धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में सार्वजनिक अवकाश की मांग शामिल नहीं', सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक अवसर पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की मांग पर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिले धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार में किसी धार्मिक अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग करने का अधिकार शामिल नहीं है। सार्वजनिक अवकाश घोषित करना सरकार का नीतिगत निर्णय है।

कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि विकासशील राष्ट्र के तौर पर भारत को उत्पादकता और काम की निरंतरता को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने गुरु गोविंद सिंह की जयंती (प्रकाश पर्व) को पूरे देश में सार्वजनिक अवकाश (राजपत्रित अवकाश) घोषित करने की मांग खारिज कर दी।

इतना ही नहीं शीर्ष अदालत ने कहा कि सिख धर्म के सिद्धांत स्मरण, ईमानदार श्रम और नि:स्वार्थ सेवा पर विशेष बल देते हैं। गुरु गोविंद सिंह जी का जीवन साहस, अनुशासन और कर्तव्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का उदाहरण है। गुरु गोविंद सिंह जी के प्रति अगाध सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करते हुए कोर्ट ने कहा कि उनका जीवन न्याय और सांसारिक कर्तव्यों के निर्वहन के लिए एक अथक संघर्ष था।

इस परिप्रेक्ष्य में, उनकी विरासत का सम्मान करने का सबसे उत्तम तरीका शायद यह है कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन किया जाए, न कि केवल श्रद्धा की मांग करके सम्मान का कोई प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया जाए।

कोर्ट ने खारिज की याचिका

ये फैसला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने ऑल इंडिया शिरोमणि सिंह सभा की याचिका याचिका खारिज करते हुए दिया। कोर्ट ने कहा कि रिट याचिका के पीछे की भावना सम्माननीय है परंतु यह अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल रिट में न्यायिक हस्तक्षेप का न्यायोचित आधार नहीं बनती। याचिका में दसवें सिखगुरु, गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व को पूरे देश में राजपत्रित अवकाश घोषित करने की मांग की गई थी।

सार्वजनिक अवकाश घोषित करना कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में- कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक अवकाश घोषित करना पूरी तरह से कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसमें न्यायालय का हस्तक्षेप उचित नहीं है। पीठ ने अनुच्छेद 25 में मिली धार्मिक स्वतंत्रता की दलील ठुकराते हुए कहा कि जहां एक ओर धर्म की स्वतंत्रता हर व्यक्ति को अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने का अधिकार देती है, वहीं दूसरी ओर यह किसी धार्मिक अवसर को पूरे देश में अनिवार्य सार्वजनिक अवकाश के रूप में राज्य से मान्यता दिलाने के अधिकार तक विस्तारित नहीं होती।

कोर्ट ने कहा कि भारत की संघीय संरचना राज्यों को भिन्न निर्णय लेने की अनुमति देती है। राज्यों द्वारा पेश सामग्री ये दर्शाती है कि सार्वजनिक अवकाशों का निर्धारण स्थानीय आवश्यकताओं और सामाजिक सांस्कृतिक कारकों पर आधारित होता है। कोर्ट ने कहा कि ये काम कार्यपालिका के विवेक पर छोड़ना उचित है। अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) तर्कसंगत भिन्नता को स्वीकारता है।

भिन्नता को भेद भाव नहीं माना जा सकता- कोर्ट

कोर्ट ने यह भी माना कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में पहले से ही अनेक धार्मिक अवसरों पर अवकाश दिए जाते हैं। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय परिस्थितियों और सांस्कृतिक आवश्यकताओं के अनुसार छुट्टियां निर्धारित की जाती हैं, जो संघीय ढांचे का हिस्सा है। इसलिए इसमें भिन्नता को भेद भाव नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि मांगी गई राहत देने से अलग-अलग समूहों से इसी तरह की मांगों की बाढ़ आ सकती है। नतीजन सार्वजनिक अवकाशों का अव्यवहारिक विस्तार होगा और शासन व प्रशासनिक कामकाज पर बुरा असर पड़ेगा।


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IndiGo फ्लाइट का इंजन फेल, Delhi में इमरजेंसी लैंडिंग

विशाखापट्टनम से दिल्ली आ रही इंडिगो की फ्लाइट 6E 579 की शनिवार सुबह दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। फ्लाइट में 160 यात्री सवार थे।

इमरजेंसी से सेफ लैंडिंग की टाइमलाइन

10.39 बजे: दिल्ली के पास पहुंचते समय विमान के इंजन नंबर-1 में खराबी आई। पायलट को CFM-56 इंजन में तेज वाइब्रेशन महसूस हुआ, इसके बाद इंजन बंद हो गया। पायलटों ने इमरजेंसी घोषित की। दिल्ली एयरपोर्ट से मदद मांगी।

10.53 बजे: फायर डिपार्टमेंट के मुताबिक सुबह 10.53 बजे इमरजेंसी कॉल आया। टीम को अलर्ट पर रखा गया।

10.59 बजे: विमान ने रनवे 28 पर सुरक्षित लैंडिंग की। सभी यात्री और क्रू उतारे गए।

विमान की सुरक्षित लैंडिंग के लिए एयरपोर्ट के रनवे 28 पर 'फुल इमरजेंसी' लागू की गई थी। SOP के तहत रनवे के चारों ओर दमकल की गाड़ियां और एंबुलेंस मौजूद थीं।

जिस बोइंग 737 विमान (TC-CON) के इंजन में खराबी आई, वह तुर्की की कोरेनडन एयरलाइन्स से वेट लीज पर लिया गया है।

इंडिगो ने कहा- विमान की जांच जारी

फ्लाइट 6E 579 में लैंडिंग से ठीक पहले एक तकनीकी खराबी सामने आई। सावधानी बरतते हुए और तय नियमों के मुताबिक पायलटों ने तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल से पहले लैंडिंग की अनुमति मांगी। इसके बाद विमान सुरक्षित रूप से दिल्ली के आईजीआई पर उतारा गया। घटना की जानकारी अधिकारियों को दी गई। विमान की जांच और जरूरी मेंटेनेंस किया जा रहा है।

इंडिगो के 148 विमानों में बार-बार खराबी, सरकार ने संसद में बताया था

जनवरी 2025 से देश की छह प्रमुख एयरलाइंस के कुल 754 विमानों की तकनीकी जांच की गई। इनमें से 377 विमानों में बार-बार आने वाली खराबियों की पहचान हुई। यानी एक ही खराबी बार-बार सामने आई, भले ही उसे पहले ठीक कर दिया गया था।

एअर इंडिया ग्रुप के 267 विमानों में से 191 (72%) में बार-बार तकनीकी खराबी पाई गई। इसके बाद इंडिगो का नंबर था। इसके 405 विमानों की जांच की गई। उनमें से 148 में इस साल 3 फरवरी तक रिपीटेटिव डिफेक्ट ( एक ही खराबी बार-बार) पाई गई।

लोकसभा में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बताया कि DGCA ने पिछले साल सुरक्षा को लेकर बड़े पैमाने पर जांच की। इस दौरान 3890 सर्विलांस इंस्पेक्शन, 56 ऑडिट, 492 रैंप चेक और 84 विदेशी विमानों की जांच की गई। 874 स्पॉट चेक और 550 नाइट सर्विलांस भी किए गए।


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Noida International Airport से ऐतिहासिक उड़ान: Yogi Adityanath और Anandiben Patel को लेकर पहली फ्लाइट रवाना

जेवर के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से विमान ने पहली ऐतिहासिक उड़ान भरी। यह विमान उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के  लिए रवाना हुआ।

उत्तर प्रदेश सरकरा का यह हॉकर-900 विमान है जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गवर्नर आनंदीबेन पटेल रवाना हुए। 

पीएम ने किया था उद्घाटन

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट का उद्घाटन हुआ। नोएडा एयरपोर्ट के बनने से क्षेत्र की कनेक्टिविटी और बेहतर होगी। 

कार्यक्रम के दौरान पीएम ने पीएम मोदी ने कहा, कि आज हम विकसित भारत विकसित यूपी का नया अध्याय शुरू कर रहे हैं।

प्रदेश की विकास का पहचान

आज यूपी देश के सबसे अधिक इंटरनेशनल एयरपोर्ट वाल राज्यों में से एक हो गया है। आज मेरे लिए गर्व प्रसन्नता के दो कारण हैं। पहला इसका शिलान्यास करने का मौका दिया फिर उद्घाटन का मौका दिया।

वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को प्रदेश के विकास की नई पहचान बताया। उन्‍होंने कहा कि यह परियोजना डबल इंजन सरकार की स्पीड और प्रधानमंत्री के विजन का परिणाम है, जो प्रदेश को ग्लोबल एविएशन मैप पर स्थापित करेगा।



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फ्लैशलाइट, पोस्टर और जोश,Noida International Airport के उद्घाटन में उमड़ा जनउत्साह का सैलाब

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन का दिन सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह लोगों के उत्साह, उम्मीदों और गर्व का बड़ा उत्सव बन गया। प्रधानमंत्री मोदी सहित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम में मौजूद रहे। 

दूर-दूर से आए लोगों ने इस ऐतिहासिक पल को अपनी मौजूदगी से खास बना दिया। मंच पर देश की बड़ी हस्तियों की मौजूदगी के साथ-साथ आम जनता की भावनाएं भी पूरे आयोजन में साफ झलकती रहीं।

स्वागत में जुटे बड़े चेहरे

कार्यक्रम की शुरुआत में नरेंद्र मोदी का स्वागत योगी आदित्यनाथ और आनंदीबेन पटेल ने किया। मंच पर मौजूद यह दृश्य आयोजन की गरिमा को और बढ़ाता नजर आया।

बच्चों से बड़े, सबमें दिखा उत्साह

इस दौरान बच्चों से लेकर बड़े, सभी के चेहरे पर इस ऐतिहासिक पल को सामने से देखने का उत्साह दिखा। बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

लोगों में दिखा उत्साह

एयरपोर्ट परिसर में हर तरफ लोगों की भारी भीड़ और चेहरे पर उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। हर कोई इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए उत्सुक नजर आया।

हाथों में धन्यवाद के पोस्टर

कई लोग अपने हाथों में प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताते हुए पोस्टर लिए हुए दिखे। “धन्यवाद मोदी जी” जैसे संदेशों के साथ लोगों की भावनाएं खुलकर सामने आईं।

फिल्मकार बोनी कपूर भी रहे मौजूद

इस दौरान फिल्मकार बोनी कपूर भी मौजूद रहे। 

काले कपड़ों में युवक को रोका गया

प्रयागराज के हंडिया से आए प्रशांत कुमार नामक युवक, जो काले कपड़े पहनकर कार्यक्रम में पहुंचा था, उसे सुरक्षा कारणों से वापस लौटा दिया गया। यह घटना भी चर्चा का विषय बनी रही।

विदेशी मेहमानों की मौजूदगी

इस खास मौके पर स्विट्ज़रलैंड से आया एक परिवार भी कार्यक्रम में शामिल हुआ, जिसने इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय रंग भी दे दिया।

मोबाइल फ्लैशलाइट से हुआ अनोखा उद्घाटन

कार्यक्रम के दौरान नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपने मोबाइल की फ्लैशलाइट ऑन करने का आग्रह किया। हजारों लोगों ने एक साथ रोशनी जलाकर इस ऐतिहासिक पल को और भी खास बना दिया। यह नजारा पूरे आयोजन का सबसे यादगार क्षण बन गया।

नन्हे यश ने खींचा ध्यान

छठी कक्षा के छात्र यश गर्ग अपने हाथों में मोदी और योगी के पोस्टर लिए नजर आए। उनका उत्साह और जोश वहां मौजूद लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया।

गीतों ने बांधा समां

कार्यक्रम में हेमंत ब्रजवासी के गीतों ने माहौल को और भी रंगीन बना दिया। उनके प्रदर्शन ने लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।


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Uttar Pradesh अब सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट वाला राज्य बना: हवाई कनेक्टिविटी में बड़ा उछाल

जेवर में बने एशिया के सबसे बड़े Noida International Airport के उद्घाटन के मौके पर पीएम Narendra Modi ने देश के एविएशन सेक्टर, किसानों, युवाओं और विकास को लेकर बड़ा विजन सामने रखा।

अपने संबोधन में उन्होंने जहां पिछली सरकारों पर निशाना साधा, वहीं ‘नए भारत’ की तेज रफ्तार विकास यात्रा का भी जिक्र किया। आइए जानते हैं पीएम मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें—

1- जनता से कराया ‘उद्घाटन’

अपने भाषण के अंत में पीएम मोदी ने लोगों से मोबाइल की फ्लैश लाइट ऑन कराकर एयरपोर्ट का उद्घाटन करवाया और इसे जनता की ‘अमानत’ बताया। उन्होंने कहा कि मैंने सिर्फ पर्दा उठाया है उद्घाटन आप सभी करिए। 

2- एमआरओ में आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य

पीएम ने कहा कि पहले देश में हवाई जहाजों की सर्विसिंग की पर्याप्त सुविधा नहीं थी और 85% विमान विदेश भेजने पड़ते थे। अब जेवर में एमआरओ सुविधा से भारत आत्मनिर्भर बनेगा।

3- उड़ान योजना से आम लोगों को फायदा

UDAN Scheme का जिक्र करते हुए पीएम ने बताया कि अब तक 1.6 करोड़ लोग हवाई यात्रा कर चुके हैं और इसके लिए 29 हजार करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।

4- 2014 के बाद एयरपोर्ट में बड़ा इजाफा

उन्होंने कहा कि 2014 से पहले देश में 74 एयरपोर्ट थे, जो अब बढ़कर 120 से ज्यादा हो गए हैं—यह ‘उड़ान’ के विस्तार का प्रमाण है।

5- इथेनॉल से कम हुआ कच्चे तेल का आयात

पीएम ने किसानों की सराहना करते हुए कहा कि गन्ने से बने इथेनॉल की वजह से देश को करीब 4.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल कम आयात करना पड़ा।

6- नोएडा को लेकर पुरानी सरकारों पर तंज

उन्होंने कहा कि पहले के मुख्यमंत्री अंधविश्वास के कारण नोएडा आने से डरते थे, जबकि अब यह क्षेत्र विकास का प्रतीक बन चुका है।

7- दादरी बनेगा लॉजिस्टिक हब

पीएम ने बताया कि दादरी में दो बड़े फ्रेट कॉरिडोर मिल रहे हैं, जिससे किसानों और व्यापारियों के उत्पाद दुनियाभर तक आसानी से पहुंचेंगे।

8- हर 2 मिनट में एक उड़ान का लक्ष्य

नोएडा एयरपोर्ट को लेकर उन्होंने कहा कि यह ऐसा एयरपोर्ट होगा जहां से हर 2 मिनट में एक फ्लाइट उड़ान भरेगी—यह देश के एविएशन भविष्य का संकेत है।

9- युवाओं के लिए रोजगार के अवसर

प्रधानमंत्री मोदी ने एमआरओ और एयरपोर्ट प्रोजेक्ट से बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिलने की बात कही गई। 

10- यूपी बना इंटरनेशनल एयरपोर्ट का हब

पीएम ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश देश का वह राज्य बन गया है जहां सबसे ज्यादा इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं।

यह उद्घाटन सिर्फ एक एयरपोर्ट का नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और देश के इंफ्रास्ट्रक्चर, एविएशन और आर्थिक विकास के नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।


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रूस ने 4 महीने के लिए पेट्रोल निर्यात रोका

रूस ने 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक पेट्रोल निर्यात पर रोक का फैसला किया है। उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने ऊर्जा मंत्रालय से इस प्रस्ताव को तैयार करने को कहा। रूस के मुताबिक यह कदम घरेलू सप्लाई बनाए रखने और कीमतें नियंत्रित रखने के लिए है।

नोवाक ने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे इजराइल-ईरान जंग की वजह से ग्लोबल तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्शन बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। इससे कीमतों में उतार-चढ़ाव हो रहा है। रूस रोजाना 1.2 से 1.7 लाख बैरल पेट्रोल निर्यात करता है।

इस फैसले से चीन, तुर्किये, ब्राजील, अफ्रीका और सिंगापुर प्रभावित हो सकते हैं। ये देश रूसी तेल उत्पादों के बड़े खरीदार हैं। भारत पर असर कम होगा क्योंकि वह पेट्रोल नहीं, कच्चा तेल खरीदता है।

पहले भी पेट्रोल एक्सपोर्ट पर रोक लगाई गई थी

मॉस्को में शुक्रवार को पेट्रोल एक्सपोर्ट के बैन को लेकर बैठक हुई थी। इसमें खासतौर पर यह जोर दिया गया कि राष्ट्रपति पुतिन ईंधन कीमतें नियंत्रित रखना चाहते हैं।

मंत्री नोवाक ने बैठक में कहा कि पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। तेल कंपनियों ने कहा कि पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक है और रिफाइनरियां पूरी या उससे अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं, जिससे जरूरत पूरी हो रही है।

रूस पहले भी कीमत नियंत्रण और घरेलू सप्लाई के लिए पेट्रोल-डीजल निर्यात पर रोक लगा चुका है। पिछले साल भी ऐसा हुआ था, जब यूक्रेन हमलों से रिफाइनरियां प्रभावित हुई थीं।

इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, रूस ने पिछले साल करीब 50 लाख मीट्रिक टन पेट्रोल एक्सपोर्ट किया था, यानी हर दिन लगभग 1.17 लाख बैरल के बराबर है।

एक दिन पहले ही नोवाक ने कहा था कि जरूरत पड़ी तो रूस फिर से तेल निर्यात पर रोक लगा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि रूस का यूराल्स तेल और दूसरे तेल उत्पाद इन दिनों ब्रेंट क्रूड के बराबर या उससे भी महंगे दाम पर बिक रहे हैं।

रूस के फैसले का भारत पर कितना असर

एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत सीधेतौर पर पेट्रोल जैसे तैयार ईंधन पर ज्यादा निर्भर नहीं है, बल्कि कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) पर निर्भर है। क्रूड ऑयल को ही रिफाइन कर पेट्रोल और डीजल बनाए जाते हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 80% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से लगभग 20% रूस से आता है।

भारत बहुत कम मात्रा में पेट्रोल या अन्य तैयार ईंधन आयात करता है। इसके बजाय देश अपने बड़े रिफाइनरी नेटवर्क के जरिए कच्चे तेल को खुद प्रोसेस करता है। यही वजह है कि रूस के पेट्रोल निर्यात पर लगी रोक का भारत पर सीधा असर पड़ने की संभावना बहुत कम है।

भारत रोजाना करीब 56 लाख बैरल कच्चा तेल रिफाइन करता है। यह न सिर्फ अपनी घरेलू जरूरत पूरी करता है, बल्कि तैयार ईंधन का निर्यात भी करता है।

हालांकि एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि रूस के फैसले से अगर वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। पहले से ही जंग के कारण तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।

क्रूड से 15 डॉलर तक महंगा मिल रहा रूसी तेल

इधर, इजराइल-ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे निपटने के लिए भारतीय रिफाइनर्स ने रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदने का फैसला किया है। अप्रैल महीने की डिलीवरी के लिए भारत ने रूस से लगभग 60 मिलियन यानी 6 करोड़ बैरल कच्चे तेल का सौदा किया है।

जो रूसी तेल कभी भारत को भारी डिस्काउंट पर मिलता था, अब उसके लिए प्रीमियम चुकाना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सौदे ब्रेंट क्रूड की कीमतों पर 5 से 15 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम (अतिरिक्त कीमत) पर बुक किए गए हैं। सप्लाई की कमी और मांग ज्यादा होने की वजह से कीमतों में यह उछाल देखा जा रहा है।

दरअसल, भारत की इस खरीदारी के पीछे अमेरिका की दी गई छूट का बड़ा हाथ है। अमेरिका ने भारत को उन रूसी तेल कार्गो को लेने की अनुमति दी है, जो 5 मार्च से पहले जहाजों पर लोड हो चुके थे। बाद में इस छूट का दायरा बढ़ाकर 12 मार्च कर दिया गया।


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United States ने Iran पर 850 टॉमहॉक मिसाइलें दागीं: मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव

ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका ने बड़े पैमाने पर टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया। इसे अमेरिकी हथियारों के जखीरे का अहम हथियार माना जाता है।

वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक चार हफ्तों में 850 से ज्यादा मिसाइलें दागी गईं। अनुमान है कि अमेरिकी नौसेना के पास लगभग 4,000 टॉमहॉक मिसाइलें थीं।

अगर यह सही है तो टॉमहॉक मिसाइलों का करीब एक चौथाई हिस्सा खत्म हो चुका है। रक्षा मंत्रालय के भीतर इसको लेकर चिंता बढ़ गई है। एक टॉमहॉक बनाने में करीब 2 साल लग सकते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार कमी पूरी करने में कई साल लगेंगे।

अमेरिका के पास करीब 4000 टॉमहॉक मिसाइलें

टॉमहॉक अमेरिका की खास क्रूज मिसाइल है। यह 1,000 मील (1609 किमी) तक उड़कर 1,000 पाउंड (453 किलो) विस्फोटक सटीक निशाने पर गिरा सकती है। इसके एडवांस वर्जन की रेंज 2500 किमी है।

टॉमहॉक का बड़े पैमाने पर पहला इस्तेमाल 1991 के खाड़ी युद्ध में हुआ। अमेरिका ने इराक पर दूर से सैकड़ों मिसाइलें दागीं। इसे रिमोट वार कहा गया, क्योंकि पहली बार इतनी सटीक और लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें इस्तेमाल हुईं।

टॉमहॉक को समुद्र में मौजूद युद्धपोतों और पनडुब्बियों से भी दागा जा सकता है, जिससे दुश्मन के इलाके में घुसे बिना हमला संभव हो जाता है। अमेरिका बीते एक महीने से ईरान पर हमले कर रहा है। यह पूरी तरह ‘स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक’ है। यानी हमला इतनी दूर से किया गया कि अमेरिकी सैनिकों को जमीन पर उतरने की जरूरत नहीं पड़ रही है।

एक्सपर्ट्स के अनुमान के मुताबिक अमेरिका के पास फिलहाल 4000 के करीब टॉमहॉक मिसाइलें हैं। यूरोप, मिडिल ईस्ट और एशिया में बढ़ते खतरों के बीच अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को टॉमहॉक मिसाइलों की बहुत जरूरत है।

अगर युद्ध लंबा चला, तो अमेरिका के पास अपने उपयोग के लिए भी टॉमहॉक खत्म हो सकते हैं, सहयोगियों को देना मुश्किल होगा।

एक साल में 600 टॉमहॉक मिसाइल बनाता है अमेरिका

अमेरिका टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का उत्पादन बहुत सीमित मात्रा में करता है। मौजूदा क्षमता के मुताबिक एक साल में करीब 600 टॉमहॉक मिसाइलें बनाई जा सकती हैं।

एक टॉमहॉक की लागत करीब 36 लाख डॉलर (34 करोड़ रुपए) है, जिससे तेज इस्तेमाल ने सप्लाई पर दबाव बढ़ाया है।

समस्या यह है कि एक टॉमहॉक बनने में लगभग 2 साल लगते हैं, इसलिए ऑर्डर के बाद तुरंत उपलब्ध नहीं होती।

यही वजह है कि जब युद्ध में इनका तेजी से इस्तेमाल होता है, जैसे अभी ईरान संघर्ष में हुआ, तो स्टॉक जल्दी घट जाता है और उसे भरने में कई साल लग सकते हैं।

जापान के साथ मिसाइल बनाने की डील अटकी

2024 में टॉमहॉक की कमी का समाधान दिखा, जब अमेरिका जापान में जॉइंट प्रोडक्शन के करीब पहुंचा, जिससे उत्पादन दोगुना हो सकता था।

प्लान यह था कि जापान, अमेरिका के लिए टॉमहॉक मिसाइल के कुछ हिस्से का उत्पादन करे। इसका फायदा दोनों देशों को मिलता। जापान अपनी रक्षा नीति में बदलाव कर रहा है और लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। यही वजह है कि उसने मिसाइल बनाने में मदद करने की हामी भरी।

हालांकि अमेरिका ने इस साझेदारी के लिए कई सख्त शर्तें रखी थीं। जैसे कि

मिसाइलों की तकनीक और डिजाइन पर पूरा कंट्रोल अमेरिका का रहेगा

जापान इन मिसाइलों को बिना अमेरिका की मंजूरी के किसी तीसरे देश को नहीं बेच सकेगा

इनका इस्तेमाल भी तय नियमों और शर्तों के तहत ही होगा

संवेदनशील तकनीक के ट्रांसफर को सीमित रखा जाएगा

हालांकि अमेरिका के अंदर ही इस डील का विरोध शुरू हो गया। दोनों ही पार्टी में कई नेताओं और विशेषज्ञों को डर था कि एडवांस्ड मिसाइल टेक्नोलॉजी विदेश में शेयर करना जोखिम भरा हो सकता है। टोमहॉक बनाने वाली कंपनी RTX के एक सीनियर अधिकारी ने भी इस विरोध में साथ दिया।

यह भी चिंता थी कि इससे अमेरिका की रक्षा इंडस्ट्री को नुकसान होगा और देश की इकोनॉमी पर भी असर पडे़गा। इस वजह से यह योजना पूरी तरह लागू नहीं हो पाई और मामला अटका गया।

अमेरिका से 6 गुना तेज हथियार बना रहा चीन

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक यह मामला अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा की बड़ी समस्या दिखाता है। वह अकेले चीन की बढ़ती औद्योगिक क्षमता का मुकाबला नहीं कर पा रहा, जो अब सैन्य शक्ति में बदल रही है।

चीन वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग का 28% और अमेरिका 17% हिस्सेदारी रखता है। अनुमान है कि चीन 5-6 गुना तेजी से एडवांस हथियार हासिल कर रहा है।

चीन का एक शिपयार्ड अमेरिका के सभी शिपयार्ड्स से ज्यादा जहाज बना सकता है।

अमेरिका को चीन से पिछड़ने का खतरा

अब अमेरिका को यह खतरा है कि वह इतिहास में ब्रिटेन, जर्मनी और जापान की तरह किसी उभरती औद्योगिक ताकत से सैन्य रूप से पिछड़ जाए। इतिहास बताता है कि ऐसी प्रतिस्पर्धाओं अक्सर विनाशकारी युद्धों में खत्म होती हैं।

समाधान यह है कि अमेरिका अकेले नहीं, बल्कि जापान, दक्षिण कोरिया, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ जैसे सहयोगियों के साथ मिलकर चीन का मुकाबला करे।

काफी समय तक कई सहयोगी देश अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका पर छोड़ते रहे। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसे ‘फ्री राइडिंग’ कहा था। ये देश अपनी अर्थव्यवस्था का बहुत छोटा हिस्सा रक्षा पर खर्च करते थे और अमेरिका पर निर्भर रहते थे।

ट्रम्प अक्सर फ्री राइडर्स के खिलाफ सख्ती का श्रेय लेते हैं। पिछले 60 सालों में अमेरिका ने अपनी जीडीपी का 3 से 9.4 प्रतिशत तक रक्षा पर खर्च किया है, जबकि कई सहयोगी देशों का खर्च 1 प्रतिशत से भी कम रहा है।

अब एशिया में चीन की बढ़ती आक्रामकता और यूरोप में रूस की जंगबाजी को देखते हुए यह व्यवस्था अब टिकाऊ नहीं रही। अब अमेरिका को दुनिया में अपनी भूमिका और गठबंधनों को नए सिरे से सोचना होगा, क्योंकि अब वह अकेला सबसे ताकतवर देश नहीं रहा।


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राजस्थान में आज से बारिश के साथ ओलावृष्टि का अलर्ट, कई जिलों में मौसम बदलेगा

देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम में बदल रहा है। राजस्थान में शनिवार से एक नया वेदर सिस्टम एक्टिव होगा। इसका असर प्रदेश के सभी जिलों में रहेगा। बारिश के साथ ओले गिर सकते हैं।

वहीं मध्य प्रदेश में 29 मार्च से लगातार 3 दिन बारिश की संभावना है। भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर-जबलपुर समेत प्रदेश के करीब 40 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट है। हालांकि, शनिवार को प्रदेश में तेज गर्मी रहेगी।

उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को लखनऊ, कानपुर समेत 10 जिलों में रुक-रुककर बारिश हुई। अगले 5 दिनों तक मौसम ऐसे ही रहेगा। कहीं-कहीं ओले गिर सकते हैं। बिहार में आधी रात को पटना समेत 5 जिलों में आंधी के साथ बारिश हुई। आज 38 जिलों में अलर्ट जारी किया है।

हिमाचल प्रदेश में अगले छह दिन तक बर्फबारी हो सकती है। जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर-लेह हाईवे पर एवलांच से बड़ा हादसा हुआ, जिसमें कई गाड़ियां बर्फ में दब गईं और 7 लोगों की जान चली गई।

अगले दो दिन मौसम का हाल

29 मार्च- अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में तेज बारिश की आशंका है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल में हल्की बारिश की संभावना।

30 मार्च- पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में हल्की बारिश की संभावना है।

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MS Dhoni दो हफ्ते तक IPL से बाहर रह सकते हैं: CSK को बड़ा झटका

MS Dhoni IPL 2026 के शुरुआती दो हफ्तों से बाहर रह सकते हैं, जिससे Chennai Super Kings को बड़ा झटका लग सकता है। टीम के मुताबिक, वह इस समय काफ स्ट्रेन (पिंडली में खिंचाव) से जूझ रहे हैं और रिहैब कर रहे हैं। अगर वह पूरे 14 दिन बाहर रहते हैं, तो कम से कम तीन मुकाबले—Rajasthan Royals, Punjab Kings और Royal Challengers Bengaluru के खिलाफ—मिस कर सकते हैं। उनकी वापसी 11 अप्रैल को Delhi Capitals के खिलाफ संभावित मानी जा रही है।

44 वर्षीय धोनी IPL 2026 के सबसे उम्रदराज खिलाड़ी हैं और अनुभव के मामले में टीम की सबसे बड़ी ताकत भी। पिछले सीजन में Ruturaj Gaikwad के चोटिल होने के बाद उन्होंने दोबारा कप्तानी संभाली और टीम को 4 में से 3 मैचों में जीत दिलाई। IPL इतिहास में सबसे ज्यादा 278 मैच खेलने वाले धोनी ने 38.30 की औसत से 5439 रन बनाए हैं, जिसमें 24 अर्धशतक शामिल हैं। विकेटकीपिंग में उनके नाम 47 स्टंपिंग और 154 कैच दर्ज हैं।

कप्तानी के मामले में भी उनका रिकॉर्ड बेमिसाल है—वे IPL में 100 से ज्यादा मैच जीतने वाले इकलौते कप्तान हैं। उन्होंने 235 मैचों में कप्तानी करते हुए 136 मुकाबले जिताए हैं। उनकी अगुआई में चेन्नई ने 2023 में अपना पांचवां खिताब जीता था। इस सूची में दूसरे स्थान पर Rohit Sharma हैं।

धोनी ने IPL 2023 फाइनल के बाद मुंबई के Kokilaben Dhirubhai Ambani Hospital में घुटने की सर्जरी कराई थी, जिसके बाद से उनकी फिटनेस पर लगातार नजर रखी जा रही है। इंटरनेशनल क्रिकेट से 2020 में संन्यास लेने के बाद से उनके IPL भविष्य को लेकर अटकलें जारी हैं, और माना जा रहा है कि 2026 उनका आखिरी सीजन हो सकता है।


 

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मिडिल ईस्ट संकट के बीच बड़ा फैसला: Rajnath Singh की अगुवाई में इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप का गठन

मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे तनावपूर्ण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। ऐसे में भारत सरकार ने कदम उठाते हुए एक अहम फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने मिडिल ईस्ट संकट से पैदा होने वाले विभिन्न मुद्दों पर लगातार नजर रखने और उनका समाधान करने के लिए एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप का गठन किया है।

राजनाथ सिंह करेंगे ग्रुप की अध्यक्षता

इस ग्रुप की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। ग्रुप में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और अन्य संबंधित मंत्री सदस्य के रूप में शामिल हैं। यह ग्रुप मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध से भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों खासकर ऊर्जा सुरक्षा, तेल-गैस आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता पर नजर रखेगा।

सरकार का यह कदम इसलिए जरूरी हो गया है क्योंकि भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 88 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस की आधी जरूरत होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आयात करता है। हाल के हमलों के बाद इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से टैंकरों की आवाजाही पर असर हुआ है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। भारत में ईंधन की कीमतों में उछाल या पैनिक स्थिति न बने, इसके लिए यह ग्रुप एक्टिव रूप से काम करेगा।

जनता को राहत देने का फैसला 

इसी क्रम में सरकार ने आम जनता को राहत देते हुए पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर शून्य कर दी है। डीजल निर्यात पर लगने वाले लाभ कर और जेट फ्यूल पर करों में भी संशोधन किया गया है।

केंद्र ने लॉकडाउन लगाए जाने की अफवाहों को भी सिरे से खारिज कर दिया है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत कई मंत्रियों ने साफ कहा कि देश में कोई लॉकडाउन नहीं लगेगा।

जनता से पैनिक न फैलाने की अपील की गई है। राजनाथ सिंह की अगुवाई वाला यह इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए निरंतर निगरानी रखेगा।


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