26 जनवरी को रेलवे का बड़ा फैसला, दिल्ली के प्रमुख स्टेशनों पर इस सेवा पर रोक

गणतंत्र दिवस समारोह को लेकर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इसी के तहत रेलवे स्टेशनों पर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सुरक्षा कारणों से रेलवे ने नई दिल्ली समेत प्रमुख स्टेशनों पर 23 जनवरी से 26 जनवरी तक पार्सल सेवा पर रोक लगाने का फैसला किया है।

इस अवधि में न तो पार्सल की बुकिंग की जाएगी और न ही बाहर से आने वाली ट्रेनों से पार्सल की अनलोडिंग होगी। पार्सल गोदाम और प्लेटफॉर्म को पूरी तरह पार्सल पैकेज और पैकिंग सामग्री से मुक्त रखा जाएगा। इसके साथ ही सभी संबंधित स्टेशनों पर लीज्ड एसएलआर और वीपी समेत आवक व जावक दोनों तरह के पार्सल ट्रैफिक पर प्रतिबंध लागू रहेगा।

हालांकि, सभी आवश्यक व्यावसायिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पंजीकृत समाचार पत्रों और पत्रिकाओं की बुकिंग को इस प्रतिबंध से छूट दी जाएगी।

इन स्टेशनों पर पार्सल सेवा रहेगी बंद

उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन, आनंद विहार टर्मिनल और दिल्ली सराय रोहिल्ला से संचालित ट्रेनों में सभी प्रकार की पार्सल सेवाएं अस्थायी रूप से बंद रहेंगी।

इन स्टेशनों पर न तो पार्सल लोड किए जाएंगे और न ही बाहर से आने वाली ट्रेनों से पार्सल उतारे जाएंगे। इस दौरान यात्रियों को केवल कोच के भीतर अपने व्यक्तिगत सामान के साथ यात्रा करने की अनुमति होगी।


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मनरेगा के बाद UPA सरकार के दो और कानूनों में बदलाव की तैयारी, जल्द संसद में आ सकता है बिल

मनरेगा में बदलाव के बाद अब केंद्र सरकार यूपीए शासनकाल में बनाए गए दो प्रमुख सामाजिक कानूनों—शिक्षा का अधिकार (RTE) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA)—में संशोधन की दिशा में कदम बढ़ा रही है। सरकार का फोकस इन योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने और यह सुनिश्चित करने पर है कि इनका लाभ केवल वास्तविक पात्र लोगों तक ही पहुंचे।

पात्र लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने की तैयारी

सरकार का उद्देश्य है कि योजनाओं का लाभ समय पर और सही तरीके से जरूरतमंदों को मिले। इसके लिए सभी लाभार्थियों का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। शुरुआती तौर पर नियमों और प्रशासनिक आदेशों के माध्यम से सुधार लागू किए जाएंगे। यदि इन उपायों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते हैं, तो सरकार संसद में संशोधन विधेयक पेश करने पर भी विचार कर सकती है।

यूपीए काल के कानूनों में बताई गईं प्रमुख खामियां

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में बनाए गए अधिकार-आधारित कानूनों में कुछ बुनियादी कमियां सामने आई हैं।

शिक्षा का अधिकार कानून सभी बच्चों तक प्रभावी ढंग से शिक्षा पहुंचाने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाया।

खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने के बावजूद कई जरूरतमंद परिवारों तक अनाज की नियमित और सुनिश्चित आपूर्ति नहीं हो सकी।

विभिन्न सामाजिक योजनाओं में लाभार्थियों की पहचान और निगरानी व्यवस्था कमजोर रही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी सामाजिक योजनाओं के लाभार्थियों का पूर्ण डिजिटल पंजीकरण किया जाए, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति योजनाओं से वंचित न रहे।

क्या है शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का संवैधानिक अधिकार प्रदान किया गया है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21(क) के अंतर्गत आता है और 1 अप्रैल 2010 से देशभर में लागू है। हालांकि, यह कानून उच्च शिक्षा यानी कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर लागू नहीं होता और 14 वर्ष से अधिक आयु के छात्रों को इसके दायरे में शामिल नहीं किया गया है।

क्या है राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013

यूपीए सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2013 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) लागू किया गया था, जिसके तहत भोजन को कानूनी अधिकार का दर्जा मिला। इस कानून के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को चावल 3 रुपये प्रति किलो, गेहूं 2 रुपये प्रति किलो और मोटे अनाज 1 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।


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BMC में सिमटी कांग्रेस, लेकिन इन इलाकों में दिखा जबरदस्त प्रदर्शन

महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों में वोटों की गिनती जारी है, जिसमें बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं। शुरुआती रुझानों में मुंबई में कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक नजर आ रहा है।

मुंबई के कुल 227 वार्डों में से भाजपा 88 वार्डों में आगे चल रही है, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 31 वार्डों में बढ़त बनाए हुए है। इन दोनों दलों ने मिलकर BMC में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। वहीं ठाकरे बंधुओं की शिवसेना (उद्धव गुट) 70 वार्डों में आगे चल रही है।

दोपहर एक बजे तक के रुझानों के मुताबिक, महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों में कांग्रेस 171 वार्डों में आगे है। यह पार्टी के लिए तीसरा सबसे बड़ा प्रदर्शन है, जो भाजपा (848 वार्डों में बढ़त) और एकनाथ शिंदे की शिवसेना (213 वार्डों) के बाद आता है।

इसी बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता अजीत पवार अपने चाचा शरद पवार की तुलना में ज्यादा मजबूत राजनीतिक दावेदार के रूप में उभरते दिख रहे हैं। शरद पवार की अगुवाई वाला गुट शुरुआती रुझानों में कमजोर नजर आ रहा है। वहीं, ठाकरे परिवार का प्रदर्शन भी पूरे राज्य में अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा है और वह एनसीपी व कांग्रेस से पीछे चल रहा है।

महानगरों में कांग्रेस का कमजोर प्रदर्शन

मुंबई और पुणे दोनों ही बड़े शहरों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है। दोनों नगर निगमों में पार्टी केवल पांच-पांच वार्डों में आगे चल रही है। नवी मुंबई और ठाणे में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ठाणे में कांग्रेस सिर्फ दो वार्डों में आगे है, जबकि नवी मुंबई में अभी तक पार्टी खाता भी नहीं खोल सकी है।

इसके अलावा पिंपरी-चिंचवड़, वसई-विरार, उल्हासनगर, नांदेड़-वाघाला, जलगांव, अहिल्यानगर, धुले और कल्याण-डोंबिवली में दोपहर एक बजे तक कांग्रेस का खाता शून्य पर अटका हुआ है। वहीं, पनवेल में पार्टी को केवल एक सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है।

इन नगर निगमों में कांग्रेस का दमदार प्रदर्शन

हालांकि, कुछ नगर निगमों में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया है। भिवंडी-निजामपुर, अमरावती, चंद्रपुर और लातूर में कांग्रेस अन्य दलों से आगे चल रही है और यहां नगर निगम पर नियंत्रण हासिल करने की स्थिति में नजर आ रही है। मीरा-भायंदर में भी पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा है, जहां कांग्रेस आठ वार्डों में बढ़त बनाए हुए है।

इसके अलावा नागपुर और कोल्हापुर में कांग्रेस दूसरे स्थान पर बनी हुई है। नागपुर में पार्टी 22 वार्डों में आगे चल रही है, जबकि कोल्हापुर में 23 वार्डों में बढ़त दर्ज की गई है।


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बॉलीवुड में एक और तलाक, दो साल में टूटा एक्ट्रेस-CEO का रिश्ता

पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री की अभिनेत्री मैंडी ठक्कर और उनके पति शेखर कौशल का वैवाहिक रिश्ता टूट गया है। दोनों ने आपसी सहमति से तलाक ले लिया है। शुक्रवार को फैमिली कोर्ट ने उनकी संयुक्त याचिका पर सुनवाई करते हुए पहले मोशन को मंजूरी दे दी।

मैंडी ठक्कर की ओर से पेश हुए सेलिब्रिटी अधिवक्ता ईशान मुखर्जी ने तलाक की पुष्टि करते हुए बताया कि कोर्ट ने आपसी सहमति से दायर पहली अर्जी को स्वीकार कर लिया है। हालांकि, उन्होंने सेटलमेंट से जुड़ी शर्तों पर कोई जानकारी देने से इनकार करते हुए कहा कि समझौते की सभी जानकारियां गोपनीय रखी गई हैं।

सूत्रों के अनुसार, तलाक की याचिका आपसी सहमति से दाखिल की गई थी, जिसमें दोनों पक्ष बिना किसी विवाद के अलग होने पर सहमत हुए। शुक्रवार को यह पूरी प्रक्रिया दिल्ली के साकेत जिला न्यायालय स्थित फैमिली कोर्ट में संपन्न हुई, जहां दोनों की संयुक्त अर्जी स्वीकार की गई और बयान दर्ज किए गए।

पहले मोशन को मंजूरी मिलने के बाद मामला आपसी सहमति से तलाक की निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा।

ब्रिटिश मूल की भारतीय अभिनेत्री मैंडी ठक्कर ने पंजाबी सिनेमा में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इसके अलावा वह हिंदी और तमिल प्रोजेक्ट्स में भी नजर आ चुकी हैं। दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और अभिनय के चलते रीजनल फिल्म इंडस्ट्री में उनकी अच्छी-खासी फैन फॉलोइंग है।

गौरतलब है कि मैंडी ठक्कर ने 13 फरवरी 2024 को जिम ट्रेनर और CEO शेखर कौशल से विवाह किया था। यह शादी हिंदू और सिख दोनों परंपराओं के अनुसार संपन्न हुई थी। दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला करते हुए अपने वैवाहिक मतभेदों को निजी और सम्मानजनक तरीके से सुलझाने का रास्ता चुना है।


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वेनेजुएला की नेता मारिया मचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार ट्रंप को सौंपा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चाहत है कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिले। वह साल 2025 में नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर कई बार बयान भी दे चुके थे। उन्होंने उस दौरान कहा था कि वह भारत-पाकिस्तान सैन्य झड़प सहित कई जंग रोके, इसलिए वह शांति पुरस्कार के हकदार हैं। लेकिन, उनके दावों को खारिज करते हुए नोबेल पीस प्राइज समिति ने वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को चुना। मारिया ने नोबेल मिलने के बाद ट्रंप का शुक्रिया भी अदा किया था। अब मारिया ने ट्रंप को अपना नोबेल पुरस्कार भेंट किया है।

माचाडो और ट्रंप की मुलाकात

दरअसल, वेनेजुएलाई राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दक्षिणी अमेरिकी देश में उथल पुथल है। ऐसे में वेनेजुएलाई नेता मारिया माचाडो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात किया। उन्होंने दावा किया कि मीटिंग में उन्होंने ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक भेंट किया, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि क्या डोनाल्ड ट्रंप ने उनका नोबेल स्वीकार किया या नहीं। हालांकि, नोबेल शांति पुरस्कार देने वाली संस्था पहले ही साफ कर चुकी है कि नियमों के अनुसार पुरस्कार को हस्तांतरित या साझा नहीं किया जा सकता है।


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अमेरिका के टैरिफ से मखाना उद्योग प्रभावित, पूर्णिया के किसानों को बड़ा नुकसान

देश में सबसे अधिक मखाना उत्पादन करने वाले सीमांचल और मिथिलांचल के कारोबारियों के लिए अमेरिकी टैरिफ बड़ी चिंता का कारण बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस टैरिफ का सीधा असर मखाने की कीमतों पर पड़ने की आशंका है। टैरिफ बढ़ने से अमेरिकी बाजार में मखाना महंगा हो जाएगा, जिससे वहां इसकी मांग में भारी गिरावट देखी जा सकती है।

टैरिफ बढ़ने के कारण भारतीय मखाने की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में मखाने की मांग 40 से 60 प्रतिशत तक घट सकती है। इसका सीधा प्रभाव स्थानीय बाजार पर पड़ेगा और व्यापारियों को नए निर्यात बाजारों की तलाश करनी पड़ेगी।

अमेरिकी टैरिफ से घटेगी मखाने की मांग

अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे आयात शुल्क से बिहार के मखाना उद्योग पर प्रतिकूल असर पड़ने वाला है। अभी तक मखाने पर अमेरिका में लगभग 3.5 प्रतिशत टैरिफ लागू था, लेकिन बदले हालात में इसे बढ़ाकर करीब 30 प्रतिशत तक करने की तैयारी की जा रही है। टैरिफ में इस बड़े इजाफे से अमेरिकी बाजार में मखाने की कीमत काफी बढ़ जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं के लिए यह उत्पाद महंगा हो जाएगा और मांग में गिरावट तय मानी जा रही है।

इसका असर पूर्णिया के साथ-साथ सीमांचल और मिथिलांचल क्षेत्र से अमेरिका को होने वाले मखाने के निर्यात पर पड़ेगा। केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश से अमेरिका को होने वाले मखाने के निर्यात में कमी आने की आशंका है।

हजारों किसानों पर पड़ेगा असर

टैरिफ बढ़ने से पूर्णिया समेत पूरे बिहार के हजारों मखाना किसानों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। मखाने के अलावा बिहार से अमेरिका को निर्यात होने वाले जर्दालु और मालदा आम, लीची, हल्दी, मधुबनी पेंटिंग, भागलपुरी सिल्क और अन्य हस्तशिल्प उत्पादों पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। टैरिफ बढ़ने से इन सभी उत्पादों की कीमतें बढ़ेंगी और उनकी मांग घटने की आशंका है।

सीमांचल–मिथिलांचल में होता है 90 प्रतिशत उत्पादन

देश में मखाने का लगभग 90 प्रतिशत उत्पादन पूर्णिया सहित सीमांचल और मिथिलांचल क्षेत्रों में होता है। खास तौर पर पूर्णिया मखाना उत्पादन के क्षेत्र में लगातार अग्रणी बनता जा रहा है। भोला पासवान शास्त्री कृषि कॉलेज में विकसित उच्च उपज देने वाले ‘सबौर मखाना-वन’ बीज के बाद इस क्षेत्र में मखाने के रकबे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में केवल पूर्णिया जिले में करीब 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मखाने की खेती की जा रही है।

मखाना व्यापार का केंद्र है पूर्णिया

मखाना कारोबार का प्रमुख केंद्र भी पूर्णिया ही है। यहां का हरदा बाजार राज्य की सबसे बड़ी मखाना मंडी के रूप में जाना जाता है, जहां 100 से अधिक मखाना प्रोसेसिंग फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं। देशभर में मखाने की कीमतें भी इसी मंडी से तय होती हैं। हरदा मंडी से बड़ी मात्रा में मखाना अमेरिका और यूरोप समेत अन्य देशों को निर्यात किया जाता है, लेकिन टैरिफ बढ़ने के बाद निर्यात प्रभावित होने की आशंका है।

क्या कहते हैं मखाना उद्यमी

‘फार्म टू फैक्ट्री’ के निदेशक मनीष कुमार का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ बढ़ने से मखाना कारोबार को गहरा नुकसान हो सकता है। उन्होंने बताया कि कुल मखाना निर्यात का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा अकेले अमेरिका को भेजा जाता है। टैरिफ बढ़ने से वहां मखाना महंगा होगा, जिससे मांग में गिरावट आएगी और इसका सीधा असर कारोबार पर पड़ेगा।

वहीं मखाना कारोबारी अमरेंद्र कुमार ने बताया कि मखाना एक हेल्दी और प्लांट-बेस्ड सुपरफूड के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और प्रीमियम बाजार में अपनी जगह बना रहा है। इसी वजह से विदेशों में इसकी मांग बढ़ी है, खासकर अमेरिका में। हालांकि, यदि ट्रंप प्रशासन मखाने पर 50 प्रतिशत तक टैक्स लगाने की तैयारी करता है, तो अमेरिकी बाजार में इसकी मांग में तेज गिरावट आ सकती है। ऐसे में निर्यातकों को यूरोप, मध्य पूर्व और अन्य एशियाई देशों को वैकल्पिक बाजार के रूप में तलाशना होगा, जिसमें सरकार के सहयोग की जरूरत है।


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पूर्व भारतीय क्रिकेटर की भविष्यवाणी, इन दो टीमों के बीच होगा T20 वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल

भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में टी20 वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत 7 फरवरी से होगी, जबकि खिताबी मुकाबला 8 मार्च को खेला जाएगा। भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर और मौजूदा क्रिकेट विशेषज्ञ आकाश चोपड़ा ने टूर्नामेंट को लेकर बड़ी भविष्यवाणी की है। उनका मानना है कि फाइनल मुकाबला गत चैंपियन भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला जा सकता है।

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम को ग्रुप ए में शामिल किया गया है, जबकि ऑस्ट्रेलिया ग्रुप बी का हिस्सा होगा। दोनों टीमें सुपर-8 चरण में एक ही ग्रुप में होंगी। यदि भारत और ऑस्ट्रेलिया सुपर-8 से आगे बढ़ने में सफल रहते हैं, तो सेमीफाइनल में उनकी टक्कर नहीं होगी, जिससे फाइनल में आमना-सामना होने की संभावना मजबूत हो जाती है।

आकाश चोपड़ा का बयान

आकाश चोपड़ा ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, “भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल खेला जा सकता है। दोनों टीमें बेहद मजबूत हैं और दबाव के हालात में बेहतरीन प्रदर्शन करना जानती हैं।”

उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई टीम की संभावित बल्लेबाजी रणनीति पर भी चर्चा की। चोपड़ा के अनुसार, कंगारू टीम आक्रामक सोच के साथ मैदान में उतर सकती है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी रणनीति काफी स्पष्ट है, जहां एक ही बल्लेबाज एंकर की भूमिका निभाता है, जबकि बाकी खिलाड़ी पहली गेंद से आक्रामक रुख अपनाते हैं। जोश इंग्लिस को उन्होंने ऐसा खिलाड़ी बताया, जो स्ट्राइकर और एंकर दोनों की भूमिका निभा सकते हैं, जबकि कैमरन ग्रीन से भी पारी संभालने की उम्मीद की जा सकती है।

गत चैंपियन है भारतीय टीम

भारतीय टीम को इस बार भी खिताब का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम इंडिया तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी जीतने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगी। भारत मौजूदा चैंपियन है, जिसने 2024 टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर खिताब जीता था। घरेलू परिस्थितियों में भारतीय टीम को हराना किसी भी विपक्षी के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

20 टीमों की होगी भागीदारी

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में कुल 20 टीमें हिस्सा लेंगी, जिन्हें चार ग्रुपों में बांटा गया है। खास बात यह है कि इटली ने पहली बार टी20 वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई किया है। भारत और श्रीलंका के पांच अलग-अलग स्थानों पर कुल 55 मैच खेले जाएंगे।

ग्रुप चरण में सभी टीमें राउंड-रॉबिन फॉर्मेट में चार-चार मुकाबले खेलेंगी। प्रत्येक ग्रुप की शीर्ष दो टीमें सुपर-8 चरण में प्रवेश करेंगी। इसके बाद सुपर-8 को दो ग्रुपों में विभाजित किया जाएगा, जहां प्रत्येक टीम तीन मैच खेलेगी। दोनों ग्रुप की शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी और सेमीफाइनल की विजेता टीमें फाइनल में आमने-सामने होंगी। फाइनल जीतने वाली टीम को टी20 वर्ल्ड कप 2026 का चैंपियन घोषित किया जाएगा।


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कोहरे ने रोकी रफ्तार, हमसफर एक्सप्रेस 6 घंटे लेट

घने कोहरे के कारण दिल्ली की ओर आने वाली 30 से अधिक ट्रेनें देरी से संचालित हो रही हैं। विलंब की वजह से नई दिल्ली–दरभंगा हमसफर स्पेशल करीब पौने छह घंटे देरी से पहुंचेगी, जबकि पुरानी दिल्ली–जैसलमेर रूणिचा एक्सप्रेस लगभग ढाई घंटे विलंब से चल रही है।

ट्रेनों की देरी से लंबी दूरी के यात्रियों के साथ-साथ दैनिक यात्रियों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। शुक्रवार सुबह कई लोकल और उपनगरीय ट्रेनें भी तय समय से काफी देर से चलाई जा रही हैं।

सहारनपुर–पुरानी दिल्ली पैसेंजर लगभग ढाई घंटे, पानीपत–गाजियाबाद एमईएमयू पौने दो घंटे, पलवल–नई दिल्ली महिला विशेष ईएमयू करीब डेढ़ घंटे देरी से चल रही है। इसके अलावा जींद–नई दिल्ली एमईएमयू और दनकौर–शकूरबस्ती ईएमयू सवा एक घंटे, हिसार–नई दिल्ली पैसेंजर करीब एक घंटे, बुलंदशहर–तिलक ब्रिज एमईएमयू 45 मिनट से अधिक विलंब से संचालित हो रही है। वहीं मथुरा–गाजियाबाद ईएमयू, बल्लभगढ़–शकूरबस्ती ईएमयू और गाजियाबाद–पुरानी दिल्ली ट्रेनें करीब आधे घंटे की देरी से चल रही हैं।

सुबह के समय लोकल ट्रेनों के विलंब से चलने के कारण यात्रियों को अपने कार्यस्थलों तक पहुंचने में खासा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार घने कोहरे के चलते दृश्यता कम हो गई है, जिससे ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।


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दिल्ली की तर्ज पर मुंबई में बनेगा 30 मंजिला बिहार भवन, मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

बिहार सरकार ने राज्य से बाहर रह रहे बिहारवासियों के हित में एक और अहम निर्णय लिया है। दिल्ली के बाद अब मुंबई में भी अत्याधुनिक बिहार भवन का निर्माण किया जाएगा। यह भवन खासतौर पर इलाज के उद्देश्य से मुंबई आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।

कैबिनेट से 314.20 करोड़ रुपये की मंजूरी

भवन निर्माण विभाग ने इस परियोजना की विस्तृत रूपरेखा तैयार कर ली है। विभागीय सचिव कुमार रवि ने बताया कि मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 314 करोड़ 20 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।

एलिफिंस्टन एस्टेट में बनेगा बिहार भवन

मुंबई पोर्ट ट्रस्ट क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एलिफिंस्टन एस्टेट में बिहार भवन का निर्माण किया जाएगा। लगभग 0.68 एकड़ भूमि में बनने वाला यह भवन आधुनिक शहरी ढांचे का उत्कृष्ट उदाहरण होगा

30 मंजिला आधुनिक और स्मार्ट इमारत

प्रस्तावित बिहार भवन बेसमेंट सहित करीब 30 मंजिला होगा, जिसकी कुल ऊंचाई लगभग 69 मीटर होगी। भवन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसमें सरकारी कार्यालयों, बैठकों और आवासीय सुविधाओं की जरूरतें एक साथ पूरी हो सकें।

इलाज के लिए आने वाले मरीजों को मिलेगी विशेष सुविधा

इस बिहार भवन की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि इसमें विशेष रूप से इलाज के लिए, खासकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार हेतु मुंबई आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के ठहरने की व्यवस्था की जाएगी।

240 बेड की डोरमेट्री व्यवस्था

मरीजों और उनके परिजनों के लिए भवन में 240 बेड की क्षमता वाला डोरमेट्री सिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे कम खर्च में सुरक्षित और सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराया जा सकेगा।

178 कमरे और आधुनिक आवासन सुविधा

बिहार भवन में कुल 178 कमरे बनाए जाएंगे। इनका उपयोग सरकारी अधिकारियों, बैठकों में शामिल प्रतिनिधियों और अन्य आवश्यक आगंतुकों के ठहराव के लिए किया जाएगा।

स्मार्ट पार्किंग और अत्याधुनिक तकनीक

भवन में सेंसर आधारित स्मार्ट ट्रिपल और डबल डेकर पार्किंग सुविधा उपलब्ध होगी, जिसमें एक साथ 233 वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था रहेगी। इससे मुंबई जैसे व्यस्त महानगर में पार्किंग की समस्या से राहत मिलेगी।

कॉन्फ्रेंस हॉल, कैफेटेरिया और मेडिकल रूम

बिहार भवन में 72 लोगों की क्षमता वाला आधुनिक कॉन्फ्रेंस हॉल, कैफेटेरिया, मेडिकल रूम और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि यहां ठहरने वालों को सभी जरूरी सुविधाएं एक ही परिसर में मिल सकें।

जनकल्याण और बिहार की प्रगति की दिशा में कदम

भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि ने कहा कि मुंबई में बिहार भवन का निर्माण राज्य के बाहर रहने वाले बिहारवासियों के लिए सम्मान, सुविधा और सहयोग प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो बिहार की प्रगति और जनकल्याण को और मजबूती देगा।



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नोएडा में ठंड का कहर: घने कोहरे के चलते नर्सरी से 8वीं तक के स्कूल दो दिन और बंद

गौतम बुद्ध नगर में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे को देखते हुए प्रशासन ने अहम निर्णय लिया है। जिले में नर्सरी से लेकर कक्षा 8 तक के सभी विद्यालय 16 और 17 जनवरी (शुक्रवार और शनिवार) को बंद रहेंगे। इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल पंवार ने शुक्रवार को आदेश जारी किया।

जारी निर्देशों में बताया गया है कि यह फैसला जिलाधिकारी के आदेशों के अनुपालन में लिया गया है, ताकि प्रतिकूल मौसम के कारण बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा या स्वास्थ्य जोखिम न हो।

सभी बोर्डों के स्कूल रहेंगे बंद

यह आदेश सीबीएसई, आईसीएसई, आईबी, यूपी बोर्ड समेत सभी बोर्डों से संबद्ध विद्यालयों पर लागू होगा। निर्देशों का उल्लंघन कर यदि कोई स्कूल खुला पाया गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

पहले भी बढ़ाई जा चुकी हैं छुट्टियां

गौरतलब है कि ठंड और कोहरे के चलते पहले ही शीतकालीन अवकाश को 15 जनवरी तक बढ़ाया गया था, लेकिन मौसम में कोई सुधार न होने के कारण प्रशासन ने दो दिन की अतिरिक्त छुट्टी घोषित की है।

जिले में लगातार गिरते तापमान और घने कोहरे का असर आम जनजीवन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने दें और ठंड से बचाव के आवश्यक उपाय अपनाएं।


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