रिलायंस जियो ने अपने दो पॉपुलर वाले प्रीपेड प्लान को किया बंद

रिलायंस जियो ने अपने करोड़ों ग्राहकों को एक के बाद एक झटका दिया है। कंपनी ने महज दो दिन के अंदर ही अपने दो सबसे पॉपुलर प्रीपेड प्लान्स को बंद कर दिया है। इनमें पहला 249 रुपये का बजट-फ्रेंडली प्लान था, जो खासतौर पर कम डेटा और महीने भर की वैलिडिटी चाहने वाले यूजर्स के बीच काफी पसंद किया जा रहा था। जबकि दूसरा प्लान 799 रुपये वाला था, जो लॉन्ग-टर्म वैलिडिटी वाले यूजर्स के बीच काफी ज्यादा पॉपुलर था। हालांकि अब कंपनी ने इन दोनों ही प्लान्स को बंद कर दिया है। चलिए पहले इन दोनों प्लान्स के बारे में विस्तार से जानें और फिर अब आपके पास क्या ऑप्शंस हैं इस पर भी एक नजर डालते हैं...

Jio का 249 रुपये वाला प्लान

जियो के इस प्लान में कंपनी 28 दिन की वैलिडिटी, रोजाना 1GB हाई-स्पीड डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग और हर दिन 100 SMS की सुविधा दे रही थी। साथ ही इस प्लान में फ्री JioCinema, JioTV और JioCloud का एक्सेस भी मिल रहा था। यह प्लान एक बजट-फ्रेंडली होने के साथ-साथ डेटा, कॉलिंग और SMS की जरूरत को भी पूरा कर रहा था।

Jio का 799 रुपये वाला प्लान

जियो के इस प्लान में कंपनी 84 दिन की वैलिडिटी, रोजाना 1.5GB डेटा (कुल 126GB), अनलिमिटेड कॉलिंग और 100 SMS/दिन भेजने की सुविधा दे रही थी। साथ ही इस प्लान में फ्री JioCinema, JioTV और JioCloud का एक्सेस भी मिल रहा था। यह प्लान लंबे टाइम तक डेटा और कॉलिंग की सुविधा दे रहा था। अब कंपनी ने इसे भी My Jio ऐप से हटा दिया है।

अब आपके पास क्या हैं ऑप्शंस?

239 रुपये वाला प्लान

अगर आप 249 रुपये वाले बजट-फ्रेंडली प्लान की जगह कोई और सस्ता प्लान ढूंढ रहे हैं तो 239 रुपये वाला प्लान आपके लिए एक बेस्ट अल्टरनेटिव ऑप्शन हो सकता है। हालांकि इस प्लान में थोड़ी कम 22 दिन की वैलिडिटी मिलती है लेकिन यह प्लान रोजाना 1.5GB डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग और 100 SMS/दिन भेजने की सुविधा दे रहा है।

889 रुपये वाला प्लान

वहीं, अगर आप 889 प्लान वाले प्लान की जगह कोई और प्लान ढूंढ रहे हैं तो 889 रुपये वाला प्लान आपके लिए एक बेस्ट अल्टरनेटिव ऑप्शन हो सकता है। इस प्लान में आपको 84 दिन की वैलिडिटी मिलती है जिसके साथ कंपनी रोजाना 1.5GB डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग, 100 SMS/दिन और JioSaavn Pro सब्सक्रिप्शन भी ऑफर कर रही रही है।


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टेलीग्राफ से लेकर 5G तक का सफर और अब स्वदेशी 6G टेक्नोलॉजी पर हमारा फोकस

देश आज 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। आज देश जहां खड़ा है उस आधुनिक भारत की नींव इसके गौरवशाली इतिहास में है। ऐसा ही एक सेक्टर भारत के टेलीकॉम सेक्टर की बात करें तो हम हाई स्पीड 5G नेटवर्क तक पहुंच चुके हैं। इतना ही नहीं भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हैं, जिसके पास अपनी टेलीकॉम टेक्नोलॉजी सिस्टम है।

इतिहास में देखें तो भारत में टेलीकॉम की शुरुआत साल 1851 में टेलीग्राफ लाइन से हुई और आज देश में 97 करोड़ टेलीकॉम यूजर हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हम आपको आज भारत की टेलीकॉम सेक्टर के डेवलपमेंट की जानकारी शेयर कर रहे हैं।

भारत में टेलीफोन की शुरुआत

भारत में टेलीफोन सर्विस की शुरुआत साल 1882 से हुई। देश में सबसे पहले कोलकाता, बॉम्बे (मुंबई) और मद्रास (चेन्नई) में टेलीफोन एक्सचेंज ओपन किए गए। उस वक्त देश में ब्रिटिश शासन था और टेलीफोन सर्विस को आम लोगों से दूर रखा गया था। यह सर्विस सिर्फ कुछ चुनिंदा सेवाओं के लिए थी। कोलकाता एक्सचेंज की बात करें तो शुरुआत में सिर्फ 93 ग्राहक थे।

आजादी के बाद भी टेलीफोन कनेक्शन मिलना बिलकुल आसान नहीं था। आवेदन करने के बाद लोगों को महीनों और सालों का इंतजार करना पड़ता था। टेलीकॉम सेक्टर में सुधार 1990 में आर्थिक सुधार के बाद ही आया

प्राइवेट कंपनियों की शुरुआत

साल 1991 में आर्थिक सुधारों के बाद देश में टेलीकॉम सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों की एंट्री हुई। नेशनल टेलीकॉम पॉलिसी 1994 के बाद इस सेक्टर में विदेशी निवेश भी आने लगा और मोबाइल फोन, रेडियो पेजिंग और इंटरनेट सर्विस की शुरुआत हुई।

पहली मोबाइल कॉल

देश में पहली मोबाइल कॉल 31 जुलाई 1995 को हुई। यह कॉल केंद्रीय दूरसंचार मंत्री सुखराम और पश्चिम बंगाल के सीएम ज्योति बसु के बीच हुई। उस वक्त मोबाइल फोन आज की तरह हल्के नहीं थे। इसके साथ नेटवर्क भी काफी कमजोर था और एक कॉल के लिए कॉलर और रिसीवर को करीब 16 रुपये प्रति मिनट तक देने होते थे।

हर जेब तक पहुंचा मोबाइल

प्राइवेट कंपनियों और विदेशी निवेश के आने से देश में टेलीकॉम सेक्टर की तस्वीर पूरी तरह से बदल गई। 2000 के दशक तक मोबाइल खास लोगों से आम लोगों के बीच में पहुंच गया। देश में तेजी से मोबाइल सब्सक्राइबर्स का बेस बढ़ने लगा। साल 1999 में देश में 12 लाख लोगों के पास मोबाइल था और 20003 में करीब 2.73 करोड़ लोगों तक इसकी पहुंच हो गई। इसके साथ 2005 तक मोबाइल कनेक्शन ने लैंडलाइन को भी पीछे छोड़ दिया।

यह सब सस्ते GSM/CDMA नेटवर्क, प्रति मिनट के बजाय प्रति सेकंड बिलिंग सिस्टम और सस्ते चाइनीज फोन की वजह से मुमकिन हो पाया। साल 2008 में भारत 30 करोड़ कनेक्शन के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मार्केट बन गया।

डेटा और स्मार्टफोन की एंट्री

2010 में एक बार फिर से देश की टेलीकॉम इंडस्ट्री में क्रांती आई। सस्ते एंड्रॉयड फोन और डेटा के साथ लोग की पहुंच इंटरनेट से हुई। 2012 में Airtel ने 4G लॉन्च किया और 2016 में मुकेश अंबानी ने जब रिलायंस जियो के साथ इस इंडस्ट्री में कदम रखा तो सबकुछ बदल गया। उन्होंने वॉइस कॉलिंग, रोमिंग और डेटा के प्लान बदलकर टेलीकॉम सेक्टर की तस्वीर ही बदल दी। 2018 तक भारत दुनिया में सबसे ज्यादा मोबाइल डेटा यूज करने वाला देश बन गया।

5G की शुरुआत और 6G की राह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2022 में देश में 5जी सर्विस लॉन्च की। 2025 तक देश के सभी बड़े शहरों और जिलों में 5जी नेटवर्क मौजूद है। इसके साथ ही ग्रामीण भारत में भी 5G सर्विस पहुंचाने पर काम हो रहा है।

देश में फिलहाल कुल मोबाइल इंटरनेस सब्सक्राइबर्स की संख्या लगभग 97 करोड़ है। इसके साथ ही शहरों में टेली-डेंसिटी 131.45% और ग्रामीण टेली डेंसिटी 59.06% है। इसके साथ भारत ने तेजी से स्वदेशी 6G टेक्नोलॉजी पर भी काम शुरू कर दिया है।

स्वदेशी 6G टेक्नोलॉजी

5G के बाद अब भारत 6G टेक्नोलॉजी की ओर तेजी से कदम बढ़ रहा है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने B6GA (भारत 6G गठबंधन) की समीक्षा करते हुए बताया कि भारत का लक्ष्य 2023 तक देश को 6G में ग्लोबल लीडर बनाने का लक्ष्य रखा। B6GA मिशन के तहत भारत में 80+ संस्थाएं और 30+ स्टार्टअप जुड़े हैं।

6G विजन डॉक्युमेंट के तहत भारत अभी से स्वदेशी नेटवर्क, ग्रामीण स्मार्ट कनेक्टिविटी और हेल्थ व एग्रीकल्चर में 6G के उपयोग पर  काम कर रहा है। इसके साथ ही हमारा फोकस हाई-स्पीड इंटरनेट और स्मार्ट नेटवर्क के साथ भारत को टेक्नोलॉजी क्रिएटर और ग्लोबल इनोवेशन हब बनाने पर है।




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समुद्र में गिराया जाएगा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन

 एक फुटबॉल ग्राउंड के आकार की लैबोरेटरी, वजन 430 टन से अधिक और धरती से लगभग 400 किलोमीटर की ऊंचाई। 28 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घूम रही इस लैबोरेटरी को हम इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन कहते हैं। 1998 में इसकी लॉन्चिंग के बाद से अब तक 26 देशों के 280 से ज्यादा एस्ट्रोनॉट ISS का दौरा कर चुके हैं।

लेकिन नासा अब इसे प्रशांत महासागर में गिराने की तैयारी कर रहा है। इसकी वजह ये है कि ISS के प्राइमरी स्ट्रक्चर जैसे मॉड्यूल, ट्रस और रेडिएटर खराब हो रहे हैं और 2030 के बाद इसका संचालन काफी जोखिम भरा व महंगा होता जाएगा। कई विकल्पों पर विचार करने के बाद इसे प्रशांत महासागर के पॉइंट निमो में गिराने का फैसला किया गया है।

क्या होता है पॉइंट निमो?

पॉइंट निमो दक्षिण प्रशांत महासागर का एक ऐसा क्षेत्र है, जो पृथ्वी का सबसे एकांत स्थान माना जाता है। इंसान तो छोड़िए, पक्षी भी इसके आसपास नहीं फटकते। न्यूजीलैंड के ईस्ट कोस्ट से 3000 मील और अंटार्कटिका से 2000 मील दूर ये जगह लंबे वक्त से रिटायर हो चुके सैटेलाइट और अंतरिक्ष यानों की कब्रगाह बनी हुई है।

ISS का संचालन नासा, रोस्कोस्मोस, ईएसए, जेएक्सए और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी करती है। अब इसको डिऑर्बिट करने की जिम्मेदारी भी इन्हीं की है। 150 अरब डॉलर की लागत वाले इस स्पेस स्टेशन को डिऑर्बिट करने के लिए स्पेसएक्स डिऑर्बिट व्हीकल बनाएगा। यह एक ऐसा विशेष अंतरिक्ष यान है, जो ISS को नियंत्रित तरीके से पॉइंट निमो तक ले जाएगा और इसी के साथ ISS के 30 साल के इस शानदार सफर का अंत हो जाएगा।

क्या ISS को गिराना ही आखिरी विकल्प?

ऐसा नहीं है कि नासा ने ISS को गिराने के अलावा किसी अन्य विकल्प पर विचार नहीं किया। पहला विचार इसी बात पर किया गया कि इसे अधिक ऊंचाई की कक्षा में धकेल दिया जाए, जिससे यह ऐतिहासिक अवशेष के रूप में हमेशा के लिए बना रहे। ISS जहां है, वहां उस पर अंतरिक्ष में किसी मलबे से टकराने का खतरा 50 साल में एक बार का है, लेकिन अधिक ऊंचाई पर ले जाने से यह 4 साल में एक बार या उससे अधिक भी हो सकता है।

इसके अलावा इस बात पर भी विचार किया गया कि ISS को उसकी कक्षा में ही विघटित कर दिया जाए और फिर इसे वापस लाकर म्यूजियम या रिसर्च के लिए रखा जाए। लेकिन यह लगभग असंभव था। इसमें अत्यधिक फंड और एस्ट्रोनॉट की जान जोखिम में डालने जैसे फैसले लेने पड़ते और इसी कारण ये फैसला टाल दिया गया। इसकी जगह डिऑर्बिट के बाद जलने से बचे हुए टुकड़ों को एकत्र करने का प्लान बनाया गया है।

क्या अब नहीं रहेगा कोई स्पेस स्टेशन?

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन एक जगह है, जहां पूरी दुनिया के एस्ट्रोनॉट जाकर माइक्रोग्रैविटी में रिसर्च करते हैं। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इसके गिराए जाने के बाद कोई स्पेस स्टेशन नहीं रहेगा। दरअसल नासा की कोशिश है कि वह अब निजी कंपनियों के स्पेस स्टेशन को डिमांड के अनुसार इस्तेमाल करे। एक्सिओम स्पेस, ब्लू ओरिजिन और वॉयेजर जैसी निजी कंपनियां इसी दिशा में काम कर रही हैं।

वहीं चीन दुनिया का एकमात्र देश है, जिसके पास अभी वर्किंग स्पेस स्टेशन तियांगोंग है। रूस भी 2033 तक अपना स्पेस स्टेशन बनाने पर काम कर रहा है। भारत ने 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन बनाने का लक्ष्य रखा है। यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि धरती पर गिराए जाने के दौरान ही ISS का अधिकांश हिस्सा जलकर राख हो जाएगा और पॉइंट निमो की गहराई में हमेशा के लिए दफ्न हो जाएगा।


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रूस के पास 2 एटमी पनडुब्बियां तैनात करेगा अमेरिका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच शुक्रवार को रूस के नजदीक दो न्यूक्लियर पनडुब्बियां तैनात करने का आदेश दिए। साथ ही गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि पनडुब्बियां कहां तैनात की जाएंगी।

ट्रम्प ने अपने इस कदम के पीछे रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव की भड़काऊ बयानबाजी को जिम्मेदार बताया। साथ ही ट्रम्प ने मेदवेदेव के परमाणु हमले की धमकी पर कहा कि- 'अमेरिका रूस के परमाणु खतरों का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।'

दरअसल, मेदवेदेव ने X पर कहा था- हम इजराइल या ईरान नहीं हैं। ट्रम्प की ओर से दिया गया हर नया अल्टीमेटम युद्ध की धमकी माना जाएगा। उन्होंने ट्रम्प को याद दिलाते हुए कहा था- 'रूस के पास सोवियत संघ के समय से परमाणु हमले डेड हैंड की क्षमता है।'

ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर लिखा- 'रूस के पूर्व राष्ट्रपति और सिक्योरिटी काउंसिल के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव की भड़काऊ बयानबाजी की वजह से मैंने रूस के नजदीक दो न्यूक्लियर पनडुब्बियों को तैनात करने का आदेश दिया है, ताकि भड़काऊ बयान सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहे।

शब्द बहुत कीमती होते हैं और कई बार अनजाने में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। मुझे उम्मीद है कि यह ऐसा मामला नहीं होगा।'

ट्रम्प ने बताया डेड इकोनॉमी तो रूस ने डेड हैंड की याद दिलाई

ट्रम्प ने 30 जुलाई को भारत पर 25% टैरिफ लगाने के बाद भारत और रूस को डेड इकोनॉमी बताया था। उन्होंने कहा था- भारत और रूस अपनी अर्थव्यवस्था को साथ ले डूबें, मुझे क्या। इसके जवाब में रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति घबरा गए हैं।

मेदवेदेव ने टेलीग्राम पर लिखा था- 'ट्रम्प को डेड हैंड की खतरनाक ताकत याद रखनी चाहिए, भले ही यह अब मौजूद नहीं है। अगर रूस के पूर्व राष्ट्रपति के कुछ शब्दों से अमेरिका के शक्तिशाली राष्ट्रपति इतना घबरा जाते हैं तो रूस का रास्ता बिल्कुल सही है। हम अपने रास्ते पर आगे बढ़ते रहेंगे।'

डेड हैंड क्या है?

सोवियत यूनियन ने 1980 के दशक में एक ऑटोमैटिक परमाणु रिटैलिएशन सिस्टम बनाया था, जिसे डेड हैंड कहते हैं। इसे 'पेरिमीटर' सिस्टम भी कहते हैं।

रूस की पूरी लीडरशिप के मारे जाने पर ये सिस्टम अपने आप परमाणु हथियार लॉन्च कर सकता है।

यह सिस्टम अब भी एक्टिव स्टैंडबाई मोड में माना जाता है। मतलब अगर अमेरिका ने रूस पर हमला किया और रूस के नेता मारे गए, फिर भी ये सिस्टम अमेरिका पर हमला कर देगा।

ट्रम्प ने मेदवेदेव को असफल पूर्व राष्ट्रपति कहा था

इससे पहले भी मेदवेदेव ने ट्रम्प पर निशाना साधते हुए कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति की रूस को धमकी युद्ध शुरू कर सकती है। यह रूस और यूक्रेन के बीच नहीं, बल्कि अमेरिका के साथ होगा। उन्होंने ट्रम्प को 'स्लीपी जो' (जो बाइडेन) की राह न अपनाने की भी सलाह दी थी।

इसके जवाब में ट्रम्प ने गुरुवार देर रात मेदवेदेव को 'असफल पूर्व राष्ट्रपति' करार देते हुए कहा था कि वे अभी भी खुद को राष्ट्रपति समझते हैं। ट्रम्प ने मेदवेदेव को उनके शब्दों पर ध्यान देने और खतरनाक बयानबाजी न करने की चेतावनी दी थी।

ट्रम्प कई बार रूस के खिलाफ नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। हालांकि, वे रूसी राष्ट्रपति पुतिन पर सीधे हमले से बचते रहे हैं। उन्होंने कुछ दिन पहले कहा था- 'मेरी पुतिन के साथ फोन पर अच्छी बातचीत होती है, लेकिन इसके कुछ घंटों बाद ही रूस यूक्रेन पर हमले करता है। इससे मैं निराश हूं। फिर भी पुतिन ऐसे इंसान हैं, जिसके साथ मैं अच्छा तालमेल बना सकता हूं।'


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अंतरिक्ष से समुद्र में उतरे शुभांशु शुक्ला

अंतरिक्ष से वापसी के बाद शुभांशु शुक्ला का अंतरिक्षयान समुद्र में उतरा, लेकिन 41 साल पहले अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय राकेश शर्मा जब वापस लौटे थे तो उन्होंने समुद्र में नहीं जमीन पर लैंडिंग की थी।

राकेश शर्मा ने जमीन पर की थी लैंडिंग

अप्रैल 1984 में, अंतरिक्ष में जाने वाले राकेश शर्मा, सोवियत सैल्यूट 7 अंतरिक्ष स्टेशन के अपने मिशन के बाद सोयूज टी-10 कैप्सूल पर सवार होकर कजाखस्तान में जमीन पर उतरे थे। समुद्र में उतरना हर बार आसान और सुरक्षित नहीं होता, फिर भी अमेरिका के मिशन में अंतरिक्ष यात्री अक्सर समुद्र में उतरते रहे हैं, जबकि रूस और चीन जमीन पर लैंडिंग को प्राथमिकता देते हैं।

क्या है स्प्लैशडाउन के फायदे?

''स्प्लैशडाउन'' या पानी में उतरने का बड़ा फायदा यह है कि अंतरिक्षयान के मलबे को पहले ही समुद्र में गिरा दिया जाता है, जिससे जमीन पर मौजूद लोगों और संपत्ति को नुकसान पहुंचने का खतरा काफी हद तक खत्म हो जाता है, वहीं जमीन पर उतरना अधिक सटीक होता है, लेकिन जमीन पर उतरते समय अक्सर अधिक जोरदार टक्कर का सामना करना पड़ता है।

राकेश शर्मा ने क्या कहा था?

जमीन पर उतरने से समुद्र में बचाव की जटिलताओं से बचा जा सकता है। 2024 में एक साक्षात्कार में राकेश शर्मा ने कहा था कि अंतरिक्ष से वापसी के समय मुझे लगा था कि मैं इसमें सफल नहीं हो पाऊंगा। तभी पैराशूट खुला और अंदर से बहुत अधिक आवाज आई। आखिकार मैनें सफल लैंडिंग की।

धरती पर सकुशल लौटे शुभांशु शुक्ला

शुभांशु शुक्ला आईएसएस पर भारत का पहले अनुसंधान मिशन को पूरा कर शुभांशु धरती पर लौट चुके हैं। शुभांशु अंतरिक्ष स्टेशन पर 18 दिन रहे। उन्होंने यहां सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण संबंधी कई प्रयोग किए।

लैंडिंग का लाइव टेलीकास्ट

शुभांशु शुक्ला की धरती पर सफल वापसी के ऐतिहासिक क्षण को देखने के लिए दिल्ली स्थित नेहरू तारामंडल में मंगलवार को स्काई थियेटर में खास लाइव स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया था। सुबह से ही छात्रों, वैज्ञानिकों, खगोल-प्रेमियों और आम नागरिकों की भीड़ उमड़ती रही। यहां आधे घंटे का लाइव प्रसारण किया गया। लोग दिल थामकर अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी देखते रहे।


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20 दिन बाद अंतरिक्ष से पृथ्वी पर लौटे शुभांशु

शुभांशु शुक्ला सहित चार एस्ट्रोनॉट 20 दिन अंतरिक्ष में रहने के बाद पृथ्वी पर लौट आए हैं। करीब 23 घंटे के सफर के बाद ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की आज यानी 15 जुलाई को दोपहर 3 बजे कैलिफोर्निया के तट पर लैंडिंग हुई। इसे स्प्लैशडाउन कहते हैं। चारों एस्ट्रोनॉट एक दिन पहले शाम 4:45 बजे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से पृथ्वी के लिए रवाना हुए थे।

सभी एस्ट्रोनॉट 26 जून को भारतीय समय के अनुसार शाम 4:01 बजे ISS पहुंचे थे। एक्सियम मिशन 4 के तहत 25 जून को दोपहर करीब 12 बजे ये रवाना हुए थे। स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट से जुड़े ड्रैगन कैप्सूल में इन्होंने कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी थी।

शुभांशु की वापसी पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- मैं पूरे देश के साथ ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का उनकी ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा से पृथ्वी पर वापसी के लिए स्वागत करता हूं।

शुभांशु ने अपने समर्पण, साहस से अरबों सपनों को प्रेरित किया है। यह हमारे अपनी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन - गगनयान की दिशा में एक और मील का पत्थर है।

शाम 4:45 बजे ISS से पृथ्वी के लिए निकले थे शुभांशु

14 जुलाई को दोपहर करीब 02:15 बजे क्रू ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट में पहुंचा।

शाम 4:45 बजे स्पेसक्राफ्ट ISS के हार्मनी मॉड्यूल से अनडॉक हुआ।

15 जुलाई को दोपहर करीब 3 बजे कैलिफोर्निया के तट पर स्प्लैशडाउन हुआ।

18 दिन स्पेस स्टेशन में शुभांशु ने क्या-क्या किया

60 वैज्ञानिक प्रयोग: शुभांशु ने मिशन के दौरान 60 से ज्यादा वैज्ञानिक प्रयोगों में हिस्सा लिया। इनमें भारत के सात प्रयोग शामिल थे। उन्होंने मेथी और मूंग के बीजों को अंतरिक्ष में उगाया। स्पेस माइक्रोएल्गी' प्रयोग में भी हिस्सा लिया। अंतरिक्ष में हड्डियों की सेहत पर भी प्रयोग किए।

प्रधानमंत्री से बात: 28 जून 2025 को शुभांशु ने ISS से पीएम नरेंद्र मोदी के साथ लाइव वीडियो कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष से भारत बहुत भव्य दिखता है। पीएम ने पूछा कि आप गाजर का हलवा लेकर गए हैं। क्या साथियों को खिलाया। इस पर शुभांशु ने कहा- हां साथियों के साथ बैठकर खाया।

छात्रों से संवाद: 3, 4 और 8 जुलाई को उन्होंने तिरुवनंतपुरम, बेंगलुरु और लखनऊ के 500 से अधिक छात्रों के साथ हैम रेडियो के जरिए बातचीत की। इसका मकसद युवाओं में STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) के प्रति रुचि बढ़ाना था।

ISRO के साथ संवाद: 6 जुलाई को उन्होंने ISRO के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत की, जिसमें उनके प्रयोगों और भारत के गगनयान मिशन के लिए उनके योगदान पर चर्चा हुई।

पृथ्वी की तस्वीरें: शुभांशु ने ISS के कपोला मॉड्यूल से पृथ्वी की शानदार तस्वीरें खींचीं, जो सात खिड़कियों वाला एक खास हिस्सा है।

41 साल बाद कोई भारतीय अंतरिक्ष में गया

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा और भारतीय एजेंसी इसरो के बीच हुए एग्रीमेंट के तहत भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को इस मिशन के लिए चुना गया था। शुभांशु इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर जाने वाले पहले और स्पेस में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं। इससे 41 साल पहले राकेश शर्मा ने 1984 में सोवियत यूनियन के स्पेसक्राफ्ट से अंतरिक्ष यात्रा की थी।

शुभांशु का ये अनुभव भारत के गगनयान मिशन में काम आएगा। ये भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसका उद्देश्य भारतीय गगनयात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना और सुरक्षित रूप से वापस लाना है। इसके 2027 में लॉन्च होने की संभावना है। भारत में एस्ट्रोनॉट को गगनयात्री कहा जाता है। इसी तरह रूस में कॉस्मोनॉट और चीन में ताइकोनॉट कहते हैं।

एक्सियम-4 मिशन का हिस्सा हैं शुभांशु शुक्ला

शुभांशु शुक्ला एक्सियम-4 मिशन का हिस्सा हैं, जिसकी एक सीट के लिए भारत ने 548 करोड़ रुपए चुकाए हैं। यह एक प्राइवेट स्पेस फ्लाइट मिशन है, जो अमेरिकी स्पेस कंपनी एक्सियम, NASA, इसरो और स्पेसएक्स की साझेदारी से हो रहा है।

एक्सियम स्पेस का यह चौथा मिशन है...

17 दिन का एक्सियम 1 मिशन अप्रैल 2022 में लॉन्च हुआ था।

08 दिन का एक्सियम का दूसरा मिशन 2 मई 2023 में लॉन्च हुआ था।

18 दिन का तीसरा मिशन 3 जनवरी 2024 में लॉन्च किया गया था।

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन क्या है?

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी के चारों ओर घूमने वाला एक बड़ा अंतरिक्ष यान है। इसमें एस्ट्रोनॉट रहते हैं और माइक्रो ग्रेविटी में एक्सपेरिमेंट करते हैं। यह 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रैवल करता है। यह हर 90 मिनट में पृथ्वी की परिक्रमा पूरी कर लेता है। 5 स्पेस एजेंसीज ने मिलकर इसे बनाया है। स्टेशन का पहला पीस नवंबर 1998 में लॉन्च किया गया था।


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बंद होने जा रहा Microsoft का आइकॉनिक 'ब्लू स्क्रीन ऑफ डेथ', अब नजर आएगी ब्लैक स्क्रीन

Microsoft का Blue Screen of Death (BSOD) बंद होने वाला है और कंपनी ने अब इस बात की भी जानकारी दी है कि इस एरर मैसेज को कब हटाया जाएगा।। पहले कंपनी ने कहा था कि वो BSOD को रिप्लेस कर रही है, इसका सक्सेसर ब्लैक स्क्रीन है और इसमें फ्राउन टेक्स्ट इमोटिकॉन नहीं है। ये यूजर्स को क्रैश से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी देगा, जो IT एडमिनिस्ट्रेटर्स को क्रैश के बाद कंप्यूटर की समस्या जल्दी ढूंढने में मदद कर सकता है।

Windows 11 में Black Screen of Death अपडेट स्क्रीन जैसी होगी

Microsoft में एंटरप्राइज एंड OS सिक्योरिटी के VP, डेविड वेस्टन ने The Verge को इंटरव्यू में बताया कि Microsoft Windows 11 पर Blue Screen of Death को नई ब्लैक स्क्रीन से रिप्लेस किया जाएगा। रीडिजाइन इस गर्मी के बाद, क्विक मशीन रिकवरी (QMR) फीचर के साथ रोल आउट होगा। एग्जीक्यूटिव द्वारा शेयर किए गए टाइमलाइन के आधार पर, हम उम्मीद कर सकते हैं कि यूजर्स अगस्त या सितंबर से पहले नया BSOD डिजाइन देखेंगे।

जब अपडेटेड BSOD डिजाइन यूजर्स के लिए रोल आउट होगा, तो वे एक सिंपल डिजाइन देखेंगे, जिसमें बड़ा फ्राउन इमोटिकॉन नहीं होगा। Microsoft के जरिए से हमें नए Black Screen of Death का अच्छा अंदाजा है। इस साल की शुरुआत में, कंपनी ने BSOD को रिप्लेस करने के लिए ग्रीन कलर की एरर स्क्रीन रोल आउट की थी, जो Windows Insiders टेस्टर्स के लिए बीटा चैनल पर उपलब्ध थी।

नई ब्लैक स्क्रीन मार्च में कंपनी द्वारा शेयर की गई ग्रीन स्क्रीन जैसी ही दिखती है। ये Windows 11 अपडेट स्क्रीन से काफी मिलती-जुलती है, जिसमें सेंटर-अलाइन्ड टेक्स्ट यूजर्स को बताता है कि कंप्यूटर एरर की वजह से रीस्टार्ट हो रहा है और क्रैश लॉग कलेक्शन प्रोसेस की प्रोग्रेस का परसेंटेज दिखाता है।

यूजर्स को स्टॉप कोड के साथ एक एरर भी दिखेगा, जिसे सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर्स के साथ शेयर किया जा सकता है, जबकि ब्लैक स्क्रीन फेल हुए प्रोसेस के बारे में भी बताएगी (उदाहरण के लिए, ये यूजर्स को बताएगी कि कोई खास ड्राइवर फाइल फेल हुई, जैसे rdbss.sys)।

गौर करने वाली बात ये है कि ये पहली बार नहीं है जब Microsoft ने BSOD वार्निंग को ब्लू से बदलने की घोषणा की है। 2021 में, कंपनी ने वार्निंग मैसेज का ब्लैक वर्जन टेस्ट किया था, लेकिन उस वर्जन में भी कोलन और ब्रैकेट के साथ टेक्स्ट इमोटिकॉन (फ्राउन) शामिल था।

Windows 11 पर BSOD को खत्म करने का कदम इसके शुरू होने के दशकों बाद आया है। एक साल पहले, सिक्योरिटी फर्म CrowdStrike की तकनीकी खराबी ने लाखों Windows कंप्यूटर्स को अनबूटेबल स्टेट में इंपैक्ट किया था। इसने Microsoft को Windows सिक्योरिटी में सुधार और PC के लिए बेहतर रिकवरी प्रोसेस पर काम करने के लिए प्रेरित किया, जो इस साल बाद में यूजर्स तक पहुंचेगा।


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अमिताभ की आवाज वाली कॉलर ट्यून बंद

कोई भी अनजान व्यक्ति अगर आपके बैंक खाते, OTP, KYC या अन्य निजी जानकारी मांगता है, तो उसे बिल्कुल न दें। हर फोन के पहले 40 सेकेंड तक सुनाई देने वाले अमिताभ बच्चन की आवाज के वॉयस मैसेज सरकार ने बंद कर दिया है।

सितंबर 2024 में साइबर फ्रॉड के प्रति जागरूक करने के लिए इसे शुरू किया गया था। लेकिन इमरजेंसी कॉलिंग के दौरान लोग इससे परेशान हो गए थे। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी इसी हफ्ते इंदौर में कहा था- मैं भी इससे परेशान हो गया हूं।

कॉलर ट्यून सितंबर 2024 में शुरू हुई थी

केंद्रीय गृह मंत्रालय के सितंबर 2024 में इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर ने साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस जागरूकता अभियान की शुरुआत की थी।

इसमें अमिताभ बच्चन की आवाज में एक 40 सेकेंड लंबा मैसेज था। इसमें लोगों को फर्जी कॉल्स, अनजान लिंक्स और OTP शेयर करने के खतरों से आगाह किया जा रहा था।

शुरुआत में इस पहल की खूब तारीफ हुई, क्योंकि देश में हर दिन हजारों लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। लेकिन, धीरे-धीरे ये कॉलर ट्यून लोगों के लिए सिरदर्द बन गई।

40 सेकेंड लंबे मैसेज की शिकायत कर रहे थे लोग

लोगों की शिकायत थी कि ये 40 सेकेंड लंबा मैसेज हर कॉल से पहले बजना, खासकर इमरजेंसी में काफी परेशान करता था। कुछ ने तो RTI तक दाखिल कर इसकी जरूरत पर सवाल उठाए थे।

सरकार ने पहले इस कॉलर ट्यून की फ्रीक्वेंसी को दिन में 8-10 बार से घटाकर सिर्फ दो बार किया और इमरजेंसी कॉल्स (पुलिस, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड) के दौरान इसे बंद कर दिया गया। लेकिन अब इसे पूरी तरह हटा दिया गया है।

कुछ महीनों से सोशल मीडिया पर लोग इस कॉलर ट्यून को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे थे। कई यूजर्स ने इसे 'झुंझलाहट भरा' बताया, खासकर इमरजेंसी कॉल्स के दौरान इसे देरी का कारण माना।

सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रहे थे अमिताभ बच्चन

हाल ही में अमिताभ बच्चन को इस कॉलर ट्यून की वजह से ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा था। सोमवार देर रात (23 जून) अमिताभ बच्चन ने अपने ऑफिशियल X अकाउंट से लिखा, 'जी हां, हिजूर मैं भी प्रशंसक हूं।' कुछ देर बाद उन्होंने सुधार कर फिर लिखा, 'हुजूर, न कि हिजूर। लिखने की गलती, माफ करिए।'

इस पर एक ट्रोलर ने बिग बी की साइबर क्राइम वाली कॉलर ट्यून पर कहा- 'तो कॉल पर बोलना बंद करो भाई।' इसके जवाब में बिग बी ने लिखा- 'सरकार को बोलो भाई, उन्होंने हमसे कहा सो किया।

कोविड महामारी के दौरान भी हुआ था विवाद

ये पहली बार नहीं है जब अमिताभ बच्चन की आवाज वाली कॉलर ट्यून पर बवाल हुआ हो। कोविड-19 के दौरान भी उनकी आवाज में एक जागरूकता मैसेज चलाया गया था। इसमें मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंसिंग और हैंड सैनिटाइजेशन की सलाह दी जाती थी।

इस पर विवाद तब हुआ जब अमिताभ बच्चन और उनके परिवार के कुछ लोग कोरोना से संक्रमित हो गए थे। उस वक्त एक यूजर ने कॉलर ट्यून से परेशान होकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक PIL भी दाखिल की थी, जिसमें उनकी आवाज हटाने की मांग की गई थी।

क्यों इस्तेमाल होती हैं कॉलर ट्यून?

भारत में कॉलर ट्यून को जागरूकता का एक प्रभावी माध्यम माना जाता है, क्योंकि देश में टेलीफोन यूजर्स की संख्या बहुत ज्यादा है। खासकर ग्रामीण इलाकों में, जहां इंटरनेट और टीवी का पहुंच सीमित हो सकता है, कॉलर ट्यून के जरिए मैसेज आसानी से लोगों तक पहुंच जाता है। हालांकि, लंबे समय तक एक ही मैसेज सुनने से लोग परेशान भी हो जाते हैं, जैसा कि कोविड और साइबर क्राइम कॉलर ट्यून के मामले में देखा गया।


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थोड़ी देर में अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरेंगे शुभांशु शुक्ला

 AXIOM-4 Mission कुछ ही पल में रवाना हो जाएगा। इस मिशन से जुड़ी कंपनी स्पेसएक्स ने कहा है कि मौसम 90 फीसदी अनुकूल है। इस मिशन में कई देशों की साझेदारी है। भारत की ओर से शुभांशु शुक्ला मिशन क्रू के हिस्सा हैं।

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय होंगे। इससे पहले साल 1984 में अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष की यात्रा की थी। राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष से कहा था, 'सारे जहां से अच्छा हिंदुस्ता हमारा'

Mission Axiom-4 एक्सिओम स्पेस की ओर से 2025 का तीसरा मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रक्षेपण है।

स्पेस एक्स का रॉकेट 'ड्रैगन' का हैच बंद हो गया है। सभी संचार और सूट की जांच पूरी हो गई है। Axiom-4 क्रू लॉन्च के लिए तैयार है।

IAF ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की बहन निधि मिश्रा ने कहा, "यह न केवल मेरे लिए बल्कि भारत में सभी के लिए गर्व का क्षण है। मैं इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकती; मैं बस इतना कहना चाहूंगी कि 'शुभांशु, आपका मिशन सफल हो और आप सुरक्षित हमारे पास वापस आएं।"

कौन हैं इस मिशन के यात्री?

इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री हिस्सा ले रहे हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला इस मिशन के पायलट होंगे। मिशन की कमान पूर्व नासा अंतरिक्ष यात्री और एक्सिओम स्पेस की मानव अंतरिक्ष उड़ान निदेशक पैगी व्हिटसन संभालेंगी। इसके अलावा, यूरोपियन स्पेस एजेंसी के प्रोजेक्ट अंतरिक्ष यात्री स्लावोश उजनांस्की-विस्निएव्स्की (पोलैंड) और हंगरी के अंतरिक्ष यात्री टिबोर कपु मिशन विशेषज्ञ के तौर पर शामिल होंगे। ये चारों अंतरिक्ष यात्री मिलकर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर कई वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे।

एक्सिओम मिशन 4 क्या है?

Axiom-4 मिशन एक निजी अंतरिक्ष यात्री मिशन है जो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए है। इस मिशन का मकसद 31 देशों की ओर से लगभग 60 वैज्ञानिक अध्ययन और गतिविधियों को डायरेक्ट करना है। ये देश हैं भारत, अमेरिका, पोलैंड, हंगरी, सऊदी अरब, ब्राजील, नाइजीरिया, संयुक्त अरब अमीरात, और यूरोप। एक्सिओम के अनुसार, यह मिशन इन देशों का इतिहास में दूसरा मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन होगा, लेकिन यह पहली बार होगा जब ये तीनों देश ISS पर एक साथ मिशन को पूरा करेंगे।


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अब तक का सबसे बड़ा डेटा ब्रीच,1600 करोड़ पासवर्ड ऑनलाइन हुए लीक,Google ने यूजर्स की ये सलाह

Apple, Google, Facebook और Telegram के लाखों यूजर्स का ऑनलाइन लीक हो गया है। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह अब तक के सबसे बड़े डेटा ब्रीच में से एक है, जिसमें करीब 1600 करोड़ पासवर्ड ऑनलाइन लीक हो गए हैं। इन पासवर्ड की मदद से साइबर अपराधी यूजर्स की निजी जानकारी, फोटो, वीडियो और दूसरी जानकारी चुरा सकते हैं। इस डेटा की मदद से से साइबर अपराध के जोखिम बढ़ सकते हैं।

फोर्ब्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ऑनलाइन लीक हुए क्रेडेंशियल सरकारी प्लेटफॉर्म के साथ-साथ Apple, Facebook, Google, GitHub और Telegram जैसी दिग्गज कंपनियों के यूजर्स के हैं। रिसर्चर्स ने 184 मिलियन रिकॉर्ड वाले सीक्रेट डेटाबेस का पता लगाया, जिसे अनसिक्योर वेब सर्वर पर अपलोड किया गया था। इससे साइबर फ्रॉड की घटनाएं बढ़ सकती हैं। अपराधियों द्वारा उल्लंघन का जोखिम काफी बढ़ गया।

रिसर्चर्स ने इस डेटाबेस से 30 डेटासेट की जांच की है। उन्हें करीब 350 करोड़ रिकॉर्ड मिले, जिसमें कॉर्पोरेट और डेवलपर प्लेटफॉर्म, VPN लॉगिन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के यूजर्स के क्रेडेंशियल शामिल हैं। बताया जा रहा है कि यह डेटा 2025 की शुरुआत से लेकर आज तक का है। रिसर्चर्स का दावा है कि ऑनलाइन लीक हुआ यह डेटा साधारण नहीं है।

क्या यह अब तक का सबसे बड़ा डेटा ब्रीच है?

रिसर्चर्स का दावा है कि स्कैमर्स इन क्रेडेंशियल का यूज कर यूजर्स को फिशिंग में फंसा सकते हैं। इसके साथ ही वे बिजनेस इमेल अटैक कर सकते हैं। इन क्रेडेंशियल को देखते हुए पता चलता है कि यह काफी खतरनाक हो सकता है।

Google ने यूजर्स को दी सलाह

इस डेटा ब्रीच की जानकारी सामने आने के बाद दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Google ने यूजर्स को 2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) एक्टिव करने की सलाह दी है। इसके साथ ही उसने अपने यूजर्स को पासवर्ड अपडेट करने को कहा है। गूगल का यूजर्स को यह भी कहना है कि उन्हें अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की बेहतर सुरक्षा के लिए Passkey फीचर का यूज करना चाहिए। पासकी से लॉगइन के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन की जरूरत होती है, जिससे यह डबल सेफ्टी प्रोवाइड करता है।

इस डेटा ब्रीच की जानकारी सामने आने के बाद दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Google ने यूजर्स को 2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) एक्टिव करने की सलाह दी है। इसके साथ ही उसने अपने यूजर्स को पासवर्ड अपडेट करने को कहा है। गूगल का यूजर्स को यह भी कहना है कि उन्हें अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की बेहतर सुरक्षा के लिए Passkey फीचर का यूज करना चाहिए। पासकी से लॉगइन के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन की जरूरत होती है, जिससे यह डबल सेफ्टी प्रोवाइड करता है।

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