लगातार तेजी के बाद सोना-चांदी के दाम गिरे, निवेशकों को मिली राहत

लगातार चार दिन तक ऑल टाइम हाई पर रहने के बाद आज 30 जनवरी को सोना और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसकी मुख्य वजह बाजार में मुनाफावसूली है। एक ही दिन में सोना 6,865 रुपये और चांदी 22,825 रुपये सस्ती हो गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव घटकर 1,68,475 रुपये रह गया, जबकि इससे पहले गुरुवार को यह 1,75,340 रुपये प्रति 10 ग्राम था। वहीं चांदी की कीमत भी गिरकर 3,57,163 रुपये प्रति किलो हो गई, जो एक दिन पहले 3,79,988 रुपये प्रति किलो थी।

IBJA के रेट्स में 3% GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मार्जिन शामिल नहीं होता, इसी वजह से अलग-अलग शहरों में सोना-चांदी के दाम अलग नजर आते हैं। इन्हीं रेट्स का इस्तेमाल RBI सोवरेन गोल्ड बॉन्ड और कई बैंक गोल्ड लोन के रेट तय करने में करते हैं।

हालांकि गिरावट के बावजूद जनवरी में अब तक सोना और चांदी दोनों जबरदस्त तेजी दिखा चुके हैं। जनवरी के 29 दिनों में सोना कुल 35,280 रुपये महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को जहां 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,33,195 रुपये था, वहीं अब यह 1,68,475 रुपये पर पहुंच चुका है। इसी तरह चांदी भी 1,26,743 रुपये महंगी हुई है और 2,30,420 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 3,57,163 रुपये प्रति किलो हो गई है।

सोना खरीदते समय हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही लें और खरीद के दिन की कीमत को IBJA जैसी भरोसेमंद वेबसाइट से जरूर क्रॉस-चेक करें। वहीं असली चांदी की पहचान के लिए मैग्नेट टेस्ट, आइस टेस्ट, स्मेल टेस्ट और कपड़े से रगड़कर जांच जैसे आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं।


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आर्थिक सर्वे में ‘मुफ्त की रेवड़ियों’ पर चेतावनी: राजकोषीय संतुलन पर पड़ सकता है असर

29 जनवरी को संसद में पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे में राज्यों द्वारा दी जा रही ‘मुफ्त की रेवड़ियों’ पर गंभीर चेतावनी दी गई है। सर्वे के मुताबिक, बिना शर्त कैश ट्रांसफर योजनाएं राज्यों के वित्तीय संसाधनों पर भारी दबाव डाल रही हैं, जिससे स्कूल, अस्पताल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए बजट कम होता जा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2023 से 2026 के बीच ऐसी योजनाएं लागू करने वाले राज्यों की संख्या पांच गुना से ज्यादा बढ़ी है और इनमें से करीब आधे राज्य पहले से ही राजस्व घाटे और कर्ज की समस्या से जूझ रहे हैं।

सर्वे में माना गया है कि कैश ट्रांसफर से गरीब परिवारों को तुरंत राहत मिलती है, लेकिन अगर इन्हें स्किल डेवलपमेंट और रोजगार से नहीं जोड़ा गया तो काम करने की इच्छा कम होने का खतरा है। इसलिए इन योजनाओं में समय-सीमा (सनसेट क्लॉज) और नियमित समीक्षा की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नई कैश स्कीम्स के कारण राज्यों का पूंजीगत खर्च घट रहा है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश ज्यादा टिकाऊ लाभ देता है।

इकोनॉमिक सर्वे में लोगों की शारीरिक और मानसिक सेहत पर भी चिंता जताई गई है। जंक फूड की बढ़ती खपत और बच्चों में मोटापे को देखते हुए सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक जंक फूड विज्ञापनों पर रोक लगाने का सुझाव दिया गया है। साथ ही सोशल मीडिया के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल को लेकर उम्र सीमा तय करने, प्लेटफॉर्म्स पर उम्र सत्यापन लागू करने और बच्चों को साधारण फोन देने की सलाह दी गई है।

सर्वे के अनुसार, आने वाले वर्षों में महंगाई दर RBI के तय दायरे में रहने की उम्मीद है और FY27 में GDP ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रह सकती है। रोजगार के मोर्चे पर नई नौकरियां पैदा हुई हैं और गिग वर्क कमाई का बड़ा जरिया बनकर उभरा है। खेती-किसानी में रिकॉर्ड अनाज उत्पादन से महंगाई काबू में रही है, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार और एक्सपोर्ट दोनों में मजबूती दिखी है। कुल मिलाकर, इकोनॉमिक सर्वे ने अर्थव्यवस्था की मजबूती के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों और सुधारों की स्पष्ट तस्वीर पेश की है।


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संसद में पेश हुआ देश का ‘आर्थिक रिपोर्ट कार्ड’: विकास, महंगाई और राजकोषीय हालात पर नजर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 29 जनवरी को संसद में देश का ‘आर्थिक रिपोर्ट कार्ड’ यानी इकोनॉमिक सर्वे पेश किया। सर्वे के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है, जबकि चालू वित्त वर्ष में विकास दर 7.4% रह सकती है। इसमें महंगाई, रोजगार, खेती-किसानी, सरकारी कर्ज और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे अहम पहलुओं का विस्तृत आकलन किया गया है। सर्वे में बताया गया है कि महंगाई दर आने वाले वर्षों में RBI के तय दायरे में रहने की संभावना है, राजकोषीय घाटा लगातार घट रहा है और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति मजबूत बनी हुई है। यह सर्वे बजट से पहले देश की आर्थिक सेहत, चुनौतियों और आगे की रणनीति की तस्वीर पेश करता है।


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संसद में राष्ट्रपति मुर्मु का संबोधन: अर्थव्यवस्था-रोजगार और पूर्वी भारत विकास पर जोर

संसद के बजट सत्र 2026-27 की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संबोधन से हुई। लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने सरकार की प्राथमिकताओं, उपलब्धियों और आगे की दिशा स्पष्ट शब्दों में रखी।

विपक्ष के हंगामे के बीच शुरू हुए इस भाषण में सामाजिक न्याय, अर्थव्यवस्था, अंतरिक्ष, पूर्वी भारत और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दे प्रमुख रूप से छाए रहे।

दो चरणों में बजट सत्र

बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहला चरण बुधवार से शुरू होकर 13 फरवरी तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें बजट पर विस्तृत चर्चा होगी। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी।

पहले चरण में 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण संसद में पेश किया जाएगा। इसके बाद 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आम बजट पेश करेंगी। पूरे सत्र में कुल 30 बैठकें प्रस्तावित हैं।

सामाजिक न्याय पर सरकार की प्रतिबद्धता

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि केंद्र सरकार सामाजिक न्याय के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि आज देश के लगभग 95 करोड़ नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

उनके अनुसार, पिछले 10 वर्षों में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार के तीसरे कार्यकाल में गरीबों को और सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही भ्रष्टाचार और घोटालों पर लगाम लगाकर सार्वजनिक धन के सही उपयोग को सुनिश्चित किया गया है।

अंतरिक्ष में भारत की ऐतिहासिक उपलब्धियां

संबोधन में राष्ट्रपति ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला का अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक पहुंचना एक ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत है।

राष्ट्रपति ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। गगनयान मिशन पर देश उत्साह के साथ काम कर रहा है और अब अंतरिक्ष पर्यटन भी भारतीयों की पहुंच में आता दिख रहा है।

पूर्वी भारत के विकास पर जोर

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सरकार पूर्वी भारत के विकास को विशेष प्राथमिकता दे रही है। बुनियादी ढांचे, उद्योग और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए इस क्षेत्र में कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है।

उन्होंने संकेत दिए कि क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करना सरकार की विकास नीति का अहम हिस्सा है, ताकि देश के हर हिस्से में समान प्रगति सुनिश्चित की जा सके।

अर्थव्यवस्था, सुधार और रोजगार पर फोकस

राष्ट्रपति ने कहा कि देश में वर्तमान समय में 150 वंदे भारत ट्रेनें संचालित हो रही हैं, जो आधुनिक बुनियादी ढांचे का प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि यूरोपीय संघ के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों को नई गति देगा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगा।

उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पुराने नियमों में बदलाव किया जा रहा है और सरकार ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के रास्ते पर आगे बढ़ रही है।

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि पिछड़े वर्गों का कल्याण सरकार की प्राथमिकता है और महिलाओं को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के जरिए सशक्त बनाया जा रहा है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए बताया कि इस अभियान ने भारत के साहस और संकल्प को दुनिया के सामने रखा है।


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सोने ने बनाया नया रिकॉर्ड हाई, 1.45 लाख रुपये के पार पहुंचे दाम

हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को सोने और चांदी की कीमतें एक बार फिर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आठ यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी, जिससे निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर सोने और चांदी की ओर रुख किया।

सोमवार के ट्रेडिंग सत्र में एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 1,45,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। एमसीएक्स गोल्ड फरवरी वायदा 2,438 रुपये यानी 1.71 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,44,955 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया। स्पॉट गोल्ड 1.6 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 4,700 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचा और बाद में 4,670 डॉलर के आसपास स्थिर हो गया। इस दौरान सोने ने अब तक का सबसे ऊंचा स्तर छुआ।

चांदी की कीमतों में भी तेज तेजी देखने को मिली। मार्च डिलीवरी वाली चांदी ने 3,01,315 रुपये प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड स्तर हासिल किया। एमसीएक्स सिल्वर मार्च वायदा 13,062 रुपये यानी 4.54 प्रतिशत की बढ़त के साथ 3,00,824 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई।

सोने और चांदी में आई इस तेजी को उस वक्त और बल मिला, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका तब तक यूरोप के आठ देशों से आने वाले उत्पादों पर ज्यादा टैक्स लगाएगा, जब तक उसे ग्रीनलैंड खरीदने की अनुमति नहीं मिलती। इस बयान के बाद यूरोपीय संघ के देशों ने अमेरिका को मनाने और जरूरत पड़ने पर जवाबी कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है।

मेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटी उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री के अनुसार, वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता, अमेरिका की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता और लगातार जारी भू-राजनीतिक तनाव सोने की कीमतों को समर्थन दे रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में ब्याज दरों में आगे कटौती की उम्मीद भी सोने और चांदी की कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए हुए है, खासकर 2025 में मजबूत प्रदर्शन के बाद।

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसकी वजह डॉलर में अस्थिरता और अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट का टैरिफ को लेकर आने वाला फैसला है। तकनीकी स्तरों की बात करें तो सोने को 1,41,650 से 1,40,310 रुपये के बीच सपोर्ट मिल सकता है, जबकि 1,44,150 से 1,45,670 रुपये के दायरे में रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है। वहीं चांदी के लिए 2,85,810 से 2,82,170 रुपये का स्तर सपोर्ट और 2,94,810 से 2,96,470 रुपये का स्तर रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स चांदी भी मजबूती के साथ 93 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है। हाल ही में यह 94.30 डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बढ़ती मांग के चलते चांदी की कीमतों को लंबे समय तक समर्थन मिल सकता है। हालांकि, ऑगमोंट की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कुछ निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं, जिससे चांदी की कीमत 84 डॉलर प्रति औंस या करीब 2,60,000 रुपये प्रति किलो तक गिर सकती है, लेकिन इसके बाद दोबारा तेजी देखने को मिल सकती है।


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चांदी के भाव में जबरदस्त तेजी, तीन दिन में ₹34 हजार की बढ़ोतरी

सोने और चांदी की कीमतें आज 14 जनवरी को लगातार तीसरे दिन ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गईं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी की कीमत ₹14,145 बढ़कर ₹2,77,175 हो गई है। इससे पहले सोमवार को चांदी ने ₹2,63,032 प्रति किलो का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। बीते तीन दिनों में चांदी ₹34,000 से ज्यादा महंगी हो चुकी है।

वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना आज ₹1,868 की तेजी के साथ ₹1,42,152 के ऑल-टाइम हाई पर खुला। सोमवार को इसका भाव ₹1,40,482 प्रति 10 ग्राम था।

शहरों में रेट अलग क्यों होते हैं?

IBJA द्वारा जारी कीमतों में 3% GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स मार्जिन शामिल नहीं होते, इसलिए अलग-अलग शहरों में सोने-चांदी के दाम अलग रहते हैं। इन्हीं रेट्स के आधार पर RBI सोवरेन गोल्ड बॉन्ड और कई बैंक गोल्ड लोन की वैल्यू तय करते हैं।

2025 में सोना 75% और चांदी 167% महंगी

साल 2025 में सोने की कीमत में ₹57,033 (करीब 75%) की बढ़ोतरी हुई। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम सोना ₹76,162 था, जो 31 दिसंबर 2025 को बढ़कर ₹1,33,195 हो गया।

इसी दौरान चांदी के भाव में ₹1,44,403 (167%) की उछाल आई। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी ₹86,017 थी, जो साल के अंत तक ₹2,30,420 प्रति किलो पहुंच गई।

सोने में तेजी के 3 बड़े कारण

डॉलर की कमजोरी: अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती से डॉलर कमजोर हुआ, जिससे सोने की होल्डिंग कॉस्ट घटी।

जियो-पॉलिटिकल तनाव: रूस-यूक्रेन युद्ध समेत वैश्विक तनाव से निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर बढ़े।

रिजर्व बैंकों की खरीद: चीन जैसे देश अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं, सालाना 900 टन से ज्यादा खरीदारी हो रही है।

चांदी में तेजी के 3 प्रमुख कारण

इंडस्ट्रियल डिमांड: सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और EV सेक्टर में भारी इस्तेमाल से मांग बढ़ी।

टैरिफ का डर: अमेरिकी कंपनियां स्टॉक जमा कर रही हैं, जिससे ग्लोबल सप्लाई घट रही है।

पहले से खरीदारी: मैन्युफैक्चरर्स प्रोडक्शन रुकने के डर से अग्रिम खरीद कर रहे हैं।

असली चांदी पहचानने के 4 आसान तरीके

मैग्नेट टेस्ट: असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती।

आइस टेस्ट: असली चांदी पर बर्फ बहुत तेजी से पिघलती है।

स्मेल टेस्ट: असली चांदी में कोई गंध नहीं होती।

क्लॉथ टेस्ट: सफेद कपड़े पर रगड़ने से काला निशान आए तो चांदी असली होती है।


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चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, ₹12 हजार टूटी, ₹2.36 लाख/kg पर पहुंची

सोने और चांदी की कीमतों में आज यानी 8 जनवरी को गिरावट दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का भाव 10 ग्राम पर 1,232 रुपये घटकर 1,35,443 रुपये रह गया है। इससे पहले इसका दाम 1,36,675 रुपये था।

चांदी की कीमत में भी तेज गिरावट देखने को मिली है। एक किलो चांदी का भाव 12,225 रुपये कम होकर 2,35,775 रुपये प्रति किलो पर आ गया है। इससे पहले चांदी 2,48,000 रुपये प्रति किलो के स्तर पर थी, जो इसका ऑल टाइम हाई भी था।

प्रॉफिट बुकिंग से दबाव

केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, चांदी के दाम कल रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे, जिसके बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। इसी वजह से आज चांदी की कीमतों में ज्यादा गिरावट देखने को मिली। सोने में भी प्रॉफिट बुकिंग का असर दिखाई दे रहा है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी। आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है। अनुमान है कि चांदी इस साल 2.75 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है, जबकि सोना 10 ग्राम पर 1.50 लाख रुपये के स्तर को पार कर सकता है।

2025 में सोना-चांदी ने दिया जोरदार रिटर्न

पिछले साल यानी 2025 में सोने की कीमत में 57,033 रुपये यानी करीब 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76,162 रुपये का था, जो 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर 1,33,195 रुपये हो गया।

इसी दौरान चांदी की कीमत में 1,44,403 रुपये यानी करीब 167 प्रतिशत की तेजी आई। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी 86,017 रुपये की थी, जो 31 दिसंबर 2025 को 2,30,420 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई।

ETF के जरिए कर सकते हैं निवेश

कम रकम से सोने या चांदी में निवेश करने के लिए गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) एक बेहतर विकल्प हो सकते हैं। ये ETF सोने-चांदी की कीमतों के उतार-चढ़ाव को ट्रैक करते हैं और शेयरों की तरह BSE और NSE पर खरीदे-बेचे जा सकते हैं।

ETF में निवेश करने पर भौतिक सोना या चांदी नहीं मिलती, लेकिन जब निवेशक इससे बाहर निकलता है, तो उस समय के बाजार भाव के हिसाब से रकम मिल जाती है।

ETF से निवेश के फायदे

• स्टोरेज की चिंता नहीं: डीमैट अकाउंट में डिजिटल फॉर्म में रहता है।

• कम खर्च: कोई GST या मेकिंग चार्ज नहीं, सिर्फ कम एक्सपेंस रेशियो।

• आसान खरीद-बिक्री: स्टॉक एक्सचेंज पर रियल टाइम ट्रेडिंग।

• शुद्ध एक्सपोजर: गोल्ड ETF 99.5% प्योर गोल्ड को ट्रैक करता है।

• डाइवर्सिफिकेशन: पोर्टफोलियो में स्थिरता और महंगाई से बचाव।

• SIP की सुविधा: छोटी रकम से निवेश की शुरुआत संभव।


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सोना-चांदी के भाव में लगातार तीसरे दिन गिरावट

नए साल के पहले दिन यानी 1 जनवरी 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 44 रुपये सस्ता होकर 1,33,151 रुपये पर आ गया है। इससे पहले यह 1,33,195 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था।

वहीं, एक किलो चांदी की कीमत 2,520 रुपये घटकर 2,27,900 रुपये हो गई है, जो एक दिन पहले 2,30,420 रुपये प्रति किलो थी। यह लगातार तीसरा दिन है जब सोने-चांदी के भाव में गिरावट देखी जा रही है।

इससे पहले 29 दिसंबर को कारोबार के दौरान सोना 1,38,161 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,43,483 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी, जो दोनों धातुओं का अब तक का ऑल टाइम हाई स्तर रहा है।

2025 में रिकॉर्ड तेजी

पिछले साल यानी 2025 में सोने की कीमत में करीब 57,033 रुपये (75%) की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 31 दिसंबर 2024 को 24 कैरेट सोना 76,162 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर 1,33,195 रुपये हो गया।

इसी अवधि में चांदी के भाव में भी जबरदस्त उछाल आया। चांदी की कीमत 1,44,403 रुपये (167%) बढ़ी और 86,017 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 2,30,420 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई।

अलग-अलग शहरों में दाम अलग क्यों?

IBJA द्वारा जारी किए गए रेट्स में 3% GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स मार्जिन शामिल नहीं होते हैं। इसी वजह से अलग-अलग शहरों में सोने-चांदी के दाम अलग हो सकते हैं। इन कीमतों का इस्तेमाल RBI द्वारा सोवरेन गोल्ड बॉन्ड और कई बैंक गोल्ड लोन के रेट तय करने में करते हैं।

सोने में तेजी के प्रमुख कारण

डॉलर में कमजोरी: अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती से डॉलर कमजोर हुआ, जिससे सोना सस्ता निवेश विकल्प बना।

भूराजनैतिक तनाव: रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक तनाव के कारण निवेशकों का झुकाव सुरक्षित निवेश यानी सोने की ओर बढ़ा।

सेंट्रल बैंक की खरीद: चीन समेत कई देश अपने रिजर्व में बड़ी मात्रा में सोना जोड़ रहे हैं, जिससे कीमतों को समर्थन मिला।

चांदी में तेजी के कारण

औद्योगिक मांग: सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों में चांदी की खपत बढ़ी है।

टैरिफ का डर: अमेरिका में संभावित टैरिफ को लेकर कंपनियां चांदी का स्टॉक जमा कर रही हैं।

मैन्युफैक्चरिंग दबाव: सप्लाई बाधित होने के डर से पहले से खरीदारी बढ़ी है।

आगे क्या रहेगा रुझान?

केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के अनुसार, चांदी की मांग मजबूत बनी हुई है और अगले एक साल में इसके 2.75 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की संभावना है। वहीं, साल के अंत तक यह 2.10 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को छू सकती है।

सोने की बात करें तो इसकी मांग भी बनी हुई है और आने वाले समय में इसके 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार जाने की उम्मीद जताई जा रही है।


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डेटा लेने से पहले कंपनियों को बताना होगा क्यों ले रहीं और उसका क्या उपयोग होगा

भारत में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट 2023 अब पूरी तरह लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने 14 नवंबर को इसके नियम नोटिफाई कर दिए, जिससे आम लोगों की प्राइवेसी और डिजिटल सुरक्षा को नई मजबूती मिली है। यह कानून डिजिटल पर्सनल डेटा को हैंडल करने वाली सभी कंपनियों (डेटा फिड्यूशरी) की जिम्मेदारियां तय करता है और नागरिकों को डेटा से जुड़े अधिकार देता है।

बच्चों और दिव्यांगों के लिए कड़े नियम

18 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा इस्तेमाल करने के लिए अब पेरेंट्स की अनुमति जरूरी होगी। हेल्थ, एजुकेशन और इमरजेंसी से जुड़े मामलों में ही राहत मिलेगी। दिव्यांग, जो स्वयं निर्णय नहीं ले सकते, उनके लिए वेरिफाइड लीगल गार्जियन की कंसेंट जरूरी होगी।

DPDP एक्ट की 5 बड़ी बातें

1. बिना कंसेंट डेटा नहीं

कोई ऐप या कंपनी आपका डेटा लेने से पहले यह बताएगी कि वह इसका क्या उपयोग करेगी। आपकी अनुमति बिना डेटा लिया या प्रोसेस नहीं किया जाएगा।

2. डेटा का सीमित उपयोग

कंपनियां आपका डेटा सिर्फ उसी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल कर सकेंगी, जिसकी जानकारी उन्होंने दी है। उदाहरण: शॉपिंग ऐप ऑर्डर के लिए डेटा ले सकती है, लेकिन आपकी इजाजत बिना मार्केटिंग के लिए नहीं।

3. डेटा पर आपका पूरा नियंत्रण

आप अपनी पर्सनल जानकारी कभी भी देख सकते हैं, सुधार सकते हैं या डिलीट करवाने का अधिकार रखते हैं। कंपनियों को 90 दिनों में जवाब देना अनिवार्य है।

4. डेटा लीक पर तुरंत सूचना

अगर डेटा ब्रेक होता है, तो कंपनी को तुरंत आसान भाषा में यह बताना होगा कि क्या हुआ, जोखिम क्या हैं और क्या सावधानी रखनी है।

5. शिकायत आसान, डिजिटल बोर्ड

अगर कोई समस्या हो तो डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड पर ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है। निर्णय से असंतुष्ट होने पर TDSAT में अपील का विकल्प होगा

डेटा ब्रेक और शिकायतों का प्रोसेस

किसी डेटा ब्रेक की स्थिति में कंपनियों को प्रभावित लोगों को तुरंत जानकारी देनी होगी। लोग अपना डेटा एक्सेस, करेक्ट, अपडेट या इरेज कराने का अधिकार रखते हैं—और इन रिक्वेस्ट्स का जवाब 90 दिनों में देना पड़ेगा। बोर्ड पूरी तरह डिजिटल होगा और शिकायतें ऐप/ऑनलाइन पोर्टल से दर्ज होंगी।

अब 8 महत्वपूर्ण सवालों के आसान जवाब

1. क्या पहले ऐसी सुविधा नहीं थी?

पहले IT एक्ट 2000 और IT रूल्स 2021 थे, जिनका फोकस कंटेंट और चाइल्ड सेफ्टी पर था। लेकिन ‘वेरिफायबल पैरेंटल कंसेंट’ का कोई सख्त नियम नहीं था—सिर्फ उम्र बताना काफी माना जाता था।

2. अब क्या बदला?

DPDP 2025 के तहत अब बच्चों के किसी भी प्रकार के डेटा के लिए पैरेंटल कंसेंट अनिवार्य है। ट्रैकिंग, टारगेटेड ऐड और बिहेवियर मॉनिटरिंग पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। उम्र की जांच अब AI या ID वेरिफिकेशन से होगी।

3. अब पैरेंट्स को क्या करना होगा?

यदि बच्चा सोशल मीडिया अकाउंट बनाना चाहता है, तो पैरेंट्स को लॉगिन करके ईमेल/फोन वेरिफाई करना होगा और डिजिटल कंसेंट देना होगा। कंसेंट कभी भी वापस लिया जा सकता है।

4. फायदे क्या हैं?

बच्चों की प्राइवेसी और सुरक्षा बढ़ेगी

पैरेंट्स को डेटा पर पूरा कंट्रोल मिलेगा

साइबरबुलिंग और टारगेटेड स्कैम्स कम होंगे

भारत का डेटा लॉ वैश्विक स्तर के बराबर होगा

5. अगर बच्चा झूठी उम्र डाल दे?

ऐप संदेह होने पर अतिरिक्त वेरिफिकेशन मांगेगा। बाद में पता चलने पर डेटा डिलीट करना पड़ेगा और कंपनी पर जुर्माना लग सकता है। बच्चे पर कानूनी जिम्मेदारी नहीं होगी।

6. अगर फोन फॉर्मेट हो जाए?

ऐसे में पुरानी कंसेंट इनवैलिड मानी जा सकती है। दोबारा लॉगिन पर नया कंसेंट लेना होगा। कंपनियों को डेटा का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना पड़ेगा।

7. क्या नियम पूरी तरह सफल होगा?

पूरी तरह नहीं।

बच्चे आसानी से फेक एज डाल सकते हैं

ग्रामीण इलाकों में पैरेंटल वेरिफिकेशन मुश्किल

AI हमेशा सटीक नहीं

8. नियम तोड़ने पर सजा?

कंपनी पर ₹250 करोड़ तक जुर्माना लग सकता है। जांच डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड करेगा।

अगर आप चाहें तो मैं इसे न्यूज़ रिपोर्ट,


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सोने के दाम में लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट दर्ज

इस हफ्ते सोने-चांदी के दाम में गिरावट देखने को मिली। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, 31 अक्टूबर को 10 ग्राम सोने की कीमत ₹1,20,770 थी, जो 7 नवंबर तक 670 रुपए घटकर ₹1,20,100 रह गई। यह लगातार तीसरा हफ्ता है जब सोने के भाव में गिरावट आई है। 17 अक्टूबर को सोना ₹1,29,584 प्रति 10 ग्राम था।

चांदी की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। 31 अक्टूबर को 1 किलो चांदी ₹1,49,125 की थी, जो 7 नवंबर तक 850 रुपए घटकर ₹1,48,275 प्रति किलो रह गई।

सोना-चांदी के दाम में गिरावट के कारण

त्योहारी खरीदारी का खत्म होना: दिवाली जैसे बड़े त्योहारों के बाद सोने-चांदी की मांग में कमी आई है।

ग्लोबल तनाव में कमी: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात स्थिर होने से सेफ-हेवन निवेश में कमी आई है।

प्रॉफिट बुकिंग और टेक्निकल इंडिकेटर्स: लगातार बढ़त के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू की है। RSI जैसे संकेतक ओवरबॉट जोन दिखा रहे थे, जिससे बिकवाली तेज हुई।

इस साल बड़ी बढ़ोतरी के बावजूद गिरावट का दौर

2024 में अब तक सोना ₹43,938 महंगा हो चुका है — 31 दिसंबर 2024 को इसकी कीमत ₹76,162 प्रति 10 ग्राम थी, जो अब ₹1,20,100 हो गई है।

इसी तरह, चांदी ₹62,258 बढ़ी है — पिछले साल के अंत में यह ₹86,017 प्रति किलो थी, जो अब ₹1,48,275 हो गई है।

अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की वजहें

ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट: सोने को एक जगह से दूसरी जगह भेजने का खर्च दामों पर असर डालता है।

डिमांड में अंतर: दक्षिण भारत में सोने की मांग सबसे ज्यादा होती है, जिससे थोक खरीद पर दाम कुछ कम रहते हैं।

लोकल एसोसिएशन: हर राज्य या शहर का ज्वेलर्स एसोसिएशन अपने हिसाब से दाम तय करता है।

खरीद मूल्य: ज्वेलर्स ने कब और कितने दाम पर स्टॉक खरीदा, इससे रिटेल प्राइस बदल जाता है।

सोना खरीदते समय ध्यान रखें ये दो बातें

सर्टिफाइड गोल्ड खरीदें: हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सोना ही लें। हॉलमार्किंग से कैरेट की शुद्धता की पुष्टि होती है।

कीमत की जांच करें: सोने का वजन और रेट कई भरोसेमंद स्रोतों (जैसे IBJA वेबसाइट) से जरूर क्रॉस-चेक करें, क्योंकि 24K, 22K और 18K के रेट अलग-अलग होते हैं।


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