ट्रंप टैरिफ के जवाब में मंत्री पीयूष गोयल का बड़ा एलान, सभी एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए आने वाला है पैकेज

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ (Trump Tariffs on India) लगाए जाने के बावजूद भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि टैरिफ के बावजूद इस साल भारत का निर्यात पिछले साल से ज्यादा रहेगा। निर्यात बढ़ाने के मकसद से सरकार जल्दी ही सभी सेक्टर के लिए उपायों की घोषणा करेगी।

गोयल का बयान ट्रंप टैरिफ पर भारत की तरफ से अब तक का सबसे करारा जवाब कहा जा सकता है। दिल्ली में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “अगर कोई देश हमारे साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) करना चाहता है, तो हम हमेशा तैयार हैं। लेकिन किसी भी तरह का भेदभाव भारत के 140 करोड़ नागरिकों के आत्मविश्वास और स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाला है। इसलिए हम न तो झुकेंगे और न ही कभी कमजोर दिखेंगे। हम साथ मिलकर आगे बढ़ते रहेंगे और नए बाजारों पर कब्जा करेंगे। मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि इस साल हमारा निर्यात पिछले साल से ज्यादा होगा।”

गोयल ने कहा, मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि सरकार हर सेक्टर की मदद के लिए उपायों की घोषणा करेगी, ताकि घरेलू बाजार में बिक्री बढ़ने के साथ विदेशी बाजारों में भी भारत की पैठ बढ़ाई जा सके। यह साल हमारे आत्मविश्वास को परिभाषित करेगा।

एक लाख करोड़ डॉलर के निर्यात का है लक्ष्य

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष भारत ने रिकॉर्ड 824.9 अरब डॉलर का निर्यात किया। यह 2023-24 में 778.1 अरब डॉलर की तुलना में 6 प्रतिशत की वृद्धि थी। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में एक लाख करोड़ डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है।

जुलाई 2025 में भारत ने 68.25 अरब डॉलर का निर्यात किया जो पिछले वर्ष के इसी महीने के 65.31 अरब डॉलर से अधिक है। अप्रैल-जुलाई 2025 के दौरान वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात 277.63 अरब डॉलर का रहा है, जो अप्रैल-जुलाई 2024 में 263.83 अरब डॉलर था। साल के पहले चार महीने में वस्तु निर्यात 144.76 अरब डॉलर की तुलना में 149.20 अरब डॉलर रहा है।

निराशावादी तस्वीर पेश करने वालों की आलोचना

गोयल ने कहा कि वैश्विक निर्यात में अभी भारत की हिस्सेदारी बहुत कम है। उन्होंने उन विश्लेषकों की आलोचना भी की जिन्होंने अमेरिकी टैरिफ की निराशावादी तस्वीर और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके नकारात्मक प्रभाव की बात कही। कोविड-19 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति और 1990 के दशक में अमेरिकी प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए गोयल ने कहा, विश्लेषकों को यह समझना चाहिए कि भारत आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था है, इसलिए अमेरिका को कम निर्यात का भारत पर बहुत कम प्रभाव पड़ेगा।



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लखनऊ पहुंचने पर शुभांशु शुक्ला ने स्पेस को लेकर बताई बड़ी बातें

देश के नए सितारे एवं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के गगनयात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने कहा कि भारत और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) पहले से ही मिशन गगनयान और अंतरिक्ष स्टेशन के प्लान बना चुका है। बस हमें उन्हें क्रियान्वित करना है। यह मिशन अंतरिक्ष का स्वर्णिम काल है, जिसमें आप कई सारे सफल प्लान देखेंगे, जब भारत की धरती से कोई भारतीय अंतरिक्ष केंद्र जाएगा।

गोमतीनगर विस्तार में पत्रकारों से बातचीत में शुभांशु ने कहा कि मिशन अंतरिक्ष बहुत चुनौतीपूर्ण है। हमने ऐसी स्थिति बनाई है कि हम वहां जा कर रह सकते हैं। मिशन के सारे पहलू पूरे कर पाएं, इसके लिए पूरी टीम लगी थी। 

अंतरिक्ष यात्रा का बहुत यूनिक अनुभव था। इसकी कल्पना करना मुश्किल है। मेरी जो यात्रा रही है, उसमें मैंने एक ही चीज फालो किया है कि जीवन में जब कभी भी चुनौती आपके सामने हो तो उसे स्वीकार करिए और आगे बढ़िए। फिर आपको पता चल जाएगा कि आप सही कर रहे या गलत। 

अंतरिक्ष में ऐसा क्या-क्या सीखा, जो भारत के मिशन गगनयान में काम आएगा? इस पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने कहा कि मैंने अंतरिक्ष में कई प्रयोग किए। सभी प्रयोग सफल रहे। ये सभी भारत के 'गगनयान मिशन' के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। 

माइक्रोग्रैविटी में शरीर पर पड़ने वाले असर के बारे में उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी के कारण कोई भी काम करना ही नहीं, रहना भी मुश्किल होता है। वहां शुरुआत के कुछ दिन चुनौतीपूर्ण रहे। फिर सब सामान्य होने लगा। वहां से लौटने के बाद भी चुनौतियां थीं, लेकिन उन सभी से पार पाया। पहली बार अंतरिक्ष से भारत को देखना काफी अच्छा लगा। 

अपने परिवार व अपनी आस्था के बारे में कहा कि आस्था तो सभी में रहती है, लेकिन कहीं ना कहीं मुझे अपनी टीम में भी आस्था थी। उन पर भरोसा था। इसी भरोसे से मैं अंतरिक्ष तक जा पाया। 

अगर आपको धरती या अंतरिक्ष दोनों से कोई एक चुनना हो तो क्या चुनेंगे? इस पर शुभांशु ने सीधे उत्तर देने की बजाए कहा कि अंतरिक्ष बहुत चुनौतीपूर्ण मिशन है। यह ऐसा मिशन है जिसमें हम धरती को बेहतर बनाने के लिए अंतरिक्ष में जाते हैं। पहली बार भारतीय वैज्ञानिक को अंतरिक्ष में शोध का अवसर मिला। मैं गर्व से कहता हूं कि हमने 100 प्रतिशत प्रयोग किए।


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22 सितंबर से GST टैक्स स्लैब लागू करने की तैयारी

देश में टैक्स सिस्टम को सरल बनाने के लिए सरकार 22 सितंबर से नया GST टैक्स स्लैब लागू ( GST rate overhaul) करने की तैयारी में है। यह तारीख नवरात्रि (22 सितंबर से 2 अक्टूबर) के साथ मेल खाती है, जिससे त्योहारी खरीदारी (festive shopping relief) में ग्राहकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

नए स्लैब से आवश्यक वस्तुओं पर कर कम हो सकता है, जिसका फायदा आम जनता को होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और छोटे व्यवसायों को भी लाभ होगा। सरकार जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा कर सकती है।

क्या बदलने वाला है ?

अभी GST में चार स्लैब हैं- 5%, 12%, 18% और 28%। नए प्रस्ताव के तहत इसे घटाकर दो स्लैब (two-slab GST structure) 5% और 18% कर दिया जाएगा। 5% स्लैब में मेरिट गुड्स यानी ज़रूरी सामान आएंगे। 

18% स्लैब में मानक वस्तुएं और सेवाएं (Statndard goods and services) होंगी। इसके अलावा, अल्ट्रा-लक्ज़री कारें और पाप-संबंधी प्रोडक्ट्स (sin goods) पर 40% तक का स्पेशल टैक्स लगेगा।

कब होगा फैसला ?

दिल्ली में 3-4 सितंबर को GST काउंसिल (GST Council Meeting) की मीटिंग होनी है, जिसमें केंद्र और देश के सभी राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होंगे। इस मीटिंग में नई दरों को लेकर अंतिम चर्चा होगी। फैसले के 5-7 दिन बाद नोटिफिकेशन जारी होंगे और 22 सितंबर तक लागू हो सकते हैं।

क्या है मकसद ?

सरकार का कहना है कि यह सुधार टैक्स स्ट्रक्चर (GST Reforms) को आसान बनाएगा। मध्यवर्ग और MSMEs को राहत देगा और त्योहारों में डिमांड बढ़ाने में मदद करेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को इसे "GST 2.0 नेक्स्ट जेनरेशन टैक्स रिफॉर्म" कहा था। उन्होंने दावा किया कि इससे किसानों, मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारियों को फायदा मिलेगा।

आपका क्या फायदा?

अगर नया ढांचा लागू होता है तो रोजमर्रा की चीज़ों और ज़रूरी सेवाओं पर टैक्स घट सकता है। वहीं, गैर-ज़रूरी और लक्ज़री आइटम्स महंगे हो सकते हैं। 22 सितंबर से GST 2.0 लागू होने पर मार्केट और आम उपभोक्ता दोनों पर असर दिखेगा।

त्योहारों में इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े और रोज़मर्रा के सामान पर राहत मिल सकती है, लेकिन लक्ज़री आइटम्स की कीमत और बढ़ जाएगी।


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इनकम टैक्स विभाग ने आईटीआर-6 फॉर्म को किया रिलीज

इनकम टैक्स विभाग ने आईटीआर-6 फॉर्म को रिलीज कर दिया है। आईटीआर फाइलिंग के तहत आपको उपलब्ध फॉर्म से किसी एक चुनाव करना होता है। इन्हीं फॉर्म में से आईटीआर-6 भी एक है। लेकिन आईटीआर-6 फॉर्म कौन इस्तेमाल कर सकता है, इसके क्या फायदे हैं, क्या आम आदमी द्वारा भी इसे उपयोग किया जा सकता है इत्यादि प्रश्न हमारे में मन में उठते हैं।

क्या होता है आईटीआर-6?

इनकम टैक्स के अन्य फॉर्म की तरह आईटीआर-6 भी काम करता है। कंपनीज एक्ट 2013 के तहत सभी कंपनियां आईटीआर-6 का उपयोग करती है। ऐसी कंपनियां जो सेक्शन 11 के तहत क्लेम करती है, वे इस फॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर सकती।

इस फॉर्म को आम आदमी और HUF द्वारा भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। आईटीआर-6 फॉर्म का इस्तेमाल-

पब्लिक लिमिटेड कंपनियां

प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां

वन पर्सन कंपनियां

आइए अब जानते हैं कि आईटीआर फाइलिंग के लिए टैक्स कैलकुलेट कैसे कर सकते हैं-

कैसे करें इनकम टैक्स कैलकुलेट?

स्टेप 1- सबसे पहले ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाना होगा।

स्टेप 2- इसके बाद यहां अपना पैन नंबर और नाम दर्ज करें।

स्टेप 3- फिर अपने आईटीआर टाइप डाले। इनमें इंडिविजुअल, फर्म,

कंपनी या HUF इत्यादि शामिल हैं।

स्टेप 4- इसके बाद रेजिडेंटल स्टेटस का चयन करना होगा।

स्टेप 5- फिर ओल्ड टैक्स रिजीम या नई टैक्स रिजीम में से किसी एक का चयन करना होगा।

स्टेप 5- इसके साथ ही फाइनेंशियल ईयर का भी चयन करें।

स्टेप 6- जिसके बाद आप किस ऐज कैटेगरी में आते हैं, उसका चुनाव करें।

इसमें रेगुलर सिटीजन, सीनियर सिटीजन और सुपर सीनियर सिटीजन शामिल हैं।

स्टेप 7- इसके बाद आपको कुल इनकम और कुल डिडक्शन अमाउंट को शामिल करना होगा।

स्टेप 8- जिसके बाद आपको दाई ओर टैक्स समरी दिखाई देगी। जिसमें आपको कुल इनकम, कुल डिडक्शन, नए टैक्स रिजीम और ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत टैक्स दिखाई जाएगा।

स्टेप 9- इसके साथ ही अगर आप दोनों टैक्स रिजीम के बीच तुलना देखना चाहते हैं, तो

view Comparison वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।

यहां आपको बेसिक कैलकुलेटर की डिटेल्स बताई गई है।



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निर्मला सीतारमण आज संसद में पेश करेंगी आयकर बिल 2025

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद में नया आयकर बिल 2025 (Revised Income Tax Bill, 2025) पेश करेंगी। पिछले हफ्ते बिल लोकसभा में पेश किया गया था। हालांकि,लोकसभा स्थगित हो गई थी। आज (11 अगस्त) को वित्त मंत्री फिर से लोकसभा के पटल पर बिल रखेंगी।

यह नया बिल आयकर अधिनियम, 1961 (Income Tax Act, 1961) की जगह लेगा। इससे पहले शुक्रवार को वित्त मंत्री ने बिल सदन में पेश किया था, मगर सदन की कार्रवाई स्थगित होने के कारण उन्हें बिल वापस लेना पड़ा।

आयकर बिल क्यों वापस लिया गया?

आयकर बिल वापस लेने के बाद सरकार ने कमेटी के सुझावों पर इसमें कुछ बदलाव किए हैं, जिसके बाद आज इसे फिर से सदन में पेश किया जाएगा। इसपर बात करते हुए संसदीय मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने कहा-

लोकसभा चयन समिति की अध्यक्षता करने वाले बीजेपी नेता बैजयंत पांडा ने आयकर बिल में 285 सुझाव दिए हैं, जिन्हें सरकार ने स्वीकार कर लिया है। आयकर से जुड़े पुराने बिल को लेकर काफी कन्फ्यूजन है, इसलिए अब इसका नया वर्जन पेश किया जाएगा।

क्या बदलाव संभव?

बता दें कि सेलेक्ट कमेटी ने 21 जुलाई को आयकर बिल पर सुझाव पेश किए थे, जिन्हें नए बिल में शामिल किया गया है। इनमें कानून की भाषा को आसान बनाना, ड्राफ्टिंग, फ्रेज को सही तरीके से लगाने और क्रॉस रिफ्रेंसिंग जैसे बदलाव शामिल हो सकते हैं। आयकर बिल में पैनल ने कुछ बड़े बदलावों के सुझाव दिए थे।

1. टैक्स रिफंड

पिछले बिल में प्रावधान था कि अगर आयकर रिटर्न तय समयसीमा पर फाइल न किया गया तो रिफंड नहीं मिलेगा। पैनल ने इस प्रावधान को हटाने का सुझाव दिया था।

2. इंटर-कॉर्पोरेट डिविडेंड्स

आयकर अधिनियम का सेक्शन 80M के तहत कुछ कंपनियों को अंतर-कॉर्पोरेट लाभांश (Inter-Corporate Dividends) देने की बात करता है। शुक्रवार को पेश किए गए बिल में यह प्रावशान शामिल नहीं था, इस बिल को सरकार ने वापस ले लिया था।

3. शून्य TDS प्रमाण पत्र

आयकर बिल पर बनी कमेटी ने टैक्स जमा करने वालों को शून्य TDS प्रमाण पत्र (NIL TDS Certificate) देने का सुझाव दिया था।


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बिकवाली के चलते गिरकर बंद हुआ एयरटेल का शेयर

वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही नतीजों के बाद टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल लिमिटेड के शेयर में बुधवार (6 अगस्त) को गिरावट रही। हालांकि शुरुआती कारोबार में इसमें 2% की तेजी थी, लेकिन बिकवाली से चलते यह गिरावट आई। कंपनी के शेयर में यह उछाल उम्मीद के मुताबिक तिमाही नतीजों के चलते आई थी।

कंपनी ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए। नतीजों के अनुसार अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी को ₹7,422 करोड़ का मुनाफा हुआ है। सालाना आधार पर यह 57.31% बढ़ा है। अप्रैल-जून 2024 में यह ₹4,718 करोड़ रहा था।

अप्रैल-जून में रेवेन्यू 28% बढ़कर ₹49,463 करोड़

पहली तिमाही (Q1FY2026) में कंपनी ने संचालन से 49,463 करोड़ रुपए का रेवेन्यू जनरेट किया। पिछले साल के मुकाबले यह 28.46% ज्यादा है। Q1FY2025 में कंपनी ने ₹38,506 करोड़ का रेवेन्यू जनरेट किया था। वस्तुओं और सेवाओं को बेचने से मिलने वाली कुल राशि रेवेन्यू होती है।

एयरटेल के होम्स बिजनेस के राजस्व में 26% की बढ़ोतरी

एयरटेल बिजनेस: राजस्व में 7.7% की गिरावट आई। होम्स बिजनेस के राजस्व में 25.7% की वृद्धि हुई। बीती तिमाही में 9,39,000 नए ग्राहक जोड़े गए, जो फाइबर टू होम और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस दोनों सेगमेंट में मजबूत गति के कारण किसी तिमाही सबसे ज्यादा है।

डिजिटल टीवी: डिजिटल टीवी के राजस्व में सालाना आधार पर 1.8% की कमी आई।

स्मार्टफोन डेटा ग्राहक 2.13 करोड़ हुए, तिमाही आधार पर 39 लाख बढ़े

मोबाइल सर्विस: मोबाइल सर्विस के राजस्व में 21.6% की वृद्धि हुई, जो ARPU में सुधार और स्मार्टफोन ग्राहकों की वृद्धि से प्रेरित है।

मोबाइल ARPU ₹250 रहा, जो सालाना आधार पर बीते वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ₹211 था। यानी सालाना आधार पर ARPU 18.4% बढ़ा।

स्मार्टफोन डेटा ग्राहकों की संख्या सालाना आधार पर 2.13 करोड़ और तिमाही आधार पर 39 लाख बढ़ी है। यह कुल मोबाइल ग्राहक बेस का 77% है।

मोबाइल डेटा की खपत सालाना आधार पर 21.6% बढ़ी, प्रति ग्राहक खपत 26.9 जीबी/माह है।

हमारी प्रति यूजर आय इंडस्ट्री में सबसे अधिक

नतीजों पर भारती एयरटेल के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) गोपाल विट्टल ने कहा,

एयरटेल ने इस तिमाही में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। कंपनी ने 40 लाख नए स्मार्टफोन डेटा ग्राहक जोड़े हैं। साथ ही प्रति यूजर औसत आय (ARPU) 250 रुपए बनाए रखा, जो बाजार में सबसे ज्यादा है।

1995 में हुई थी भारती एयरटेल की शुरुआत

भारत सरकार ने 1992 में पहली बार मोबाइल सेवा के लिए लाइसेंस बांटने शुरू किए। कंपनी के फाउंडर सुनील मित्तल ने इस अवसर को समझा और फ्रेंच कंपनी विवेंडी के साथ मिलकर दिल्ली और आस-पास के इलाकों के लाइसेंस हासिल किए। 1995 में मित्तल ने सेल्युलर सर्विस ऑफर करने के लिए भारती सेल्युलर लिमिटेड बनाई और एयरटेल ब्रांड के तहत काम शुरू किया।


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सोना ₹1,00,904 प्रति 10 ग्राम के ऑलटाइम हाई पर

सोने के दाम आज यानी 7 अगस्त को अपने ऑलटाइम हाई पर पहुंच गए हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 24 कैरेट सोने का दाम 452 रुपए बढ़कर 1,00,904 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले सोने का भाव 1,00,452 रुपए पर था।

वहीं, चांदी की कीमत 1,020 रुपए बढ़कर 1,14,505 रुपए प्रति किलो हो गई है। इससे पहले चांदी 1,13,485 रुपए पर थी। वहीं, 23 जुलाई को चांदी ने 1,15,850 रुपए ऑल टाइम हाई बनाया था।

भोपाल सहित 4 महानगरों में 10 ग्राम सोने की कीमत

दिल्ली: 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,02,700 और 22 कैरेट सोने की कीमत ₹94,150

मुंबई: 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,02,550 और 22 कैरेट सोने की कीमत ₹94,000

कोलकाता: 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,02,550 और 22 कैरेट सोने की कीमत ₹94,000

चेन्नई: 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,02,550 और 22 कैरेट सोने की कीमत ₹94,000

भोपाल: 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,02,600 और 22 कैरेट सोने की कीमत ₹94,050

इस साल ₹1 लाख 4 हजार तक जा सकता है सोना

केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया कहते हैं कि अमेरिका के टैरिफ के चलते जियो पॉलिटिकल टेंशन बने हुए हैं। इससे गोल्ड को सपोर्ट मिल रहा है। इससे गोल्ड की डिमांड बढ़ रही है। ऐसे में इस साल सोना 1 लाख 4 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है। वहीं चांदी इस साल 1 लाख 30 हजार रुपए तक जा सकती है।

सोना इस साल अब तक ₹24,742 महंगा हुआ

इस साल यानी 1 जनवरी से अब तक 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 76,162 रुपए से 24,742 रुपए बढ़कर 1,00,904 रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी का भाव भी 86,017 रुपए प्रति किलो से 28,488 रुपए बढ़कर 1,14,505 रुपए पर पहुंच गया है। वहीं पिछले साल यानी 2024 में सोना 12,810 रुपए महंगा हुआ था।

सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें

हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। सोने पर 6 अंकों का हॉलमार्क कोड रहता है। इसे हॉलमार्क यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी HUID कहते हैं। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह होता है- AZ4524। हॉलमार्किंग के जरिए ये पता करना संभव है कि कोई सोना कितने कैरेट का है।



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सोना ₹1,00,672 प्रति 10 ग्राम के ऑलटाइम हाई पर

सोने के दाम आज यानी 6 अगस्त को अपने ऑलटाइम हाई पर पहुंच गए हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 24 कैरेट सोने का दाम 596 रुपए बढ़कर 1,00,672 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। इससे पहले सोने का भाव 1,00,076 रुपए पर था।

वहीं, चांदी की कीमत 1,154 रुपए बढ़कर 1,13,576 रुपए प्रति किलो हो गई है। इससे पहले चांदी 1,12,422 रुपए पर थी। वहीं, 23 जुलाई को चांदी ने 1,15,850 रुपए ऑल टाइम हाई बनाया था।

भोपाल सहित 4 महानगरों में 10 ग्राम सोने की कीमत

दिल्ली: 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,02,480 और 22 कैरेट सोने की कीमत ₹93,950

मुंबई: 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,02,330 और 22 कैरेट सोने की कीमत ₹93,800

कोलकाता: 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,02,330 और 22 कैरेट सोने की कीमत ₹93,800

चेन्नई: 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,02,330 और 22 कैरेट सोने की कीमत ₹93,800

भोपाल: 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,02,270 और 22 कैरेट सोने की कीमत ₹93,850

इस साल ₹1 लाख 4 हजार तक जा सकता है सोना केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया कहते हैं कि अमेरिका के टैरिफ के चलते जियो पॉलिटिकल टेंशन बने हुए हैं। इससे गोल्ड को सपोर्ट मिल रहा है। इससे गोल्ड की डिमांड बढ़ रही है। ऐसे में इस साल सोना 1 लाख 4 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है। वहीं चांदी इस साल 1 लाख 30 हजार रुपए तक जा सकती है।

इस साल अब तक ₹24,510 महंगा हुआ सोना इस साल यानी 1 जनवरी से अब तक 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 76,162 रुपए से 24,235 रुपए बढ़कर 1,00,672 रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी का भाव भी 86,017 रुपए प्रति किलो से 27,559 रुपए बढ़कर 1,13,576 रुपए पर पहुंच गया है। वहीं पिछले साल यानी 2024 में सोना 12,810 रुपए महंगा हुआ था।

सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। सोने पर 6 अंकों का हॉलमार्क कोड रहता है। इसे हॉलमार्क यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी HUID कहते हैं। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह होता है- AZ4524। हॉलमार्किंग के जरिए ये पता करना संभव है कि कोई सोना कितने कैरेट का है।


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RBI ने रेपो रेट में बदलाव नहीं किया,5.50% पर बरकरार रखा, लोन-EMI नहीं बदलेंगे

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस बार रेपो रेट में बदलाव नहीं किया है। इसे 5.5% पर जस का तस रखा है। यानी लोन महंगे नहीं होंगे और आपकी EMI भी नहीं बढ़ेगी। RBI ने जून में ब्याज दर 0.50% घटाकर 5.5% की थीं।

यह फैसला मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की 4 से 6 अगस्त तक चली मीटिंग में लिया गया। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज यानी 6 अगस्त को इसकी जानकारी दी।

RBI गवर्नर ने कहा कि कमेटी के सभी मेंबर्स ब्याज दरों में स्थिर रखने के पक्ष में थे। टैरिफ अनिश्चितता के कारण ये फैसला लिया गया है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI जिस रेट पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। इसमें बदलाव नहीं होने का मतलब है कि ब्याज दरें न तो बढ़ेंगी न घटेंगी।

गवर्नर बोले- ग्लोबल ट्रेड की चुनौतियां बनी हुई हैं

RBI गवर्नर ने कहा- मानसून सीजन अच्छा चल रहा है। साथ ही, त्योहारों का सीजन भी नजदीक आ रहा है, जो आमतौर पर आर्थिक गतिविधियों में उत्साह और तेजी लाता है।

ये अनुकूल माहौल, सरकार और रिजर्व बैंक की सहायक नीतियों के साथ, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निकट भविष्य में अच्छा संकेत देता है। भले ही ग्लोबल ट्रेड की चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं कुछ हद तक कम हुई हैं।

इस साल 3 बार घटा रेपो रेट, 1% की कटौती हुई

RBI ने फरवरी में हुई मीटिंग में ब्याज दरों को 6.5% से घटाकर 6.25% कर दिया था। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की ओर से ये कटौती करीब 5 साल बाद की गई थी।

दूसरी बार अप्रैल में हुई मीटिंग में भी ब्याज दर 0.25% घटाई गई। जून में तीसरी बार दरों में 0.50% कटौती हुई। यानी, मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने तीन बार में ब्याज दरें 1% घटाई।

रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है?

किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है, तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है।

पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है।

इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है।

हर दो महीने में होती है RBI की मीटिंग

मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। RBI की मीटिंग हर दो महीने में होती है।

बीते दिनों रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठकों का शेड्यूल जारी किया था। इस वित्तीय वर्ष में कुल 6 बैठकें होंगी। पहली बैठक 7-9 अप्रैल को हुई थी।


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UPI से लेकर गैस सिलेंडर तक आज से बदल गए ये नियम, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर

आज से नया महीना शुरू हो चुका है। हम जुलाई से अगस्त में प्रवेश कर चुके हैं। इसी के साथ कई चीजें भी बदल गई हैं। आज से हुए बदलावों का आपकी जेब और जीवन में सीधा असर पड़ेगा। यूपीआई से लेकर गैस सिलेंडर के दामों में बदलाव हुआ है। आइए एक-एक करके जानते हैं कि आज से क्या-क्या बदलाव हुए हैं।

UPI में हुए बड़े बदलाव

आज यानी 1 अगस्त 2025 से यूपीआई में कई बड़े बदलाव हुए हैं। ये बदलाव UPI ऐप्स की कार्यक्षमता को और बढ़ाएंगे और उपयोगकर्ताओं को धोखाधड़ी से बचाएंगे। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा लागू किए गए ये नियम Google Pay, PhonePe या Paytm जैसे सभी भुगतान प्लेफॉर्म पर लागू होंगे।

आज से आप UPI ऐप्स के जरिए दिन में 50 बार अपना बैंक बैलेंस चेक कर पाएंगे।

आज यानी एक अगस्त से एक यूजर प्रतिदिन अधिकतम 20 यूपीआई लेनदेन कर सकता है, जिसकी सीमा ₹1 लाख है।

अगर कोई पेमेंट अटक जाती है तो आप ट्रांजैक्शन स्टेटस सिर्फ 3 बार चेक कर सकते हैं, वो भी हर बार 90 सेकेंड के गैप पर।

अब ऑटो-पे (जैसे EMI, सब्सक्रिप्शन या बिल पेमेंट) दिन में किसी भी समय नहीं हो सकता है। यह एक टाइम पीरियड पर ही होगा। अब ऑटो पे सुबह के 10 बजे से पहले और रात के 9:30 बजे के बाद ही होंगे।

LPG गैस सिलेंडर हुआ सस्ता

आज यानी 1 अगस्त 2025 को कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम सस्ते हुए है। कमर्शियल गैस सिलेंडर 34 रुपये 50 पैसे तक सस्ता हो गया है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने एलपीजी सिलेंडर के नए रेट्स भी जारी कर दिए हैं। लेकिन घरेलू गैस सिलेंडर यानी 14 किलो वाले LPG सिलेंडर के दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

SBI क्रेडिट कार्ड में अब नहीं मिलेगी यह सुविधा

भारत के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई ने अपने कुछ  को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड्स (ELITE और PRIME) मिलने वाले फ्री एयर एक्सीडेंट इंश्योरेंस को खत्म करने की घोषणा की है। हालांकि, यह 11 अगस्त से लागू होगा। अभी तक इसके तहत 50 लाख से 1 करोड़ रुपए तक का कवर मिलता था। लेकिन अब 11 अगस्त से यह बंद हो जाएगा।

महंगी होगी हवाई यात्रा

अगस्त महीने में हवाई यात्रा महंगी हो सकती है। देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (हवाई जहाज में पड़ने वाला फ्यूल) यानी ATF के दाम 2677.88 रुपए प्रति किलोलीटर (1000L) की बढ़ोतरी कर दी है। यानी इसमें 3% की बढ़ोतरी हुई है। अब यह बढ़कर प्रति 1000 लीटर 92,021.93 रुपये हो गई है। ऐसे में हवाई यात्रा महंगी होने की संभावना है।


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