महिलाओं ने दिल्ली चुनाव में रचा इतिहास

दिल्ली विधानसभा चुनाव में महिला मतदाताओं ने इस बार इतिहास रचते हुए मतदान में पुरुषों को पछाड़ दिया है। यह पहला मौका है जब दिल्ली में पहली बार महिला मतदाताओं का मत प्रतिशत पुरुषों के मुकाबले अधिक रहा।

ऐसे में महिला मतदाताओं का वोट चुनाव परिणाम निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाएगा। उनका वोट जिस दल को अधिक पड़ा होगा दिल्ली का ताज उसी के सिर सजेगा।  चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक दलों ने भी महिलाओं को साधने की पूरी कोशिश की और चुनाव की घोषणा से पहले से ही महिलाओं का मुद्दा छाया रहा।

(महिलाओं ने दिल्ली चुनाव में बढ़-चढ़कर मतदान किया। जागरण फोटो)

सबसे पहले आम आदमी पार्टी (आप) ने महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। इसके बाद कांग्रेस व भाजपा ने हर महीने महिलाओं को उनके खाते में ढाई हजार रुपये देने की घोषणा की।

इसके अलावा भाजपा ने गर्भवती महिलाओं के लिए 21 हजार रुपये, गरीब महिलाओं को 500 रुपये में गैस सिलेंडर और होली व दीपावली में मुफ्त सिलेंडर देने की घोषणा की। इसका असर यह हुआ कि महिलाओं ने मतदान में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इस वजह से महिलाओं का मत प्रतिशत 60.92 प्रतिशत रहा।

(युवा महिलाओं ने भी जमकर किया वोट। जागरण फोटो)

वहीं, 60.20 प्रतिशत पुरुष मतदाताओं ने मतदान किया। आंकड़ों के अनुसार, इस बार 40 विधानसभा क्षेत्रों में महिलाओं का मत प्रतिशत पुरुषों के मुकाबले ज्यादा रहा है। वहीं, 30 विधानसभा में पुरुषों का मत प्रतिशत अधिक है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि महिलाओं ने किस दल की घोषणाओं पर ज्यादा विश्वास जताया है।

(मुस्लिम महिलाओं ने भी जमकर वोट किया है। जागरण फोटो)

वैसे पुरुष मतदाताओं की कुल संख्या अधिक होने के कारण छह लाख 34 हजार 337 वोट पुरुषों का अधिक पड़ा है। पिछले चुनाव में 31 विधानसभा क्षेत्रों में महिलाओं का मत प्रतिशत पुरुषों से अधिक था। इससे पहले वर्ष 2015 में 15 विधानसभा क्षेत्रों में महिलाओं का मत प्रतिशत अधिक रहा था।

दिल्ली में विधानसभा चुनावों में कुल मतदान, पुरुष व महिला मतदान के आंकड़े 

दिल्ली में कुल मतदाता- 1,56,14,000

पुरुष मतदाता- 83,76,173

महिला मतदाता- 72,36,560

थर्ड जेंडर मतदाता- 1267

चुनाव में हुआ कुल मतदान - 94,51,997

पुरुष मतदाताओं के पड़े वोट- 50,42,966

महिलाओं मतदाताओं के पड़े वोट- 44,08,629

थर्ड जेंडर मतदाताओं के पड़े वोट- 402


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Delhi Chunav Result से पहले हलचल तेज, AAP की बैठक में सभी 70 प्रत्याशियों के साथ मंथन कर रहे केजरीवाल

दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Vidhan Sabha Chunav 2025) के नतीजों से पहले आज आम आदमी पार्टी (AAP) के सभी 70 उम्मीदवारों की आज बैठक शुरू हो गई है।

बताया गया कि इस बैठक में नतीजे वाले दिन के लिए पार्टी की तैयारियों और विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों को लेकर बैठक चल रही है। यह बैठक अरविंद केजरीवाल के आवास पर ही चल रही है।

आप के वरिष्ठ नेता ने बताई यह अहम बात

आम आदमी पार्टी ने संभावित विधायकों की खरीद फरोख्त के आरोपों के बीच चुनाव लड़ रहे अपने प्रत्याशियों की बैठक बुलाई है। जिसमें संभावित सरकार को लेकर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी। आप के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार पूर्ण बहुमत से बन रही है, मगर भाजपा माहौल खराब करने के लिए फर्जी एग्जिट पोल दिखाकर उनके संभावित विधायकों को खरीदना चाहती है।

केजरीवाल ने अपने संभावित विधायकों से क्या कहा?

ऐसे में पार्टी नेतृत्व अपने संभावित विधायकों के साथ बैठकर इस मुद्दे पर चर्चा करेगा और उन्हें आश्वस्त करेगा कि सरकार उनकी बन रही है। वहीं, इन संभावित विधायकों से यह भी कहा जाएगा कि किसी तरीके का विपक्षी दलों द्वारा संपर्क करने पर उसकी रिकॉर्डिंग जरूर करें।

बता दें कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए पांच फरवरी को वोटिंग हुई थी, जबकि आठ अफवरी को चुनाव का परिणाम आएगा। वहीं, ज्यादातर एग्जिट पोल के अनुसार, दिल्ली में इस बार भाजपा की सरकार बन रही है। लेकिन सरकार किसकी बनेगी, यह तो आठ फरवरी को ही पता चलेगा।


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दिल्ली में 60.45% वोटिंग: 28 विधानसभा क्षेत्रों में 60% से कम रहा मतदान, 2008 के बाद पड़े सबसे कम वोट

दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Vidhan Sabha Chunav 2025) में लगातार दूसरी बार मतदान के प्रतिशत में गिरावट हुई और पिछले तीन चुनावों के मुकाबले इस बार सबसे कम मतदान हुआ। इसका कारण यह है कि पिछले तीन चुनावों जैसा इस बार मतदाताओं में उत्साह नहीं था।

किन सीटों पर पड़े सबसे ज्यादा वोट?

इस वजह से दिल्ली के एक भी विधानसभा क्षेत्र में भी मतदान का आंकड़ा (Delhi Voting Percentage) 70 प्रतिशत नहीं पहुंच पाया और 28 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान 60 प्रतिशत से भी कम रहा है

पश्चिमी दिल्ली के सुभाष नगर स्थित लिए मतदान केंद्र मे जोश के साथ कतार में खड़े वृद्ध , महिलाएं व युवा। फोटो- चंद्र प्रकाश मिश्र

इस बार मुस्तफाबाद, सीलमपुर, गोकलपुरी, बाबरपुर, त्रिलोकपुरी, सीमापुरी, मटियामहल व रोहतास नगर इन आठ विधानसभा क्षेत्रों में 65 प्रतिशत से अधिक मतदान जरूर रहा है, लेकिन बाबरपुर को छोड़कर बाकी क्षेत्रों में मत प्रतिशत घटा है।

इन सीटों पर घटा मतदान प्रतिशत

पिछली बार 17 विधानसभा क्षेत्रों में 65 प्रतिशत से अधिक मतदान रहा था। जिसमें से बल्लीमारान, सीलमपुर, गोलकपुरी, मुस्तफाबाद व मटियामहल इन पांच विधानसभा क्षेत्रों में मतदान 70 प्रतिशत से ज्यादा था। बल्लीमारान, सदर बाजार जैसे इलाकों में मतदान काफी घटा है।

2013 के चुनाव में बढ़ा था मतदान

असल में वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव भ्रष्टाचार व लोकपाल जैसे मुद्दों से लोग गोलबंद हुए थे। इस वजह से वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में बढ़ा था और 66 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था। 

इसके बाद वर्ष 2015 के चुनाव में पानी माफ, बिजली हाफ व मोहल्ला क्लीनिक के मुद्दे पर मतदाता लामबंद हुए। इसके बाद वर्ष 2020 के चुनाव में 4.87 प्रतिशत मतदान कम होने के बावजूद 62 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था। इस बार किसी एक दल के प्रति मतदाताओं में गोलबंदी नहीं देखी गई।

मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी वोट बंटते दिखे। इस वजह से मतदाताओं में उत्साह थोड़ा कम रहा। अब मतदान के बाद आठ फरवरी आने वाले नतीजों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। शनिवार को 19 मतगणना केंद्रों पर सुबह आठ बजे से वोटों की गिनती होगी।


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दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों पर होगी वोटिंग

दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों के लिए 5 फरवरी को सिंगल फेज में वोटिंग होगी। लोकसभा चुनाव में INDIA ब्लॉक का हिस्सा रहीं 5 पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं। इनमें आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस सभी 70 सीटों पर आमने-सामने हैं।

वहीं, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने 6, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया- मार्कसिस्ट (CPM) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया- मार्कसिस्ट लेनेनिस्ट (CPI-ML) ने 2-2 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं।

भाजपा ने 68 सीटों पर कैंडिडेट उतारे हैं। दो सीटें सहयोगी पार्टियों को दी हैं। इसमें जनता दल- यूनाइटेड (JDU) ने बुराड़ी और लोक जनशक्ति पार्टी- रामविलास (LJP-R) ने देवली सीट से प्रत्याशी उतारे हैं।

महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) 30 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के डिप्टी CM एकनाथ शिंदे ने सभी सीटों पर भाजपा को समर्थन दिया है।

इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी (BSP) 70 और असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तिहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) 02 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। चुनाव के नतीजे 8 फरवरी को आएंगे।

19% उम्मीदवार दागी, 81 पर हत्या-बलात्कार जैसे गंभीर मामले दर्ज

चुनाव आयोग के मुताबिक निर्दलीय समेत विभिन्न पार्टियों के कुल 699 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (ADR) ने इन सभी उम्मीदवारों के हलफनामों की जांच करके एक रिपोर्ट तैयार की है।

इसके मुताबिक करीब 19 फीसदी यानी 132 उम्मीदवार आपराधिक छवि के हैं। इनमें से 81 पर हत्या, किडनैपिंग, बलात्कार जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। 13 उम्मीदवार महिलाओं के खिलाफ अपराधों में आरोपी हैं।

5 उम्मीदवारों के पास ₹100 करोड़ से ज्यादा संपत्ति, 699 में सिर्फ 96 महिलाएं

ADR के अनुसार 5 उम्मीदवारों के पास 100 करोड़ रुपए या उससे ज्यादा की संपत्ति है। इसमें 3 भाजपा के जबकि एक-एक कांग्रेस और AAP का है। भाजपा उम्मीदवारों की औसत संपत्ति करीब 22.90 करोड़ रुपए है। वहीं, तीन उम्मीदवारों ने अपनी संपत्ति शून्य बताई है।

करीब 28% यानी 196 उम्मीदवारों ने अपनी उम्र 25 से 40 साल के बीच बताई है। 106 (15%) की उम्र 61 से 80 साल के बीच, जबकि तीन की उम्र 80 साल से ज्यादा है। सभी 699 उम्मीदवारों में 96 महिलाएं हैं, जो करीब 14% होता है।

प्रत्याशियों के एजुकेशन क्वालिफिकेशन की बात करें तो 46% ने अपने आपको 5वीं से 12वीं के बीच घोषित किया है। 18 उम्मीदवारों ने खुद को डिप्लोमा धारक, 6 ने साक्षर और 29 ने असाक्षर बताया है।

दिल्ली में 18% स्विंग वोटर्स किंगमेकर

लोकसभा चुनाव में दिल्ली की 7 सीटों पर AAP और कांग्रेस साथ चुनाव लड़ा था। AAP ने 4 और कांग्रेस ने 3 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन सभी 7 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया।

भाजपा को 54.7%, जबकि INDIA ब्लॉक को कुल 43.3% वोट मिला था। जीत-हार का मार्जिन सभी सीटों पर औसतन 1.35 लाख रहा था। भाजपा 52 विधानसभा सीटों पर आगे रही थी।

दिल्ली चुनाव लोकसभा के करीब 9 महीने बाद होते हैं लेकिन इतने कम वक्त में ही वोटिंग ट्रेंड्स में बड़ा बदलाव दिखता है। पिछले दो लोकसभा (2014 और 2019) और दो विधानसभा चुनावों (2015 और 2020) के डेटा के मुताबिक करीब 18% स्विंग वोटर्स दिल्ली की सत्ता तय करते रहे हैं।

स्विंग वोटर या फ्लोटिंग वोटर वह मतदाता होता है जो किसी पार्टी से जुड़ा नहीं होता। वह हर चुनाव में अपने फायदे-नुकसान के आधार पर अलग-अलग पार्टी को वोट देता है।

2014 में भी भाजपा ने लोकसभा की सभी 7 सीटें जीती थीं। इस दौरान विधानसभा की 70 में से 60 सीटों पर भाजपा आगे रही थी। जबकि 2015 विधानसभा चुनाव में भाजपा सिर्फ 3 सीटें ही जीत सकी और AAP ने 67 सीटों पर कब्जा जमाया।

इसी तरह 2019 में भी भाजपा ने सातों लोकसभा सीटें जीतीं और 65 विधानसभा सीटों पर आगे रही। वहीं, 2020 के विधानसभा चुनाव में AAP ने 62 और भाजपा ने 8 सीटें जीतीं।

2013 में साल भर पुरानी पार्टी ने 29% वोट पाए, 2 साल में 54% तक पहुंची

2012 में गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को आम आदमी पार्टी की नींव रखी गई। इसके ठीक 1 साल 1 महीने और 2 दिन बाद 4 दिसंबर, 2013 को दिल्ली विधानसभा चुनाव हुए। जब 8 दिसंबर को नतीजे आए तो AAP को 29.49% वोट के साथ 28 सीटों पर जीत मिली।

पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को उनकी नई दिल्ली सीट पर करीब 26 हजार वोट से हराया। केजरीवाल को 53.8% वोट मिले, जबकि तीन बार की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को सिर्फ 22.4% वोट मिले।

7 साल में भाजपा का 5% वोट बढ़ा, सीटें 31 से घटकर 8 रह गईं

दिसंबर, 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत से 5 सीट पीछे रह गई। भाजपा ने 31 सीटें जीतीं। AAP ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई, लेकिन 2 महीने में ही गिर गई। करीब साल भर दिल्ली में राष्ट्रपति शासन रहा।

2015 में चुनाव हुए तो भाजपा का वोट शेयर सिर्फ 0.88% घटा लेकिन इतने से ही पार्टी ने 28 सीटें गवां दीं। पार्टी सिर्फ 3 सीटें जीत पाई। 2013 की तुलना में 2020 के चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 5.44% बढ़कर 38.51% हो गया फिर भी पार्टी सिर्फ 8 सीटें ही जीत सकी।

7 साल में 24% से 4% पर आई कांग्रेस, 2 बार से खाता भी नहीं खुला

1998 से 2013 तक लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीतने वाली कांग्रेस 2015 के चुनाव में खाता तक नहीं खोल पाई। पार्टी को सिर्फ 9.65% वोट मिले। जबकि, 2013 में कांग्रेस ने 24.55% वोट के साथ 8 सीटें जीती थीं। दिल्ली में पार्टी की दुर्गति यहीं नहीं रुकी। 2020 में वोट गिरकर 4.26% रह गया और पार्टी फिर से जीरो पर सिमट गई।

अब 14 हॉट सीटों पर एक नजर…

1. नई दिल्ली

नई दिल्ली विधानसभा सीट इस बार सिर्फ इसलिए खास नहीं है कि यहां से AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल चुनाव लड़ रहे हैं। बल्कि इसलिए भी है क्योंकि इस सीट पर एक पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे चुनाव लड़ रहे हैं।

दिल्ली के पूर्व CM अरविंद केजरीवाल के सामने भाजपा ने 1996 से 1998 तक दिल्ली के CM रहे साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा को उतारा है। वहीं, कांग्रेस के उम्मीदवार संदीप दीक्षित तीन बार CM रहीं शीला दीक्षित के बेटे हैं।

2008 में परिसीमन से पहले इस सीट का नाम गोट मार्केट हुआ करता था। इसी गोल मार्केट सीट से चुनाव जीतकर शीला दीक्षित पहली बार 1998 में मुख्यमंत्री बनीं और 2013 तक इस पद पर रहीं।

2013 के चुनाव में नई-नवेली आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने नई दिल्ली सीट से शीला दीक्षित को 25 हजार से ज्यादा वोटों से हराया और पहली बार CM बने। तब से केजरीवाल ही इस सीट से जीतते आ रहे हैं। 2020 में केजरीवाल को 61.4% वोट मिले थे। भाजपा के सुनील कुमार 28.5% वोट मार्जिन से हार झेलनी पड़ी थी।

भाजपा उम्मीदवार प्रवेश वर्मा 2014 से 2024 तक पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद रहे हैं। साल 2013 में वे महरौली विधानसभा सीट से विधायक भी रह चुके हैं। वहीं, कांग्रेस उम्मीदवार संदीप दीक्षित 2004 से 2014 तक पूर्वी दिल्ली सीट से सांसद रहे हैं।

2. कालकाजी

साउथ दिल्ली की इस सीट पर भी त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री आतिशी इस सीट से दूसरी बार चुनाव लड़ रही हैं। वहीं, भाजपा ने पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी को टिकट दिया है। वे दक्षिणी दिल्ली सीट से 2 बार सांसद रह चुके हैं।

तीसरा मोर्चा कांग्रेस की तरफ से अलका लांबा ने खोल रखा है। कांग्रेस की स्टूडेंट विंग NSUI से राजनीतिक करियर शुरू करने वाली अलका 2015 में AAP के टिकट पर चांदनी चौक से विधायक बनी थीं।

2015 में यह सीट AAP के अवतार सिंह ने तो 2013 में भाजपा के हरमीत सिंह ने जीती थी। उससे पहले 15 साल तक इस सीट पर कांग्रेस के सुभाष चोपड़ा का कब्जा रहा था।

2020 में यह सीट जीतने से पहले आतिशी ने 2019 में पूर्वी दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ा था। हालांकि, भाजपा के गौतम गंभीर से साढ़े चार लाख से ज्यादा वोटों से हार गई थीं। डिप्टी CM और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के जेल जाने के बाद आतिशी को ही शिक्षा मंत्री बनाया गया था।

भाजपा उम्मीदवार रमेश बिधूड़ी सांसद बनने से पहले 2003 से 2014 तक तुगलकाबाद सीट से तीन बार विधायक रहे थे। वे दिल्ली भाजपा के उपाध्यक्ष और महासचिव भी रह चुके हैं। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी अलका लांबा महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वे दिल्ली यूनिवर्सिटी की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।

3. जंगपुरा

पूर्वी दिल्ली लोकसभा में आने वाली इस सीट पर पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि, 2013 से वे पटपड़गंज सीट से चुनाव लड़ते आए हैं। दरअसल, 2020 का चुनाव सिसोदिया मामूली अंतर से ही जीत पाए थे।

उन्होंने भाजपा उम्मीदवार रवींद्र सिंह नेगी को सिर्फ 3207 वोटों से हराया था। इस बार पटपड़गंज सीट से मनीष का जीतना मुश्किल लग रहा था। यही वजह है कि उन्हें जंगपुरा सीट से चुनाव में उतारा गया। पिछली बार AAP के प्रवीण कुमार ने यह सीट करीब 16 हजार के मार्जिन से जीती थी।

भाजपा की ओर से तरविंदर सिंह मारवाह मैदान में हैं। वे 1998 से 2013 तक तीन बार इस सीट से कांग्रेस विधायक रह चुके हैं। साथ ही उस समय की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के संसदीय सचिव के रूप में भी काम कर चुके हैं। वे जुलाई, 2022 में भाजपा में शामिल हुए थे और दिल्ली भाजपा सिख प्रकोष्ठ के प्रभारी हैं।

वहीं, कांग्रेस ने पूर्व मेयर फरहाद सूरी को टिकट दिया है। वे दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में विपक्ष के नेता और दरियागंज से 4 बार पार्षद रह चुके हैं। उनके पिता ताजदार बाबर भी विधायक रहे थे।

4. पटपड़गंज

इस सीट पर करीब 25% वोटर पहाड़ी हैं, जबकि 30% पूर्वांचल से हैं। 1993 से अब तक हुए 7 चुनावों में सिर्फ पहला चुनाव भाजपा ने जीता था। उसके बाद हर चुनाव में पार्टी दूसरे नंबर पर ही रही है।

AAP ने इस सीट पर टीचर से पॉलिटिशियन बने अवध ओझा को टिकट दिया है। वे करीब 22 साल से सिविल सेवा परीक्षा की कोचिंग दे रहे हैं। ओझा ने घोषणा की है कि चुनाव जीतने पर गरीब बच्चों को फ्री कोचिंग देंगे। इसके लिए उन्होंने QR कोड जारी किया है। स्टूडेंट QR कोड स्कैन करके फ्री कोचिंग का फॉर्म भर सकते हैं।

भाजपा ने उनके सामने उत्तराखंड के मूल निवासी रविंद्र सिंह नेगी को उतारा है। वे विनोद नगर वार्ड से निगम पार्षद हैं। नेगी पिछले साल अपने वार्ड के दुकानदारों से नाम पूछने और मुस्लिम दुकानदारों से दुकान के बाहर उनका नाम लिखने के लिए कहने पर विवाद में आए थे।

उन्होंने हिंदू दुकानदारों को भगवा झंडे भी बांटे थे ताकि हिंदू दुकानदारों की पहचान हो सके। पिछले विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने नेगी को प्रत्याशी बनाया था। उन्होंने AAP उम्मीदवार और तब के डिप्टी CM मनीष सिसोदिया को कड़ी टक्कर दी थी। मनीष सिर्फ 2.3% के वोट मार्जिन से जीत पाए थे।

वहीं, कांग्रेस ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। वे 2008 से 2013 तक इस सीट से विधायक रहे थे। NSUI से पॉलिटिकल करियर शुरू करने वाले चौधरी कांग्रेस के सचिव भी रह चुके हैं।

5. ग्रेटर कैलाश

इस सीट से AAP की ओर से कैबिनेट मंत्री सौरभ भारद्वाज चुनाव लड़ रहे हैं। उनके पास हेल्थ, फूड कंट्रोल, इंडस्ट्री जैसे कई अहम मंत्रालय रहे हैं। वे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं। सौरभ 2013 से ही इस सीट पर जीतते आ रहे हैं। सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में करियर शुरू करने वाले सौरभ 2013 में केजरीवाल की 49 दिन की सरकार में भी मंत्री थे।

वहीं, भाजपा ने इस सीट पर एक बार फिर शिखा राय को उतारा है। वे 2020 में इसी सीट से और 2013 में कस्तूरबा नगर सीट से चुनाव हार चुकी हैं। अभी वे ग्रेटर कैलाश- 1 वार्ड से दूसरी बार निगम पार्षद हैं। शिखा 2023 में भाजपा की ओर से मेयर प्रत्याशी भी थीं, हालांकि नतीजे भाजपा के पक्ष में नहीं आए थे। शिखा प्रदेश भाजपा की उपाध्यक्ष और महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकी हैं। उधर कांग्रेस ने भी 2020 में उम्मीदवार रहे सुखबीर सिंह पंवार को दोबारा मौका दिया है।

6. बाबरपुर

दिल्ली AAP अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री गोपाल राय इस सीट से मैदान में हैं। राय ने 2013 में अपना पहला चुनाव इसी सीट से लड़ा था लेकिन करीब 25 हजार वोटों से हारकर तीसरे नंबर पर रहे थे। जबकि 2015 का चुनाव 35 हजार से ज्यादा वोट से जीता और कैबिनेट मंत्री बने।

वहीं, भाजपा ने इस सीट से अनिल वशिष्ठ को उतारा है। पिछले 7 विधानसभा चुनावों में से 4 बार भाजपा ने इस सीट पर कब्जा जमाया है। हालांकि सीट पर करीब 35% मुस्लिम वोटर है। मुस्लिम वोट बंटने पर भाजपा को और हिंदू वोट बंटने पर कांग्रेस और AAP को फायदा होता है।

कांग्रेस ने पूर्व विधायक हाजी इशराक खान प्रत्याशी बनाया है। वे 2015 में AAP के टिकट पर सीलमपुर सीट से विधायक बने थे। माना जा रहा है कि साफ छवि के हाजी इशराक मुस्लिमों के अच्छे-खासे वोट अपने पाले में कर सकते हैं, जिसका खामियाजा गोपाल राय को भुगतना पड़ सकता है।

7. मुस्तफाबाद

इस सीट को AAP नहीं बल्कि भाजपा प्रत्याशी ने खास बनाया है। भाजपा ने पांच बार के विधायक मोहन सिंह बिष्ट को इस सीट से उतारा है। वे करावल नगर सीट से मौजूदा विधायक हैं। भाजपा ने वहां से कपिल मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है।

इससे नाराज मोहन ने बगावती तेवर अपना लिए थे और करावल नगर से ही चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। इसके बाद पार्टी ने उन्हें मुस्तफाबाद सीट से प्रत्याशी बनाया था।

वहीं, AAP ने पत्रकार रहे आदिल अहमद खान को उम्मीदवार बनाया है। वे एशिया की सबसे बड़ी फल-सब्जी मंडी कही जाने वाली आजादपुर मंडी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। आदिल अन्ना आंदोलन के समय भी सक्रिय रहे थे और बाद में पत्रकारिता छोड़कर AAP में शामिल हो गए थे।

कांग्रेस ने यहां के पूर्व विधायक हसन अहमद के बेटे अली मेहदी को उतारा है। मेहदी 2020 में भी इस सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। वे 2022 में एक दिन में दो बार पार्टी बदलने के बाद चर्चा में आए थे। दिल्ली कांग्रेस के उपाध्यक्ष रहे मेहदी ने 9 दिसंबर की सुबह दो पार्षदों के साथ AAP जॉइन की और देर शाम कांग्रेस में वापसी कर ली।

इसके अलावा दिल्ली दंगों के आरोपी और AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने कैंडिडेट घोषित किया है।

8. करावल नगर

यह सीट भाजपा का गढ़ रही है। सात में से छह बार भाजपा का प्रत्याशी यहां से जीतता आया है। सिर्फ 2015 AAP के टिकट पर कपिल मिश्रा यह सीट जीतने में कामयाब रहे थे। इसके बाद 2017 तक कैबिनेट मंत्री भी रहे थे।

काफी सियासी उठापटक के बाद 2019 में वे भाजपा में शामिल हो गए थे। भाजपा ने इस दफा इन्हीं कपिल मिश्रा को मैदान में उतारा है। इस समय ने दिल्ली भाजपा के उपाध्यक्ष भी हैं। AAP ने इस सीट से पूर्व पार्षद मनोज त्यागी को उतारा है। वहीं, कांग्रेस ने डॉ पीके मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है।

9. मोती नगर

भाजपा ने इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना के बेटे हरीश खुराना को टिकट दिया है। मदनलाल 1993 से 1996 तक दिल्ली के CM रहे थे। उस समय वे इसी सीट से विधायक थे।

मदनलाल 2003 में भी इस सीट से विधायक चुने गए थे। हरीश खुराना उनके सबसे छोटे बेटे हैं और इस समय दिल्ली भाजपा के सचिव हैं। इससे पहले हरीश पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता और लंबे समय तक मीडिया सेल से जुड़े रहे हैं।

वहीं, AAP ने शिवचरण गोयल का टिकट रिपीट किया है। उन्होंने भाजपा के पूर्व विधायक सुभाष सचदेवा को 2020 में करीब 14 हजार वोट और 2015 में करीब 15 हजार वोट से हराया था। कांग्रेस ने राजिंदर नामधारी को प्रत्याशी बनाया है।

10. करोल बाग

भाजपा ने इस सीट से अपने राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम को उतारा है। वे राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं और काफी समय तक SC मोर्चा से जुड़े रहे हैं। इसके अलावा वे निगम पार्षद का चुनाव लड़कर हार चुके हैं। 2013 में दुष्यंत ने कोंडली विधानसभा से चुनाव लड़ा था, लेकिन AAP के मनोज कुमार से 7 हजार से ज्यादा वोट से हारे थे।

AAP ने तीन बार के विधायक विशेष रवि को फिर से मैदान में उतारा है। 2013 में उन्होंने भाजपा उम्मीदवार और तीन बार से विधायक सुरेंद्र पाल रतावल को हराया था। कांग्रेस ने दिल्ली यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल धानक को टिकट दिया है।

11. बिजवासन

इस सीट पर भाजपा ने दिल्ली के पूर्व कैबिनेट मंत्री और हाल ही में AAP छोड़कर पार्टी में शामिल हुए कैलाश गहलोत को उतारा है। उनके पास वित्त, परिवहन, राजस्व और कानून जैसे अहम मंत्रालय रहे हैं। वे 2015 से नजफगढ़ के विधायक हैं।

गहलोत दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट रह चुके हैं। वे 2005 से 2007 तक दिल्ली हाईकोर्ट बार काउंसिल की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के मेंबर भी रह चुके हैं। पिछले चुनाव में AAP के भूपिंदर सिंह जून भाजपा के सत प्रकाश राना से यह सीट सिर्फ 753 वोट से जीत पाए थे।

शायद यही वजह रही कि पार्टी उनकी जगह सुरेंद्र भारद्वाज को उतारा है। वे राजनगर से पार्षद हैं और 2013 में इसी सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। वहीं, कांग्रेस ने इसी सीट से विधायक रहे देवेंद्र सहरावत को टिकट दिया है। उन्होंने 2015 का चुनाव AAP के टिकट पर जीता था और दो बार के विधायक सत प्रकाश राणा को 19 हजार से ज्यादा वोट से हराया था।

12. गांधी नगर

इस सीट पर भाजपा ने अरविंदर सिंह लवली को उम्मीदवार बनाया है। लवली दिल्ली कांग्रेस के दो बार अध्यक्ष रह चुके हैं और मई, 2024 में ही भाजपा में शामिल हुए थे। साल 2017 में भी वे कुछ महीनों तक भाजपा का हिस्सा रहे थे।

इसके अलावा वे ज्यादातर समय कांग्रेस में ही रहे हैं। लवली 1998 में पहली बार इसी सीट से विधायक बने थे। इसके बाद 2013 तक लगातार चार बार इस सीट से विधायक चुने गए। वे 2003 से 2013 तक शीला दीक्षित सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। इस दौरान शिक्षा और परिवहन जैसे कई अहम विभाग उनके पास रहे थे।

वहीं, AAP ने एक बार फिर नवीन चौधरी को टिकट दिया है। पिछले चुनाव में वे भाजपा के अनिल कुमार बाजपेयी से करीब 6 हजार वोटों से हारे थे। कांग्रेस ने कमल अरोड़ा को उम्मीदवार बनाया है।

13. रोहिणी

इस सीट से विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता भाजपा की ओर से मैदान में हैं। छात्र राजनीति में सक्रिय रहे गुप्ता दिल्ली यूनिवर्सिटी के के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनकी चुनावी राजनीति की शुरुआत 1997 में निगम पार्षद चुने जाने से होती है।

इसके बाद वे रोहिणी वार्ड से तीन बाद पार्षद रहे। विजेंद्र दिल्ली भाजपा के सचिव और अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 2013 में उन्होंने अरविंद केजरीवाल और शीला दीक्षित के खिलाफ नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ा था। करीब 18 हजार वोट के साथ वे तीसरे स्थान पर रहे थे।

इसके बाद 2015 में रोहिणी सीट से विधायक चुने गए। उस चुनाव में भाजपा सिर्फ तीन सीटें ही जीत सकी थी। विजेंद्र ने AAP के राजेश नामा को करीब 12 हजार वोट से हराया था। इसके बाद अप्रैल, 2015 से अब तक नेता प्रतिपक्ष रहे।

AAP ने इस सीट पर प्रदीप मित्तल को उतारा है। वे रोहिणी- ए वार्ड से पार्षद हैं। कांग्रेस ने एक बार फिर सुमेश गुप्ता को टिकट दिया है। वे 2020 में भी इसी सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। तब उन्हें करीब 2 हजार वोट मिले थे और तीसरे स्थान पर रहे थे।

14. शकूर बस्ती

इस सीट से दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन AAP की ओर से मैदान में हैं। मई, 2022 में मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार होने से पहले वे तीन बार दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री रहे थे। जैन सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट में काम करते थे, लेकिन एग्रीकल्चर कंसल्टेंसी फर्म खोलने के लिए नौकरी से इस्तीफा दे दिया था।

वे अन्ना आंदोलन में भी सक्रिय रहे और फिर AAP से जुड़ गए। 2013 में पहली बार पार्टी की सरकार बनी तो जैन को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। भाजपा ने मंदिर प्रकोष्ठ के अध्यक्ष करनैल सिंह को इस सीट से उम्मीदवार बनाया है। वे मुस्लिम समुदाय पर दिए गए बयानों के चलते कई बार विवादों में रहे हैं। वहीं, कांग्रेस ने सतीश लूथरा को टिकट दिया है।

AAP के अलावा किसी पार्टी का CM फेस घोषित नहीं

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के अलावा किसी भी पार्टी ने CM फेस घोषित नहीं किया है। AAP सत्ता में लौटी तो अरविंद केजरीवाल का मुख्यमंत्री बनना तय है। जबकि, भाजपा और कांग्रेस की ओर से तीन-तीन नाम चर्चा में हैं। हालांकि, कांग्रेस सरकार बनाती नहीं दिख रही है।

भाजपा हमेशा मुख्यमंत्री को लेकर चौंकाती रही है, फिर भी आम लोगों के बीच तीन नामों की चर्चा है। इसमें पहला नाम प्रवेश वर्मा का है। प्रवेश जाट समुदाय से आते हैं। दिल्ली के 364 में से 225 गांवों में जाटों की आबादी सबसे ज्यादा है।

दिल्ली की करीब 50 सीटों पर ये असर डालते हैं, जबकि 20 सीटों पर हार-जीत का फैसला करते हैं। ऐसे में हरियाणा और पश्चिमी यूपी समेत अन्य राज्यों के जाटों साधने के लिए प्रवेश को मौका मिल सकता है।

दिल्ली को मिल सकता है SC मुख्यमंत्री

दूसरा नाम रमेश बिधूड़ी का है। वे गुर्जर समुदाय से आते हैं। जाट के बाद गुर्जर समुदाय की आबादी दिल्ली में सबसे ज्यादा है। गुर्जर दिल्ली की 9 सीटों पर असर डालते हैं।

इनके अलावा तीसरा नाम दुष्यंत गौतम का है। वे SC समुदाय से आते हैं। पार्टी के संकल्प पत्र (मैनिफेस्टो) का तीसरा पार्ट जारी करते समय अमित शाह ने कहा था कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली को दलित CM देने का वादा किया था। 2 बार सरकार बनी। जेल गए, तब मौका था, फिर भी दलित CM नहीं बनाया।

देश में इस समय एक भी दलित मुख्यमंत्री नहीं है। ऐसे में भाजपा की सरकार बनने पर दुष्यंत गौतम को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।

कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव, पूर्व CM शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित और महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा मुख्यमंत्री पद के बड़े दावेदार हो सकते हैं।


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चंडीगढ़ मेयर चुनाव में हुआ 'खेल'; BJP ने क्रॉस वोटिंग में मारी बाजी

 भारतीय जनता पार्टी की हरप्रीत कौर बबला चंडीगढ़ की मेयर (Chandigarh Mayor Chunav) बन गई हैं। उन्होंने आप कांग्रेस गठबंधन की प्रेमलता को तीन वोट से हराया।

हरप्रीत बबला (Harpreet Kaur Babla) को 19 और प्रेमलता को 17 वोट मिले। चंडीगढ़ मेयर (Chandigarh Mayor Election) के लिए कुल 36 वोट डाले गए। इनमें सभी वोट वैध रही। कोई रद्द नहीं हुई। आप और कांग्रेस की तीन वोट क्रॉस हुई हैं।

मेयर हरप्रीत कौर बबला ने संभाला कार्यभार

अब दोनों दल एक दूसरे पर आरोप लगाएंगे। आप के कई पार्षद नाराज चल रहे थे। साथ कांग्रेस में भी सब ठीक नहीं था। चुनाव से कुछ दिन पहले तीन बार की पार्षद गुरबक्श भाजपा में शामिल हो गई थी।

मेयर हरप्रीत कौर बबला (Harpreet Kaur Babla) ने कार्यभार संभाल लिया है। यह चुनाव रिटायर्ड जस्टिस जयश्री ठाकुर की मौजूदगी में हुए हैं। एक एक वोट प्रोसिडिंग अधिकारी डॉ. रमणीक सिंह बेदी ने उनसे चेक कराया।

नगर निगम सदन में वोट गणित

कुल वोट- 36

भाजपा- 16

आप- 13

कांग्रेस- 06

सांसद- 01

किसको कितनी वोट मिली?

कुल वोट- 36

भाजपा- 19

आप-कांग्रेस गठबंधन- 17

कांग्रेस के जसबीर सिंह बंटी बने सीनियर डिप्टी मेयर

सीनियर डिप्टी मेयर की सभी 36 वोट वैध रही। कांग्रेस के जसबीर सिंह बंटी 19 वोट के साथ जीते और सीनियर डिप्टी मेयर बने।

सीनियर डिप्टी मेयर चुनाव रिजल्ट 2025

कुल- 36 वोट

कांग्रेस- 19 वोट

भाजपा- 17 वोट

डिप्टी मेयर चुनाव रिजल्ट 2025

कुल- 36 वोट

कांग्रेस- 19 वोट

भाजपा- 17 वोट

डिप्टी मेयर के लिए 36 वोट पड़े। सभी की सभी वैध हैं। कांग्रेस की तरुणा मेहता 19 वोट पाकर जीत गई हैं। इसमें भी गठबंधन का एक वोट क्रॉस हुआ है। बता दें कि कांग्रेस के दोनों कैंडिडेट जीत गए हैं और आप की मेयर प्रत्याशी हार गई हैं।

कांग्रेस-आप ने गठबंधन कर पद बांटे थे। आप को मेयर और कांग्रेस को सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद मिले थे। पिछली बार ठीक इसके उलट हुआ था। मेयर आप का बना था और बाकी दोनों पद पर कांग्रेस हार गई थी।

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5 फरवरी को बंद रहेंगे दिल्ली के सभी बाजार

5 फरवरी को बंद रहेंगे दिल्ली के सभी 700 बाजार



 दिल्ली में पांच फरवरी को विधानसभा चुनाव (Delhi Election 2025) को लेकर मतदान होना है। इसको लेकर व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने व्यापारियों और सभी बाजार संगठनों से आह्वान किया है कि पांच फरवरी को दुकानें बंद रखें।

कर्मचारी को देना होगा वेतन सहित अवकाश

सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल और अध्यक्ष सुभाष खंडेलवाल ने बताया कि पांच फरवरी को विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दिल्ली के सभी 700 बाजार बंद रहेंगे। साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में भी छुट्टी होगी।

बृजेश गोयल ने कहा कि कभी कभी कुछ खुदरा क्षेत्र के दुकानदार वोट डालने के बाद शाम को दुकान खोल लेते हैं, यदि किन्हीं कारणों से दुकान खोलनी भी पड़ें, तो कर्मचारियों को सवैतनिक अवकाश दें। ऐसा सीटीआई की ओर से सभी व्यापारियों को संदेश दिया गया है और ना ही किसी कर्मचारी या स्टाफ का वेतन काटी जाए।

इमरजेंसी सर्विस से जुड़े कर्मचारियों से की गई खास अपील

चुनाव आयोग और श्रम विभाग ने भी चुनाव में वोट डालने के लिए कर्मचारियों और स्टाफ को सवेतन अवकाश देने का निर्देश दिया है। इस संदर्भ में दिल्ली के बाजार संगठनों के पदाधिकारियों से भी चर्चा हुई है। ऐसे में पांच फरवरी को थोक बाजारों समेत सभी 700 बाजार पूरी तरह बंद रहेंगे।

फिर भी खुदरा में कोई अपनी दुकान खोलता है तो वोट डालकर आएं। मगर, श्रमिक या कर्मचारी पर किसी तरह का दबाव नहीं हो। इमरजेंसी सर्विस से जुड़े कर्मचारियों से अपील है कि वो भी मतदान करके ही काम पर पहुंचे।

पांच फरवरी को रहेगी छुट्टी

सीटीआई महासचिव गुरमीत अरोड़ा और वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक गर्ग ने बताया कि दिल्ली सरकार पहले ही दुकान, होटल, रेस्तरां, रिसार्ट, व्यापार और औद्योगिक इकाइयों समेत व्यवसासिक प्रतिष्ठानों को निर्देश दे चुकी है कि वे अपने कर्मचारियों को छुट्टी दें और पैसे नहीं काटें।

राज्य सरकार के श्रम विभाग ने आदेश भी जारी किया है, जिसमें जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135बी प्रावधान के अनुसार किसी भी व्यवसाय, व्यापार, औद्योगिक उपक्रम या किसी अन्य प्रतिष्ठान में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति को चुनाव में वोटिंग का हक है। उसे मतदान के दिन छुट्टी दी जाएगी।


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दिल्ली चुनाव में केजरीवाल की 15 गारंटी

आम आदमी पार्टी (AAP) ने सोमवार को दिल्ली के लिए अपना मेनिफेस्टो जारी किया। पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के लिए पार्टी की 15 गारंटियों का ऐलान किया। इसमें रोजगार, महिला सम्मान, बुजुर्गों को मुफ्त इलाज, मुफ्त पानी की गारंटी का वादा किया।

उन्होंने कहा कि बीजेपी का संकल्प पत्र फर्जी है। दिल्ली में सरकार बनने पर लोगों के लाखों के पानी के बिल माफ किए जाएंगे। केजरीवाल ने कहा कि 2020 साल में यमुना साफ करने, दिल्ली की सड़कों को यूरोपियन स्टैंडर्ड की तरह बनाने और पानी की सप्लाई की वादा किया था।

केजरीवाल ने कहा कि हमे ये 3 काम नहीं कर पाए। आज कबूल कर रहा हूं कि पिछले 5 साल में ये वादे पूरे नहीं कर पाए। ढाई साल कोरोना चला, इसके बाद उन्होंने जेल-जेल का खेल खेला। मेरी सारी टीम बिखर गई।उन्होंने कहा कि अब हम सारे जेल से बाहर आ गए। ये मेरा सपना है कि दिल्ली में तीनों काम होते देखना चाहता हूं। अगले 5 साल में तीनों काम हम पूरे करेंगे। हमारे पास फंड भी है और इसके लिए प्लान भी है।

AAP की गारंटियां

1. रोजगार की गारंटी

केजरीवाल ने कहा कि किस्मत से हमारे पास पढ़ी लिखी टीम है, उनकी तरह अनपढ़ नहीं है। रोजगार दिल्ली के हर बच्चे को मिले। इसकी प्लानिंग कर रहे हैं। हर महिला को 2100 रुपए हर महीने मिलेंगे।

2. इलाज की गांरटी

केजरीवाल ने कहा कि संजीवनी योजना के तहत बुजुर्गों के इलाज का खर्च दिल्ली सरकार देगी।

3. पानी की गारंटी

केजरीवाल ने कहा कि पानी के गलत बिल आने की शिकायत थी। पहले पानी का बिल जीरो था। षडयंत्र करके जेल भेज दिया फिर न जाने का साजिश की तो लोगों के कई-कई हजार बिल आए थे। जिनके बिल गलत आए हैं, उन्हें बिल भरने की जरूरत नहीं है। बिल माफ कर दिए जाएंगे।

4. सीवर की गारंटी

केजरीवाल ने कहा कि जब जेल में था तो कई जगह सीवर में सीमेंट डाल दिए, बोल्डर डाल दिए ताकि जनता मुझ से नाराज हो जाए। अब जहां-जहां सीवर लॉक हैं, ओवरफ्लो हैं, इन्हें सरकार बनने के 15 दिन की भीतर ठीक कर देंगे। साल डेढ़ साल के भीतर सीवर की लाइनें चेंज कर देंगे।

5. स्कॉलरशिप की गारंटी

केजरीवाल ने छात्रों को डॉक्टर अंबेडकर स्कॉलरशिप योजना के तहत स्कॉलरशिप की गारंटी दी है। इसके तहत विदेशों में पढ़ाई का खर्चा दिया जाएगा। छात्रों को फ्री बस की सुविधा होगी और दिल्ली मेट्रो में 50 फीसदी कंसेशन दिया जाएगा।

6. पुजारी-ग्रंथी हर हर महीने 18-18 हजार रुपए की गांरटी

दिल्ली के मंदिरों के पुजारियों और गुरुद्वारों के ग्रंथियों को हर महीने 18-18 हजार रुपए हर महीने दिए जाएंगे।

7. बिजली-पानी के जीरो बिल की गांरटी

केजरीवाल ने कहा कि बिजली-पानी के बिल जीरो कर दिए। कई किराएदारों को इसका फायदा नहीं मिल रहा है। ऐसा सिस्टम लाएंगे कि उन्हें भी फ्री बिजली-पानी का लाभ मिलेगा।

8. राशनकार्ड की गारंटी

दिल्ली में राशनकार्ड सेंटर खोले जाएंगे। गरीब यहां जाकर राशनकार्ड बनवा सकेंगे।

9. हेल्थ इंश्योरेंस की गांरटी

ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा वालों की बेटियों की शादी पर 1 लाख देंगे। बच्चों को कोचिंग देंगे, 10 लाख का लाइफ इंश्योरेंस और 5 लाख का हेल्थ इश्योरेंस परिवार के लिए कराया जाएगा।

दिल्ली की 70 सीटों पर 5 फरवरी को वोटिंग, 8 को रिजल्ट4

दिल्ली की 70 सीटों पर 5 फरवरी को वोटिंग होगी, जबकि 8 फरवरी को रिजल्ट आएंगे। इस बार के चुनाव में कुल 699 उम्मीदवार 70 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। 20 जनवरी को नाम वापस लेने की अंतिम तिथि थी।

चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार, 1,522 उम्मीदवारों ने चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था। नई दिल्ली सीट पर आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल के खिलाफ 22 उम्मीदवार अपनी किस्‍मत आजमा रहे हैं।


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महाराष्ट्र-झारखंड में चुनाव तारीखों का ऐलान आज दोपहर 3:30 बजे

चुनाव आयोग आज महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा करेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार दोपहर 3:30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। महाराष्ट्र में एक और झारखंड में 5 फेज में वोटिंग की संभावना है। महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर 2024 को, वहीं झारखंड विधानसभा का कार्यकाल 5 जनवरी 2025 को खत्म हो रहा है।

वायनाड समेत 3 लोकसभा सीटों पर भी उपचुनाव

दोनों राज्यों के चुनाव के साथ ही 3 लोकसभा और 13 राज्यों की 49 विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव हो सकते हैं। केरल की वायनाड सीट राहुल गांधी के इस्तीफे, महाराष्ट्र की नांदेड़ सीट कांग्रेस सांसद और पश्चिम बंगाल की बशीरहाट सीट तृणमूल सांसद के निधन से खाली हुई है।

13 राज्यों की 49 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव

इसके अलावा 13 राज्यों की 49 विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव की घोषणा हो सकती है। इनमें उत्तर प्रदेश की 10, राजस्थान की 7, पश्चिम बंगाल की 6, असम की 5, बिहार की 4, पंजाब की 4, कर्नाटक की 3, केरल की 3, मध्य प्रदेश की 2, सिक्किम की 2, गुजरात की 1, उत्तराखंड की 1 और छत्तीसगढ़ की 1 विधानसभा सीटें शामिल हैं।

महाराष्ट्र का राजनीतिक समीकरण

लोकसभा चुनाव में भाजपा 23 से 9 पर सिमटी, मराठा आरक्षण सबसे बड़ी चुनौती

महाराष्ट्र में महायुति यानी शिवसेना, भाजपा और NCP अजित पवार गुट की सरकार है। एंटी इन्कंबेंसी और 6 बड़ी पार्टियों के बीच बंटने वाले वोट को साधना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती होगी।

2024 लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की 48 सीटों में INDIA गठबंधन को 30 और NDA को 17 सीटें मिलीं।। इनमें BJP को 9, शिवसेना को 7 और NCP को सिर्फ 1 सीट मिली। भाजपा को 23 सीटों का नुकसान हुआ। 2019 लोकसभा चुनाव से NDA को 41 सीटें मिली थीं। 2014 में यह आंकड़ा 42 था। यानी आधे से भी कम।

2024 लोकसभा चुनाव के हिसाब से भाजपा 60 सीटों के आसपास सिमट जाएगी। विपक्षी गठबंधन के एक सर्वे में राज्य की 288 सीटों पर MVA यानी महाविकास अघाड़ी को 160 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। भाजपा के लिए मराठा आंदोलन सबसे बड़ी चुनौती है। इसके अलावा शिवसेना और NCP में तोड़फोड़ के बाद उद्धव ठाकरे और शरद पवार के साथ लोगों की सिंपथी है।

झारखंड का राजनीतिक समीकरण

संथाल परगना और कोल्हान प्रमंडल की 32 सीटें भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती

झारखंड में महागठबंधन यानी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेतृत्व वाली सरकार है। इसमें कांग्रेस, राजद और वाम दल शामिल हैं। भाजपा को झारखंड में सरकार बनाने के लिए संथाल परगना और कोल्हान प्रमंडल की 32 सीटों पर फोकस करना होगा।

संथाल परगना की 18 विधानसभा सीटों में से सिर्फ तीन सीटें अभी भाजपा के पास हैं। पिछले चुनाव में कोल्हान प्रमंडल की 14 विधानसभा सीटों पर तो भाजपा का खाता भी नहीं खुल पाया। जमशेदपुर पूर्वी से तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास को भी हार का सामना करना पड़ा।

जनवरी में भ्रष्टाचार के मामले में CM पद से इस्तीफा देकर हेमंत सोरेन को जेल जाना पड़ा। हालांकि, जमानत मिलने के बाद वे बाहर आए और चंपई सोरेन से 156 दिन में CM का पद वापस ले लिया। इसके बाद चंपई भाजपा में शामिल हो गए। झारखंड आंदोलन में शिबू सोरेन के साथी रहे चंपई को कोल्हान टाइगर भी कहा जाता है।

2024 चुनावी साल : लोकसभा सहित 6 राज्यों में चुनाव हुए

2024 में लोकसभा के साथ 4 राज्यों- आंध्र प्रदेश, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में विधानसभा के चुनाव हुए। लोकसभा में भाजपा अकेले बहुमत का आंकड़ा तो पार नहीं कर पाई, लेकिन सहयोगियों के दम पर रिकॉर्ड लगातार तीसरी बार सरकार बनाई। मोदी पहले गैर कांग्रेसी चेहरे हुए जो तीसरी बार PM बने।

वहीं, आंध्र प्रदेश में TDP के साथ भाजपा ने सरकार बनाई। चंद्रबाबू नायडू CM बने। ओडिशा में पहली बार भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ मोहन चंद्र माझी के नेतृत्व में सरकार बनाई। अरुणाचल में भाजपा ने लगातार तिसरी बार सरकार बनाई। सिक्किम में सत्ताधारी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (SKM) ने सरकार बनाई।

हरियाणा में भाजपा 48 सीटें जीतकर रिकॉर्ड तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। राज्य में अब तक किसी राजनीतिक दल ने लगातार 3 बार सरकार नहीं बनाई है। जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद हुए चुनाव में जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन सरकार बनाने जा रहा है। कांग्रेस-NC गठबंधन ने 48 सीटें हासिल कीं। भाजपा 29 सीटों पर जीती। 15 साल पहले 2009 में भी कांग्रेस और NC गठबंधन की सरकार बनी थी। तब उमर 38 साल के थे और राज्य के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने थे।


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सुबह 11 बजे तक 22.70% मतदान, बड़ी संख्या में पोलिंग बूथ पहुंच रहे मतदाता

हरियाणा में शनिवार को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग जारी है। सभी 90 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान हो रहा है। हरियाणा में 2 करोड़ से अधिक मतदाता मतदान में हिस्सा ले रहे है। इस बार हरियाणा में दिलचस्प मुकाबला है। सत्ताधारी दल भाजपा राज्य में तीसरी बार सरकार बनाने के लिए मैदान में उतरेगी, वहीं कांग्रेस लंबे समय बाद राज्य की सत्ता में वापसी की उम्मीद में है। आप, इनेलो-बसपा और जजपा-आसपा के उम्मीदवारों की भी किस्मत ईवीएम में कैद हो जाएगी। सुबह 11 बजे तक सभी 90 सीटों पर 22.70% मतदान दर्ज किया गया है। अंबाला कैंट से भाजपा उम्मीदवार और हरियाणा के पूर्व गृह मंत्री अनिल विज ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि इस बार भी भाजपा की सरकार बनेगी। अगर पार्टी चाहेगी तो उनसे अगली मुलाकात सीएम आवास में होगी। 

कुरुक्षेत्र के भाजपा सांसद नवीन जिंदल की मां सावित्री जिंदल को भाजपा ने पार्टी से निकाल दिया है। बता दें कि सावित्री जिंदल हिसार से निर्दलीय चुनाव लड़ रहीं थी।

हरियाणा में इस बार के विधानसभा चुनाव के लिए 20,629 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। चुनाव में कई दिग्गजों की किस्मत दांव पर है। इस बार कांग्रेस पार्टी ने पेरिस ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने से चूकने वाली पहलवान विनेश फोगाट को जुलाना से अपना उम्मीदवार बनाया है। ध्यान देने वाली बात है कि मतदान से ठीक पहले गुरुवार यानी 03 अक्टूबर को बीजेपी के बड़े नेता अशोक तंवर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। 90 सीटों पर मतदान के लिए चुनाव आयोग ने जरूरी तैयारी पूरी कर ली थी। मतदान सुबह 7 बजे से जारी है।


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हरियाणा चुनाव के लिए बीजेपी ने जारी किया संकल्प पत्र, महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये

हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने संकल्प पत्र जारी किया। बीजेपी हरियाणा में अगर में आती है तो वो हर महीने महिलाओं को लाडो लक्ष्मी योजना के तहत 2100 रुपये देगी। इसी के साथ सरकार 24 फसलों की घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदेगी। बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में 20 वादे किए है। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी, प्रदेश प्रभारी सतीश पूनिया, प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली, पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और संकल्प पत्र कमिटी के अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ प्रमुख तौर पर मौजूद रहे। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, पहले यह घोषणा पत्र बुधवार को जारी होना था। इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को आना था। बाद में उनकी जगह जेपी नड्डा का कार्यक्रम तय किया गया। मंगलवार देर रात को अचानक ही संकल्प पत्र जारी करने का दिन बदल दिया गया।

बीजेपी के संकल्प पत्र में क्या-क्या

1. सभी महिलाओं को लाडो लक्ष्मी योजना के तहत प्रतिमाह ₹2,100

2. IMT खरखौटा की तर्ज पर 10 औद्योगिक शहरों का निर्माण। प्रति शहर 50,000 स्थानीय युवाओं को नौकरी देने के लिए उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन

3. चिरायु-आयुष्मान योजना के तहत प्रत्येक परिवार को ₹10 लाख तक का मुफ्त इलाज एवं परिवार के 70 वर्ष से अधिक प्रत्येक बुजुर्ग को अलग से ₹5 लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा

4. 24 फसलों की घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद

5. 2 लाख युवाओं को 'बिना पर्ची बिना खचर्ची' पक्की सरकारी नौकरी

6. 5 लाख युवाओं के लिए अन्य रोजगार के अवसर एवं नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन योजना से मासिक स्टाइपेंड

7. शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 5 लाख आवास

8. सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस तथा सभी अस्पतालों में डायग्नोसिस मुफ्त

9. हर जिले में ओलंपिक खेलों की नर्सरी

10. हर घर गृहणी योजना तहत ₹500 में सिलेंडर

11. अव्वल बालिका योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र में कॉलेज जाने वाली प्रत्येक छात्रा को स्कूटर

12. हर हरियाणवी अग्निवीर को सरकारी नौकरी की गारंटी

13. भारत सरकार के सहयोग से केएमपी के ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर का निर्माण एवं नई वंदे भारत ट्रेनों की शुरुआत

14. भारत सरकार के सहयोग से विभिन्न रैपिड रेल सेवाओं एवं फरीदाबाद से गुरुग्राम के बीच इंटरसिटी एक्सप्रेस मेट्रो सेवा की शुरुआत

15. छोटी पिछड़े समाज की जातियों (36 बिरादरियों) के लिए पर्याप्त बजट के साथ अलग-अलग कल्याण बोर्ड

16. DA और पेंशनों को जोड़ने वाले साइंटिफिक फॉर्मूले के आधार पर सभी सामाजिक मासिक पेंशनों में वृद्धि

17. भारत के किसी भी सरकारी कॉलेज से मेडिकल और इंजीनियरिंग पढ़ने वाले ओबीसी एवं एससी जातियों के हरियाणा के विद्यार्थियों को पूर्ण छात्रवृत्ति

18. सभी ओबीसी वर्ग के उद्यमियों की, मुद्रा योजना के अतिरिक्त, 25 लाख रुपये तक के ऋण की गारंटी हरियाणा राज्य सरकार उठाएगी

19. हरियाणा को वैश्विक शिक्षा का केंद्र बनाकर आधुनिक स्किल का प्रशिक्षण प्रदान करेंगे

20. दक्षिण हरियाणा में एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का अरावली जंगल सफारी पार्क




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