भारत और फिजी के बीच कई समझौतों पर हुए हस्ताक्षर

फिजी के प्रधानमंत्री सिटिवेनी लिगामामादा राबुका रविवार को भारत की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे। उनकी ये यात्रा 26 अगस्त तक चलेगी। फिजी के प्रधानमंत्री के रूप में यह उनकी पहली भारत यात्रा है।

सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी स्थित हैदराबाद हाउस में फिजी के प्रधानमंत्री सिटिवेनी लिगामामादा राबुका के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की द्विपक्षीय वार्ता की। वहीं, दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने का निर्णय लिया है।

भारत और फिजी के बीच हुए सात समझौते

बता दें कि फिजी के पीएम सिटिवेनी लिगामामादा राबुका और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संयुक्त बयान जारी किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि भारत और फिजी ने रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने का निर्णय लिया है।

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी और उनके फिजी समकक्ष राबुका के बीच वार्ता के बाद भारत और फिजी ने सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए। फिजी समकक्ष राबुका के साथ वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत वैश्विक दक्षिण के विकास में सह-यात्री है।

'सुरक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग को मजबूत करने का फैसला'

संयुक्त बयान के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत और फिजी ने रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन फिजी के लिए खतरा है; हम आपदा प्रतिक्रिया से निपटने में उसकी मदद करेंगे।

पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि भारत और फिजी भले ही समुद्र के पार हों, लेकिन हमारी आकांक्षाएँ एक ही नाव पर सवार हैं। भारत वैश्विक दक्षिण के विकास में सहयात्री है। उन्होंने कहा कि हम एक ऐसी विश्व व्यवस्था के निर्माण में भागीदार हैं जहां वैश्विक दक्षिण की स्वतंत्रता, विचारों और पहचान का सम्मान किया जाता है।

महात्मा गांधी की समाधि पर अर्पित की श्रद्धांजलि

सोमवार को फिजी के पीएम राजघाट पहुंचे, जहां पर उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक्स पर श्रद्धांजलि की तस्वीरें साझा कीं और फिजी के नेता को एक महत्वपूर्ण वैश्विक दक्षिण और एफआईपीआईसी भागीदार बताया।


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सुदर्शन रेड्डी ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए दाखिल किया नामांकन

 इंडी गठबंधन की ओर से उपराष्ट्रपति पद के लिए बी सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया गया है। हाल के दिनों में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उनके नाम का एलान किया था। बी सुदर्शन रेड्डी ने गुरुवार को अपना नामांकन दाखिल किया।

दरअसल, उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में नामांकन के लिए आज आखिरी दिन है। बता दें कि इससे पहले एनडीए की तरफ से सीपी राधाकृष्णन ने बुधवार को अपना नामांकन दाखिल किया था।

राहुल गांधी समेत कई नेता रहे मौजूद

बी सुदर्शन रेड्डी के नामांकन के दौरान उनके साथ कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई विपक्षी नेता मौजूद रहे।

नामांकन से पहले बी सुदर्शन रेड्डी ने क्या कहा?

गौरतलब है कि अपने नामांकन से पहले INDIA गठबंधन के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी ने कहा कि संख्याएं मायने नहीं रखती हैं। उन्होंने कहा कि बेशक मुझे उम्मीद है। हालांकि, मैं किसी राजनीतिक दल से नहीं हूं लेकिन मुझे विश्वास है कि सभी लोग मेरा समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि मैनें पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यह विचारधारा की लड़ाई है।

उपराष्ट्रपति चुनाव में दो ही उम्मीदवार

उल्लेखनीय है कि इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव में दो ही उम्मीदवारों के नाम सामने आए हैं। एनडीए की ओर से सीपी राधाकृष्णन हैं, तो वहीं विपक्ष की ओर से बी सुदर्शन रेड्डी हैं। दोनों के बीच 9 सितंबर को चुनावी मुकाबला होना है। बता दें कि चुनाव के परिणाम वोटिंग वाले दिन ही आ जाएंगे।




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एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन ने अपना नामांकन दाखिल किया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद

 उपराष्ट्रपति पद के लिए एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। इस मौके पर उनके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे।

राधाकृष्णन के नामांकन दाखिल के दौरान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह के अलावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, किरेन रिजिजू और एनडीए के कई बड़े नेता भी मौजूद थे।

4 सेटों में दाखिल हुआ नामांकन

नामांकन चार सेटों में दाखिल हुआ है, जिनमें से प्रत्येक पर 20 प्रस्तावकों और 20 अनुमोदकों के हस्ताक्षर हैं। पहले सेट में मुख्य प्रस्तावक के रूप में प्रधानमंत्री मोदी के हस्ताक्षर हैं, जबकि बाकी सेटों में केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ एनडीए नेताओं के हस्ताक्षर हैं, जो गठबंधन में व्यापक सहमति को दर्शाता है।

160 सदस्य रहे मौजूद

संसद भवन में नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान मंत्रियों और सांसदों सहित एनडीए के लगभग 160 सदस्य उपस्थित रहे। सीपी राधाकृष्णन को नामित करने का निर्णय केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास पर आयोजित एनडीए के नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।

एनडीए के वरिष्ठ सहयोगी और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सर्वसम्मति से समर्थन की पुष्टि करते हुए कहा कि उपस्थित सभी नेताओं ने राधाकृष्णन की उम्मीदवारी के लिए अपना पूर्ण समर्थन देने का संकल्प लिया।


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सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए बनाया उम्मीदवार

I.N.D.I.A ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है। उनका मुकाबला NDA के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन से होगा।

79 साल के रेड्‌डी गुवाहाटी हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस और गोवा के पहले लोकायुक्त रह चुके हैं। वे आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं। 2007 में सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था।

खास बात है कि दोनों उम्मीदवार दक्षिण से हैं। रिटायर जस्टिस रेड्डी आंध्रप्रदेश से, जबकि सीपी राधाकृष्णन तमिलनाडु से हैं। दोनों 21 अगस्त को नामांकन दाखिल करेंगे।

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए 9 सितंबर को वोटिंग होगी। उसी दिन काउंटिंग भी होगी। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 21 अगस्त है। 25 अगस्त तक उम्मीदवारी वापस ली जा सकती है।

उपराष्ट्रपति का चुनाव जगदीप धनखड़ के 21 जुलाई की रात अचानक इस्तीफा देने की वजह से हो रहा है। 74 साल के धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था।

खड़गे बोले- संविधान बचाने विपक्ष एकजुट

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जब कभी लोकतंत्र और संविधान खतरे में आता है। विपक्ष उसे बचाने के लिए एकजुट हो जाता है। I.N.D.I.A दलों ने एक साझा उम्मीदवार रखने का फैसला किया है, यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है। मुझे खुशी है कि सभी विपक्षी दल एक नाम पर सहमत हुए हैं। यह लोकतंत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

TMC सांसद डेरेक ओब्रायन ने कहा कि आम आदमी पार्टी भी हमारे फैसले से सहमत है और जल्द ही वह अपने समर्थन की घोषणा करेगी।

NDA के उम्मीदवार का जीतना तय

लोकसभा में कुल सांसदों की संख्या 542 है। एक सीट खाली है। एनडीए के 293 सांसद हैं। इसी तरह राज्यसभा में 245 सांसद हैं। 5 सीट खाली हैं। एनडीए के पास एक129 सांसद हैं। यह मानते हुए कि उपराष्ट्रपति के लिए नामांकित सदस्य भी एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेंगे।

इस तरह, सत्तारूढ़ गठबंधन को कुल 422 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। बहुमत के लिए 391 सांसदों के समर्थन की जरूरत है। अगस्त 2022 में एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले थे। वहीं विपक्षी उम्मीदवार मार्गेट अल्वा को सिर्फ 182 वोट मिले थे। तब 56 सांसदों ने वोट नहीं डाला था।

उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया को समझें

6 स्टेप में चुना जाता है उपराष्ट्रपति, ऐसे समझें

सबसे पहले निर्वाचक मंडल की लिस्ट बनती है: उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए सबसे पहले निर्वाचक मंडल लिस्ट बनती है। इसमें लोकसभा और राज्यसभा के सभी निर्वाचित और नामित सदस्य (सांसद) शामिल होते हैं। राज्यसभा में 233 निर्वाचित सांसद और 12 नामांकित सांसद हैं। लोकसभा में 543 सांसद हैं। यानी कुल सांसदों की संख्या 788 है। मौजूदा समय में राज्यसभा में 5 और लोकसभा में एक सीट खाली है। इसलिए निर्वाचक मंडल में यह संख्या 782 होगी। इस तरह उपराष्ट्रपति चुनाव जीत में 391 सांसदों (50%) के समर्थन की जरूरत होगी।

7 अगस्त को जारी की जाएगी अधिसूचना: चुनाव आयोग ने 1 अगस्त को उपराष्ट्रपति के चुनाव की तारीखों का ऐलान किया। अधिसूचना 7 अगस्त को जारी की जाएगी। अधिसूचना जारी होते ही नामांकन शुरू हो जाता है। इसकी आखिरी तारीख 21 अगस्त है। 25 अगस्त को कैंडिडेट नामांकन वापस ले सकता है।

नामांकन के लिए 20 सांसदों का समर्थन जरूरी: उम्मीदवार को कम से कम 20 सांसदों की तरफ से प्रस्तावित होना जरूरी है। इसके अलावा 20 सांसदों का समर्थन भी चाहिए।

सांसद ही मतदाता, इसलिए प्रचार सीमित: चुनाव में केवल सांसद मतदाता होते हैं। इसलिए यह प्रचार सीमित दायरे में होता है। उम्मीदवार और उनके समर्थक दल प्रचार में शामिल होते हैं।

मतदान कैसे होता है: हर सांसद मतपत्र पर प्रत्याशियों को प्राथमिकता के क्रम में (1, 2, 3...) टिक करता है। वोटिंग तभी होती है, जब एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में होते हैं। अन्यथा एक उम्मीदवार होने पर प्रत्याशी निर्विरोध चुनाव जीत जाता है।

एक ही दिन वोटिंग और रिजल्ट: मतदान के बाद ही रिजल्ट आ जाता है। उसकी वजह यह है कि दोनों सदनों के 782 सदस्य मतदान करते हैं। इनकी गणना कुछ घंटों में हो जाती है। जीत के लिए कुल वैध मतों का बहुमत यानी 50% से अधिक प्राप्त करना होता है। इसके बाद नतीजे घोषित किए जाते हैं। इस बार 9 सितंबर को सुबह 10 से 5 बजे के बीच वोटिंग होगी।


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'वोट चोरी' पर मार्च निकाल रहे राहुल-प्रियंका हिरासत में, पुलिस ने रोका तो बैरिकेडिंग से कूद गए अखिलेश यादव

बिहार में चुनाव आयोग के खिलाफ उठ रही विरोध की आवाज अब दिल्ली तक पहुंच गई है। संसद के मानसून सत्र में विपक्ष ने चुनाव आयोग के खिलाफ हल्ला बोलते हुए राजधानी की सड़कों पर मार्च निकालना शुरू कर दिया है।

इंडी गंठबंधन का यह मार्च संसद के मकर द्वार से चुनाव आयोग के दफ्तर तक निकाला जाएगा, जिसमें कई बड़े विपक्षी नेता शामिल हैं।

अखिलेश बैरिकेडिंग से कूदे

विपक्ष के मार्च के मद्देनजर पूरे मार्ग की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कई जगहों पर बैरिकेडिंग भी लगी है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव बैरिकेडिंग कूद कर आगे निकल गए, जिसका वीडियो भी सामने आया है।

विपक्ष क्यों निकाल रहा है मार्च?

विपक्ष का यह मार्च बिहार में चुनाव आयोग के द्वारा शुरू की गई स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के खिलाफ है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत कई लोगों के नाम काट दिए गए हैं। साथ ही विपक्ष ने 2024 के लोकसभा चुनाव में 'वोट चोरी' का भी आरोप लगाया है।

कई दिग्गज नेता शामिल

संसद के मकर द्वार पर सभी विपक्षी नेताओं को एकत्रित किया गया। इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी से लेकर प्रियंका गांधी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव समेत कई बड़े नेता शामिल रहे। इंडिया गठबंधन में शामिल विपक्षी पार्टियों के ज्यादातर सांसदों ने इस मार्च में हिस्सा लिया है।

कहां से कहां तक निकलेगा मार्च?

विपक्ष का यह मार्च संसद के मकर द्वार से शुरू होकर चुनाव आयोग के दफ्तर तक जाएगा। नई दिल्ली से संसद मार्ग के पंडित पंत मार्ग पर निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग का मुख्यालय) मौजूद है। विपक्ष का काफिला इसी मुख्यालय तक जाएगा।

संसद से चुनाव आयोग की दूरी कितनी?

बता दें कि संसद से निर्वाचन सदन की दूरी लगभग डेढ़ किलोमीटर है। ऐसे में कर्तव्य पथ और रायसेना रोड से होते हुए विपक्ष के सांसद चुनाव आयोग के दफ्तर तक पहुंचेंगे।


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राहुल बोले- मोदी वोट चुराकर प्रधानमंत्री बने

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि नरेंद्र मोदी तीसरी बार 25 सीट के मार्जिन से प्रधानमंत्री बने हैं। 25 सीट ऐसी हैं, जिन्हें भाजपा ने 35 हजार या कम वोट से जीतीं। अगर हमें इलेक्ट्रानिक डेटा मिल जाए तो हम साबित कर देंगे कि मोदी चोरी करके प्रधानमंत्री बने हैं।

राहुल ने कहा- चुनाव आयोग को पिछले 10 साल की देश की सारी इलेक्ट्रानिक वोटर लिस्ट और वीडियोग्राफी देनी चाहिए। ये सब नहीं देंगे तो क्राइम है। भाजपा को चुनाव चोरी करने दे रहे हैं। पूरे देश को चुनाव आयोग से वोटर्स का डेटा मांगना चाहिए।

राहुल गांधी ने कर्नाटक के बेंगलुरु में फ्रीडम पार्क में आयोजित कांग्रेस की 'वोट अधिकार रैली' में ये बात कही। उनके साथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी रैली में शामिल हुए। 

बेंगलुरु पहुंचने से पहले राहुल ने X पोस्ट में लिखा- 'वोट चोरी' केवल चुनावी घोटाला नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र के साथ बड़ा विश्वासघात है। देश के गुनहगार सुन लें, वक्त बदलेगा, सजा जरूर मिलेगी।

राहुल ने गुरुवार को भी आरोप लगाया था कि कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 1,00,250 फर्जी वोट बनाए गए, जिससे भाजपा को फायदा हुआ। भाजपा-EC की मिलीभगत से यह धांधली हुई, जिसने PM मोदी को तीसरी बार सत्ता में पहुंचाया।

राहुल की स्पीच की 5 बड़ी बातें...

कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा में 6.50 लाख वोट हैं। उसमें से 1 लाख 250 वोट चोरी किए गए, मतलब 6 में से 1 वोट इन्होंने चोरी किए। 5 तरीके से चोरी की गई। डुप्लीकेट वोटर मतलब एक वोटर ने कई बार वोट किया। एक वोटर ने 5-6 पोलिंग बूथ में वोट डाला।

इन लोगों का कोई एड्रेस भी नहीं है। करीब 40 हजार ऐसे वोट हैं। एक एड्रेस पर कई वोटर हैं। एक बेडरूम के घर में 40-50 वोटर दिखा दिए। जब हम उन्हें ढूंढने गए तो वहां कोई नहीं था। उस घर का मालिक बीजेपी नेता निकला।

कर्नाटक की सरकार पैसा देकर चोरी की गई थी। मेरे पास सबूत है कि लोकसभा में भी चोरी की गई। भाजपा की विचारधारा संविधान के खिलाफ है। कर्नाटक का डेटा निकालने में हमें 6 महीने लगे, 1 वोट को लाखों वोटर से चेक किया।

हर एक नाम को चेक किया, चुनाव आयोग का पूरा डेटा हमारे लिए सबूत है। हमें एक सीट की सच्चाई निकालने के लिए 6 महीने लगे, अगर EC ने डेटा नहीं दिया तो हम ये काम 20-25 सीटों पर भी कर सकते हैं। आप छिप नहीं सकते एक न एक दिन आपको विपक्ष का सामना करना पड़ेगा।

जहां फार्म 6 का मिसयूज किया गया, वहां 34 हजार वोट थे। फार्म 6 नए वोटर्स के लिए होता है, लेकिन 34 हजार ऐसे वोटर्स हैं जिनकी एज 60, 70 और 80 साल है। डुप्लीकेट वोटर्स ने पहले कर्नाटक में वोट दिया। इसके बाद महाराष्ट्र और यूपी में भी वोट दिया।

राहुल के भाजपा-EC पर लगाए पहले के आरोप

7 अगस्त: राहुल बोले- वोटर लिस्ट में गड़बड़ी

राहुल ने दिल्ली के इंदिरा भवन ने 1 घंटे 11 मिनट के प्रजेंटेशन दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने कर्नाटक, तमिलनाडु और हरियाणा में चुनाव आयोग पर बीजेपी के साथ देने का दावा भी किया। अब इसको लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि पहले ECI जबाव देता था, आज जब कोई ECI से सवाल पूछता है तो वो जवाब नहीं बल्कि सत्ता पक्ष के नुमाइंदे की तरह उलटे इल्जाम लगाता है, विपक्षी पार्टियों की मांगों पर गौर किये बिना केवल अनर्गल बयानबाजी करता है।

2 अगस्त: राहुल बोले- मोदी धांधली से PM बने

राहुल गांधी ने 2 अगस्त को कहा था कि भारत का इलेक्शन सिस्टम मर चुका है। हम आने वाले कुछ दिनों में आपको साबित कर देंगे कि लोकसभा चुनाव में कैसे धांधली हो सकती है और हुई भी।

भारत के पीएम के पास बहुत कम बहुमत है। अगर 10-15 सीटों पर भी धांधली न होती तो वे भारत के प्रधानमंत्री भी नहीं होते। राहुल ने ये बातें दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एनुअल लीगल कॉन्क्लेव- 2025 में कही थीं।

ECI ने लिखा-कांग्रेस को आपत्ति तो कोर्ट जा सकती है

चुनाव आयोग की ओर से जारी किए गए लेटर में लिखा- कांग्रेस ने पहले भी नवंबर 2024 के चुनावों के बाद ऐसे ही आरोप लगाए थे, जिनका विस्तृत जवाब 24 दिसंबर 2024 को दिया गया था।

पत्र में बताया गया है कि चुनाव पूरी पारदर्शिता से, कानून के अनुसार और हजारों अधिकारियों की निगरानी में कराए गए। आयोग ने यह भी कहा कि अगर कांग्रेस को कोई कानूनी आपत्ति थी तो वह कोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल कर सकती थी।

1 अगस्त: EC ने कहा- ऐसे निराधार आरोपों को नजरअंदाज करते हैं

इलेक्शन कमीशन ने एक बयान जारी करते हुए कहा था कि चुनाव आयोग ऐसे निराधार आरोपों को नजरअंदाज करता है। लगातार दी जा रही धमकियों के बावजूद, हम सभी चुनाव अधिकारियों से कहना चाहते हैं कि वे पहले की तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम करें। गैरजिम्मेदाराना बयानों को नजरअंदाज करें।

1 अगस्त 2025: राहुल बोले- मेरे पास चोरी के 100% सबूत हैं

राहुल ने आगे कहा कि मैं इसे हल्के में नहीं, बल्कि सौ प्रतिशत प्रमाण के साथ कह रहा हूं। जैसे ही हम इसे जारी करेंगे, पूरे देश को पता चल जाएगा कि चुनाव आयोग भाजपा के लिए वोट चुराने का काम कर रहा है। हमें मध्य प्रदेश चुनाव, लोकसभा चुनाव में शक था, महाराष्ट्र चुनाव के दौरान हमारा शक और बढ़ गया। 

24 जुलाई 2025: आप सोचते हैं कि बच जाएंगे, ये आपकी गलतफहमी है

राहुल ने कहा, 'चुनाव आयोग ने कर्नाटक की एक सीट पर धोखाधड़ी कराई। हमारे पास इसके 100% सबूत हैं। एक ही निर्वाचन क्षेत्र में 50, 60 और 65 साल के हजारों नए वोटरों को सूची में जोड़ा गया है और 18 साल से ज्यादा उम्र के वोटरों को सूची से हटा दिया गया है।'

कांग्रेस सांसद ने कहा, 'हमे अभी एक सीट की जांच में यह गड़बड़ी मिली। मुझे पूरा यकीन है कि हर सीट पर यही नाटक चल रहा है। मैं चुनाव आयोग को एक मैसेज देना चाहता हूं। अगर आपको लगता है कि आप इससे बच निकलेंगे, तो ये आपकी गलतफहमी है।


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डिंपल के अपमान पर दोहरी उलझन में फंसी अखिलेश यादव की पार्टी, भाजपा के हमलों से बढ़ रही है चुनौती

मैनपुरी सांसद डिंपल यादव पर मुस्लिम मौलाना की टिप्पणी ने समाजवादी पार्टी को दोहरी उलझन में फंसा दिया है। एक तरफ मुस्लिम वोट बैंक को नाराज न होने देने की चुनौती है तो दूसरी तरफ महिला संबंधी मुद्दों पर पार्टी की आक्रामक रणनीति के कमजोर पड़ने का डर सता रहा है। 

मुश्किल इसलिए भी अधिक है, क्योंकि टिप्पणी किसी सामान्य नेता या कार्यकर्ता पर नहीं, राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी पर हुई है और दूसरी तरफ भाजपा लगातार इस मुद्दे को गरमा रही है। सपा मुखिया की चुप्पी पर सवाल उठाए जा रहे हैं। 

ऐसे में फिलहाल सपा वेट एंड वाच की नीति पर चल रही है। रणनीति के तहत नेताओं-कार्यकर्ताओं को विरोध जताने की छूट दे दी गई है, परंतु बड़े नेताओं का मौन अभी जारी रहेगा। दूसरी तरफ भाजपा की कोशिश विवाद को लंबे समय तक खींचकर सपा को बैकफुट पर बनाए रखने की है।

सपा मुखिया पिछले दिनों डिंपल और अन्य पार्टी सांसदों के साथ दिल्ली में संसद के पास स्थित मस्जिद में गए थे। इस पर एक न्यूज चैनल पर बहस के दौरान आल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने मस्जिद के अंदर डिंपल के पहनावे को लेकर विवादित टिप्पणी की। 

इसके बाद लखनऊ से दिल्ली तक राजनीति गर्माई हुई है। अपमान और उस पर सपा की चुप्पी को भाजपा ने बड़ा मुद्दा बना लिया है। भाजपा के सांसदों ने संसद भवन के बाहर इसे लेकर प्रदर्शन किया। यहां महिला कल्याण मंत्री बेबीरानी मौर्य ने सीधे अखिलेश पर हमला बोला। 

कहा कि सपा मुखिया की चुप्पी कहीं न कहीं उनकी वोट बैंक की लालसा को दर्शाती है। क्या उन्होंने सत्ता के लिए अपनी पत्नी का अपमान स्वीकार कर लिया है? सपा का मौन क्या इस सोच की सहमति है कि सपा में महिलाओं की गरिमा अब मौलवी तय करेंगे? भाजपा के अन्य नेता भी लगातार सपा को घेर रहे हैं।

इससे सपा की बेचैनी बढ़ी है। माना जा रहा है कि सपा अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले में शामिल मुस्लिम वोट बैंक को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाना चाहती। 

टिप्पणी मामले में बयानबाजी से उसे नुकसान की आशंका है। इसके चलते ही प्रकरण पर शुरुआत में पूरी तरह चुप्पी साधी गई। परंतु अब भाजपा की रणनीति से सपा को महिला सम्मान का मुद्दा हाथ से फिसलता दिख रहा है और पार्टी इस दोहरी उलझन से निकलने का रास्ता तलाश रही है। 

इसके तहत ही मुकदमा दर्ज कराने के साथ ही पार्टी फ्रंटल संगठनों को विरोध के लिए आगे किया गया है, जिससे बड़े नेताओं की चुप्पी भी बनी रहे और विरोध का संदेश भी चला जाए।



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चुनाव से पहले बिहार के नेता हो रहे इधर-उधर, BJP-JDU के कई कद्दावर नेताओं ने थामा कांग्रेस का दामन

 बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की मंशा से पार्टी में नए लोगों को जोड़ा जा रहा है। इसी सिलसिले में रविवार को कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित मिलन समारोह में पूर्णिया की मेयर के पति और समाजसेवी जितेंद्र कुमार ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।

इसके अलावा भाजपा अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के सह संयोजक कुणाल किशोर सहनी और जदयू के प्रदेश महासचिव कुणाल अग्रवाल भी अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल हुए। जितेंद्र कुमार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम और भाजपा नेता कुणाल को प्रदेश प्रभारी अल्लावरु ने सदस्यता दिलाई।

पार्टी की सदस्यता दिलाने के बाद राजेश राम ने कहा कि नए लोगों के कांग्रेस में शामिल होने से पूर्णिया में कांग्रेस पार्टी मजबूत होगी। कुणाल किशोर सहनी का कांग्रेस में स्वागत करते हुए अल्लावरु ने कहा कि उनके शामिल होने से अति पिछड़ा समाज में कांग्रेस मजबूत होगी।

मिलन समारोह में शकील अहमद खान, मदन मोहन झा, अंशुल अभिजीत, मोतीलाल शर्मा, राजेश राठौर, मंजीत आनंद साहू, रोशन कुमार सिंह समेत अन्य नेता मौजूद थे।


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भाषा विवाद के बीच कमल हासन ने तमिल में ली राज्यसभा सांसद की शपथ, तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा सदन

एक्टर और मक्कल निधि मय्यम (MNM) प्रमुख कमल हासन ने आज (25 जुलाई)  राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली। उन्होंने तमिल भाषा में शपथ पत्र पढ़ा।

69 वर्षीय अभिनेता से राजनेता बने हासन ने संसद भवन के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "मैं बहुत गौरवान्वित और सम्मानित महसूस कर रहा हूं।"

कमल हासन ने किया DMK का समर्थन

बता दें कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव में कमल हासन की पार्टी ने डीएमके का समर्थन किया था। इसी समर्थन के बदले अब कमल हासन को डीएमके की तरफ से राज्यसभा सीट दी गई है।  

आधिकारिक तौर पर कमल हासन की पार्टी और डीएमके के बीच गठबंधन हुआ है। उम्मीद जताई जा रही है कि साल 2026 में तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव में डीएमके और एमएनएम साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे।  

हासन ने 6 जून को तमिलनाडु सचिवालय में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था, उनके साथ मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन , उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन और वीसीके के थोल थिरुमावलवन, एमडीएमके के वाइको और तमिलनाडु कांग्रेस प्रमुख सेल्वापेरुंथगई सहित गठबंधन सहयोगियों के वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

मैं राजनीति में कॉमन मैन की तरह आया हूं: कमल हासन 

मक्कल निधि मय्यम पार्टी के संस्थापक कमल हासन ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा था कि उनकी पार्टी न तो राइट विंग की विचारधार की समर्थक है, न ही लेफ्ट की। तमिल में मय्यम का मतलब 'केंद्र' होता है।

उन्होंने कहा था उनकी राजनीति में आने का मतलब लोगों की सेवा करना है। वो राजनीति में किसी स्टार की तरह नहीं बल्कि कॉमन मैन की तरह आए हैं। कमल हासन ने खुद की पार्टी को तमिलनाडु में तीसरे विकल्प के रूप में बताया है।


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नए उपराष्ट्रपति के लिए थावरचंद गहलोत, ओम माथुर का नाम

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफा देने के 3 दिनों के भीतर निर्वाचन आयोग ने इस पद के लिए चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है। चुनाव की तारीखें जल्द घोषित की जाएंगी।

इस बीच, भाजपा इस पद के लिए अपनी विचारधारा के प्रति समर्पित कार्यकर्ता को उम्मीदवार बना सकती है। फिलहाल जिन नामों पर पार्टी में विचार चल रहा है, उनमें कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। अन्य नाम सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर का भी है।

आयोग ने इस पद के लिए निर्वाचक मंडल, रिटर्निंग ऑफिसर और अन्य जरूरी चीजों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। आयोग की तैयारियों के बीच भाजपा की कोशिश होगी कि इस पद का उम्मीदवार किसी अन्य सहयोगी को बनाने की जगह अपने उम्मीदवार का नाम तय कर उसके नाम पर सहयोगी दलों को राजी करे।

दरअसल, जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई की रात अचानक देश के 14वें उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दिया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को धनखड़ का इस्तीफा मंजूर कर लिया था। 74 साल के धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था।

गहलोत जातीय समीकरण में भी फिट

थावरचंद गहलोत अभी कर्नाटक के राज्यपाल हैं। 77 वर्षीय गहलोत राज्यसभा में सदन के नेता रह चुके हैं साथ ही केंद्रीय मंत्री का पद भी संभाल चुके हैं। भाजपा में वे सर्वोच्च नीति निर्धारक इकाई पार्लियामेंट्री बोर्ड के सदस्य भी रहे हैं। जातीय समीकरण (दलित) में भी वे फिट बैठते हैं। वह मध्य प्रदेश से हैं। उनके पास प्रशासनिक अनुभव भी है।

माथुर मोदी-शाह के करीबी

ओम माथुर अभी सिक्किम के राज्यपाल हैं। 73 वर्षीय माथुर पार्टी के कद्दावर नेता हैं और राजस्थान से आते हैं। वे गुजरात के चुनाव प्रभारी तब रहे हैं, जब पीएम मोदी वहां के मुख्यमंत्री थे। वे मोदी के साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भी करीबी माने जाते हैं। माथुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में प्रचारक रह चुके हैं।

भाजपा के नाम पर सहमति नहीं तो उप सभापति हरिवंश का नाम

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि निर्वाचन आयोग की तरफ से उपराष्ट्रपति पद के चुनाव की तारीख घोषित होते ही इस पद के लिए एनडीए प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर दी जाएगी। यदि भाजपा के किसी प्रत्याशी के नाम पर एनडीए में सहमति बनाने में समस्या आई तो मौजूदा उप सभापति हरिवंश भी इस पद के उम्मीदवार बनाए जा सकते हैं।

विपक्ष उतारेगा मजबूत प्रत्याशी

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है, प्रत्याशी का चयन ठोक बजाकर ही किया जाएगा, क्योंकि विपक्ष से भी कोई मजबूत प्रत्याशी उतारे जाने की पूरी संभावना है। ऐसे में NDA इस पद के लिए प्रत्याशियों के कद, अनुभव व जातीय समीकरण को प्राथमिकता देगी।

6 स्टेप में चुन जाते हैं उपराष्ट्रपति...

स्टेप-1 : निर्वाचक मंडल का गठन करना

उपराष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मंडल करता है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सभी निर्वाचित और नामित सदस्य शामिल होते हैं।

स्टेप-2: चुनाव की अधिसूचना जारी होना

निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचना में नामांकन, मतदान और परिणाम की तारीखें होती हैं।

स्टेप-3: नामांकन प्रक्रिया

उम्मीदवार को कम से कम 20 सांसदों द्वारा प्रस्तावक और 20 सांसदों द्वारा समर्थक के रूप में हस्ताक्षर के साथ नामांकन पत्र दाखिल करना होता है।

स्टेप-4 : सांसदों के बीच प्रचार होता है

केवल सांसद मतदाता होते हैं। इसलिए यह प्रचार सीमित दायरे में होता है। उम्मीदवार और उनके समर्थक दल प्रचार में शामिल होते हैं।

स्टेप-5: मतदान की प्रक्रिया शुरू होगी

हर सांसद मतपत्र पर प्रत्याशियों को प्राथमिकता के क्रम में (1, 2, 3...) अंकित करता है।

स्टेप-6: मतों की गिनती और परिणाम

जीत के लिए कुल वैध मतों का साधारण बहुमत (50% से अधिक) प्राप्त करना होता है। रिटर्निंग ऑफिसर नतीजे की घोषणा करते हैं।


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