बिहार पंचायत चुनाव 2026: मल्टी पोस्ट ईवीएम से छह पदों पर एक साथ मतदान का बड़ा बदलाव

बिहार में होने वाले आगामी पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। संभावना है कि यह चुनाव नवंबर-दिसंबर में कराए जाएंगे। इस बार चुनाव प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए पहली बार मल्टी पोस्ट ईवीएम का इस्तेमाल किया जाएगा।

राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन पदाधिकारी (डीआरओ) और अपर जिला निर्वाचन पदाधिकारी (एडीआरओ) की नियुक्ति कर दी है। साथ ही सभी जिलों को नई व्यवस्था के लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

चुनाव के लिए हैदराबाद स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड से 32,200 कंट्रोल यूनिट (CU) और 1,93,200 बैलेट यूनिट (BU) खरीदी गई हैं। एक मल्टी पोस्ट ईवीएम सेट में एक कंट्रोल यूनिट के साथ छह बैलेट यूनिट जुड़े होते हैं।

सुरक्षित रखरखाव की व्यवस्था

आयोग ने सभी जिलों के प्रमंडलीय आयुक्तों को पत्र भेजकर इन मशीनों के सुरक्षित रखरखाव के लिए वेयरहाउस चिह्नित कर उसकी सूची उपलब्ध कराने को कहा है।

वेयरहाउस के लिए तय मानकों के अनुसार प्राथमिकता सरकारी भवनों को दी जाएगी। विशेष स्थिति में ही आयोग की अनुमति से लीज पर वेयरहाउस बनाया जा सकेगा, जिसकी अवधि कम से कम 15 वर्ष होगी।

खराब मशीनों के लिए अलग व्यवस्था

स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ईवीएम स्टोरेज वाले वेयरहाउस में कोई अन्य सामग्री नहीं रखी जाएगी। साथ ही फर्स्ट लेवल चेकिंग के बाद खराब या डिफेक्टिव मशीनों के लिए अलग से व्यवस्था अनिवार्य होगी।

क्या है मल्टी पोस्ट ईवीएम?

मल्टी पोस्ट ईवीएम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके जरिए एक ही समय में छह पदों—ग्राम पंचायत सदस्य, मुखिया, पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के लिए मतदान किया जा सकेगा। इससे चुनाव प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक हो जाएगी।

उन्नत तकनीक पर आधारित ईवीएम

दरअसल, यह उन्नत तकनीक पर आधारित ईवीएम है, जिसे खास तौर पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए विकसित किया गया है। पारंपरिक ईवीएम में एक बार में केवल एक पद के लिए वोट डाला जाता है, जबकि मल्टी पोस्ट ईवीएम में मतदाता एक ही बूथ पर सभी पदों के लिए क्रमवार मतदान कर सकता है।

होगी समय की बचत 

इस व्यवस्था से मतदाताओं को अलग-अलग कतार में लगने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे समय की बचत होगी। वहीं चुनावी खर्च भी कम होगा और मतगणना की प्रक्रिया पहले से अधिक तेज और सटीक हो जाएगी।

इसके अलावा, कागजी मतपत्रों में होने वाली अमान्य वोट की समस्या भी खत्म हो जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इस नई प्रणाली से चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।


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Nitish Kumar का विधानसभा से राज्यसभा तक सफर, चारों सदनों में पहुंचने वाले बनेंगे Bihar के पांचवें नेता

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की घोषणा के साथ ही एक नया राजनीतिक रिकॉर्ड बनने जा रहा है। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद वे बिहार के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो जाएंगे जिन्होंने चारों सदनों की सदस्यता हासिल की है। इन चारों सदनों में लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद शामिल हैं।

राजनीतिक रूप से यह उपलब्धि बेहद खास मानी जाती है। नीतीश कुमार इससे पहले लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं। राज्यसभा पहुंचने के बाद उनका नाम इस खास सूची में जुड़ जाएगा।

बिहार के पांचवें नेता बनेंगे नीतीश

राज्यसभा सदस्य बनने के बाद नीतीश कुमार बिहार के पांचवें ऐसे नेता होंगे जो चारों सदनों में रह चुके हैं। इससे पहले यह उपलब्धि कुछ ही नेताओं को मिली है।

इन नेताओं में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद का नाम प्रमुख है। इसके अलावा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी इस सूची में शामिल हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि भी चारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं। वहीं पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत सुशील कुमार मोदी को भी यह गौरव प्राप्त था।

अलग-अलग सदनों में रहा लंबा राजनीतिक सफर

इन नेताओं का राजनीतिक सफर अलग-अलग सदनों से होकर गुजरा है। अधिकांश नेताओं ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत विधानसभा से की थी।

इसके बाद वे लोकसभा और राज्यसभा तक पहुंचे। राजनीतिक अनुभव और जनाधार के आधार पर उन्हें अलग-अलग सदनों में प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला।

चारों सदनों में सदस्य रहने को एक बड़े राजनीतिक अनुभव के रूप में देखा जाता है। नीतीश कुमार भी लंबे समय से सक्रिय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।

लालू प्रसाद ने लोकसभा से की थी शुरुआत

चारों सदनों में रहने वाले नेताओं में लालू प्रसाद का सफर थोड़ा अलग रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत लोकसभा से की थी।

साल 1977 में वे पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए थे। इसके बाद वे बिहार की राजनीति में सक्रिय हुए। बाद में वे विधानसभा और राज्यसभा के सदस्य भी बने। इस तरह उन्होंने चारों सदनों में प्रतिनिधित्व किया।

उपेंद्र कुशवाहा तीसरी बार जाएंगे राज्यसभा

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा का भी लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है। वे पहले भी लोकसभा, विधानसभा और राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं।

अब वे तीसरी बार राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं। उनका नाम भी उन नेताओं में शामिल है जिन्होंने चारों सदनों का अनुभव हासिल किया है।

बिहार की राजनीति में ऐसे नेताओं की संख्या बहुत कम है। इसी वजह से यह उपलब्धि राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।


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केरल चुनाव 2026: अबकी बार गठबंधन नहीं

केरल में विधानसभा चुनाव अब कुछ ही महीने दूर हैं और सियासी सरगर्मी तेज हो चुकी है। सवाल यही है कि क्या पिनराई विजयन के नेतृत्व वाला लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटकर इतिहास रचेगा, या फिर कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) नेतृत्व की स्पष्टता और जमीनी सक्रियता के दम पर वापसी करेगा। नगर निकाय चुनावों में वोट शेयर बढ़ाने वाली भाजपा की मौजूदगी भी कई सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकती है।

एलडीएफ अपनी सरकार के कामकाज—कल्याणकारी योजनाएं, आधारभूत ढांचे का विकास और संकट प्रबंधन—को चुनावी मुद्दा बना रहा है। विजयन गठबंधन का सबसे बड़ा चेहरा हैं। फ्रंट के संयोजक टी.पी. रामकृष्णन का कहना है कि मुकाबला कड़ा है और जनता विकास कार्यों पर फैसला करेगी। वहीं एम. स्वराज का मानना है कि चुनौती प्रदर्शन का बचाव नहीं, बल्कि मतदाताओं को निरंतरता का महत्व समझाना है। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि विजयन के बाद राज्यव्यापी अपील वाले दूसरे पंक्ति के नेता की कमी एलडीएफ के लिए चुनौती बन सकती है।

यूडीएफ में वर्षों की गुटबाजी के बाद एकजुटता का दावा किया जा रहा है। विपक्ष के नेता वीडी सतीशन के नेतृत्व में कांग्रेस अधिक संगठित नजर आ रही है। सतीशन का कहना है कि राज्य राजनीतिक पुनर्संरचना के लिए तैयार है और जनता जवाबदेही व पारदर्शिता चाहती है। यूडीएफ का जोर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने के साथ खुद को भरोसेमंद विकल्प के रूप में पेश करने पर है।

भाजपा नीत एनडीए दीर्घकालिक रणनीति के तहत शहरी क्षेत्रों में आधार मजबूत करने और वोट प्रतिशत बढ़ाने पर फोकस कर रही है। ईसाई समुदाय तक पहुंच बनाने की कोशिशें भी तेज हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि भले ही सीटें सीमित हों, लेकिन वोट शेयर में बढ़ोतरी कई सीटों के समीकरण बदल सकती है। ऐसे में संकेत साफ हैं कि इस बार चुनाव लहर के बजाय सीट-दर-सीट कड़े मुकाबले और छोटे-छोटे वोट शिफ्ट पर तय होगा।


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मायावती का फैसला: यूपी चुनाव में बसपा अकेले उतरेगी, दिल्ली आवास मुद्दे पर दी सफाई

वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में बसपा द्वारा गठबंधन किए जाने के कयासों को बुधवार को पार्टी सुप्रीमो मायावती ने खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा कि चुनावी तैयारियों में लगे हमारे नेताओं-कार्यकर्ताओं का ध्यान भटकाने के लिए विरोधियों द्वारा ये साजिश की जा रही है। मीडिया में ऐसी फेक न्यूज प्रसारित कराई जा रही हैं। बसपा वर्ष 2007 की तरह की अकेले अपने बलबूते पर विधानसभा लड़ेगी।

बसपा सुप्रीमो ने मीडिया से बातचीत में कहा कि नौ अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि पर लखनऊ में हुए कार्यक्रम में उन्होंने खुले मंच से अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की थी।

इसके बाद कई बार यह बात दोहराई जा चुकी है। अब इस पर चर्चा-बहस की गुंजाइश नहीं है। सभी जानते हैं कि कांग्रेस, सपा और भाजपा की सोच संकीर्ण हैं और ये सभी पार्टियां डा. बीआर आंबेडकर की विरोधी हैं।


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10 राज्यों में राज्यसभा की 37 सीटों पर 16 मार्च को होंगे चुनाव

 चुनाव आयोग ने 10 राज्यों में खाली हो रही 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव की घोषणा कर दी है। आयोग ने बताया है कि चुनाव 16 मार्च को होंगे।

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निकाय चुनाव में बड़ा बदलाव: 18 साल बाद फिर बैलेट पेपर से होगा मतदान

नगर निकाय चुनाव को लेकर इस बार मतदान प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। लंबे समय बाद एक बार फिर पुरानी चुनावी व्यवस्था की वापसी हो रही है। इस चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराया जाएगा, जिससे पूरी चुनावी प्रक्रिया का स्वरूप बदल गया है।

आयोग के इस फैसले का सीधा असर चुनाव परिणामों की घोषणा पर पड़ेगा। ईवीएम के अभाव में इस बार उम्मीदवारों को नतीजों के लिए लंबा इंतजार करना होगा। जहां पिछले चुनावों में मतगणना कुछ ही घंटों में पूरी हो जाती थी, वहीं इस बार परिणाम आने में लगभग 72 घंटे तक का समय लग सकता है।

गौरतलब है कि वर्ष 2008 में भी नगर निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए थे। उस समय मतगणना की प्रक्रिया में करीब तीन दिन लगे थे और इसी अनुभव के आधार पर इस बार भी देर की संभावना जताई जा रही है।

2008 के बाद व्यवस्था में सुधार

दरअसल, वर्ष 2008 के बाद मतदान व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से नगर निकाय चुनावों में ईवीएम को शामिल किया गया था। इसके बाद हुए दो चुनाव ईवीएम के जरिए कराए गए, जिससे मतदान और मतगणना दोनों ही प्रक्रियाएं तेज और सरल रहीं। हालांकि इस बार आयोग ने 18 वर्ष पुरानी बैलेट पेपर प्रणाली को दोबारा लागू करने का फैसला किया है।

बैलेट पेपर प्रणाली के तहत मतदाताओं को इस बार एक ही बैलेट बॉक्स में दो अलग-अलग बैलेट पेपर डालने होंगे। एक बैलेट पेपर महापौर पद के लिए होगा, जबकि दूसरा वार्ड सदस्य के चुनाव के लिए। ऐसे में मतदान केंद्रों पर सतर्कता और मतदाताओं की समझदारी बेहद अहम होगी।

प्रशासनिक चुनौती बढ़ेगी

चुनावी जानकारों का मानना है कि बैलेट पेपर से चुनाव कराने से प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ेंगी। वहीं उम्मीदवारों की धड़कनें भी परिणाम घोषित होने तक तेज बनी रहेंगी। कुल मिलाकर, इस बार नगर निकाय चुनाव सिर्फ जनादेश का नहीं, बल्कि धैर्य और इंतजार की भी बड़ी परीक्षा साबित होंगे।


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झारखंड के 48 नगर निकायों में 23 फरवरी को चुनाव, 27 फरवरी को होगी मतगणना

झारखंड में नगर निकाय चुनाव की घोषणा हो गई है। रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने बताया कि झारखंड के 48 नगर निकायों में 23 फरवरी को चुनाव होंगे। वहीं मतगणना 27 फरवरी को होगी। चुनाव गैर दलीय आधार पर होगा।

चुनाव की घोषणा के बाद से ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। यह सिर्फ निकाय क्षेत्रों पर प्रभावी रहेगी। एक अक्टूबर, 2024 तक बने सभी मतदाता वोट कर सकेंगे। यानी जिस मतदाता सूची से विधानसभा चुनाव हुआ था, उसी से नगर निकाय चुनाव भी होगा।

राज्य के कुल 48 नगरपालिकाओं में 9 नगर निगम, 20 नगर परिषद तथा 19 नगर पंचायतों के कुल 1087 वार्डों में वार्ड पार्षदों तथा उक्त सभी नगरपालिकाओं के महापौर/अध्यक्ष का प्रत्यक्ष निर्वाचन होना है। उपमहापौर / उपाध्यक्ष का पद अनारक्षित है, जिस पर अप्रत्यक्ष निर्वाचन होगा।

बैलेट पेपर से होगी वोटिंग

नगर निकाय चुनाव मतपत्र (Ballot Paper) एवं मतपेटिका (Ballot Box) के द्वारा सम्पन्न कराया जाएगा। इस निमित्त संबंधित जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका)-सह-उपायुक्त को पर्याप्त संख्या में मतपेटिका उपलब्ध करा दिया गया है।

सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका)-सह-उपायुक्त को निर्देश दिए जा चुके हैं कि निर्वाचन हेतु समुचित संख्या में मतपेटिका को तैयार रखा जाए एवं मतदान कर्मियों / मतगणना कर्मियों को मतपेटिका के परिचालन हेतु ससमय समुचित प्रशिक्षण दे दिया जाए।

मतदान केन्द्र में सारी सुविधाएं 

इस निर्वाचन हेतु स्थापित कुल मतदान केन्द्रों की संख्या 4304 है, जो कुल 2129 भवनों में अवस्थित है।राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका) को यह सुनिश्चित करने के लिए आदेश दिया है कि प्रत्येक मतदान केन्द्र में आधारभूत न्यूनतम सुविधाएं जैसे पेयजल, शौचालय, दिव्यांग मतदाताओं के लिए रैम्प, प्रकाश आदि की व्यवस्था की जाएगी।

विधि व्यवस्था एवं सुरक्षा बलों की तैनाती

चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए 8 जनवरी के बाद ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। विधि-व्यवस्था संधारण हेतु एवं मतदान केन्द्रों पर सुरक्षा बलों को पर्याप्त संख्या में तैनाती रहेगी।

चुनाव गैर-दलीय आधार पर होंगे, लेकिन सभी प्रमुख दल (जेएमएम, भाजपा, कांग्रेस आदि) शहरी क्षेत्रों में दबदबा कायम करने की कोशिशों में जुटे हैं। राजनीतिक हलकों में इसे राज्य की शहरी राजनीति का 'सेमीफाइनल' माना जा रहा है।


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महाराष्ट्र निकाय चुनाव परिणाम: 29 नगर निगम, 2869 सीटों का फैसला

महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों में मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी को बड़ी बढ़त मिलती नजर आ रही है। नगर निकाय चुनावों में कुल 2,869 सीटों के लिए हो रही गिनती में बीजेपी गठबंधन एकतरफा जीत की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) में भी बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनती नजर आ रही है, जबकि उसकी सहयोगी शिवसेना (यूबीटी) ने भी कई नगर निगमों में मजबूत प्रदर्शन किया है। मुंबई, पुणे, ठाणे, नवी मुंबई, पनवेल, लातूर और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे प्रमुख शहरों के रुझान और नतीजों पर सबकी नजर बनी हुई है।

रुझानों के मुताबिक 29 में से 24 नगर निगमों में बीजेपी गठबंधन को बढ़त हासिल है। बृहन्मुंबई नगर निगम में बीजेपी–शिवसेना गठबंधन 227 सीटों में से 118 सीटों पर आगे चल रहा है। इसके अलावा नागपुर, पुणे, ठाणे, नवी मुंबई, पिंपरी-चिंचवड़ और नासिक नगर निगमों में भी बीजेपी गठबंधन को स्पष्ट बढ़त मिली हुई है। वहीं लातूर और चंद्रपुर नगर निगमों में कांग्रेस आगे चल रही है। परभणी नगर निगम में शिवसेना (यूबीटी) को बढ़त हासिल है, जबकि वसई-विरार में बहुजन विकास आघाड़ी (VBA) और मालेगांव में शिवसेना (शिंदे गुट) आगे चल रही है।


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BMC में सिमटी कांग्रेस, लेकिन इन इलाकों में दिखा जबरदस्त प्रदर्शन

महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों में वोटों की गिनती जारी है, जिसमें बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं। शुरुआती रुझानों में मुंबई में कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक नजर आ रहा है।

मुंबई के कुल 227 वार्डों में से भाजपा 88 वार्डों में आगे चल रही है, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 31 वार्डों में बढ़त बनाए हुए है। इन दोनों दलों ने मिलकर BMC में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। वहीं ठाकरे बंधुओं की शिवसेना (उद्धव गुट) 70 वार्डों में आगे चल रही है।

दोपहर एक बजे तक के रुझानों के मुताबिक, महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों में कांग्रेस 171 वार्डों में आगे है। यह पार्टी के लिए तीसरा सबसे बड़ा प्रदर्शन है, जो भाजपा (848 वार्डों में बढ़त) और एकनाथ शिंदे की शिवसेना (213 वार्डों) के बाद आता है।

इसी बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता अजीत पवार अपने चाचा शरद पवार की तुलना में ज्यादा मजबूत राजनीतिक दावेदार के रूप में उभरते दिख रहे हैं। शरद पवार की अगुवाई वाला गुट शुरुआती रुझानों में कमजोर नजर आ रहा है। वहीं, ठाकरे परिवार का प्रदर्शन भी पूरे राज्य में अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा है और वह एनसीपी व कांग्रेस से पीछे चल रहा है।

महानगरों में कांग्रेस का कमजोर प्रदर्शन

मुंबई और पुणे दोनों ही बड़े शहरों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है। दोनों नगर निगमों में पार्टी केवल पांच-पांच वार्डों में आगे चल रही है। नवी मुंबई और ठाणे में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ठाणे में कांग्रेस सिर्फ दो वार्डों में आगे है, जबकि नवी मुंबई में अभी तक पार्टी खाता भी नहीं खोल सकी है।

इसके अलावा पिंपरी-चिंचवड़, वसई-विरार, उल्हासनगर, नांदेड़-वाघाला, जलगांव, अहिल्यानगर, धुले और कल्याण-डोंबिवली में दोपहर एक बजे तक कांग्रेस का खाता शून्य पर अटका हुआ है। वहीं, पनवेल में पार्टी को केवल एक सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है।

इन नगर निगमों में कांग्रेस का दमदार प्रदर्शन

हालांकि, कुछ नगर निगमों में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया है। भिवंडी-निजामपुर, अमरावती, चंद्रपुर और लातूर में कांग्रेस अन्य दलों से आगे चल रही है और यहां नगर निगम पर नियंत्रण हासिल करने की स्थिति में नजर आ रही है। मीरा-भायंदर में भी पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा है, जहां कांग्रेस आठ वार्डों में बढ़त बनाए हुए है।

इसके अलावा नागपुर और कोल्हापुर में कांग्रेस दूसरे स्थान पर बनी हुई है। नागपुर में पार्टी 22 वार्डों में आगे चल रही है, जबकि कोल्हापुर में 23 वार्डों में बढ़त दर्ज की गई है।


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BMC चुनाव में दिखा बॉलीवुड का जिम्मेदार चेहरा, वोट डालने पहुंचे कई स्टार्स

मुंबई में BMC चुनाव को लेकर माहौल गर्म है। आम जनता के साथ-साथ बॉलीवुड सेलेब्स ने भी लोकतंत्र के इस पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सुबह से ही कई नामी फिल्मी सितारे मतदान करने पोलिंग बूथ पहुंचे, जिनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

तमन्ना भाटिया

एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया सुबह पिंक सूट में वोट डालने पहुंचीं। इस दौरान वे अपनी मां का हाथ थामे उन्हें सहारा देती नजर आईं।

सान्या मल्होत्रा

सान्या मल्होत्रा भी नागरिक कर्तव्य निभाते हुए मतदान केंद्र पहुंचीं। हाल ही में वे फिल्म ‘सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी’ में नजर आई थीं।

जॉन अब्राहम

एक्टर जॉन अब्राहम कैजुअल लुक में वोट डालने पहुंचे। उन्होंने ब्लैक टी-शर्ट, पजामा और चप्पल पहन रखी थी।

हेमा मालिनी

वरिष्ठ अभिनेत्री हेमा मालिनी ने भी मतदान किया। कैमरे के सामने उन्होंने मुस्कुराते हुए मतदान का निशान दिखाया। हाल ही में 24 नवंबर को उन्होंने अपने पति धर्मेंद्र को खोया है।

अक्षय कुमार

अक्षय कुमार सुबह ही मतदान केंद्र पहुंचे। इस दौरान एक युवती ने उनसे अपने पिता के कर्ज को लेकर मदद की गुहार लगाई, जिस पर अक्षय ने सहयोग का भरोसा दिया।

सुनील शेट्टी

एक्टर सुनील शेट्टी भी वोट डालने पहुंचे। ऑल-ब्लैक लुक में नजर आए सुनील काफी स्मार्ट दिखाई दिए।


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