रूस से तेल आयात पर कायम रहेगा भारत का भरोसा

अमेरिका की ओर से दी गई प्रतिबंधों में छूट खत्म होने के बावजूद भारत रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी Sujata Sharma ने साफ कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों का भारत की तेल आयात योजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा और देश अपनी जरूरतों के अनुसार रूसी क्रूड खरीदता रहेगा।

इसी बीच वैश्विक सप्लाई संकट को देखते हुए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने समुद्र में फंसे रूसी तेल के जहाजों से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों का अस्थायी लाइसेंस जारी किया है। अमेरिकी ट्रेजरी मंत्री Scott Bessent ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इससे वैश्विक कच्चे तेल बाजार को स्थिरता मिलेगी और ऊर्जा के लिहाज से संवेदनशील देशों तक सप्लाई बनाए रखने में मदद होगी।

भारत सरकार का कहना है कि उसका रुख शुरू से स्पष्ट रहा है। भारत अमेरिकी छूट मिलने से पहले भी रूस से तेल खरीदता था, छूट के दौरान भी खरीद जारी रही और आगे भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी। सरकार के मुताबिक देश की जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त कच्चे तेल का इंतजाम कर लिया गया है और सप्लाई को लेकर किसी तरह की चिंता नहीं है।

आंकड़ों के अनुसार मई महीने में भारत ने रूस से रिकॉर्ड 23 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया है। डेटा एजेंसी केपलर के मुताबिक यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। विश्लेषकों का अनुमान है कि पूरे मई महीने का औसत आयात करीब 19 लाख बैरल प्रतिदिन रह सकता है।

अमेरिका ने मार्च में भारत समेत कुछ देशों को रूस से तेल खरीदने के लिए विशेष छूट दी थी, ताकि वैश्विक बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नियंत्रण में रहें और सप्लाई बाधित न हो। यह छूट 16 मई तक बढ़ाई गई थी। हालांकि रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका लगातार भारत पर रूसी तेल खरीद कम करने का दबाव बनाता रहा है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी प्रशासन से साफ कहा था कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और तेल सप्लाई बनाए रखना सरकार की पहली प्राथमिकता है। अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि यदि सप्लाई में रुकावट आती है तो इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा और LPG जैसी जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

पिछले साल नवंबर में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ट्रम्प प्रशासन ने रूसी तेल कंपनियों Lukoil और Rosneft पर सख्त प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद जनवरी में भारत का रूसी तेल आयात घटकर 11 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया था, जो नवंबर 2022 के बाद सबसे कम स्तर था। हालांकि फरवरी में रूसी तेल की हिस्सेदारी फिर बढ़कर करीब 30% तक पहुंच गई।

भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदता रहा है और सरकार फिलहाल इस नीति में कोई बदलाव करने के संकेत नहीं दे रही है।


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भारत-UAE के बीच LPG सप्लाई को लेकर बड़ा समझौता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी UAE दौरे पर पहुंचे हैं। अबूधाबी पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का गार्ड ऑफ ऑनर से स्वागत किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक UAE एयरफोर्स के F-16 फाइटर जेट्स ने प्रधानमंत्री के विमान को एस्कॉर्ट किया।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों देशों के बीच LPG सप्लाई को लेकर अहम समझौता हुआ। इसके अलावा स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व, रक्षा सहयोग और वडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर से जुड़े MoU भी साइन किए गए।

UAE ने भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर, RBL बैंक और सम्मान कैपिटल में 5 अरब डॉलर निवेश का ऐलान भी किया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों नेताओं ने ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश और वेस्ट एशिया के हालात पर चर्चा की।


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हंतावायरस के संपर्क में आए 17 यात्री अमेरिका लाए गए

हंता वायरस के संपर्क में आए 17 अमेरिकी यात्रियों को अमेरिका लाया गया

Hantavirus के संपर्क में आए 17 अमेरिकी यात्रियों को विशेष विमान से अमेरिका के Nebraska Medical Center लाया गया है। इन सभी यात्रियों को 42 दिनों तक निगरानी और क्वारंटीन में रखा जाएगा।

अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग (HHS) के अनुसार, इन यात्रियों को सरकारी स्पेशल विमान के जरिए वापस लाया गया है। ये सभी यात्री ‘MV होंडियस’ क्रूज शिप से लौटे हैं, जो स्पेन के कैनरी आइलैंड्स के पास रुका हुआ था। इसी दौरान कुछ मामलों में वायरस के संपर्क की आशंका सामने आई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, एक यात्री में Hantavirus संक्रमण की पुष्टि हुई है, जबकि दूसरे में हल्के लक्षण पाए गए हैं। दोनों को एहतियातन आइसोलेशन में रखा गया है। बाकी यात्रियों की भी लगातार मेडिकल जांच की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि लक्षण सामने आने में कई हफ्ते लग सकते हैं, इसलिए सभी यात्रियों की लंबी अवधि तक निगरानी जरूरी है। अगर किसी में संक्रमण की पुष्टि होती है तो उसका तुरंत इलाज किया जाएगा, जबकि स्वस्थ पाए जाने वालों को घर भेजा जा सकता है, लेकिन उनकी फॉलो-अप मॉनिटरिंग जारी रहेगी।

Hantavirus एक गंभीर संक्रमण है जो मुख्य रूप से चूहों और गिलहरियों जैसे जानवरों से फैलता है। यह उनके मल, पेशाब और लार के संपर्क में आने से इंसानों में फैल सकता है। गंभीर मामलों में यह फेफड़ों और किडनी को प्रभावित कर जानलेवा साबित हो सकता है।

अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, यह वायरस कोविड-19 की तरह तेजी से नहीं फैलता, लेकिन इसके लक्षण गंभीर हो सकते हैं और समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति बिगड़ सकती है। फिलहाल इसका कोई विशेष इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए मरीज का लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है।

अधिकारियों ने बताया कि नेब्रास्का मेडिकल सेंटर में विशेष क्वारंटीन यूनिट है, जहां इन यात्रियों को सुरक्षित माहौल में रखा गया है। यहां हर व्यक्ति की नियमित जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर उन्हें अलग आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा।


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हंतावायरस से संक्रमित जहाज पर सवार थे 2 भारतीय यात्री

अटलांटिक महासागर में सफर कर रहे डच फ्लैग वाले क्रूज शिप MV Hondius पर हंतावायरस संक्रमण के मामले सामने आने के बाद चिंता बढ़ गई है। जहाज पर मौजूद यात्रियों में दो भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक जहाज पर हंतावायरस संक्रमण के पांच मामलों की पुष्टि हुई है, जबकि तीन लोगों की मौत हो चुकी है।

यह जहाज फिलहाल स्पेन के कैनरी आइलैंड की ओर बढ़ रहा है और 10 मई तक वहां पहुंचने की संभावना है। वहां पहुंचने के बाद सभी यात्रियों और क्रू सदस्यों की मेडिकल जांच की जाएगी। World Health Organization ने कहा है कि मामला गंभीर जरूर है, लेकिन फिलहाल आम लोगों के लिए खतरा कम माना जा रहा है।

नीदरलैंड के लीडेन यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में भर्ती मरीजों का इलाज कर रहीं डॉक्टर Karin Ellen Veldkamp ने बताया कि हंतावायरस कोरोना की तरह तेजी से फैलने वाला वायरस नहीं है। उन्होंने कहा कि इंसान से इंसान में इसका संक्रमण फैलना बेहद मुश्किल होता है और इसकी तुलना कोविड-19 से नहीं की जा सकती।

डॉक्टरों के मुताबिक संक्रमित मरीजों को विशेष आइसोलेशन रूम में रखा जा रहा है, जहां प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ उनकी निगरानी कर रहा है। मरीजों को तब तक अलग रखा जाएगा, जब तक उनमें लक्षण बने रहते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हंतावायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड लंबा हो सकता है, इसलिए संक्रमित लोगों को करीब 40 दिनों तक क्वारंटाइन में रखने की सलाह दी गई है।

Tedros Adhanom Ghebreyesus ने कहा कि हंतावायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड छह हफ्ते तक हो सकता है। इसी वजह से आने वाले दिनों में और मामले सामने आने की आशंका जताई जा रही है।

WHO के अनुसार मौत के मामलों में हंतावायरस के एंडीज स्ट्रेन का शक है। यह स्ट्रेन मुख्य रूप से अर्जेंटीना और चिली में पाया जाता है और बाकी हंतावायरस से अलग माना जाता है, क्योंकि कुछ परिस्थितियों में यह इंसान से इंसान में भी फैल सकता है। हालांकि इसका संक्रमण कोरोना वायरस जितनी तेजी से नहीं फैलता।

जांच में सामने आया है कि शुरुआती संक्रमित दंपती जहाज पर सवार होने से पहले चिली, अर्जेंटीना और उरुग्वे में बर्ड वॉचिंग ट्रिप पर गए थे। विशेषज्ञों के मुताबिक इन क्षेत्रों में ऐसे चूहे पाए जाते हैं, जो इस वायरस को फैलाने के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। अर्जेंटीना की एजेंसियां अब उनकी यात्रा और संपर्कों की जांच कर रही हैं।

करीब सात हफ्तों से यात्रा कर रहा यह क्रूज शिप 20 मार्च को अर्जेंटीना के उशुआइया से रवाना हुआ था। जहाज दक्षिणी ध्रुव के आसपास के इलाकों से गुजरते हुए अटलांटिक पार कर यूरोप की ओर बढ़ रहा है। इसमें कुल 170 यात्री और 71 क्रू सदस्य मौजूद हैं।

पहले मृतक की मौत जहाज पर ही हुई थी, जिसके बाद शव को सेंट हेलेना द्वीप पर उतारा गया। बाद में उसकी पत्नी दक्षिण अफ्रीका पहुंचीं, लेकिन एयरपोर्ट पर उनकी तबीयत बिगड़ गई और अस्पताल में उनकी भी मौत हो गई। क्रूज ऑपरेट करने वाली Oceanwide Expeditions ने बताया कि तीसरे मृतक का शव अभी भी जहाज पर मौजूद है।

WHO ने एहतियात के तौर पर सेंट हेलेना में उतरे यात्रियों को लेकर 12 देशों को अलर्ट जारी किया है। इनमें ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और सिंगापुर जैसे देश शामिल हैं।


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सीजफायर टूटते ही अमेरिका ने ईरान पर फिर की बमबारी

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान ने आरोप लगाया है कि सीजफायर के बावजूद अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाकर बमबारी की। इसके बाद तेहरान ने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

ईरानी सरकारी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक, खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी सेना ने जास्क के पास ईरानी समुद्री क्षेत्र से होर्मुज स्ट्रेट की ओर जा रहे एक तेल टैंकर को निशाना बनाया। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि ईरान ने अमेरिकी जंगी जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई में ईरानी छोटी नावों को तबाह कर दिया और साफ कर दिया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं देगा।

वहीं संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी IMO के महासचिव Arsenio Dominguez ने बताया कि होर्मुज संकट के कारण खाड़ी क्षेत्र में करीब 1500 जहाज फंस गए हैं। इन जहाजों पर लगभग 20 हजार नाविक मौजूद हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन और तेल कारोबार पर असर बढ़ता जा रहा है।

पिछले 24 घंटों में इस संकट से जुड़े कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और ईरान 30 दिन के अस्थायी समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, जिसके तहत लड़ाई रोकने और होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर चर्चा चल रही है। इसी दौरान स्थायी समझौते के लिए वार्ता जारी रहेगी।

दूसरी ओर इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष भी तेज हो गया है। इजराइल ने दावा किया है कि उसने बेरूत में हमले के दौरान हिजबुल्लाह की रदवान यूनिट के कमांडर अहमद बलूत समेत कई बड़े कमांडरों को मार गिराया। जवाब में हिजबुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में इजराइली टैंक और सैन्य ठिकानों पर हमले करने का दावा किया है।

इसके अलावा अमेरिका ने ईरान से जुड़े कई नेटवर्क और व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं। इनमें इराक के डिप्टी ऑयल मिनिस्टर अली मारीज अल-बहादली और कई कंपनियां शामिल हैं। अमेरिका का आरोप है कि ये लोग तेल कारोबार के जरिए ईरान और उसके समर्थित संगठनों की मदद कर रहे थे।


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ईरान युद्ध का असर: ‘बंद करना पड़ सकता है संचालन’, एयरलाइंस की बिगड़ी हालत

पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर भले ही आम आदमी की जेब पर ज्यादा न पड़ा हो, लेकिन एयरलाइंस की हालत खराब होनी शुरू हो गई है। भारत के एविएशन सेक्टर में खतरे की घंटी बजनी शुरू हो गई है और इसका पहला संकेत एयरलाइंस द्वारा केंद्र को लिखे लेटर से मिला है।

कई एयरलाइंस ने सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि ईंधन की ऊंची कीमतों के कारण वे ऑपरेशन रोकने की कगार पर हैं। इन एयरलाइंस में एअर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट शामिल हैं।

एयरलाइंस ने लिखा लेटर

एयरलाइंस ने सरकार से एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ की कीमतों में बदलाव करने की मांग की है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस यानी एफआईए ने सिविल एविएशन मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा है कि ATF की कीमत में अतार्किक वृद्धि या एड-हॉक प्राइसिंग से एयरलाइंस को भारी नुकसान होगा और विमानों को खड़ा करना पड़ेगा, जिससे फ्लाइट रद होंगी।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस एअर इंडिया, इंडिगो और स्पाइस जेट का प्रतिनिधित्व करता है। बता दें कि ATF किसी भी एयरलाइन की ऑपरेशनल लागत में करीब 40 प्रतिशत का योगदान देता है। एयरलाइंस ने सरकार से कहा कि बचने, टिके रहने और ऑपरेशन जारी रखने के लिए हम मौजूदा हालात से निपटने के लिए तत्काल और सार्थक वित्तीय सहायता हेतु आपके तुरंत हस्तक्षेप का अनुरोध करते हैं।

एफआईए ने कहा है कि लंबी दूरी वाली फ्लाइट सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। उन्होंने मंत्रालय ने ATF पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को कुछ समय के लिए टाल और एक ऐसी फ्यूल प्राइसिंग मेथड इस्तेमाल करने को कहा जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय के लिए एक जैसी हो। दरअसल सरकार ने ATF की कीमत में बढ़ोतरी को घरेलू उड़ान के लिए 15 रुपये प्रति लीटर और अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन्स के लिए यह 73 रुपये प्रति लीटर तय किया है।


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ईरान युद्ध के बीच पहली बार LNG टैंकर ने होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया, भारत के पास आया नजर

UAE की ADNOC द्वारा प्रतिबंधित LNG टैंकर ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया है, और अब यह भारत के पास दिखाई दे रहा है। सोमवार को शिप-ट्रैकिंग डेटा से यह जानकारी मिली।

अगर इसकी पुष्टि हो जाती है तो, 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से यह पहला LNG टैंकर जिसने इस जलडमरूमध्य को पार किया है।

136,357-क्यूबिक-मीटर क्षमता वाला यह टैंकर, जिसका प्रबंधन Adnoc Logistics & Services करती है और जिसे आखिरी बार 30 मार्च को खाड़ी में देखा गया था, अब भारत के पश्चिमी तट के पास दिखाई दिया है।

LNG टैंकर ने होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर लिया- मरीन ट्रैफिक

ICIS LNG Edge, मरीन ट्रैफिक और LSEG के डेटा के अनुसार, इससे यह संकेत मिलता है कि कई हफ्तों तक बिना किसी सिग्नल के रहने के बाद इसने होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया है। हालांकि, Adnoc ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

पकड़े जाने से बचने के लिए अपना रहे बचाव की तरकीबें

शिप-ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि खाड़ी के आसपास के जहाज, निशाना बनने या हिरासत में लिए जाने से बचने के लिए बचाव की तरकीबें अपना रहे हैं; जैसे कि अपनी लोकेशन का प्रसारण बंद कर देना या गलत पहचान संख्याएं भेजते हैं।

डेटा इंटेलिजेंस फर्म ICIS के सीनियर LNG एनालिस्ट एलेक्स फ्रॉली ने कहा, "कभी-कभी खराब सिग्नल डेटा के मामले सामने आते हैं, या जहाज अपनी लोकेशन की गलत जानकारी देते हैं, या किसी दूसरे जहाज की पहचान (MMSI) नंबर का इस्तेमाल करते हैं; लेकिन अभी जो लोकेशन दिख रही है, उसमें ऐसी कोई भी बात तुरंत साफ तौर पर नजर नहीं आ रही है।"

गैस बाजार के लिए एक उम्मीद की किरण- फ्रॉली

फ्रॉली ने आगे कहा, "अगर टैंकर ने रास्ता पार कर लिया है, तो यह गैस बाजार के लिए एक उम्मीद की किरण होगी, लेकिन अभी यह बहुत शुरुआती संकेत है। सिर्फ एक टैंकर के पार करने से यह जरूरी नहीं कि और भी टैंकर उसके पीछे-पीछे आएं, क्योंकि हालात तेजी से बदल रहे हैं।"

अप्रैल में कतर के कुछ टैंकरों ने दो बार इस जलडमरूमध्य को पार करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। इस महीने की शुरुआत में ओमान का एक खाली LNG टैंकर इस जलडमरूमध्य को पार करने में कामयाब रहा।


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डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बाद ईरान की खाड़ी देशों को चेतावनी— ‘तुम एक जगह हमला करोगे तो हम चार जगह करेंगे’

अमेरिका और ईरान के बीच शांति-वार्ता को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। दोनों देशों के बीच कोई हल निकलता नजर नहीं आ रहा है।

ऐसे में अमेरिका ने ईरान की तेल पाइपलाइनों पर अटैक करने की धमकी दी थी। वहीं अब ईरान की तरफ से भी इस पर चार गुना वार करने की चेतावनी दी गई है।

ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका उसके एक पावर प्लांट को निशाना बनाएगा तो ईरान उन खाड़ी देशों के पावर प्लांट पर हमला करेगा, जो अमेरिका को इस युद्ध में सपोर्ट कर रहे हैं। ईरान ने यहां तक कहा है कि एक पावर प्लांट के बदले चार प्लांट पर हमले होंगे।

ईरान की खाड़ी देशों को चेतावनी

ईरान ने पड़ोसी खाड़ी देशों को अमेरिका का साथ देने के खिलाफ चेतावनी दी है। ईरान के उपराष्ट्रपति, इस्माइल सघाब इस्फहानी ने कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रही नाकेबंदी के बीच, तेल के कुओं सहित ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाता है, तो तेहरान की प्रतिक्रिया चार गुना होगी।

इस्फहानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'हम युद्ध के किसी भी कृत्य का जवाब देंगे। अगर नाकाबंदी के परिणामस्वरूप हमारे किसी भी बुनियादी ढांचे, जिसमें तेल के कुएं भी शामिल हैं, उन्हें नुकसान पहुंचता है तो हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमलावर का समर्थन करने वाले देशों को उससे चार गुना ज्यादा नुकसान हो।'

ईरान के उपराष्ट्रपति ने अपनी बात में बताया कि ईरान इस युद्ध में अमेरिका के समर्थकों को किस हद तक नुकसान पहुंचा सकता है। इस्फहानी ने आगे कहा, 'हमारा हिसाब-किताब करने का तरीका अलग है। एक तेल का कुआं, चार तेल के कुओं के बराबर होता है।'

ट्रंप ने पर हमले की दी थी धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में लिखा, 'ईरान आर्थिक रूप से ढह रहा है! वे चाहते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोल दिया जाए वे नकदी के लिए तरस रहे हैं!'

ट्रंप ने आगे लिखा, 'ईरान को रोजाना 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है। सेना और पुलिस शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें वेतन नहीं मिल रहा है।'

फॉक्स न्यूज से बात करते हुए भी ट्रंप ने कहा, 'अगर इस तरह की पाबंदियां जारी रहीं तो ईरान की तेल पाइपलाइनें कुछ ही दिनों में एक गंभीर स्थिति तक पहुंच सकती हैं।'


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बंद है होर्मुज, तेल-गैस की सप्लाई पर बड़ा असर

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच हुए युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। यह दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग माना जाता है। इस स्थिति ने मिडिल ईस्ट के देशों के सामने तेल-गैस निर्यात के सीमित विकल्पों को उजागर कर दिया है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इसे अब तक का सबसे बड़ा सप्लाई संकट बताया है, जो 1970 के दशक के तेल संकट और यूक्रेन युद्ध के बाद रूस की गैस सप्लाई रुकने से भी बड़ा है। ऐसे में कई देश होर्मुज को बायपास करने के लिए पुराने और नए रास्तों पर निर्भर हो रहे हैं।

मौजूदा पाइपलाइन विकल्प

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन करीब 1200 किलोमीटर लंबी है, जो रोजाना लगभग 70 लाख बैरल तेल ले जा सकती है। हालांकि, फिलहाल इससे करीब 45 लाख बैरल तेल का निर्यात हो पा रहा है। यह तेल यनबू बंदरगाह तक जाता है, जहां से यूरोप और एशिया भेजा जाता है।

संयुक्त अरब अमीरात की हबशान-फुजैराह पाइपलाइन 360 किलोमीटर लंबी है और इसकी क्षमता 15 से 18 लाख बैरल प्रतिदिन है। यह होर्मुज के बाहर स्थित फुजैराह बंदरगाह तक तेल पहुंचाती है, लेकिन हाल में ड्रोन हमलों से यहां भी सप्लाई प्रभावित हुई है।

इराक-तुर्की की किर्कुक-जेहान पाइपलाइन भी एक अहम मार्ग है, जो कुर्दिस्तान होते हुए तुर्की के जेहान बंदरगाह तक जाती है। इसे ढाई साल बाद फिर से शुरू किया गया और फिलहाल करीब 1.7 लाख बैरल प्रतिदिन तेल भेजा जा रहा है, जिसे बढ़ाकर 2.5 लाख बैरल तक करने की योजना है।

ईरान और संभावित रास्ते

ईरान की गोरेह-जास्क पाइपलाइन भी एक विकल्प है, जिसकी क्षमता करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन है। जास्क टर्मिनल पूरी तरह तैयार नहीं है, लेकिन 2024 में यहां से ट्रायल शिपमेंट किया गया था। इसके अलावा, इराक ओमान के दूक्म बंदरगाह तक पाइपलाइन बनाने पर विचार कर रहा है, हालांकि यह योजना अभी शुरुआती चरण में है और इसके रास्ते तय किए जा रहे हैं।

इराक-जॉर्डन पाइपलाइन का प्रस्ताव भी लंबे समय से है, जिसके जरिए बसरा से अकाबा बंदरगाह तक तेल भेजा जा सकता है। इसकी क्षमता 10 लाख बैरल प्रतिदिन होगी, लेकिन लागत और सुरक्षा कारणों से यह प्रोजेक्ट अभी अटका हुआ है।

बड़े लेकिन मुश्किल विकल्प

हॉर्मुज को पूरी तरह बायपास करने के लिए खाड़ी से ओमान सागर तक नहर बनाने का विचार भी सामने आया है, जो स्वेज या पनामा नहर की तरह हो सकती है। हालांकि, हजर पर्वतों को काटकर यह नहर बनाना बेहद कठिन और महंगा होगा, जिसकी लागत सैकड़ों अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।

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नेपाल में बवाल के बीच पीएम बालेन शाह को बड़ा झटका, 26 दिन में ही गृह मंत्री ने दिया इस्तीफा

नेपाल के गृह मंत्री सुधन गुरुंग ने भारी विवादों के बीच बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। महज 26 दिन के कार्यकाल के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया है।

दरअसल, सुधन गुरुंग पर विवादास्पद कारोबारी दीपक भट्टा के साथ व्यापारिक हिस्सेदारी और माइक्रो इंश्योरेंस कंपनियों में संदिग्ध निवेश के आरोप लगे थे।

गृह मंत्री बनने के बाद से भ्रष्टाचार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने वाले गुरुंग को अपने ही निजी निवेशों के चलते चौतरफा आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, व्यापक विरोध के बाद उन्होने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

गृह मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप

गृह मंत्री सुदान गुरूंग पर आय से अधिक संपत्ति और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में शामिल होने के आरोप लगे हैं। विपक्ष और प्रदर्शनकारियों का दावा है कि गुरूंग कुछ विवादित कारोबार से जुड़े लोगों के संपर्क में रहे हैं। नेपाली मीडिया में भी ऐसे दस्तावेजों का जिक्र हुआ है, जिससे उनके इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर भी लगातार प्रदर्शन किया।

क्या बोले गुरुंग?

अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए गुरुंग ने फेसबुक पोस्ट पर लिखा, "मैं, सूडान गुरुंग, चैत्र 13, 2082 (26 मार्च, 2026) से गृह मंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन कर रहा हूं। हाल ही में, मैंने अपने शेयरों और संबंधित मामलों के बारे में नागरिकों द्वारा उठाए गए प्रश्नों, टिप्पणियों और सार्वजनिक चिंताओं को बहुत गंभीरता से लिया है।"

जनता के विश्वास से बढ़कर कोई शक्ति नहीं

पद संभालने से पहले जनता का विश्वास सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा, "मेरे लिए नैतिकता किसी भी पद से अधिक महत्वपूर्ण है, और जनता के विश्वास से बढ़कर कोई शक्ति नहीं है। आज का 'जेनरेशन जेड' आंदोलन, जो सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करता है, यही संदेश देता है, सार्वजनिक जीवन स्वच्छ होना चाहिए और नेतृत्व जवाबदेह होना चाहिए।".

गुरुंग ने व्यापक राजनीतिक संदर्भ और देश के अतीत में किए गए बलिदानों का भी जिक्र करते हुए कहा कि जब सवाल उठते हैं तो जवाबदेही आवश्यक है। गुरुंग ने कहा, "जब मेरे 46 भाइयों और बहनों के खून और बलिदान पर बनी सरकार के खिलाफ सवाल उठते हैं, तो एकमात्र जवाब नैतिकता ही है।

मैनें सार्वजनिक आलोचना को गंभीरता से लिया और सार्वजनिक जीवन में नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए पद छोड़ने का विकल्प चुना।"

दीपक कुमार को किया था बर्खास्त

इससे पहले 9 अप्रैल को नेपाली प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने अपनी पार्टी की सिफारिश पर अनुशासनात्मक आरोपों के चलते श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपक कुमार साह को बर्खास्त कर दिया था। प्रधानमंत्री सचिवालय ने कहा कि साह को पार्टी द्वारा आचार संहिता और अनुशासन का उल्लंघन करने के बाद हटाया गया है।

आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, साह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी पत्नी जूनू श्रेष्ठ को स्वास्थ्य बीमा बोर्ड के सदस्य के रूप में बनाए रखा, जबकि यह पद लंबे समय से निष्क्रिय पड़ा था। आयोग ने बुधवार को पार्टी को अपनी रिपोर्ट सौंपी और कार्रवाई की सिफारिश की।


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