बंद है होर्मुज, तेल-गैस की सप्लाई पर बड़ा असर

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच हुए युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। यह दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग माना जाता है। इस स्थिति ने मिडिल ईस्ट के देशों के सामने तेल-गैस निर्यात के सीमित विकल्पों को उजागर कर दिया है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इसे अब तक का सबसे बड़ा सप्लाई संकट बताया है, जो 1970 के दशक के तेल संकट और यूक्रेन युद्ध के बाद रूस की गैस सप्लाई रुकने से भी बड़ा है। ऐसे में कई देश होर्मुज को बायपास करने के लिए पुराने और नए रास्तों पर निर्भर हो रहे हैं।

मौजूदा पाइपलाइन विकल्प

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन करीब 1200 किलोमीटर लंबी है, जो रोजाना लगभग 70 लाख बैरल तेल ले जा सकती है। हालांकि, फिलहाल इससे करीब 45 लाख बैरल तेल का निर्यात हो पा रहा है। यह तेल यनबू बंदरगाह तक जाता है, जहां से यूरोप और एशिया भेजा जाता है।

संयुक्त अरब अमीरात की हबशान-फुजैराह पाइपलाइन 360 किलोमीटर लंबी है और इसकी क्षमता 15 से 18 लाख बैरल प्रतिदिन है। यह होर्मुज के बाहर स्थित फुजैराह बंदरगाह तक तेल पहुंचाती है, लेकिन हाल में ड्रोन हमलों से यहां भी सप्लाई प्रभावित हुई है।

इराक-तुर्की की किर्कुक-जेहान पाइपलाइन भी एक अहम मार्ग है, जो कुर्दिस्तान होते हुए तुर्की के जेहान बंदरगाह तक जाती है। इसे ढाई साल बाद फिर से शुरू किया गया और फिलहाल करीब 1.7 लाख बैरल प्रतिदिन तेल भेजा जा रहा है, जिसे बढ़ाकर 2.5 लाख बैरल तक करने की योजना है।

ईरान और संभावित रास्ते

ईरान की गोरेह-जास्क पाइपलाइन भी एक विकल्प है, जिसकी क्षमता करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन है। जास्क टर्मिनल पूरी तरह तैयार नहीं है, लेकिन 2024 में यहां से ट्रायल शिपमेंट किया गया था। इसके अलावा, इराक ओमान के दूक्म बंदरगाह तक पाइपलाइन बनाने पर विचार कर रहा है, हालांकि यह योजना अभी शुरुआती चरण में है और इसके रास्ते तय किए जा रहे हैं।

इराक-जॉर्डन पाइपलाइन का प्रस्ताव भी लंबे समय से है, जिसके जरिए बसरा से अकाबा बंदरगाह तक तेल भेजा जा सकता है। इसकी क्षमता 10 लाख बैरल प्रतिदिन होगी, लेकिन लागत और सुरक्षा कारणों से यह प्रोजेक्ट अभी अटका हुआ है।

बड़े लेकिन मुश्किल विकल्प

हॉर्मुज को पूरी तरह बायपास करने के लिए खाड़ी से ओमान सागर तक नहर बनाने का विचार भी सामने आया है, जो स्वेज या पनामा नहर की तरह हो सकती है। हालांकि, हजर पर्वतों को काटकर यह नहर बनाना बेहद कठिन और महंगा होगा, जिसकी लागत सैकड़ों अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।

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नेपाल में बवाल के बीच पीएम बालेन शाह को बड़ा झटका, 26 दिन में ही गृह मंत्री ने दिया इस्तीफा

नेपाल के गृह मंत्री सुधन गुरुंग ने भारी विवादों के बीच बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। महज 26 दिन के कार्यकाल के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया है।

दरअसल, सुधन गुरुंग पर विवादास्पद कारोबारी दीपक भट्टा के साथ व्यापारिक हिस्सेदारी और माइक्रो इंश्योरेंस कंपनियों में संदिग्ध निवेश के आरोप लगे थे।

गृह मंत्री बनने के बाद से भ्रष्टाचार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने वाले गुरुंग को अपने ही निजी निवेशों के चलते चौतरफा आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, व्यापक विरोध के बाद उन्होने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

गृह मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप

गृह मंत्री सुदान गुरूंग पर आय से अधिक संपत्ति और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में शामिल होने के आरोप लगे हैं। विपक्ष और प्रदर्शनकारियों का दावा है कि गुरूंग कुछ विवादित कारोबार से जुड़े लोगों के संपर्क में रहे हैं। नेपाली मीडिया में भी ऐसे दस्तावेजों का जिक्र हुआ है, जिससे उनके इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर भी लगातार प्रदर्शन किया।

क्या बोले गुरुंग?

अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए गुरुंग ने फेसबुक पोस्ट पर लिखा, "मैं, सूडान गुरुंग, चैत्र 13, 2082 (26 मार्च, 2026) से गृह मंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन कर रहा हूं। हाल ही में, मैंने अपने शेयरों और संबंधित मामलों के बारे में नागरिकों द्वारा उठाए गए प्रश्नों, टिप्पणियों और सार्वजनिक चिंताओं को बहुत गंभीरता से लिया है।"

जनता के विश्वास से बढ़कर कोई शक्ति नहीं

पद संभालने से पहले जनता का विश्वास सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा, "मेरे लिए नैतिकता किसी भी पद से अधिक महत्वपूर्ण है, और जनता के विश्वास से बढ़कर कोई शक्ति नहीं है। आज का 'जेनरेशन जेड' आंदोलन, जो सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करता है, यही संदेश देता है, सार्वजनिक जीवन स्वच्छ होना चाहिए और नेतृत्व जवाबदेह होना चाहिए।".

गुरुंग ने व्यापक राजनीतिक संदर्भ और देश के अतीत में किए गए बलिदानों का भी जिक्र करते हुए कहा कि जब सवाल उठते हैं तो जवाबदेही आवश्यक है। गुरुंग ने कहा, "जब मेरे 46 भाइयों और बहनों के खून और बलिदान पर बनी सरकार के खिलाफ सवाल उठते हैं, तो एकमात्र जवाब नैतिकता ही है।

मैनें सार्वजनिक आलोचना को गंभीरता से लिया और सार्वजनिक जीवन में नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए पद छोड़ने का विकल्प चुना।"

दीपक कुमार को किया था बर्खास्त

इससे पहले 9 अप्रैल को नेपाली प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने अपनी पार्टी की सिफारिश पर अनुशासनात्मक आरोपों के चलते श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपक कुमार साह को बर्खास्त कर दिया था। प्रधानमंत्री सचिवालय ने कहा कि साह को पार्टी द्वारा आचार संहिता और अनुशासन का उल्लंघन करने के बाद हटाया गया है।

आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, साह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी पत्नी जूनू श्रेष्ठ को स्वास्थ्य बीमा बोर्ड के सदस्य के रूप में बनाए रखा, जबकि यह पद लंबे समय से निष्क्रिय पड़ा था। आयोग ने बुधवार को पार्टी को अपनी रिपोर्ट सौंपी और कार्रवाई की सिफारिश की।


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7.4 तीव्रता के भूकंप से कांपा जापान, समुद्र में 80 सेमी तक उठीं लहरें; सुनामी का अलर्ट जारी

सोमवार को जापान के पूर्वोत्तर तट पर प्रशांत महासागर में 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने इसकी पुष्टि की है। भूकंप का केंद्र उत्तरी इवाते प्रांत के पास समुद्र में था। 

भूकंप स्थानीय समयानुसार दोपहर 4:53 बजे आया। इसकी गहराई मात्र 10 किलोमीटर थी, जिससे झटके काफी तेज महसूस किए गए। जिसके बाद जापान के एक बंदरगाह पर 80 सेंटीमीटर (31 इंच) ऊंची सुनामी की लहरें टकराईं।

टोक्यो तक महसूस हुए झटके

भूकंप इतना शक्तिशाली था कि केंद्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर टोक्यो में भी ऊंची इमारतें हिल गईं। कई इलाकों में लोगों ने तेज झटके महसूस किए। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की खबर नहीं आई है, लेकिन स्थिति की निगरानी की जा रही है। 

इसके अलावा, क्योडो के अनुसार, जापान में आए जोरदार भूकंप के बाद टोक्यो-आओमोरी बुलेट ट्रेन लाइन पर परिचालन रोक दिया गया।

उत्तरी जापान के बंदरगाह से टकराईं सुनामी की लहरें

जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने बताया कि सोमवार को उत्तरी जापान के एक बंदरगाह पर 80 सेंटीमीटर (31 इंच) ऊंची सुनामी की लहरें टकराईं। यह लहर शाम 5:34 बजे इवाते के कुजी में एक बंदरगाह पर देखी गई। एजेंसी ने इससे पहले बताया था कि शाम 5:32 बजे 70 सेंटीमीटर ऊंची एक लहर टकराई थी।

एजेंसी ने तटीय इलाकों के निवासियों को तुरंत ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है। सुनामी लहरों के आने की उम्मीद जताई जा रही है, इसलिए सतर्कता बरतने का आग्रह किया गया है। जापान के मीडिया NHK के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि जोरदार भूकंपीय गतिविधि के कारण समुद्र तट के पास सुनामी भी आ गई।

मौसम एजेंसी ने चेतावनी दी कि सुनामी की लहरें उत्तरी तटरेखा तक लगभग तुरंत पहुंच सकती हैं। एजेंसी ने कहा कि तटीय क्षेत्रों और नदी के किनारे वाले इलाकों से तुरंत किसी सुरक्षित जगह, जैसे कि ऊंची जमीन या किसी सुरक्षित इमारत में चले जाएं, और साथ ही यह भी चेताया कि सुनामी की लहरों से नुकसान होने की संभावना है।

एजेंसी ने आगे कहा, "सुनामी की लहरें बार-बार आने की उम्मीद है। जब तक चेतावनी वापस नहीं ले ली जाती, तब तक सुरक्षित जगह न छोड़ें।"


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भारत को रूसी तेल पर अमेरिकी छूट नहीं मिलेगी

अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल खरीद पर दी जा रही छूट को रोकने का फैसला किया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को कहा कि हम रूसी तेल पर दी गई छूट को रिन्यू नहीं करेंगे। इससे पहले मंगलवार को ही ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने ईरानी तेल पर मिलने वाली छूट पर भी रोक लगा दी थी।

व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए बेसेंट ने कहा कि हम रूसी और ईरानी तेल पर देशों को मिल रहे जनरल लाइसेंस को रिन्यू नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यह छूट उन तेल खेपों के लिए थी जो 11 मार्च से पहले समुद्र में थीं और उनका उपयोग हो चुका है। ऐसे में आगे किसी भी देश को यह राहत नहीं मिलेगी।

अमेरिका ने 5 मार्च को भारत को 30 दिन की विशेष छूट दी थी, जिसके बाद भारत यूक्रेन युद्ध के चलते लगे प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल खरीद रहा था। यह छूट बाद में कुछ अन्य देशों को भी दी गई थी और 11 अप्रैल को समाप्त हो गई।

अमेरिका ने 30 दिन की छूट दी थी

मार्च में अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग की वजह से दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर के पार चली गई थीं। इसे काबू में करने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने दूसरे देशों को भी रूस से तेल खरीदने की अस्थाई मंजूरी दे दी थी। रूस के कई ऑयल टैंकर समुद्र में फंसे हैं।

यह छूट सिर्फ 11 अप्रैल तक के लिए दी गई थी। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने तब बताया था कि इसका मकसद दुनियाभर में तेल की सप्लाई बढ़ाना है, ताकि बढ़ती कीमतों पर लगाम लग सके।

रूस से तेल आयात 19 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंचा

अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 90% आयात करने वाले भारत ने पिछले दो महीनों में रूसी क्रूड की खरीदारी में भारी बढ़ोतरी की है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग के कारण ग्लोबल मार्केट में तेल की किल्लत बढ़ गई है, जिसके चलते भारतीय रिफाइनर्स अब रूस से ज्यादा से ज्यादा तेल जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।

इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के डेटा के मुताबिक, मार्च के महीने में रूस से कच्चे तेल का आयात औसत 1.98 मिलियन यानी 19 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) रहा। यह जून 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

हालांकि, अप्रैल में यह आंकड़ा गिरकर 1.57 मिलियन यानी 15.7 लाख बैरल प्रति दिन रह गया है, लेकिन जानकारों का कहना है कि यह गिरावट मांग की कमी की वजह से नहीं, बल्कि नयारा एनर्जी की रिफाइनरी में मेंटेनेंस के लिए किए गए शटडाउन के कारण आई है। अगले महीने से इसमें फिर से उछाल आने की उम्मीद है।

भारत रूसी तेल पर अपनी निर्भरता बनाए रखेगा

सिंगापुर स्थित कंसल्टेंसी 'वांडा इनसाइट्स' की फाउंडर वंदना हरि का कहना है कि भारत वह सारा रूसी तेल खरीदने की कोशिश कर रहा है जो उसे मिल सकता है।

उन्होंने बताया कि जब तक फारस की खाड़ी से होने वाली सप्लाई में दिक्कत बनी रहेगी, भारत रूसी तेल पर अपनी निर्भरता बनाए रखेगा।

दरअसल, अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और होर्मुज रूट के बंद होने से दुनिया भर में सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।


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US सेना ने ईरान से जुड़े 8 तेल टैंकर रोके, CENTCOM का दावा—समुद्री व्यापार ठप

ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सख्ती बढ़ा दी है। नाकेबंदी लागू होने के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े कई तेल टैंकरों को रोक दिया, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है।

US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज में नाकेबंदी शुरू होने के बाद अब तक कम से कम 8 तेल टैंकरों को रोका है। ये टैंकर ईरान के बंदरगाहों की ओर जा रहे थे या वहां से निकल रहे थे।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना ने हर बार रेडियो के जरिए जहाजों के क्रू से संपर्क किया और उन्हें वापस लौटने का आदेश दिया। सभी टैंकरों ने इस आदेश का पालन किया और किसी जहाज पर चढ़कर कार्रवाई करने की जरूरत नहीं पड़ी।

चीन से जुड़ा टैंकर भी शामिल

इन रोके गए टैंकरों में चीन की शंघाई शुआनरुन शिपिंग कंपनी का टैंकर 'रिच स्टार्री' भी शामिल था, जिस पर पहले से अमेरिकी प्रतिबंध लगे हुए हैं। अमेरिका ने इस नाकेबंदी को लागू करने के लिए 15 से ज्यादा युद्धपोत और हजारों सैनिक तैनात किए हैं।

इनमें मरीन और स्पेशल ऑपरेशन फोर्स के जवान भी शामिल हैं। यह पूरी कार्रवाई ईरान के बंदरगाहों पर दबाव बनाने और उसके समुद्री व्यापार को रोकने के मकसद से की जा रही है।

सीजफायर फेल होने के बाद बढ़ी सख्ती

ईरान के साथ सीजफायर की बातचीत इस सप्ताहांत विफल होने के बाद अमेरिका ने यह कदम उठाया। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने आदेश दिया कि होर्मुज में ईरान के सभी बंदरगाहों को ब्लॉक किया जाए।

अब अमेरिकी सेना हर उस ईरानी जहाज पर नजर रखने की तैयारी में है, जो इस जलमार्ग से गुजरने की कोशिश करेगा। जरूरत पड़ने पर जहाजों पर चढ़कर जांच भी की जा सकती है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि नाकेबंदी पूरी तरह लागू कर दी गई है और मध्य पूर्व में समुद्र पर अमेरिका की पकड़ मजबूत बनी हुई है।

समुद्री व्यापार पर बड़ा असर

अमेरिका के मुताबिक, ईरान की करीब 90% अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर निर्भर है। नाकेबंदी लागू होने के 36 घंटे के भीतर ही ईरान का समुद्री व्यापार लगभग ठप हो गया है। इस बीच अमेरिकी सेना होर्मुज में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने की भी कोशिश कर रही है।

इसके लिए दो युद्धपोत लगातार अभियान चला रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान खुद भी इन सुरंगों को ढूंढ पाने और हटाने में सक्षम नहीं है, जिससे इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही और प्रभावित हो रही है।

तेल सप्लाई पर असर

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की तेल सप्लाई का एक बड़ा रास्ता है, जहां से करीब 20% तेल गुजरता है। इस रास्ते के लगभग बंद होने से ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं।

इस स्थिति ने कई दशकों का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है और इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। ईरान युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका की एक बड़ी शर्त यही है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोल दिया जाए।


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सीजफायर के बीच अमेरिका को झटका! होर्मुज के ऊपर से 1800 करोड़ का ड्रोन लापता

अमेरिका-ईरान के बीच हुए सीजफायर के ठीक दो दिन बाद अमेरिका का निगरानी ड्रोन, MQ-4C ट्राइटन, होर्मुज स्ट्रेट से लापता हो गया है। यह अमेरिकी नौसेना का सबसे महंगा और अत्याधुनिक निगरानी ड्रोन है। जो तीन घंटे की निगरानी पूरी करने के बाद अपनी बेस पर लौटते वक्त रडार से ओझल हो गया।

अमेरिकी नौसेना का एक निगरानी ड्रोन, एमक्यू-4सी ट्राइटन की कीमत 200 मिलियन डॉलर (लगभग 1,800 करोड़ रुपये) है। यह ड्रोन अपनी उच्च-ऊंचाई और लंबी दूरी की क्षमताओं के लिए जाना जाता है। फिलहाल अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ड्रोन तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हुआ है या इसे मार गिराया गया है।

अपने बेस पर लौटते वक्त हुआ लापता

ऑनलाइन फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट, ड्रोन ने फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट की लगभग तीन घंटे की निगरानी पूरी की। इसके बाद ऐसा लग रहा था कि वह इटली के सिगोनेला नौसैनिक हवाई अड्डे पर अपने बेस पर लौट रहा था। ड्रोन ने ईरान की ओर थोड़ा सा मोड़ लिया और कोड 7700 (सामान्य आपातकाल के लिए) भेजकर नीचे उतरना शुरू कर दिया। यह ड्रोन लगभग 50,000 फीट की अपनी उड़ान ऊंचाई से तेजी से 10,000 फीट से नीचे उतर गया। इसके बाद ड्रोन ट्रैकिंग से गायब हो गया।

उड़ान के दौरान भेजा था इमरजेंसी अलर्ट

इस दौरान इसे ट्रैक किया गया और वह तेजी से ऊंचाई खोता हुआ दिखाई दिया, जिसके बाद वह गायब हो गया। दी वॉर जोन की रिपोर्ट के मुताबिक, उड़ान के दौरान इसने इमरजेंसी अलर्ट भी भेजा था।

सीजफायर के दो दिन बाद की घटना

बताते चलें कि ड्रोन के लापता होने की घटना अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम पर सहमति बनने के दो दिन बाद हुई है, जिसमें ईरान ने होर्मुज को जहाजरानी यातायात के लिए फिर से खोलने पर सहमति जताई थी।

MQ-4C ट्राइटन के बारे में...

अमेरिका के एमक्यू-4सी ट्राइटन को खाड़ी क्षेत्र के ऊपर अमेरिकी केंद्रीय कमान के क्षेत्र में तैनात किया गया है। यह परंपरागत विमानों के विपरीत, ट्राइटन महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर लंबे समय तक रणनीतिक निगरानी प्रदान करता है। इसे निरंतर और व्यापक समुद्री निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है, और यह अक्सर पी-8ए पोसाइडन गश्ती विमानों के लिए उच्च-ऊंचाई पर निगरानी रखने वाले विमान के रूप में कार्य करता है।

ट्राइटन एकमात्र स्वायत्त उच्च-ऊंचाई, लंबी अवधि तक उड़ान भरने वाला ड्रोन है, जो 50,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर 24 घंटे से अधिक समय तक 7,400 समुद्री मील की रेंज के साथ उड़ान भरने में सक्षम है।


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‘होर्मुज नहीं खुला तो फिर शुरू होगी गोलीबारी’: सीजफायर के बीच ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को एक नई धमकी दी है। ट्रंप का कहना है कि अगर ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलता है और परमाणु हथियार न रखने का वादा नहीं करता है तो गोलीबारी शुरू हो जाएगी।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर उन्होंने लिखा, "अमेरिका के सभी जहाज, विमान और सैन्य कर्मी साथ ही अतिरिक्त गोला-बारूद, हथियार और ऐसी कोई भी चीज जो पहले से ही काफी कमजोर हो चुके दुश्मन को पूरी तरह से खत्म करने और नष्ट करने के लिए सही और जरूरी हो ईरान के अंदर और उसके आस-पास तब तक तैनात रहेंगे, जब तक कि हुई 'असली सहमति' का पूरी तरह से पालन नहीं हो जाता।"

'कोई भी परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं किया जाएगा'

ट्रंप ने आगे लिखा, "अगर किसी भी वजह से ऐसा नहीं होता है, जिसकी संभावना बहुत ही कम है तो "गोलीबारी शुरू हो जाएगी" जो पहले कभी किसी ने नहीं देखी होगी, उससे भी ज्यादा बड़ी, बेहतर और जबरदस्त। बहुत पहले ही इस बात पर सहमति बन गई थी और इसके विपरीत तमाम झूठी बयानबाजियों के बावजूद कि कोई भी परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं किया जाएगा और होर्मुज स्ट्रेट खुला और सुरक्षित रहेगा।"

'सेना कर रही बेसब्री से इंतजार'

अमेरिकी राष्ट्रपति ने धमकी देते हुए लिखा, "इस बीच, हमारी महान सेना अपनी पूरी तैयारी कर रही है और आराम कर रही है। असल में, वह अपनी अगली जीत का बेसब्री से इंतजार कर रही है। अमेरिका वापस आ गया है!"


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सीजफायर के बाद ट्रंप का टैरिफ अटैक! ईरान को हथियार देने वाले देशों पर 50% ज्यादा शुल्क लगाने का ऐलान

अमेरिका-ईरान सीजफायर के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सख्त रुख अपनाते हुए ईरान का साथ देने वाले देशों को चेतावनी दी है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि जो भी देश ईरान को सैन्य हथियार सप्लाई करेगा, उसके द्वारा अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले सभी सामानों पर तुरंत 50% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होगा और इसमें किसी तरह की कोई छूट नहीं दी जाएगी।

इस कड़े ऐलान से ठीक पहले ट्रंप ने एक और बयान में अमेरिका और ईरान के बीच सहयोग की बात कही। उन्होंने दावा किया कि ईरान अब यूरेनियम संवर्धन की गतिविधियां बंद कर देगा और दोनों देश मिलकर परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर काम करेंगे। ट्रंप ने यह भी कहा कि जमीन के भीतर मौजूद परमाणु सामग्री को बाहर निकालने की प्रक्रिया भी सख्त निगरानी में की जाएगी।

ट्रंप के मुताबिक, यह पूरा ऑपरेशन अमेरिकी सैटेलाइट सिस्टम की निगरानी में चल रहा है और अब तक किसी भी सामग्री के साथ छेड़छाड़ नहीं हुई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका, ईरान को टैरिफ और प्रतिबंधों में राहत देने के मुद्दे पर बातचीत कर रहा है और 15 में से कई अहम बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है।


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अमेरिका-ईरान के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम कराने का दावा

अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के युद्धविराम में पाकिस्तान की अहम भूमिका सामने आई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने बयान में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर को ‘प्रिय भाई’ बताते हुए उनके प्रयासों की सराहना की। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस भूमिका को अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार किया। पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच संवाद का रास्ता तैयार करने में अहम भूमिका निभाई और युद्धविराम तक पहुंचने में मदद की। शहबाज शरीफ ने घोषणा की कि दोनों देश तत्काल प्रभाव से सीजफायर पर सहमत हो गए हैं और आगे की बातचीत के लिए उन्हें इस्लामाबाद आने का न्योता भी दिया गया है।

सीजफायर से पहले पाकिस्तान बैकचैनल कूटनीति में लगातार सक्रिय रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, असीम मुनीर ने पूरी रात अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री के साथ संपर्क बनाए रखा। पाकिस्तान ने अमेरिका का 15 सूत्रीय प्रस्ताव ईरान तक पहुंचाया और फिर ईरान की प्रतिक्रिया अमेरिका तक भेजी, इस तरह वह दोनों देशों के बीच एक पुल की तरह काम करता रहा। 29 मार्च को पाकिस्तान ने तुर्की, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों की बैठक भी कराई, जिसमें मध्य पूर्व के संकट पर चर्चा हुई।

पाकिस्तान को मध्यस्थ के रूप में दोनों देशों का भरोसा मिलना भी एक अहम कारण रहा। ईरान को अपने कई अरब पड़ोसियों पर पूरी तरह भरोसा नहीं है, जबकि पाकिस्तान के साथ उसके रिश्ते स्थिर हैं और दोनों की सीमाएं भी जुड़ी हुई हैं। पाकिस्तान के इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं होने से भी ईरान का भरोसा मजबूत हुआ। वहीं, अमेरिका के साथ हाल के वर्षों में बेहतर होते संबंध और असीम मुनीर के दोनों पक्षों से संपर्क ने पाकिस्तान को इस भूमिका में बढ़त दिलाई।

इस पहल के पीछे पाकिस्तान के अपने रणनीतिक और आर्थिक हित भी जुड़े थे। उसकी ऊर्जा जरूरतें बड़े पैमाने पर मध्य पूर्व पर निर्भर हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के चलते ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से उसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा था। इसके अलावा खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों पाकिस्तानी नागरिकों की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है। पहले से आर्थिक संकट और अफगानिस्तान के साथ तनाव झेल रहे पाकिस्तान के लिए क्षेत्र में और अस्थिरता नुकसानदेह हो सकती थी।

हालांकि यह युद्धविराम अभी भी नाजुक स्थिति में है। यदि समझौता टूटता है, तो पाकिस्तान की कूटनीतिक साख को झटका लग सकता है। साथ ही, उसके पास इतना सामरिक प्रभाव नहीं है कि वह इस सीजफायर को पूरी तरह लागू करवा सके। ऐसे में आने वाले समय में इस समझौते की स्थिरता ही पाकिस्तान की इस कूटनीतिक सफलता की असली परीक्षा होगी।


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ईरान युद्ध का असर: पाकिस्तान में बिगड़े हालात, आज रात से लॉकडाउन का ऐलान; शहबाज शरीफ का बड़ा फैसला

पाकिस्तान में सरकार ने सोमवार को फैसला किया कि देश भर के बाजार और शॉपिंग मॉल सिंध को छोड़कर ऊर्जा बचाने के उपायों के तहत रात 8 बजे तक बंद हो जाएंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में बताया गया कि यह फैसला इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई एक बैठक के दौरान लिया गया।

सिंध को छोड़कर सभी जगहों पर पाबंदी लागू

इससे पहले बयान में कहा गया था कि KP के डिविजनल मुख्यालयों में बाजारों को रात 9 बजे तक खुला रहने की अनुमति होगी, और सिंध के बाजारों के लिए खुलने-बंद होने के समय को लेकर अभी बातचीत चल रही है। इस बीच, बयान में कहा गया कि बैठक में यह फैसला लिया गया कि KP के बाकी हिस्सों, पंजाब, बलूचिस्तान, इस्लामाबाद, गिलगित-बाल्टिस्तान और अन्य जगहों पर बाजार और शॉपिंग मॉल रात 8 बजे तक बंद हो जाएंगे।

इसके साथ ही यह भी फैसला लिया गया है कि बेकरी, रेस्टोरेंट, तंदूर और खाने-पीने की चीजें बेचने वाली दुकानें रात 10 बजे तक बंद हो जाएंगी। वहीं, मैरिज हॉल, मार्की और शादी समारोहों के आयोजन के लिए इस्तेमाल होने वाली अन्य कमर्शियल जगहें भी इसी समय तक बंद करने होंगे।

शादी के लिए रात 10 बजे तक छूट

बयान में आगे कहा गया कि निजी जगहों और घरों में भी रात 10 बजे के बाद शादी समारोह आयोजित करने पर पाबंदी होगी। हालांकि, इसमें कहा गया कि मेडिकल स्टोर और दवा की दुकानों को समय की पाबंदियों से छूट दी जा रही है, और ये नए समय 7 अप्रैल (मंगलवार) से लागू होंगे। ये फैसले बलूचिस्तान और KP सरकारों द्वारा अपने-अपने प्रांतों के लिए व्यावसायिक समय की घोषणा करने के एक दिन बाद आए हैं, जो सोमवार की बैठक में लिए गए फैसलों के अनुरूप हैं।

PMO ने X पर पोस्ट कर दी जानकारी

PMO के बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में ईंधन और ऊर्जा-बचत के उपायों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के दौरान खर्च में कटौती के उपायों की भी समीक्षा की गई। यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के साथ शुरू हुआ था। जिसके दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य एक रणनीतिक समुद्री गलियारा जिससे युद्ध से पहले दुनिया का लगभग 25 प्रतिशत तेल गुजरता था। उसमें रुकावट के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं और आपूर्ति में बाधाएं आई हैं।

मुजफ्फराबाद में एक महीने तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट फ्री

उन्होंने यह भी कहा कि गिलगित और मुजफ्फराबाद में एक महीने तक शहरों के बीच चलने वाली पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवाएं मुफ्त दी जाएंगी। इस दौरान इसका सारा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। PMO के बयान के अनुसार, इस बैठक में उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार, आर्थिक मामलों के मंत्री अहद चीमा और संबंधित वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

सिंध के मुख्यमंत्री ने भी जारी किया बयान

सिंध के मुख्यमंत्री ने कारोबारी समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस बीच, सिंध के मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया कि प्रांत के मुख्य कार्यकारी, मुराद अली शाह ने सोमवार को कारोबारी समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की। इस बैठक में कराची चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, कोरंगी एसोसिएशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री और अन्य व्यवसायों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

बयान में मुराद के हवाले से कहा गया कि "देश के हालात को देखते हुए हम सभी को अपनी-अपनी भूमिका निभानी होगी" और सिंध सरकार ऊर्जा बचाने के लिए कदम उठाना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठा रही है कि गरीबों पर कम से कम बोझ पड़े। उन्होंने कहा कि व्यापारियों के संगठनों ने बाजार खुलने के समय के बारे में अपने सुझाव दिए हैं, और उन सुझावों की समीक्षा करने के बाद प्रधानमंत्री को इसकी जानकारी दी जाएगी।


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