशासन ने 200 अरब डॉलर से ज्यादा का टैरिफ वसूला है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब इस रकम के रिफंड को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

फैसले के बाद यह साफ नहीं है कि सरकार को कंपनियों को वसूला गया पैसा लौटाना पड़ेगा या नहीं। ट्रम्प प्रशासन ने पहले कहा था कि अगर केस हार गए तो कई देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों को वापस लेना पड़ सकता है और भारी रिफंड चुकाने पड़ सकते हैं।

ट्रम्प ने 49 साल पुराने कानून के इस्तेमाल कर टैरिफ लगाया था

ट्रम्प के टैरिफ विवाद के केंद्र में एक कानून है, जिसका नाम इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) है। यह कानून 1977 में बनाया गया था।

इसका मकसद यह था कि अगर देश पर कोई गंभीर खतरा जैसे युद्ध जैसी स्थिति, विदेशी दुश्मन से बड़ा आर्थिक खतरा या असाधारण अंतरराष्ट्रीय संकट आए तो राष्ट्रपति को कुछ खास शक्तियां दी जा सकें।

इन शक्तियों के तहत राष्ट्रपति विदेशी लेन-देन पर रोक लगा सकता है, उन्हें नियंत्रित कर सकता है या कुछ आर्थिक फैसले तुरंत लागू कर सकता है। ट्रम्प ने टैरिफ लगाने के लिए IEEPA का ही सहारा लिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ पर सवाल उठाए थे

पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प सरकार के टैरिफ लगाने के कानूनी आधार पर सवाल उठाए थे। उस दौरान जजों ने पूछा था कि क्या राष्ट्रपति को इस तरह के ग्लोबल टैरिफ लगाने का अधिकार है। कोर्ट ने इस मामले में लंबी सुनवाई की।

कोर्ट ने कहा कि ट्रम्प 150 दिनों तक 15% टैरिफ लगा सकते हैं, लेकिन इसके लिए ठोस कारण चाहिए। फैसले में कहा गया कि IEEPA में ‘टैरिफ’ शब्द का कहीं जिक्र नहीं है और न ही इसमें राष्ट्रपति के अधिकारों पर कोई स्पष्ट सीमा तय की गई है।

ट्रम्प के खिलाफ 12 राज्यों का मुकदमा

ट्रम्प ने पिछले साल अप्रैल इन टैरिफ के ऐलान किए थे। इन टैरिफ के खिलाफ अमेरिका के कई छोटे कारोबारी और 12 राज्यों ने मुकदमा दायर किया था। उनका कहना था कि राष्ट्रपति ने अपनी सीमा से बाहर जाकर आयात होने वाले सामान पर नए टैरिफ लगाए।

एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, इलिनॉय, मेन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू मेक्सिको, न्यूयॉर्क, ओरेगन और वर्मोंट राज्यों ने छोटे कारोबारियों के साथ मिलकर ट्रम्प सरकार के खिलाफ यह केस किया था।

निचली अदालतों ने टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था

इससे पहले निचली अदालतों (कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड और फेडरल सर्किट कोर्ट) ने टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था। उनका मानना था कि IEEPA टैरिफ लगाने की इतनी व्यापक शक्ति नहीं देता।

सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में मौखिक बहस सुनी थी, जहां जजों ने ट्रम्प की ओर से पेश की गईं दलीलों पर संदेह जताया था। कोर्ट के 6-3 बहुमत के बावजूद, जस्टिस ने पूछा था कि क्या राष्ट्रपति कांग्रेस की मंजूरी के बिना इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगा सकता है, क्योंकि टैरिफ टैक्स का रूप हैं और यह संसद की जिम्मेदारी हैं।


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ब्राजील कार्निवल में रंग-उत्सव का सैलाब, इस बार टूट सकते हैं पुराने रिकॉर्ड

दुनिया के सबसे भव्य आयोजनों में गिने जाने वाला रियो कार्निवल अपने चरम पर पहुंच गया है। 13 फरवरी से शुरू हुआ यह रंगारंग उत्सव विभिन्न शहरों से गुजरते हुए अब रियो डी जेनेरियो में पूरे जोश के साथ मनाया जा रहा है। 21 फरवरी तक चलने वाले इस आयोजन में भारी भीड़ उमड़ रही है और अनुमान है कि इस बार करीब 6.5 करोड़ लोग इसमें हिस्सा लेंगे। देशभर में 4 हजार से ज्यादा कलाकार कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं, जबकि केवल रियो में ही लगभग 80 लाख आगंतुकों के पहुंचने की संभावना है।

रियो में कार्निवल परेड का मुख्य केंद्र सांबाड्रोम मार्केस दे सपुकाई है, जहां 12 प्रमुख सांबा स्कूल मुख्य प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं। इनके अलावा कई अन्य स्कूल अलग-अलग श्रेणियों में प्रदर्शन करते हैं। हर बड़े सांबा स्कूल से हजारों डांसर, संगीतकार, कारीगर, कॉस्ट्यूम डिजाइनर, दर्जी और सेट निर्माता जुड़े होते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक एक उभरते सांबा स्कूल पाड्रे मिगुएल का बजट करीब 190 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

कार्निवल का आर्थिक प्रभाव भी बड़ा है — केवल रियो में ही हर साल करीब 70 हजार अस्थायी रोजगार पैदा होते हैं, जिनमें सुरक्षा, सफाई, फूड स्टॉल, होटल-रेस्तरां स्टाफ और इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े काम शामिल हैं।


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भारत-EU के बीच हुआ FTA, पीएम मोदी बोले—27 देशों के साथ बड़ी डील साइन

18 साल के लंबे इंतजार के बाद भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) का सपना साकार हो गया है। दोनों पक्षों ने FTA को हरी झंडी दिखा दी है। इस ऐतिहासिक समझौते को'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपिय परिषद के राष्ट्रपति एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा के साथ मीडिया को संबोधित किया है।

पीएम मोदी ने किया एलान

नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रेस मीट के दौरान पीएम मोदी ने कहा, "कल एक ऐतिहासिक क्षण था, जब पहली बार यूरोपीयन यूनियन के लीडर्स भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। आज एक और ऐतिहासिक अवसर है, जब विश्व की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियां अपने संबंधों में एक निर्णायक अध्याय जोड़ रही हैं।"

किसानों और छोटे उद्योगों को होगा फायदा: PM मोदी

पीएम मोदी ने ट्रेड डील के फायदे गिनाते हुए कहा, "यह ऐतिहासिक समझौता हमारे किसानों और हमारे छोटे उद्योगों के लिए यूरोपीय मार्केट तक पहुंच को आसान बनाएगा, मैन्युफैक्चरिंग में नए अवसर पैदा करेगा और हमारे सर्विसेज सेक्टर के बीच सहयोग को और मजबूत करेगा। यह सिर्फ व्यापार समझौता नहीं है। यह साझा समृद्धि का नया ब्लू प्रिंट है।"

27 देशों से हुई डील

पीएम मोदी ने डील की घोषणा करते हुए कहा-

आज भारत ने अपने इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा मुक्त व्यापर समझौता संपन्न किया है। आज 27 तारीख है और ये सुखद संयोग है कि आज ही के दिन, यूरोपीय संघ के 27 देशों के साथ भारत ये FTA कर रहा है।

ट्राइ-लटरल प्रोजेक्ट्स का होगा विस्तार: PM मोदी

पीएम मोदी के अनुसार, "भारत और यूरोपीय संघ का सहयोग एक वैश्विक साझेदारी साबित होगी है। हम इंडो-पैसिफिक से लेकर कैरेबियन तक ट्राइ-लेटरल प्रोजेक्ट्स का विस्तार देंगे। इससे सस्टेनेबल एग्रीकल्चर, क्लीन एनर्जी और महिला सशक्तिकरण को समर्थन मिलेगा।"


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तेज हवा, भारी बारिश और बर्फबारी के साथ UK में दस्तक देगा तूफान ‘चंद्रा’, इंग्लैंड से लेकर आयरलैंड तक अलर्ट

ब्रिटेन में आज मंगलवार को चंद्रा तूफान दस्तक देने जा रहा है। मेट ऑफिस ने चेतावनी दी है कि मंगलवार को पूरे यूनाइटेड किंगडम में तेज हवाएं चलेंगी। भारी बारिश के साथ बर्फबारी होने का भी अनुमान है।

तूफान चंद्रा से बहुत तेज़ हवाओं के चलने से इमारतों को नुकसान हो सकता है। छतों से टाइलें और मलबे के उड़ने से जानलेवा चोटें लग सकती हैं। ये तूफान मौसम को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर सकता है।

इंग्लैंड से लेकर आयरलैंड तक अलर्ट

ब्रिटेन में इस तूफान को लेकर कई मौसम संबंधी चेतावनी जारी की गई हैं, जिसमें दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड के लिए बारिश और उत्तरी आयरलैंड के पूर्वी तट पर तेज हवाओं के चलने की चेतावनी दी गई है।

सबसे तेज हवाएं दक्षिण पश्चिम और वेल्स में चलेंगी। पेम्ब्रोकशायर और आइल्स ऑफ सिली में  80mph की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। उत्तरी आयरलैंड में 75mph की रफ्तार से हवाओं के चलने की आशंका है।

बाढ़ का भी अलर्ट

यूनाइटेड किंगडम में इस सप्ताह बाढ़ भी एक बड़े खतरे के तौर पर सामने आने वाली है। पर्यावरण एजेंसी ने इंग्लैंड के लिए 97 बाढ़ अलर्ट और 19 चेतावनी जारी की हैं।

यूनाइटेड किंगडम की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने कमजोर लोगों के जीवन के लिए इस बड़े जोखिम के बीच सोमवार की शाम 6 बजे से शुक्रवार तक उत्तरी इंग्लैंड के लिए ठंड स्वास्थ्य अलर्ट सक्रिय कर दिया है।


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भारत-EU के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर मुहर, पीएम बोले—दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच ऐतिहासिक समझौता

भारत और यूरोपिय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) साइन हो चुका है। 18 साल की बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने नई दिल्ली में इसे हरी झंडी दिखा दी है। यूरोपीय संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बैठक की, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसकी घोषणा कर दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक 2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा, "यूरोपीय देशों से भारत की डील को लोग दुनिया में 'मदर ऑफ ऑल डील' कह रहे हैं।"

पीएम मोदी ने की घोषणा

भारत-ईयू के बीच ऐतिहासिक समझौते की घोषणा करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "कल ही भारत और European Union के बीच एक बहुत बड़ा एग्रीमेंट हुआ है। दुनिया में लोग इसकी चर्चा ‘मदर ऑफ ऑल डील’ के रूप में कर रहे हैं। यह समझौता भारत के 140 करोड़ लोगों और यूरोपीय देशों के करोड़ों लोगों के लिए बहुत बड़ा अवसर लेकर आया है।"

पीएम मोदी ने कहा-

यह समझौता दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तालमेल का एक शानदार उदाहरण है। यह समझौता ग्लोबल GDP के करीब 25 प्रतिशत और ग्लोबल ट्रेड के लगभग एक-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। यह समझौता ट्रेड के साथ-साथ डेमोक्रेसी और रूल ऑफ लॉ के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को भी सशक्त करता है।

रिफाइनिंग कैपेसिटी में भारत दूसरे स्थान पर: PM मोदी

पीएम मोदी के अनुसार, "भारत में बहुत बड़ी रिफाइनिंग कैपेसिटी मौजूद है। हम रिफाइनिंग कैपेसिटी में दुनिया में दूसरे स्थान पर हैं और जल्द ही दुनिया में पहले नंबर पर होंगे। आज भारत की रिफाइनिंग कैपेसिटी करीब 260 MMTPA है। इसे 300 MMTPA तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। यह इन्वेस्टर्स के लिए बहुत बड़ा मौका है।"

भारत-ईयू FTA

बता दें कि भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच 2007 से ही FTA पर बातचीत चल रही थी। 18 सालों के लंबे इंतजार के बाद दोनों पक्षों ने इसे मंजूरी दे दी है। यूरोपिय संघ की तरफ से यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपिय परिषद के राष्ट्रपति एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा ने FTA डील को हरी झंडी दिखाई है।


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