अमेरिका में लोकेश सत्यनाथन ने लॉन्ग जंप में गोल्ड जीता

भारतीय लॉन्ग जंपर लोकेश सत्यनाथन ने अमेरिका के अर्कांसस में आयोजित NCAA Division I Championship में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने 8.21 मीटर की छलांग लगाकर न सिर्फ अपना पिछला इंडोर नेशनल रिकॉर्ड (8.01 मीटर) तोड़ा, बल्कि इस खिताब को जीतने वाले चौथे भारतीय खिलाड़ी भी बन गए।

टेक्सास की टार्लेटन स्टेट यूनिवर्सिटी में हेल्थ साइंस की पढ़ाई कर रहे लोकेश अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हैं। वे अक्सर K.G.F: Chapter 2 के एक डायलॉग से प्रेरणा लेते हैं, जिसमें नायक अपनी मां से किया वादा पूरा करने की बात करता है। लोकेश के अनुसार, अपनी मां के त्याग और उनके शब्दों को याद करना उन्हें हर बार नई ऊर्जा देता है।

उनकी यह उपलब्धि आसान नहीं रही। 2022 में अमेरिका जाने से पहले बेंगलुरु में एक गंभीर सड़क हादसे में उनके चेहरे पर गहरी चोटें आई थीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत के दम पर शानदार वापसी की।

इस जीत के साथ लोकेश अब भारत के ऑल टाइम लॉन्ग जंपर्स की सूची में तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। उनसे आगे केवल जेस्विन एल्ड्रिन और मुरली श्रीशंकर जैसे बड़े नाम ही मौजूद हैं।


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चारधाम यात्रा आज से शुरू, 18.25 लाख श्रद्धालुओं ने कराया रजिस्ट्रेशन

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा शनिवार से विधिवत शुरू हो रही है। पुष्कर सिंह धामी ऋषिकेश से 10 बसों को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के लिए रवाना करेंगे। ये श्रद्धालु 19 अप्रैल को कपाट खुलने के समय मौजूद रहेंगे। इस साल यात्रा को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है, अब तक करीब 18.25 लाख श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं, जबकि पिछले साल यह संख्या 23 लाख थी।

यात्रियों की सुविधा के लिए ऋषिकेश और हरिद्वार में ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन काउंटर भी शुरू कर दिए गए हैं। सबसे पहले मध्य प्रदेश के शहडोल से आए 100 श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया, जो यमुनोत्री और गंगोत्री के दर्शन करेंगे।

यात्रा के दौरान कुछ अहम नियम भी लागू किए गए हैं। बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक रहेगी, जबकि हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन धर्म के लोग दर्शन कर सकेंगे। केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में गंगाजल और फूल चढ़ाने की अनुमति नहीं होगी, और विशेष पूजा का समय भी रात 11 बजे से सुबह 4 बजे के बीच तय किया गया है।

यात्रा मार्ग पर वाहनों की आवाजाही सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक ही रहेगी। प्रशासन ने पूरे रूट को 16 सुपर जोन में बांटकर 54 हजार वाहनों के लिए 118 पार्किंग की व्यवस्था की है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 80 भूस्खलन संभावित स्थानों को चिन्हित किया गया है, जहां इमरजेंसी टीमें तैनात रहेंगी।

इसके अलावा, केदारनाथ की पैदल यात्रा से पहले बुजुर्गों और बीपी के मरीजों की गौरीकुंड में स्वास्थ्य जांच की जाएगी। साथ ही 48 हाल्टिंग पॉइंट बनाए गए हैं, जहां किसी आपदा की स्थिति में करीब 1.18 लाख लोगों को सुरक्षित ठहराया जा सकता है।


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नोएडा के बाद हापुड़ में भड़के श्रमिक, वेतन बढ़ाने की मांग पर फूटा गुस्सा; पुलिस ने हालात संभाले

हापुड़ के कोतवाली क्षेत्र में स्थित दो कंपनियों के कर्मचारियों ने वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर अचानक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते हालात तनावपूर्ण हो गए और कामकाज ठप पड़ गया। बढ़ते हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को काबू में किया।

कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से वेतन वृद्धि की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी अनदेखी से नाराज होकर उन्होंने एकजुट होकर प्रदर्शन किया और जोरदार नारेबाजी की। उनका आरोप है कि मौजूदा वेतन में गुजारा करना मुश्किल हो गया है, बावजूद इसके उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने साफ कहा कि जब तक वेतन बढ़ोतरी को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, उनका विरोध जारी रहेगा। वहीं, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक मनीष चौहान ने बताया कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को सामान्य कर दिया है और इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।


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350 साल पुराने पैलेस में हुई ‘भूत बंगला’ की शूटिंग, जयपुर से 45 किमी दूर हवेली का एक दिन का किराया लाखों में

अक्षय कुमार की हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘भूत बंगला’ ने दर्शकों को न सिर्फ अपनी कहानी और कॉमिक टाइमिंग से बांधा है, बल्कि फिल्म में दिखाई गई डरावनी और भव्य हवेली ने भी खासा ध्यान खींचा है। अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की इस फिल्म का फर्स्ट हाफ जहां हंसी से भरपूर है, वहीं सेकंड हाफ में हॉरर और सस्पेंस का जबरदस्त मिश्रण देखने को मिलता है।

फिल्म में नजर आने वाली यह शानदार हवेली दरअसल राजस्थान के चोमू पैलेस में स्थित है, जो जयपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर NH-11 पर बना हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि इसी लोकेशन पर भूल भुलैया जैसी हिट फिल्म की शूटिंग भी हो चुकी है।

करीब 350 साल पुराना यह पैलेस 1550 के दशक में राव गोपालजी द्वारा बनवाया गया था। पहले यह किलेबंद रिहायश के रूप में इस्तेमाल होता था, लेकिन अब इसे एक लग्जरी हेरिटेज होटल में बदल दिया गया है। अपने राजपूत और मुगल आर्किटेक्चर के चलते यह जगह फिल्मों की शूटिंग के लिए बेहद लोकप्रिय बन चुकी है।

हालांकि फिल्मों की शूटिंग के बाद इसे लेकर ‘हॉन्टेड’ होने की अफवाहें भी फैलीं, लेकिन हकीकत में यह पैलेस किसी भी तरह से डरावना नहीं है। यहां का सन्नाटा और पुरानी बनावट इसे रहस्यमयी जरूर बनाते हैं, जो हॉरर फिल्मों के लिए परफेक्ट माहौल तैयार करता है।

अगर यहां ठहरने की बात करें, तो इस शाही पैलेस में एक रात का किराया करीब 40,000 रुपये तक बताया जाता है। 100 से ज्यादा सुइट्स, शाही इंटीरियर, मार्बल फिनिश और ऐतिहासिक दरबार हॉल के साथ यह जगह लग्जरी और विरासत का अनोखा संगम पेश करती है।


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जम्मू-कश्मीर में भूकंप के झटके, दहशत में घरों से बाहर निकले लोग

जम्मू-कश्मीर में शनिवार (18 अप्रैल, 2026) को भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर जिसकी तीव्रता 5.3 मापी गई, जिसका केंद्र अफगानिस्तान के बदाखशान प्रांत में था। आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने बताया कि शनिवार सुबह 8.24 बजे रिक्टर पैमाने पर 5.3 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र अफगानिस्तान के बदाखशान प्रांत में था।

अधिकारियों ने कहा, 'यह भूकंप पृथ्वी की पपड़ी के 190 किलोमीटर अंदर आया। इसके निर्देशांक 36.55 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 70.92 डिग्री पूर्वी देशांतर हैं।' भूकंपीय दृष्टि से, कश्मीर घाटी एक भूकंप-संभावित क्षेत्र में स्थित है। अतीत में कश्मीर में भूकंपों ने भारी तबाही मचाई है।

2005 में हुआ था भूकंप से भारी नुकसान

8 अक्टूबर, 2005 को जम्मू-कश्मीर में रिक्टर पैमाने पर 7.6 तीव्रता का एक भूकंप आया, जिसमें 80,000 से ज़्यादा लोगों की जान चली गई। इस भूकंप का केंद्र पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) के मुजफ्फराबाद शहर में था, और यह शहर भूकंप की वजह से पूरी तरह से मलबे में तब्दील हो गया। घाटी के बारामूला जिले में स्थित सीमावर्ती शहर उरी को भी 2005 के भूकंप में भारी नुकसान पहुंचा था।

कश्मीर का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसमें विनाशकारी भूकंपों की घटनाएं शामिल हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह क्षेत्र एक उच्च-भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है। ऐतिहासिक घटनाओं में 1555 और 1885 के विनाशकारी भूकंप प्रमुख हैं, जिन्होंने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी और हजारों लोगों की जान ले ली थी।

इतिहास में दर्ज प्रमुख भूकंपों में 1555 का कश्मीर भूकंप शामिल है, जो बेहद विनाशकारी था। इसकी तीव्रता संभवतः 7.6 थी, जिसने कई शहरों को तबाह कर दिया था और वेशा नदी का रास्ता बदल दिया था।

30 मई, 1885 को आया बारामूला भूकंप 6.8 तीव्रता का था। इसने श्रीनगर और बारामूला क्षेत्र में 3,000 से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी और इमारतों को गंभीर नुकसान पहुंचाया था। पांड्रेथन मंदिर के विश्लेषण के आधार पर, 1828 के भूकंप को भी एक शक्तिशाली घटना माना जाता है, जिसने काफी नुकसान पहुंचाया था।

स्ट्रक्चरल इंजीनियरों और भूकंप विशेषज्ञों ने कश्मीर में भूकंप-रोधी घरों और अन्य इमारतों के निर्माण की वकालत की है। इन विशेषज्ञों ने सीमेंट-कंक्रीट से बने घरों और इमारतों का कड़ा विरोध किया है। ये इमारतें भूकंप के झटकों के प्रति सबसे ज़्यादा संवेदनशील होती हैं, क्योंकि इनमें झटकों को सहने की क्षमता बहुत कम होती है, जिसके कारण ये ढह जाती हैं।


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यूपी का बांदा एशिया में सबसे गर्म, पारा 45.4°C पहुंचा

देश के लगभग सभी राज्यों में भीषण गर्मी पड़ रही है। उत्तर प्रदेश के बांदा में शुक्रवार को तापमान 45.4°C दर्ज हुआ, जो इस सीजन में अब तक एशिया में सबसे ज्यादा तापमान है। दिलचस्प बात यह है कि एक हफ्ते पहले, यानी 9-10 अप्रैल को देश के मैदानी इलाकों में सबसे कम 12°C तापमान भी बांदा में ही दर्ज हुआ था।

इधर, आज से अगले 4 दिन मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में लू चलने की आशंका है।

यूपी के 16 जिलों में तापमान 40°C से ज्यादा रहा, जिससे हीटवेव यानी लू चली। प्रयागराज, वाराणसी समेत 50 शहरों में भीषण गर्मी पड़ रही है।

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा के कई जिलों में तापमान 43°C के पार पहुंच गया है। MP के 13 जिलों में स्कूलों का टाइम बदला गया है।

छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा के बोलांगीर, सुबर्णपुर और कालाहांडी जिलों में 21 अप्रैल तक सभी स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे।

राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में शुक्रवार को बारिश ने थोड़ी राहत दी है। फिर भी इन राज्यों में पारा 40°C के ऊपर रहा।

पूर्वोत्तर के 13 राज्यों में बारिश और 4 में बर्फबारी का अलर्ट

जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल, बिहार, सिक्किम, बंगाल, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में बारिश का अलर्ट है। बंगाल से लगे ओडिशा के कुछ जिलों में भी बारिश हो सकती है। इधर कर्नाटक के कुछ जिलों में ओले गिर सकते हैं।

मध्य महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तटीय कर्नाटक के जिलों में भी बारिश होगी। जिससे मौमस उमस भरा हो जाएगा। शनिवार सुबह आंध्र प्रदेश के तिरुमाला में मौसम अचानक बदल गया, यहां सुबह कोहरा छाया है।

हालांकि जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल में बर्फबारी का अलर्ट है। वहीं सिक्किम के नाथुला में शुक्रवार-शनिवार को बर्फबारी हुई।

अगले 2 दिन के मौसम का हाल

19 अप्रैल:

छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र के कुछ स्थानों पर लू का अलर्ट है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु में गर्म और उमस भरा मौसम रहेगा

अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय में भारी बारिश होने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में आंधी और बिजली की आशंका है।

20 अप्रैल:

झारखंड और ओडिशा में हीटवेव की स्थिति बन सकती है, जबकि तटीय इलाकों में उमस भरी गर्मी रहेगी। ओडिशा में कुछ जगहों पर गर्म रात रहने की संभावना है।

अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में भारी बारिश हो सकती है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, तेलंगाना में आंधी की आशंका है।


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लोकसभा सीटें बढ़ाने का बिल 54 वोट से गिरा

लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े संविधान (131वां) संशोधन बिल को सरकार पास नहीं करा सकी। 21 घंटे की लंबी बहस के बाद हुई वोटिंग में कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 298 ने समर्थन और 230 ने विरोध में मतदान किया। हालांकि, इस बिल को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट जरूरी थे, जिससे यह 54 वोटों से गिर गया। यह पिछले कई वर्षों में पहला मौका है जब नरेंद्र मोदी सरकार लोकसभा में कोई विधेयक पास नहीं करा पाई।

सरकार ने इस बिल के साथ जुड़े दो अन्य विधेयकों—परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026—को वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किया। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि ये दोनों बिल मुख्य विधेयक से जुड़े हैं, इसलिए अलग से मतदान की जरूरत नहीं है।

इस घटनाक्रम का सीधा असर महिला आरक्षण के लागू होने की समयसीमा पर भी पड़ा है। हालांकि ‘महिला आरक्षण अधिनियम-2023’ लागू हो चुका है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ अब परिसीमन और नई जनगणना के बाद ही मिल पाएगा, जिसकी संभावना 2034 के आसपास जताई जा रही है।

बहस के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सरकार पर राजनीतिक फायदे के लिए बिल लाने का आरोप लगाया, जबकि अमित शाह ने विपक्ष पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाया। वहीं अखिलेश यादव ने इसे पिछड़े वर्गों के हितों के खिलाफ बताया।

सरकार के सामने अब विकल्प है कि वह संशोधनों के साथ नया बिल पेश करे या विपक्ष के साथ सहमति बनाने की कोशिश करे। फिलहाल, इस विधेयक के गिरने से राजनीतिक माहौल और गरमा गया है और आने वाले चुनावों में यह एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।


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दुनिया के वो देश, जहां संसद में भारत के मुकाबले महिलाओं की भागीदारी बहुत ज्यादा

विधायिकाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 गुरुवार (16 अप्रैल, 2026) से लागू हो गया है। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने इस संबंध में देर शाम अधिसूचना जारी कर दी, जबकि संसद में इसी कानून में संशोधन करके इसे 2029 में लागू करने पर बहस चल रही है।

इसमें महिलाओं की भागीदारी की बात कही गई है। प्रस्ताव है कि देश में लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 815 किया जाएगा और इसमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। हालांकि दुनिया में कई देश ऐसे हैं, जहां भारत के मुकाबले संसद में महिलाओं की भागीदारी काफी ज्यादा है। इन देशों में संसद के अंदर महिलाओं के नेतृत्व और समानता की स्थिति भारत से बहुत अलग है। हैरानी इस बात की है कि इनमें कई छोटे से देश शामिल हैं। 

दुनिया के इस देश में संसद में महिलाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा

रवांडा की संसद में महिलाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा है। PU (Inter-Parliamentary Union) की अप्रैल 2026 तक की रिपोर्ट के मुताबिक, रवांडा में संसद के अंदर 63.8 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी है और यह विश्व में सर्वोच्च है। इसके बाद क्यूबा का नाम आता है, जहां पर यह आंकड़ा 57.2 प्रतिशत है।

अन्य प्रमुख देश

न्यूजीलैंड- 49.2 %

डेनमार्क- 48% (फरवरी 2026 चुनाव के बाद)

आइसलैंड- 47.6%

स्वीडन, नॉर्वे, दक्षिण अफ्रीका- इन देशों में भी संसद में महिलाओं की भागीदारी 45% से ज्यादा है।

इसके अलावा लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र में संसदों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सबसे अधिक (35.6%) है।

भारत की स्थिति

भारत में 18वीं लोकसभा में 74 महिला सांसद (14%) हैं, जो विश्व औसत से काफी कम है। अब महिला आरक्षण विधेयक के तहत इस भागीदारी को बढ़ाने की ओर कदम रख दिया गया है।


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संभल मस्जिद की 35 फीट ऊंची मीनार ढहाई गई

संभल में मस्जिद की 35 फीट ऊंची मीनार शुक्रवार दोपहर डेढ़ बजे गिरा दी गई। अब बुलडोजर मस्जिद के बाकी हिस्सों को तोड़ रहा है। इससे पहले, सुबह साढ़े 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक मस्जिद के बाहर की पांच दुकानों को तोड़ा गया।

मस्जिद की मीनार तोड़ने के लिए प्रशासन ने दो हाइड्रा मशीनें बुलाईं। एक मजदूर मीनार पर चढ़कर रस्सी को बांधा, फिर उसके दूसरे सिरे को दोनों हाइड्रा मशीनों से बांधा। इसके बाद मशीनों से खींचकर मीनार को गिरा दिया।

मामला मुबारकपुर बंद गांव का है। प्रशासन के मुताबिक, 15 साल पहले सरकारी जमीन पर मस्जिद का निर्माण कराया गया था। फिलहाल, डीएम राजेंद्र पेंसिया और एसपी केके बिश्नोई समेत 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी मौके पर हैं। गांव वाले जुटने लगे तो विरोध की आशंका को देखते हुए पुलिस ने उन्हें खदेड़ दिया।

12 दिन पहले, यानी 5 अप्रैल को मस्जिद पर कार्रवाई होनी थी, लेकिन उस समय बुलडोजर चालक ने मस्जिद की 35 फीट ऊंची मीनार तोड़ने से मना कर दिया था। तर्क दिया था कि मीनार बुलडोजर के ऊपर गिर सकती है।

हालांकि उस दिन मदरसा, पांच दुकानें और मस्जिद का गेट तोड़ दिया गया था। दुकानों का करीब 20 फीसदी हिस्सा बच गया था, जिसे आज गिराया गया।

दो ग्रामीण अपने मकान खुद तोड़ रहे

मुबारकपुर बंद गांव गुलाम रसूल और आसमा के मकानों के कुछ हिस्से सरकारी जमीन पर बने हैं। प्रशासन ने दोनों से खुद ही कब्जा हटाने को कहा है। इसके बाद आसमा ने घर के आगे बने हिस्से को और गुलाम ने घर के गेट को छैनी-हथौड़ी से तोड़ना शुरू कर दिया है।

गुलाम ने कहा- अब क्या कहें साहब..यह जमीन प्रधान के चाचा से 30 हजार में खरीदी थी, हमें कोई जानकारी नहीं थी कि यह ग्राम समाज की जमीन है। बहुत नुकसान हो गया है।

वहीं, आशा कार्यकर्ता आसमा ने कहा- अगर यह सरकारी जमीन थी, तो प्रधानों ने इसे क्यों बेचा? हमने 30 साल पहले जमीन खरीद थी। अगर उन्हें जमीन खाली करनी पड़ रही है तो उन्हें दी गई राशि वापस मिलनी चाहिए।

जानिए पूरा मामला

मुबारकपुर बंद गांव में करीब 30 साल पहले सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया था। 15 साल पहले खेल मैदान पर 150 वर्गमीटर में मस्जिद का निर्माण किया गया। इसके साथ ही पांच दुकानें और आठ मकान भी बना लिए गए। हैरानी की बात यह है कि इसी जमीन पर दो सरकारी प्राइमरी स्कूल भी बने हुए हैं।

सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत डीएम को मिली थी। इसके बाद तहसीलदार कोर्ट ने 28 मार्च को अवैध निर्माण हटाने के लिए नोटिस जारी किया। उसी दिन जमीन की नाप कराई गई। 30 मार्च से स्थानीय मजदूरों के जरिए निर्माण हटाने का काम शुरू हुआ।

31 मार्च से मुस्लिम समुदाय के लोगों ने खुद ही मदरसा गौसुल और पांच दुकानों को तोड़ना शुरू किया, लेकिन काम पूरा नहीं हो सका। मस्जिद कमेटी और ग्राम प्रधानपति हाजी मुनव्वर की मांग पर 5 अप्रैल को प्रशासन ने 2100 रुपए शुल्क लेकर करीब दो घंटे में मदरसा और दुकानों को ध्वस्त करा दिया।

ग्रामीणों ने मस्जिद को खुद नहीं तोड़ा और प्रशासन से इसे हटाने की मांग की थी। ग्राम प्रधानपति का कहना है कि स्कूलों को छोड़कर बाकी अवैध संपत्तियों को हटाया जाए।


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चारधाम यात्रा से दो दिन पहले ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के लिए विधिवत रूप से आज सुबह यानी 17 अप्रैल से ऑफ लाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. आगामी 19 तारीख से यमुनोत्री धाम, गंगोत्री धाम खुल रहे हैं, जबकि आगामी 22 अप्रैल को केदारनाथ जी धाम और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ जी धाम के कपाट खुल जाएंगे. प्रशासन ने ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए कुल 20 काउंटर बनाए हैं.

रजिस्ट्रेशन स्थल पर तैनात कर्मचारियों को दिए आवश्यक निर्देश 

रिपोर्ट के मुताबिक रजिस्ट्रेशन स्थल पर पहुंचकर जिलाधिकारी ने हर प्रक्रिया का खुदनिरीक्षण किया और वहां तैनात कर्मचारियों को निर्देश दिया. देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन स्थल किसी भी प्रकार की अव्यवस्था का शिकार न होना पड़े इसलिए उनके लिए एक अलग से काउंटर बनाए गए है. जिलाधिकारी ने बताया कि यात्रियों की सुविधा के लिए रजिस्ट्रेशन स्थल पर 20 काउंटर बनाए गए हैं.

पहले दिन काफी कम संख्या में श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन के लिए पहुंचे

गौरतलब है शुक्रवार सुबह 8 बजे से शुरू हुए ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में अपेक्षानुसार चारधाम यात्रियों की कम ही रही. चूंकि अभी गंगोत्री ओर यमनोत्री धाम के ही कपाट खुल रहे है, जैसे ही केदारनाथ बद्रीनाथ धाम के कपाट खुल जाएंगे तो संभवतया रजिस्ट्रेशन स्थल पर काफी संख्या में यात्रियों की बढ़ने की उम्मीद है. हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में पहले दिन काफी कम संख्या में श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन के लिए पहुंचे. 

22 मार्च को केदारनाथ और 23 मार्च को बद्रीनाथ के खुलेंगे कपाट

चारधाम यात्रा का रजिस्ट्रेशन हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान से शुरू किया है. अभी यमनोत्री धाम गंगोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल से खुल रहे है, उसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथजी फिर 23 को बद्रीनाथजी के कपाट खुल जाएंगे. जिला प्रशासन देश के विभिन्न क्षेत्रों से ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए आए चारधाम यात्रियों के लिए सभी व्यवस्थाओं को उपलब्ध करवा रही है. आगामी यात्रा के लिए होटल्स में बड़ी संख्या में बुकिंग़ हो गई है.

19 अप्रैल से शुरू हो रहे गंगोत्री धाम ओर यमनोत्री धाम के कपाट खुल रहे हैं

उल्लेखनीय है 19 अप्रैल से शुरू हो रहे गंगोत्री धाम ओर यमनोत्री धाम के कपाट खुल रहे है. 17 अप्रैल से शुरू हुए ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए ऋषिकुल मैदान में बनाए गए रजिस्ट्रेशन स्थल पर जिला प्रशासन द्वारा पूरी तैयारी कर ली गई है. मौके पर वॉलेंटियर्स, पुलिस बल, फायर विभाग और प्रशासन का अमला मौजूद है, सामान्य दिन, वीकएंड और पर्व के लिए भी पूरी व्यवस्था की गई है. 

ऋषिकेश में पहले दिन 100 यात्रियों ने कराया ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन

ऋषिकेश जिले में भी आज चार धाम यात्रा के ऑफलाइन रजिस्ट्रेश शुरू हुआ, जहां सुबह-सुबह ही 100 से अधिक रजिस्ट्रेशन दर्ज हो गए. ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन कराने वालों में ज्यादातर तीर्थ यात्री मध्य प्रदेश के थे. रजिस्ट्रेशन के साथ ही तीर्थ यात्रा के लिए निकल पड़े. ऋषिकेश में रजिस्ट्रेशन के लिए कुल 34 काउंटर तैयार किए गए हैं, जिसमें से चार धाम यात्रा ट्रांजिट कैंप में 24 और ISBT में 6 और गुरुद्वारा में 4 काउंटर शामिल है.


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