भारत में इस बार धीमी रहेगी मानसून की रफ्तार

भारत में इस साल (2026) मानसून की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। स्काईमेट वेदर ने साल 2026 के लिए भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून का अपना पूर्वानुमान जारी किया है, जिसके तहत इस बार जून से सितंबर के दौरान सामान्य से 6 प्रतिशत कम बारिश होने की संभावना है।

शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, मानसून औसत का केवल 94% रह सकता है। कम बारिश का असर न सिर्फ खेती पर, बल्कि आपकी रसोई के बजट और देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। आइए जानते हैं इस साल क्यों कम होगी बरसात और इसका असर किस पर पड़ेगा।

स्काईमेट वेदर 2026 के मानसून पूर्वानुमान के मुताबिक, जून से सितंबर इन 4 महीनों में सामान्य औसत (LPA) 868.6 मिलीमीटर होता है, जबकि इस बार लगभग 817 मिलीमीटर बारिश होने का अनुमान है।

क्या होगा बारिश न होने का असर?

बारिश कम होने से किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है, इससे फसल उत्पादन गिर सकता है और खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा कम बारिश होने से कुछ इलाकों में पानी की कमी और बजली की डिमांड बढ़ सकती है। मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से हीटवेव का असर तेज हो सकता है।

कब कितनी होगी बारिश?

जून- मानसून की शुरुआत अच्छी रहने की उम्मीद है। जून में LPA की 101% बारिश का अनुमान है, जो सामान्य है।

जुलाई- इस महीने से मानसून में कुछ कमी आ सकती है। जुलाई में 95% बारिश की संभावना जताई गई है।

अगस्त- अगस्त के दौरान बारिश और घटकर 92% रह सकती है।

सितंबर- सीजन के आखिरी महीने में मानसून सबसे कमजोर रहने की आशंका है, जहां केवल 89% बारिश का अनुमान है।

30 प्रतिशत तक सूखे की आशंका

स्काईमेट के अनुसार पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे उत्तर-पश्चिमी राज्यों में सूखे की 30 प्रतिशत आशंका है, मध्य और पश्चिम भारत के राज्यों में कम बारिश हो सकती है। वहीं, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत जैसे- बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय में अच्छी बारिश होने की संभावना है।

अल नीनो का असर

मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने के पीछे की वजह अल नीनो को माना जा रहा है। जो एक क्लाइमेट घटना है, अल नीनो शांत महासागर के पानी को गर्म करती है और दुनिया भर के मौसम के पैटर्न को बिगाड़ती है। भारत के लिए, एल नीनो का मतलब अक्सर कम बारिश होता है, वयह पूर्वानुमान कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि बारिश में कमी फसलों के पैदावार को प्रभावित कर सकती है।


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राजस्थान में अप्रैल में सर्दी, उत्तराखंड-हिमाचल में बर्फबारी

उत्तर भारत में 3 वेस्टर्न डिस्टरबेंस के असर से अप्रैल में भी सर्दी का अहसास हो रहा है। राजस्थान में 20 दिनों से बदले मौसम के कारण तापमान 7 डिग्री तक कम हुआ है।

मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए छत्तीसगढ़ और बिहार समेत 17 राज्यों में आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, सिक्किम, बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बारिश का ऑरेंज अलर्ट है।

बिहार में काल बैसाखी सिस्टम एक्टिव हो गया है। काल बैसाखी अचानक आने वाला तेज आंधी-तूफान होता है। यह अप्रैल–मई (वैशाख) में आता है। इसके एक्टिव होने पर 50-100 kmph की रफ्तार से हवाएं चलती हैं, बारिश और ओले गिरते हैं। यह जल्दी खत्म हो जाता है।

असम और मेघालय में मौसम सबसे ज्यादा खराब रहेगा। यहां आंधी-बारिश और ओले गिरने का ऑरेंज अलर्ट है। दक्षिण के राज्यों तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और और कोस्टल कर्नाटक में उमस भरा मौसम रहेगा।

अगले दो दिन के मौसम का हाल

9 अप्रैल- जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी की संभावना। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में कहीं-कहीं हल्की बारिश। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 30-50kmph रफ्तार की हवा चल सकती हैं। असम और मेघालय में तेज बारिश।

10 अप्रैल: जम्मू-कश्मीर में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कहीं-कहीं हल्की बारिश। पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा में 30-50kmph रफ्तार की हवा।


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इस साल मानसून कमजोर! 6% कम बारिश का अनुमान, खेती और पानी पर असर की आशंका

इस साल मानसून की बारिश सामान्य से कम रह सकती है। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट वेदर ने इस साल के मानसून का पूर्वानुमान जारी किया है। इसके अनुसार, बारिश सामान्य से 6% कम रह सकती है।

जून से सितंबर तक मानसून के 4 महीनों में देश में बारिश का सामान्य औसत 868.6 मिलीमीटर है। सामान्य से कम मानसून का मतलब है कि बारिश 90% से 95% के बीच रहेगी। एजेंसी ने 94% बारिश का अनुमान दिया है।

जून में सामान्य बारिश होगी, लेकिन जुलाई से गिरावट शुरू होकर अगस्त और सितंबर में मानसून कमजोर पड़ेगा। खासकर अगस्त-सितंबर में बारिश की कमी ज्यादा रहने के संकेत हैं।

मध्य और पश्चिम भारत के मुख्य क्षेत्रों में बारिश कम रहने के आसार हैं। अगस्त-सितंबर में मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में सामान्य से कम बारिश की आशंका है।

जुलाई से बारिश में कमी होने का अनुमान

एलपीए के मुकाबले जून में 101% बारिश संभव। इस माह का एलपीए 165.3 mm है।

सितंबर में एलपीए के मुकाबले 89% बारिश का पूर्वानुमान। एलपीए 167.9 mm है।

एलपीए के मुकाबले 95% बारिश जुलाई में होगी। इस माह एलपीए 280.5 mm है।

एलपीए के मुकाबले अगस्त में 92% बारिश संभव। इस माह का एलपीए 254.9 mm है।

क्या होता है लॉन्ग पीरियड एवरेज यानी LPA

इसका मतलब है कि मौसम विभाग ने 1971-2020 की अवधि के आधार पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) को 87 सेमी (870 मिमी) निर्धारित किया है। अगर किसी साल की बारिश 87 सेमी से ज्यादा होती है, तो उसे सामान्य से अधिक माना जाता है। अगर कम हो तो कमजोर मानसून माना जाता है।

मानसून की शुरुआत के समय अल-नीनो बनने की संभावना

स्काईमेट वेदर से जुड़े जतिन सिंह ने कहा कि मानसून की शुरुआत के समय अल-नीनो बनने की संभावना है। इससे मानसून कमजोर पड़ सकता है। हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) मजबूत हो तो अल-नीनो का असर कुछ कम होता है। अभी आईओडी सामान्य या थोड़ा अधिक रहने की उम्मीद है। इससे मानसून की शुरुआत ठीक होगी, लेकिन सीजन के दूसरे हिस्से में बारिश कमजोर पड़ने का खतरा रहेगा।

अल नीनो और ला नीना क्लाइमेट (जलवायु) के दो पैटर्न होते हैं-

अल नीनो: इसमें समुद्र का तापमान 3 से 4 डिग्री बढ़ जाता है। इसका प्रभाव 10 साल में दो बार होता है। इसके प्रभाव से ज्यादा बारिश वाले क्षेत्र में कम और कम बारिश वाले क्षेत्र में ज्यादा बारिश होती है।

ला नीना: इसमें समुद्र का पानी तेजी से ठंडा होता है। इसका दुनियाभर के मौसम पर असर पड़ता है। आसमान में बादल छाते हैं और अच्छी बारिश होती है।

साल 2025: तय समय से 8 दिन पहले केरल पहुंचा था मानसून

पिछले साल दक्षिण-पश्चिम मानसून तय समय से 8 दिन पहले 24 मई को केरल पहुंचा था। ऐसा 16 साल बाद हुआ था। 2009 में 23 मई को केरल पहुंचा था। मुंबई में बारिश लाने वाला सिस्टम 16 दिन पहले ही एक्टिव हो गया था जो 1950 के बाद से सबसे जल्दी था।

आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून तक केरल पहुंचता है। 11 जून तक मुंबई और 8 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है। इसकी वापसी उत्तर-पश्चिम भारत से 17 सितंबर को शुरू होती है और यह पूरी तरह 15 अक्टूबर तक लौट जाता है।

भारत में पिछले साल मानसून जल्दी पहुंचने की मुख्य वजह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बढ़ी हुई नमी थी। समुद्र का तापमान सामान्य से ज्यादा रहा, जिससे मानसूनी हवाएं तेजी से सक्रिय हुईं थीं।

पश्चिमी हवाओं और चक्रवातों की हलचल ने भी मानसून को आगे बढ़ने में मदद की थी। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन भी मौसम के पैटर्न में बदलाव की एक बड़ी वजह बना था।



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उत्तराखंड में चारों धाम पर बर्फबारी, राजस्थान में भी गिरे ओले; मौसम ने बदला मिजाज

देश में एक साथ दो वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय होने से मौसम बदल गया है। उत्तराखंड के चारों धाम-केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में बर्फबारी हो रही है। राज्य के सभी जिलों में बारिश हो रही है।

राजस्थान के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, नागौर समेत कई जिलों में तूफानी बारिश के साथ ओले भी गिरे। कई जिलों में एक इंच से ज्यादा पानी बरसा। वहीं, भरतपुर जिले में मकान पर बिजली गिरने से सिलेंडर में ब्लास्ट हो गया। बारिश की वजह से तापमान में 7 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है।

यूपी के लखनऊ, गोरखपुर, गोंडा, जौनपुर, अलीगढ़ समेत 20 जिलों में आज तेज हवाओं के साथ रुक-रुककर बारिश हो रही है। 9 जिलों में ओले गिरने का अलर्ट है। पिछले हफ्ते आंधी-बिजली से 15 लोगों की मौत हो चुकी है।

मध्य प्रदेश में 3 साइक्लोनिक एक्टिविटी हैं। मौसम विभाग ने भोपाल, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, पन्ना, सतना, रीवा समेत 18 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। दतिया, निवाड़ी, छतरपुर और टीकमगढ़ में ओले गिर सकते हैं। जम्मू-कश्मीर के रामबन में लैंडस्लाइड से जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद हो गया है।

अगले दो दिन मौसम का हाल

8 अप्रैल: जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, यूपी में गरज-चमक के साथ तेज बारिश की संभावना है। 40 से 60 किमी/घंटा की रफ्तार से हवा चल सकती है। बिहार, झारखंड, बंगाल, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बारिश के साथ ओले गिरने की आशंका।

9 अप्रैल: जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है। 30 से 50 किमी/घंटा की रफ्तार से हवा चल सकती है। असम-मेघालय में भारी बारिश का अलर्ट है, जबकि मध्य और पूर्व भारत के कुछ हिस्सों में गरज और चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना।


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मथुरा में तेज आंधी का असर: योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम का टेंट उड़ा, मची अफरा-तफरी

देश के 20 से ज्यादा राज्यों में आज से आंधी-तूफान और बारिश की संभावना है। आज से नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय हो रहा है। बैक-टु-बैक दो सिस्टम एक्टिव होने से मौसम में बदलाव है।

यूपी के लखनऊ, मेरठ और गाजियाबाद में मंगलवार दोपहर बारिश हुई। मथुरा में तेज आंधी से सीएम योगी के कार्यक्रम का टेंट उड़ गया। वहीं राजस्थान के रेगिस्तानी जिल नागौर में बारिश के साथ ओले गिरे। जयपुर, बीकानेर और टोंन में भी तेज बारिश हुई।

इधर, मध्य प्रदेश में अगले 3 दिन आंधी-बारिश और ओले गिरने की संभावना रहेगी। ग्वालियर में आज बारिश हुई, जबकि 34 जिलों में अलर्ट है।

हिमाचल प्रदेश के चंबा में मंगलवार सुबह लैंडस्लाइड से एक निर्माणाधीन पुल टूट गया। भरमौर और होली क्षेत्र को जोड़ने वाला सिंयूर पुल रावी नदी में समा गया। इसके बाद क्षेत्र के कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है।

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और चमोली में मंगलवार को बर्फबारी हुई। दिल्ली-NCR में भी मंगलवार को बारिश हुई।

अगले दो दिन मौसम का हाल

7-8 अप्रैल- पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में भी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का असर रहेगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और 40–50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने 10 राज्यों में ऑरेंज अलर्ट और 15 राज्यों में यलो अलर्ट जारी किया है।


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हिमाचल में लैंडस्लाइड का कहर: निर्माणाधीन पुल टूटकर नदी में गिरा, बड़ा हादसा

हिमाचल प्रदेश के चंबा में मंगलवार सुबह लैंडस्लाइड से एक निर्माणाधीन पुल टूट गया। भरमौर और होली क्षेत्र को जोड़ने वाला सिंयूर पुल रावी नदी में समा गया। इसके बाद क्षेत्र के कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है।

उधर देश के 20 से ज्यादा राज्यों में आज से आंधी-तूफान और बारिश की संभावना है। क्योंकि आज से नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय होगा। बैक-टु-बैक दो सिस्टम एक्टिव होने से मौसम में बदलाव है। मध्य प्रदेश में आंधी-बारिश का नया सिस्टम एक्टिव होने से अगले 3 दिन आंधी-बारिश और ओलावृष्टि की संभावना रहेगी। आज 34 जिलों में अलर्ट है।

उत्तर प्रदेश के 34 जिलों में बारिश-ओलावृष्टि का अलर्ट है। बीते 72 घंटों में 43 जिलों में बारिश और 10 शहरों में ओलावृष्टि हुई। राजस्थान के 17 जिलों में भी अलर्ट है। 20 से 50 मिमी तक बारिश हो सकती है। कई जिलों में दिन का तापमान 3°C तक बढ़ा है।

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और चमोली में मंगलवार को बर्फबारी हुई। रुद्रप्रयाग के केदारनाथ धाम में लगातार तीन दिन बर्फबारी हुई, जबकि राज्य के 8 जिलों में बारिश हुई।

अगले दो दिन मौसम का हाल

7-8 अप्रैल- पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में भी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का असर रहेगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और 40–50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने 10 राज्यों में ऑरेंज अलर्ट और 15 राज्यों में यलो अलर्ट जारी किया है।


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सिक्किम में बर्फबारी-भूस्खलन का कहर, 1500 टूरिस्ट फंसे

Sikkim के मंगन जिले में रविवार को लाचेन-चुंगथांग रोड पर तेज बारिश और बर्फबारी के कारण हालात बिगड़ गए। खराब मौसम के चलते भूस्खलन हुआ, जिससे सड़क पर बड़ी दरारें पड़ गईं और करीब 1500 पर्यटक फंस गए। प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य शुरू करते हुए सोमवार सुबह से रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया है।

वहीं, Western Disturbance के असर से पूरे उत्तर भारत के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। Uttarakhand के उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री धाम समेत कई इलाकों में बर्फबारी हुई, जबकि राज्य के छह जिलों में बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई।

इसी तरह Himachal Pradesh के लाहौल-स्पीति के ऊंचे क्षेत्रों में भारी बर्फबारी हुई। गोंदला, केलांग और हंसा में अच्छी खासी बर्फ जमी, जबकि शिमला, कुल्लू और मंडी में ओले गिरने से सेब की फसल को नुकसान पहुंचा है।

Uttar Pradesh में आंधी, बारिश और बिजली गिरने की घटनाओं ने बीते 72 घंटों में 15 लोगों की जान ले ली। काशी, गोंडा, सुल्तानपुर और कानपुर सहित कई जिलों में रुक-रुककर बारिश हुई, वहीं कुछ इलाकों में ओले भी गिरे।

आगे के मौसम की बात करें तो Rajasthan में नया वेदर सिस्टम एक्टिव हो रहा है, जिससे 14 जिलों में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। Delhi NCR और हरियाणा के कुछ हिस्सों में भी बारिश और ओलावृष्टि की संभावना है।

अगले दो दिनों में देश के कई राज्यों—हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, ओडिशा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश—में आंधी-तूफान और बारिश का असर देखने को मिल सकता है। कुछ जगहों पर तेज हवाएं 60 किमी/घंटा तक की रफ्तार से चलने की भी चेतावनी जारी की गई है।


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11 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

देशभर में गर्मी की शुरुआत के बीच मौसम ने अचानक करवट ले ली है। दिल्ली और पंजाब समेत 11 राज्यों में शनिवार को तेज बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मध्य प्रदेश में शुक्रवार को 36 जिलों में बारिश दर्ज की गई, जबकि आज वहां ओलावृष्टि की आशंका जताई जा रही है।

राजस्थान के रेगिस्तानी जिलों जैसलमेर और बीकानेर में शुक्रवार को जमकर ओले गिरे। अजमेर और ब्यावर में तेज आंधी के कारण पेड़ गिर गए और टीनशेड उड़ गए। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में अगले तीन दिन तक ऐसा ही मौसम बने रहने की संभावना है।

उत्तर प्रदेश के कोसीकला स्थित अनाज मंडी में भारी बारिश से करीब 10 हजार बोरियों में रखा 5 हजार क्विंटल गेहूं भीग गया। इससे पहले प्रदेश के विभिन्न इलाकों में बिजली गिरने से 5 लोगों की मौत हो चुकी है।

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में तेज तूफान के साथ हल्की बारिश हुई, जबकि लाहौल-स्पीति के ऊंचे इलाकों में बर्फबारी दर्ज की गई। वहीं, केदारनाथ में भी शनिवार को ताजा बर्फबारी हुई।

मौसम विभाग के अनुसार, 5 और 6 अप्रैल को उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, बिहार, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बारिश की संभावना है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में ओलावृष्टि हो सकती है, जबकि तमिलनाडु में बिजली गिरने की आशंका जताई गई है।


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हिमाचल-जम्मू कश्मीर में एवलांच अलर्ट, लोगों को सतर्क रहने की सलाह

देश के कई राज्यों में अगले तीन दिनों तक मौसम का मिजाज बदला रहेगा। मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में बारिश का अलर्ट जारी किया है। पहाड़ी इलाकों में खतरा ज्यादा बना हुआ है, जहां हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में हिमस्खलन (एवलांच) की आशंका जताई गई है। हिमाचल के अटल टनल रोहतांग के नॉर्थ पोर्टल क्षेत्र में एहतियातन पर्यटकों की एंट्री रोक दी गई है, जबकि जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में लोगों को बर्फीले और पहाड़ी क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

मध्य प्रदेश में गुरुवार को 15 जिलों में बारिश दर्ज की गई, जहां मऊगंज में आकाशीय बिजली गिरने से एक महिला की मौत हो गई। राजस्थान के सभी जिलों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी है, वहीं जैसलमेर में शुक्रवार सुबह बारिश भी हुई। हरियाणा के हिसार, सिरसा और फतेहाबाद में तेज आंधी चली, जिससे पहले हुई बारिश के साथ मिलकर करीब 100 गांवों में गेहूं, सरसों और चने की फसल को नुकसान पहुंचा है। दिल्ली में भी शुक्रवार सुबह धूलभरी आंधी के कारण कई इलाकों में विजिबिलिटी कम हो गई।

आने वाले दो दिनों यानी 4 और 5 अप्रैल को उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, बिहार, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में बारिश की संभावना है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में ओलावृष्टि हो सकती है, जबकि तमिलनाडु में बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है।


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मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश समेत 5 राज्यों में बारिश का अलर्ट

देश के पांच राज्यों में अगले तीन दिन मौसम में बदलाव रहेगा। मध्य प्रदेश के 30 और उत्तर प्रदेश के 40 जिलों में आज बारिश का अलर्ट है। बुधवार को उत्तर प्रदेश के लखनऊ और अमेठी समेत 20 शहरों में बारिश हुई।

दिल्ली में गुरुवार सुबह बादल छाए रहे। इधर, राजस्थान में 2 अप्रैल से फिर एक नया वेदर सिस्टम एक्टिव होगा। इससे एक बार फिर बारिश का दौर शुरू होने का अलर्ट है। राज्य में पिछले 24 घंटे में 10 जिलों के मौसम में दोपहर बाद बदलाव देखने को मिला।

हरियाणा में बारिश और ओले गिरने से 7 जिलों में फसलों को नुकसान पहुंचा। वहीं 100 गांवों में गेहूं, सरसों और चने की खड़ी फसलें खराब हो गईं।

उत्तराखंड में रुद्रप्रयाग की सोनप्रयाग घाटी में ओले गिरे और केदारघाटी में बारिश हुई। वहीं जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह घाटी के ऊपरी इलाकों में ताजा बर्फबारी के बाद पर्यटक पहुंचने लगे हैं।

अगले 2 दिन मौसम का हाल

3-4 अप्रैल- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश में हल्की बर्फबारी-बारिश और पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, यूपी, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश में भी बारिश के साथ ओलवृष्टि हो सकती है। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में बिजली गिरने की आशंका है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, केरल में तेज बारिश की आशंका है।


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