दूसरी बार असम के सीएम बने Himanta Biswa Sarma, इन 4 विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ

Himanta Biswa Sarma ने मंगलवार को लगातार दूसरी बार Assam के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ चार विधायकों ने भी मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। इनमें Rameswar Teli और Ajanta Neog भाजपा से, जबकि Atul Bora AGP और Chandan Brahma BPF की ओर से शामिल रहे।

Guwahati के खानापारा स्थित वेटरनरी ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल Lakshman Prasad Acharya ने सभी नेताओं को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

शपथ ग्रहण समारोह में Narendra Modi, Suvendu Adhikari और Devendra Fadnavis समेत कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। इसके अलावा Amit Shah, Rajnath Singh, Nitin Gadkari, Sarbananda Sonowal और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

असम में लगातार तीसरी बार NDA सरकार बनी है और मुख्यमंत्री के तौर पर यह हिमंत बिस्वा सरमा का दूसरा कार्यकाल होगा। मंत्री पद की शपथ लेने वाले अजंता नेओग, अतुल बोरा और चरण बोरो पहले भी सरमा कैबिनेट का हिस्सा रह चुके हैं, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री रामेश्वर तेली ने राज्य राजनीति में वापसी की है।

पिछली सरकार में अजंता नेओग वित्त मंत्रालय संभाल रही थीं, अतुल बोरा के पास कृषि विभाग था और चरण बोरो परिवहन मंत्री थे। हालिया विधानसभा चुनाव में NDA ने 126 सदस्यीय विधानसभा में रिकॉर्ड 102 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी। इनमें भाजपा को 82 सीटें मिलीं, जबकि सहयोगी दल Asom Gana Parishad और Bodoland People's Front ने 10-10 सीटों पर जीत दर्ज की।


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आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में विलय को मंजूरी, राज्यसभा चेयरमैन जगदीप धनखड़ ने दी अनुमति

नई दिल्ली में सोमवार को राज्यसभा में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। राज्यसभा के चेयरमैन सी.पी. राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय को आधिकारिक मंजूरी दे दी। इस फैसले के बाद उच्च सदन में AAP की ताकत घटकर सिर्फ तीन सांसदों तक रह गई है।

राज्यसभा में BJP की ताकत बढ़कर 113 पहुंची

वहीं, इस बदलाव से BJP को सीधा फायदा हुआ है और उसकी संख्या राज्यसभा में बढ़कर 113 पहुंच गई है। इसके साथ ही NDA का आंकड़ा 148 पहुंच गया। वहीं, जिन सात सांसदों का BJP में विलय हुआ है, उनमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं। अब राज्यसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इन सभी को BJP सांसदों की सूची में दिखाया जा रहा है।

AAP ने सदस्यता रद्द करने की मांग की थी

जानकारी के अनुसार, इन सांसदों ने शुक्रवार को चेयरमैन से अनुरोध किया था कि उन्हें विलय के बाद BJP के सदस्य के रूप में मान्यता दी जाए। चेयरमैन ने उनकी इस मांग को स्वीकार कर लिया। हालांकि, इससे पहले आम आदमी पार्टी ने इन सातों सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। पार्टी ने राज्यसभा चेयरमैन के समक्ष याचिका दायर कर उनकी सदस्यता रद्द करने की अपील की थी।

AAP सांसद संजय सिंह ने कहा था कि, पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होने वाले सांसदों को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि पिछले शुक्रवार को AAP को उस समय बड़ा झटका लगा था, जब उसके सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर BJP में शामिल होने का ऐलान कर दिया था। इन नेताओं ने आरोप लगाया था कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और मूल्यों से भटक गई है।


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नीतीश कुमार ने राज्यपाल को सौंपा इस्तीफा, बिहार में पहली बार BJP का मुख्यमंत्री बनने की तैयारी

Nitish Kumar ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। सरकार के भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।

विभिन्न दलों के नेताओं की गतिविधियां भी बढ़ गई हैं। सभी की नजर अब अगले कदम पर टिकी है।

राज्यपाल से मुलाकात कर दिया इस्तीफा

मुख्यमंत्री ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल से मुलाकात की। उन्होंने औपचारिक रूप से अपना इस्तीफा सौंप दिया। बताया जा रहा है कि यह फैसला राजनीतिक परिस्थितियों के कारण लिया गया।

राज्यपाल ने उनसे कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने को कहा है। नई सरकार के गठन तक वे जिम्मेदारी संभालेंगे। राजभवन से जुड़े सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है।

नए गठबंधन की चर्चा तेज

इस्तीफे के बाद नए गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई दलों के बीच बातचीत की खबरें सामने आ रही हैं। संभावित सहयोगियों के साथ बैठकों का दौर जारी है।

सत्ता के नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में तस्वीर साफ हो सकती है।

जनता और कार्यकर्ताओं में उत्सुकता

इस घटनाक्रम के बाद आम जनता में भी उत्सुकता बढ़ गई है। लोग जानना चाहते हैं कि अगली सरकार किसकी बनेगी। राजनीतिक कार्यकर्ता भी सक्रिय हो गए हैं।

सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर बहस तेज है। हर कोई अपने-अपने अंदाज में कयास लगा रहा है। बिहार की राजनीति फिर से केंद्र में आ गई है।

आगे क्या होगा, सबकी नजरें टिकी

अब सबसे बड़ा सवाल है कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। संख्या बल और समर्थन जुटाने की कोशिश जारी है।

राज्यपाल की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। आने वाले समय में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।फिलहाल बिहार में सियासी गतिविधियां चरम पर हैं।

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बिहार के बाद नीतीश कुमार की दिल्ली पॉलिटिक्स शुरू, राज्यसभा MP के तौर पर ली शपथ; CM पद से देंगे इस्तीफा

 बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद बन गए हैं। आज दिल्ली में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने संसद भवन परिसर में उन्हें शपथ दिलाई।

नीतीश के बाद कौन सीएम बनेगा, इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं, इस पर मंथन के लिए दिल्ली में बिहार बीजेपी के कोर ग्रुप की बैठक बुलाई गई है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पटना लौटने के बाद नीतीश कुमार 14 अप्रैल तक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं और केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं, जहां वे पहले भी सक्रिय रहे हैं।

सबसे ज्‍यादा बार सीएम रहने का रिकॉर्ड

साल 2005 से बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश अब तक 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

बीजेपी की बैठक में नए सीएम पर होगा मंथन

बिहार में नई सरकार का मुख्यमंत्री चुनने की प्रक्रिया में भाजपा ने आज बिहार कोर ग्रुप की बैठक दिल्ली में बुलाई है।

पार्टी के संसदीय बोर्ड की बैठक से पहले अध्यक्ष नितिन नवीन राज्य के नेताओं के साथ बैठकर एक नाम पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं।


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बिहार में बनेगी नई सरकार: नीतीश कुमार 12 अप्रैल को देंगे इस्तीफा, 14 अप्रैल को नए CM की शपथ

बिहार में नई सरकार (Bihar New Government Formation) के गठन की प्रक्रिया अगले दस दिनों बाद शुरू हो जाएगी। नीतीश कुमार 12 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा (Nitish Kumar Resignation) देंगे। संभावना है कि 14 अप्रैल को बिहार में नए मुख्यमंत्री पद का शपथ होगा। नए मुख्यमंत्री के साथ नए मंत्रिमंडल का भी शपथग्रहण होगा।

नौ अप्रैल को दिल्ली के लिए हो रहे रवाना

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नौ अप्रैल को दिल्ली के लिए रवाना होंगे। इस बाबत मिली जानकारी के अनुसार, दस अप्रैल को वह राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसके बाद 11 अप्रैल को वह दिल्ली लौटेंगे और अगले दिन यानी 12 अप्रैल को उनका इस्तीफा होगा।

13 अप्रैल को एनडीए की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर

एनडीए सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 13 अप्रैल को एनडीए विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर विधिवत मुहर लग जाएगी। इस दौरान भाजपा के कई दिग्गज भी मौजूद रहेंगे। उसी दिन एनडीए के नए विधायक दल के नेता राज्यपाल को अपनी सरकार बनाने का दावा भी पेश करेंगे।

राष्ट्रीय अध्यक्ष के नए कार्यकाल का इसी महीने आरंभ

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चौथा कार्यकाल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसी महीने आरंभ करेंगे। इस बाबत मिली जानकारी के अनुसार देश भर के विभिन्न प्रदेशों से जदयू के पदाधिकारी पटना पहुंचेंगे और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाग लेंगे।

राष्ट्रीय परिषद की बैठक भी होनी है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार का संबोधन होगा। यह पहली बार होगा जब वह मुख्यमंत्री पद पर रहे बिना जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करेंगे।

16 मार्च को राज्यसभा का सदस्य चुने गए थे नीतीश

नीतीश कुमार इसी महीने की 16 तारीख को राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित हुए थे। संवैधानिक प्राविधानों के अनुसार राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के बाद उन्हें अगले 14 दिनों के अंदर इस्तीफा देना था।

इस संवैधानिक वजहों से 30 मार्च को नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उसी दिन कुछ ही घंटे के भीतर उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया गया था।


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आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा डिप्टी लीडर पद से हटाया, सदन से कहा—न दें बोलने का समय

आम आदमी पार्टी (AAP) ने गुरुवार को सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटा दिया है। उनकी जगह यह पोस्ट राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल दे दी है। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह जानकारी दी।

लेटर में कहा कि सदन में पार्टी की तरफ से बोलने का समय ना दिया जाए। राघव 2022 से पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं। उनका कार्यकाल 2028 तक है।

पार्टी ने इस फैसले की वजह नहीं बताई है। हालांकि उन्होंने लंबे समय से पार्टी से दूरी बना ली थी और AAP को लेकर कोई बयान नहीं दे रहे हैं।

27 फरवरी को जब एक निचली अदालत से अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब नीति मामले में राहत मिली, तब भी उन्होंने कोई बयान नहीं दिया था। राज्यसभा में भी वे गिग वर्कर्स और स्कूल की फीस जैसे उठा रहे थे।

पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं अशोक मित्तल

अशोक मित्तल भी पंजाब से AAP के राज्यसभा सांसद हैं। वे जालंधर के रहने वाले हैं। पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के फाउंडर और चांसलर हैं। 2022 में राज्यसभा सांसद बने थे। राजनीति में आने से पहले वह एक सफल उद्यमी रहे हैं। उनका परिवार 'लवली ग्रुप' का मालिक है, जो ऑटोमोबाइल और मिठाई (लवली स्वीट्स) के व्यवसाय से जुड़ा है।


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कच्चा तेल और मोदी की 'किस्मत': जब नसीब ने फेरा मुंह, तो क्या 'मास्टर स्ट्रोक' बनेगा ढाल?

नई दिल्ली: जाने आलम (जानू चौधरी) भारतीय राजनीति में एक दौर था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद को 'नसीब वालाबताकर विरोधियों पर तंज कसते थे। साल 2015 के दिल्ली चुनाव में उन्होंने गरजते हुए कहा था, "अगर मोदी की किस्मत से पेट्रोल-डीजल के दाम कम होते हैंतो बदनसीबों को क्यों लाना?" लेकिन आजजब 2026 के वैश्विक समीकरण बदल रहे हैं और कच्चा तेल $100 के पार गोते लगा रहा हैतो सवाल यह है: क्या अब 'किस्मतबदल गई है या फिर जनता को 'ग्रैब' (संबोधित) करने की उनकी कला इस आग को भी ठंडा कर देगी?

1. किस्मत का 'क्रूडकनेक्शन: तब और अब

2014 में सत्ता संभालते ही मोदी सरकार को वैश्विक बाजार से एक बड़ा 'गिफ्टमिला था। कच्चे तेल की कीमतें औंधे मुंह गिरी थीं। उस वक्त सरकार ने गिरती कीमतों का पूरा फायदा जनता को देने के बजाय एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर अपना खजाना भरा। तर्क दिया गया कि यह पैसा बुनियादी ढांचे और विकास में लग रहा है।

तब का नैरेटिव: "मोदी भाग्यशाली हैंइसलिए देश का भला हो रहा है।"

अब की हकीकत: 2026 में मध्य-पूर्व (इजरायल-ईरान संघर्ष) के तनाव और सप्लाई चेन की बाधाओं ने कच्चे तेल को फिर से महंगा कर दिया है। अब जब कीमतें बढ़ रही हैंतो 'किस्मतवाला तर्क सरकार के लिए गले की हड्डी बनता दिख रहा है।

2. जनता को 'ग्रैबकरने की मास्टरक्लास

विपक्ष का आरोप है कि मोदी जी आपदा को भी 'इवेंटबनाने में माहिर हैं। जब तेल महंगा होता हैतो सरकार के पास तर्क तैयार होते हैं:

रूस-यूक्रेन या मध्य-पूर्व का युद्ध: ग्लोबल परिस्थितियों को ढाल बनाना।

डायवर्सिफिकेशन का कार्ड: हम अब 27 नहींबल्कि 41 देशों से तेल खरीद रहे हैं।

राष्ट्रवाद और भविष्य: "हम आज महंगा तेल सह रहे हैं ताकि भविष्य में सौर ऊर्जा और हाइड्रोजन में आत्मनिर्भर बन सकें।"

"क्या यह सिर्फ संयोग है कि चुनाव आते ही तेल की कीमतें स्थिर हो जाती हैं और चुनाव खत्म होते ही 'वैश्विक दबावहावी हो जाता है?" — यह सवाल आज हर नुक्कड़ पर गूंज रहा है।

3. अब किसकी किस्मत?

अगर कच्चा तेल सस्ता होना मोदी की किस्मत थीतो अब महंगा होना किसकी किस्मत मानी जाए?

  1. जनता की बदकिस्मती? क्योंकि अंततः बोझ आम आदमी की जेब पर ही पड़ता है।
  2. विपक्ष के लिए मौका? जो लंबे समय बाद महंगाई को एक धारदार हथियार की तरह इस्तेमाल कर पा रहा है।
  3. तेल कंपनियों का 'कुशन': सरकार अब तेल कंपनियों को घाटा सहने या 'कुशनइस्तेमाल करने का निर्देश दे रही है ताकि आम जनता का गुस्सा सीधे प्रधानमंत्री तक न पहुंचे।

निष्कर्ष: ब्रांड मोदी बनाम महंगाई की आग

मोदी की राजनीति का सबसे बड़ा मंत्र है—'नैरेटिव मैनेजमेंट'। वे जानते हैं कि जब आर्थिक आंकड़े खिलाफ होंतो भावनाओं का सहारा कैसे लिया जाता है। लेकिन 2026 का भारत बदल रहा है। ₹100 से ऊपर का पेट्रोल अब सिर्फ एक आंकड़ा नहींबल्कि मध्यम वर्ग का दर्द है।

अब देखना यह है कि क्या प्रधानमंत्री अपनी पुरानी 'किस्मतको फिर से जगा पाएंगेया इस बार 'महंगा तेलउनके अभेद्य राजनीतिक दुर्ग में सेंध लगा देगा। By jane Aalam (Janu choudhary)

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भाजपा को मिला नया नेतृत्व: नितिन नबीन 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष

नितिन नबीन मंगलवार को भाजपा के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। नई दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में उनके नाम का ऐलान किया गया। नितिन को 14 दिसंबर 2025 को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। सोमवार को फुल टाइम अध्यक्ष पद के लिए उनका इकलौता नामांकन आया था, इसके बाद वे निर्विरोध पार्टी अध्यक्ष बन गए।

नए अध्यक्ष के पदभार ग्रहण कार्यक्रम में PM मोदी ने उन्हें माला पहनाई। मोदी ने 55 मिनट के भाषण में कहा, ‘भाजपा ऐसी पार्टी है, जहां लोगों को लगता होगा कि मोदीजी इतनी छोटी उम्र में मुख्यमंत्री बन गए। हेड ऑफ द गवर्नमेंट बन गए हैं। इन सबसे बड़ी चीज है कि मैं BJP का कार्यकर्ता हूं। मैं मानता हूं कि नितिनजी मेरे बॉस हैं, मैं कार्यकर्ता हूं। अब वे मेरे काम का आकलन करेंगे।’

बतौर अध्यक्ष नितिन नबीन का पहला भाषण करीब 20 मिनट का रहा। उन्होंने कहा, ‘हम ऐसे राजनीतिक दल से जुड़े हैं, जहां राजनीति सत्ता नहीं, साधना है। राजनीति भोग नहीं, त्याग है। राजनीति ऐशो-आराम नहीं, तपस्या है। राजनीति कोई पदभार नहीं, उत्तरदायित्व है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में मेरा निर्वाचन एक साधारण कार्यकर्ता की असाधारण यात्रा को मिला सम्मान है।'

मोदी और नितिन नबीन से पहले पार्टी के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा 10 मिनट बोले। उन्होंने कहा, ''नबीन की लीडरशिप में पार्टी नई राज्यों में अपनी पहुंच बढ़ाएगी। उन क्षेत्रों में भी कमल खिलेगा जहां अब तक भाजपा को सफलता नहीं मिली है, जैसे बंगाल, पुडुचेरी, तमिलनाडु, असम और केरल।'

नबीन ने 20 मिनट का भाषण दिया, कहा- हमें अपने हिस्से का त्याग करना होगा

पीएम की तारीफ की: 'हमने कार्यकर्ता के तौर पर पीएम मोदी के देशसेवा के काम करते हुए देखा। आपको देख कर ही सीखा है कि जो व्यक्ति खुद को लोगों की भावनाओं से जुड़ने वाला बना सकता है,वहीं बड़ा शख्स बनता है। आपने कहा था कि हम जो विकास का काम करते हैं। लोग हमसे उम्मीद करते हैं। हमसे जुड़ते हैं।'

भाजपा के नारों का जिक्र किया: 'भाजपा के कार्यकर्ता कुछ नारों को जनसंघ के समय से गढ़ते थे- राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे, जहां हुए बलिदान मुखर्जी वह कश्मीर हमारा है, एक देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेगा। भाजपा के कार्यकर्ताओं ने वह समय देखा, जब अयोध्या में राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हुआ। जम्मू-कश्मीर की जनता ने धारा 370 से मुक्ति का दौर देखा। जब हम श्रीनगर के लाल चौक में तिरंगा लहराते हुए देखते हैं, तो गर्व की अनुभूति होती है।

सबसे पहले राष्ट्र: जब प्रधानमंत्री के नेतृत्व में अनुच्छेद 370 की समाप्ति हुई, तो कश्मीर की फिजा बदली। हम 'राष्ट्र पहले, पार्टी बाद में, और खुद सबसे आखिर में' के आदर्श पर काम करते हैं। हम ऐसे राजनीतिक दल से जुड़े हैं जहां राजनीति सत्ता नहीं, साधना है। राजनीति भोग नहीं, त्याग है। राजनीति ऐशो-आराम नहीं, तपस्या है। राजनीति कोई पदभार नहीं, उत्तरदायित्व है। हमें अपने हिस्से का त्याग करना होगा।

कार्यकर्ताओं से अपील: भाजपा का लक्ष्य अब सिर्फ पारंपरिक राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पार्टी को मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करना है। संगठन की ताकत, कार्यकर्ताओं की मेहनत और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इन राज्यों में भी भाजपा बेहतर प्रदर्शन करेगी।

मोदी की स्पीच की 5 बड़ी बातें, कहा- जो कांग्रेस की बुराइयों से बचेगा, वही देश में आगे बढ़ेगा

कांग्रेस अपने पतन की जिम्मेदार: ‘आज देश को याद भी नहीं होगा कि 1984 में कांग्रेस को 400 से अधिक सीटें मिली थीं और देश ने कांग्रेस को करीब-करीब 50% वोट दिया था, लेकिन आज कांग्रेस 100 सीटों के लिए तरस गई है। कांग्रेस अपने इस घनघोर पतन की कभी समीक्षा नहीं करती, क्योंकि अगर समीक्षा करेंगे और पतन के कारणों पर जाएंगे तो उसी परिवार पर सवाल उठेंगे, जिस परिवार ने कांग्रेस पर कब्जा कर रखा है। और इसलिए बहाने ढूंढते रहते हैं। पतन का सही कारण ढूंढने की हिम्मत तक खो चुके हैं। जो कांग्रेस की बुराइयों से बचेगा, वही देश में आगे बढ़ेगा।'

घुसपैठियों को देश लूटने नहीं देगा: ‘आज देश के सामने बहुत बड़ी चुनौती घुसपैठियों की है। दुनिया के समर्थ देश भी अपने देश में घुसपैठियों की जांच पड़ताल कर रहे हैं और उनको पकड़-पकड़ कर निकाल रहे हैं। दुनिया में कोई अपने देश में घुसपैठियों को स्वीकार नहीं करता, भारत भी घुसपैठियों को अपने गरीबों, युवाओं के हक लूटने नहीं दे सकता। घुसपैठिए देश की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है, उनकी पहचान करके उन्हें वापस उनके देश भेजना बहुत जरूरी है। इसके अलावा ऐसे राजनीतिक दल जो वोट बैंक की राजनीति में घुसपैठियों को बचा रहे हैं, उन्हें हमें पूरी शक्ति से जनता के सामने बेनकाब करना होगा।’

महाराष्ट्र नतीजों ने बताया भाजपा पहली पसंद: ‘भाजपा सिर्फ संसद और विधानसभा की ही नहीं, बल्कि नगरपालिकाओं और नगर निगमों में भी पहली पसंद है। इसका ताजा उदाहरण महाराष्ट्र है। भाजपा, महाराष्ट्र के स्थानीय निकायों में नंबर वन पार्टी बनी है। कुल 29 में से 25 बड़े शहरों की जनता ने भाजपा-एनडीए को चुना है। कुल जितने पार्षद जीते हैं, उनमें से 50% भाजपा के हैं। ऐसे ही केरल में भाजपा के करीब 100 पार्षद हैं। ऐसे ही तिरुवनंतपुरम की जनता ने मेयर चुनाव में 45 साल बाद लेफ्ट से सत्ता छीनी और भाजपा पर भरोसा किया।’

पिछले डेढ़ साल में जीते 4 राज्यों में चुनाव: ‘बीते डेढ़-दो वर्षों में भाजपा पर जनता का भरोसा और मजबूत हुआ है। विधानसभा हो या स्थानीय निकाय, भाजपा की स्ट्राइक रेट अभूतपूर्व रही है। इस दौरान देश में 6 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं, इनमें से 4 चुनाव भाजपा-एनडीए ने जीते हैं।’

भाजपा की परंपरा मेंबरशिप से ज्यादा रिलेशनशिप अहम: 'भाजपा एक संस्कार है। भाजपा एक परिवार है। हमारे यहां 'मेंबरशिप' से भी ज्यादा 'रिलेशनशिप' होती है। भाजपा एक ऐसी परंपरा है, जो पद से नहीं प्रक्रिया से चलती है। हमारे यहां पदभार एक व्यवस्था है और कार्यभार जीवन भर की जिम्मेदारी है। हमारे यहां अध्यक्ष बदलते हैं, लेकिन आदर्श नहीं बदलते। नेतृत्व बदलता है लेकिन दिशा नहीं बदलती।'

नड्डा ने कहा 10 मिनट भाषण दिया, कहा- पार्टी में आगे बढ़ने के लिए मेहनत जरूरी

नितिन नबीन को बधाई और भरोसा: नितिन के नेतृत्व में पार्टी और मज़बूत होगी।

कार्यकर्ता से शीर्ष नेतृत्व तक का संदेश: भाजपा में कार्यकर्ता ही सबसे बड़ी ताकत है। संगठन में मेहनत करने वाला हर व्यक्ति आगे बढ़ सकता है।

पार्टी विस्तार पर जोर: भाजपा का लक्ष्य उन राज्यों में भी मजबूती से आगे बढ़ना है जहां अब तक पार्टी कमजोर रही है, जैसे तमिलनाडु, बंगाल, केरल आदि।

मोदी के नेतृत्व की सराहना: पार्टी पीएम मोदी के विकास और सुशासन की सोच को आगे बढ़ा रही है।

संगठनात्मक अनुशासन और एकता: कार्यकर्ताओं को अनुशासन, एकजुटता और समर्पण के साथ काम करना होगा, ताकि पार्टी के लक्ष्य पूरे किए जा सकें।

20 जनवरी को नामांकन भरा, निर्विरोध चुने गए.

दिल्ली में पार्टी हेडक्वार्टर में नॉमिनेशन प्रक्रिया की गई। पार्टी के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए केवल नितिन नबीन का ही नाम प्रस्तावित हुआ था। नितिन नबीन के समर्थन में कुल 37 सेट नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। नामांकन पत्रों की जांच की गई, जिसमें सभी वैध पाए गए।


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नितिन नवीन की कुछ ही देर में ताजपोशी, BJP मुख्यालय पहुंचे नेता; शाह-नड्डा की मौजूदगी

भारतीय जनता पार्टी के नेता नितिन नवीन ने निर्विरोध जीत दर्ज करके बीजेपी की कमान संभाल ली है। नितिन नवीन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन चुके हैं। आज सुबह दिल्ली के कई मंदिरों में माथा टेकने के बाद नितिन नवीन ने बीजेपी मुख्यालय का रुख किया। कुछ देर में वो अपना पदभार ग्रहण कर सकते हैं।

नई दिल्ली स्थित बीजेपी के मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं का जमावड़ा लगा है। नितिन नवीन की ताजपोशी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्र राजनाथ सिंह समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे।

गृह मंत्री अमित शाह, पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बीजेपी मुख्यालय पहुंच चुके हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा, विदेश मंत्री एस.जयशंकर, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी बीजेपी मुख्यालय पर मौजूद हैं।


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BJP में नया युग: राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नितिन नवीन ने भरा पर्चा, निर्विरोध चुना जाना तय

बिहार के युवा नेता और पूर्व मंत्री नितिन नवीन ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। नामांकन के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और जेपी नड्डा मौजूद रहे।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन प्रक्रिया पार्टी मुख्यालय में संपन्न हुई। इस दौरान विभिन्न राज्यों से पार्टी नेताओं ने नितिन नवीन के समर्थन में प्रस्ताव पत्र भी जमा किए। अगले 24 घंटों के भीतर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राज्य बीजेपी के नेताओं ने भी अपना समर्थन पत्र सौंपा।

नितिन नवीन की नामांकन प्रक्रिया के समय बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विभिन्न राज्य इकाइयों के अध्यक्ष, सांसद और अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नितिन नवीन ही एकमात्र उम्मीदवार हैं। ऐसे में उनके निर्विरोध चुने जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है। भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की औपचारिक घोषणा मंगलवार 20 जनवरी को किए जाने की संभावना है।


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