क्यों मिलती है मंदिर जाने से अद्भुत शांति? जानिए क्या है इसके पीछे वैज्ञानिक, वास्तुकला एवं आध्यात्मिक रहस्य ?

उपभोक्ता जनघोष:जब कभी जीवन में कुछ समझ नहीं आता और संघर्षों से मन हारता जाता है तो कदम खुद ब खुद मंदिर की ओर चल पड़ते हैं। लेकिन क्या कभी सोचा है कि परेशानियों के झंझट में लड़खड़ाता मन मंदिर में जाकर क्यों स्थिर हो जाता है।  

आइए जानते है कुछ मुख्य बिंदु  

सबसे पहले दर्शन और पूजन का वैज्ञानिक स्वरूप बताया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में प्राचीन मंदिर धरती के धनात्मक यानी पॉजिटिव ऊर्जा केंद्रों पर बनाये गए हैं। ये मंदिर आकाशीय ऊर्जा के ग्रिड हैं। भक्त मंदिर में नंगे पैर होता है। इससे उसके शरीर में अर्थ प्रवाहित होने लगता है। जब हाथ जोड़ता है तो शरीर का ऊर्जा चक्र चलने लगता है। देव प्रतिमा के आगे सिर झुकाता है तो प्रतिमा से परावर्तित होने वाली पृथ्वी व आकाशीय तरंगे मस्तक पर पड़ती हैं और मस्तक पर स्थित आज्ञा चक्र पर प्रभाव डालती है। जिससे सकरात्मक विचार आते हैं। भक्त अपने अंदर एक विशेष ऊर्जा और हल्केपन तथा शांति का अनुभव करने लगता है।।

मंदिर के शिखर का भी विशेष महत्व होता है। मंदिर के शिखर की भीतरी सतह से ऊर्जा ध्वनी एवं तरंगें टकरा कर  मनुष्य को प्रभावित करती हैं। ये परावर्तित तरंगें मानव तन की प्राकृतिक आवृति बनाये रखने में भी सहायक सिद्ध होती है।  ध्वनि, प्रकाश, वायु आदि सभी मे तरंगें होती हैं। कोई भी तरंग सीधी रेखा में नही चलती सभी की अपनी आवृति होती है। विस्फोट होता है। ये जितनी अधिक शक्तिशाली होगी उसका उतना ही अधिक क्रिया क्षमता पर असर पड़ेगा। मन्दिरों में शंख, घण्टे और मन्त्रों की ध्वनि में एक विशेष आवृति बनती है। वह दैवीय ऊर्जा होती है जो हमें मानसिक शारीरिक और आत्मिक रूप से दृढ़ बनाती है।

वही देखा जाये तो हमारे देश में मंदिरों के गुंबद पिरामिड के आकार जैसे होते हैं। जो कास्मिक ऊर्जा के संपर्क में रहते हैं। प्रतिमा का सीधा संबंध उस ऊर्जा से सदा बना रहता है। जब भक्त प्रतिमा के समक्ष जाता है तो उसका ब्रेन कास्मिक वेव के संपर्क में आ जाता है और ब्रेन यानी मस्तिक के न्यूरॉन्स विशेष प्रकार से सक्रिय होने लगते हैं। उस समय भक्त प्रतिमा के सामने जो भी प्रार्थना करता है उसका फल उसे अवश्य मिलता है। प्रार्थना जितनी गहन होगी उतनी ही जल्दी फलित भी होती है।

वही अगर मंदिर के द्वार की बात करे तो   मंदिर और गर्भ गृह का द्वार बड़ा नहीं होना चाहिए । बस एक ही भक्त एक बार मे प्रवेश कर सके, इस शिल्प से द्वार इसीलिए  बनाये जाते थे जिससे  कास्मिक ऊर्जा का संतुलन बना रहे। उसी प्रकार मंदिर की चौखट का महत्व है। मंदिर का चौखट सामान्य चौखट से ऊंची और चौड़ी होती है। यह पत्थर, लकड़ी आदि की होती है उस पर सोने, चांदी, पीतल आदि से कवर किया जाता है इसलिए कि मंदिर की दिव्य ऊर्जा बाहर विकीर्ण न हो सके। मंदिर की ऊर्जा मंदिर के अंदर ही रहे। इसके पीछे आध्यात्मिक रहस्य भी है। चौखट पर भगवान नर सिंह का वास माना जाता है इसलिए उसे स्पर्श कर सिर पर लगाना या सिर से स्पर्श करना चाहिए। मंदिर में प्रवेश करते समय पैर चौखट से स्पर्श न हो। मंदिर की चौखट लाल या पीले रंग से रंगी जाती है। उसके दोनों तरफ तीन रंग की धारियां होती है। लाल पीला और सफेद यह सत्व रज और तम का प्रतीक हैं।


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ऑनलाइन पंजीकरण आज से शुरू, सुबह 7 बजे से करा सकेंगे रजिस्ट्रेशन

चारधाम यात्रा-2026 की तैयारियों के बीच श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुक्रवार छह मार्च से शुरू की जा रही है। पंजीकरण सुबह सात बजे से आरंभ होगा।

राज्य सरकार ने यात्रियों की सुविधा और यात्रा को व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से इस बार भी ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था लागू की है।

जिलाधिकारी सविन बंसल के अनुसार चारधाम यात्रा के लिए वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in के माध्यम से श्रद्धालु आनलाइन पंजीकरण कर सकेंगे।

इसके अलावा Tourist Care Uttarakhand मोबाइल ऐप के जरिए भी रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। चारधाम यात्रा के अंतर्गत इस वर्ष यमुनोत्री व गंगोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को खुलेंगे।

केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को, जबकि बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। वहीं, हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने की अभी घोषणा होना शेष है।

चारधाम यात्रा में आने वाले भारतीय श्रद्धालु आधार कार्ड के माध्यम से पंजीकरण करा सकेंगे, जबकि विदेशी श्रद्धालुओं के लिए ई-मेल आईडी के जरिए पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

जिन श्रद्धालुओं के पास आधार कार्ड उपलब्ध नहीं है, उनके लिए पिछले वर्ष की तरह ही इस बार भी ऑफलाइन पंजीकरण केंद्रों की व्यवस्था की गई है।

यात्रा से पूर्व ऑफलाइन पंजीकरण की सुविधा 17 अप्रैल से शुरू होगी। इसके लिए देहरादून और हरिद्वार में विशेष पंजीकरण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

17 अप्रैल से खुलेंगे ऑफलाइन पंजीकरण

ऋषिकेश स्थित यात्रा पंजीकरण केंद्र और ट्रांजिट कैंप, हरिद्वार का ऋषिकुल ग्राउंड व देहरादून के विकासनगर में पंजीकरण केंद्र शामिल हैं।

श्रद्धालुओं की सहायता के लिए पर्यटन विभाग की ओर से टोल फ्री नंबर 0135-1364 पर 24 घंटे काल सेंटर की व्यवस्था भी की गई है, जहां यात्रा से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।

राज्य सरकार ने चारधाम यात्रा पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए यात्रा से पहले अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराएं। इससे यात्रा मार्गों पर भीड़ प्रबंधन और सुविधाओं के संचालन में मदद मिलेगी।


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देशभर में होलिका दहन, उज्जैन में महाकाल की विशेष आरती

देशभर में आज होलिका दहन किया जा रहा है। दिल्ली, मुंबई, कई शहरों में पूजा के बाद होलिका दहन किया गया। भोपाल में सीएम मोहन यादव ने अपनी पत्नी के साथ और अहमदाबाद में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने होली जलाई।

वहीं मुंबई के वर्ली में लव जिहाद की थीम पर होलिका दहन किया गया। मध्य प्रदेश में उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में शाम को विशेष आरती की गई। ओडिशा के जगन्नाथ मंदिर में होली पर्व डोला पूर्णिमा के रूप में मनाया जा रहा है।

भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा ‘सुना भेषा’ (स्वर्ण वेश) में दर्शन देंगे। भगवान श्री भुज, श्री पयर, रत्न कीरट, रत्न मुकुट, कंठी, बाहुटी जैसे 138 प्रकार के सोने के जेवर पहनेंगे।

इनका वजन 200 किलो से अधिक होता है। मंगलवार को ग्रहण काल दोपहर 3:20 से शाम 6:47 बजे तक है। इसके चलते सुना भेषा रात 8 से 9 बजे के बीच होगा।

डोला मंडप में बैठाकर लगाएंगे गुलाल

जगन्नाथ संस्कृति प्रचारक पंडित पद्मनाभ त्रिपाठी शर्मा ने बताया कि यह महाप्रभु की 12 बड़ी यात्राओं में से एक है। पूरे देश में डोला के दौरान राधा-कृष्ण की पूजा की जाती है, लेकिन यहां डोला गोबिंद, भूदेवी और श्रीदेवी की पूजा की जाती है। भगवान को विशेष डोला मंडप में बैठाकर गुलाल लगाया जाता है।


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महाकालेश्वर मंदिर में नई व्यवस्था: ₹250 में संध्या और शयन आरती में प्रवेश

ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में अब श्रद्धालु भस्म आरती की तरह संध्या और शयन आरती के दर्शन के लिए भी ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे। इसके लिए प्रति व्यक्ति 250 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है और दोनों आरतियों की बुकिंग अलग-अलग समय पर होगी। मंदिर प्रशासन ने बुधवार देर रात इस नई व्यवस्था की घोषणा की। देशभर के श्रद्धालु मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर संध्या और शयन आरती के लिए अग्रिम आरक्षण करा सकते हैं। संध्या आरती की बुकिंग दोपहर 12 बजे से और शयन आरती की बुकिंग शाम 4 बजे से शुरू होगी। अनुमति प्राप्त श्रद्धालुओं को गेट नंबर 1 से प्रवेश दिया जाएगा — संध्या आरती के लिए शाम 6 बजे और शयन आरती के लिए रात 10 बजे तक मंदिर पहुंचना अनिवार्य रहेगा। सामान्य श्रद्धालु कार्तिकेय मंडपम से चलायमान दर्शन कर सकेंगे और सभी बुकिंग पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होगी।


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महाकाल मंदिर में VIP दर्शन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन पर रोक लगाने की लंबे समय से मांग हो रही है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि किसी भी मंदिर में वीआईपी दर्शन होंगे या नहीं, इसका फैसला करने का अधिकार अदालत को नहीं है। इस तरह की याचिका को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

3 जजों की बेंच ने की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने ये फैसला सुनाया है। जस्टिस महादेवन और जस्टिस जॉयमाला बागची भी इस बेंच का हिस्सा थे। याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी ने इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी याचिका दायर करते हुए वीआपी दर्शन पर रोक लगाने की मांग की थी। मगर, हाईकोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

VIP दर्शन पर उठाए सवाल

याचिकाकर्ता का कहना था कि महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी लोगों को आसानी से एंट्री मिल जाती है। वो महाकाल शिवलिंग पर जल चढ़ाकर पूजा-पाठ भी करते हैं, लेकिन आम जनता को इसका अधिकार नहीं है। उन्हें दूर से ही दर्शन करके वापस लौटना पड़ता है, जो पूरी तरह से गलत है।

कोर्ट में याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कहा कि गर्भगृह में सभी के लिए नियम समान होने चाहिए। उन्होंने कहा, "ये अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। गर्भगृह में जाने के नियम सभी के लिए बराबर होने चाहिए। वीआईपी दर्शन के नाम पर नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता है। अगर कोई वीआईपी व्यक्ति कलेक्टर के आदेश में गर्भगृह में जाता है, तो आम जनता को भी ये अधिकार मिलना चाहिए।"

CJI ने दी प्रतिक्रिया

CJI सूर्यकांत ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, "गर्भगृह में किसे जाना चाहिए और किसे नहीं, इसका फैसला अदालत नहीं कर सकती है। हम न्याय की बात कर रहे हैं। हो सकता है ये न्याय का मामला हो, लेकिन इसपर जिम्मेदार लोग ही फैसला ले सकते हैं, न कि अदालत। अगर अदालत ये तय करने लगे कि मंदिर में कौन जाएगा और कौन नहीं, तो कोर्ट का भार बहुत बढ़ जाएगा।"

CJI सूर्यकांत ने कहा-

अगर अनुच्छे 14 की बात हो रही है, तो कल अनुच्छेद 19 की भी मांग होगी। अभी आप गर्भगृह में जाने का अधिकार मांग रहे हैं, कल कहेंगे कि मुझे मंत्र पढ़ना है, क्योंकि अनुच्छेद 19 के तहत हमारे पास बोलने का अधिकार है।

याचिका में क्या की गई मांग?

एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने साफ किया है कि उनकी याचिका भेदभाव पर आधारित है। गर्भगृह में या तो सबकी एंट्री बंद कर देनी चाहिए, या सभी को गर्भगृह में जाने की इजाजत होनी चाहिए। कुछ चुनिंदा लोगों को खास तवज्जो देना गलत है।


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रिकॉर्ड तोड़ भीड़! माघ मेले में 54 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, ‘हर-हर गंगे’ से गूंजी संगम नगरी

संगम की रेती पर आस्था का महासैलाब उमड़ पड़ा है। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद लाखों श्रद्धालु ‘हर-हर गंगे’ के जयघोष के साथ त्रिवेणी संगम में मकर संक्रांति का पुण्य स्नान कर रहे हैं। प्रशासन के अनुमान के मुताबिक, आज संगम तट पर 1.5 से 2 करोड़ श्रद्धालुओं के डुबकी लगाने की संभावना है।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चप्पे-चप्पे पर एटीएस कमांडो तैनात हैं और एआई आधारित कैमरों से पूरे मेला क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है। वहीं, कल्पवासियों की तपस्या और हठयोगियों की साधना ने मेले के वातावरण को अलौकिक बना दिया है। मकर संक्रांति के इस पावन अवसर पर संगम नगरी में श्रद्धा, शक्ति और सुरक्षा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।


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केदारनाथ मंदिर से व्हाइट हाउस तक… जम्मू में दिखेंगे 14 विश्वप्रसिद्ध स्मारक

फ्रांस का एफिल टावर, मिस्र का ग्रेट स्फिंक्स ऑफ गीजा, अमेरिका का व्हाइट हाउस और इटली का कोलोसियम देखने के लिए अब विदेश जाने या भारी खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर, आगरा के ताज महल और गुजरात के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सहित दुनिया के 14 प्रसिद्ध स्मारक अब जम्मू में ही देखने को मिलेंगे।

इसके लिए लोगों को ज्यादा इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा। जम्मू के भगवती नगर में वंडर पार्क का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। यहां सरदार वल्लभभाई पटेल की 40 फीट ऊंची प्रतिमा सहित कई स्मारकों का आधे से अधिक निर्माण पूरा हो चुका है। पार्क के मार्च–अप्रैल तक बनकर तैयार होने की उम्मीद है।

यह वंडर पार्क श्री अमरनाथ यात्रा के आधार शिविर से मात्र 400 मीटर की दूरी पर बनाया जा रहा है। इसका निर्माण जम्मू स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत दिल्ली की एक कंपनी द्वारा किया जा रहा है। गुजरात और महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से आए कारीगर निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं। स्थानीय विधायक अरविंद गुप्ता ने बताया कि पार्क के निर्माण पर करीब नौ करोड़ रुपये की लागत आएगी और इसे 31 मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

पार्क में जिन प्रमुख स्मारकों का निर्माण किया जा रहा है, उनमें ग्रेट स्फिंक्स ऑफ गीजा (मिस्र), अंगकोर वाट मंदिर (कंबोडिया), एफिल टावर (फ्रांस), कोलोसियम (इटली), व्हाइट हाउस (यूएसए), स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (गुजरात), ताज महल (उत्तर प्रदेश), केदारनाथ मंदिर (उत्तराखंड), अखनूर किला (जम्मू), क्रीमची मंदिर (ऊधमपुर) और रियासी जिले का रेलवे आर्च ब्रिज शामिल हैं।

देश-दुनिया के प्रसिद्ध स्मारकों के साथ इस पार्क में जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की भी झलक देखने को मिलेगी। यहां ऊधमपुर का क्रीमची मंदिर, अखनूर किला और रियासी में बने विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च ब्रिज का स्मारक भी आकर्षण का केंद्र होगा।


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वैष्णो देवी कॉलेज विवाद: मान्यता रद्द, अब श्राइन बोर्ड के संविधान संशोधन पर जोर

श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने एमबीबीएस सीटों को लेकर पिछले 45 दिनों से चल रहे आंदोलन की सफलता पर सभी समर्थकों का आभार जताया है। साथ ही समिति ने साफ किया कि उनका संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है और जम्मू के साथ भेदभाव के खिलाफ उनकी आवाज आगे भी जारी रहेगी।

समिति ने कहा कि उनकी अगली लड़ाई अब श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के संविधान में संशोधन को लेकर होगी, ताकि भक्तों द्वारा चढ़ाई गई राशि का किसी भी तरह से दुरुपयोग न हो और इसका उपयोग केवल सनातन धर्म से जुड़े कार्यों में ही किया जाए।

श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीटों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा कॉलेज की मान्यता रद्द किए जाने के साथ ही समाप्त हो गया है। मंगलवार रात आए इस फैसले के बाद बुधवार को समिति के सदस्यों ने जम्मू में विजय रैली निकालकर अपनी खुशी जाहिर की।

हिंदू संगठनों ने मनाई जीत

समिति से जुड़े युवा राजपूत सभा, बजरंग दल सहित अन्य हिंदू संगठनों ने इसे जम्मू की जीत बताते हुए जश्न मनाया। इससे पहले समिति के संयोजक सेवानिवृत्त कर्नल सुखवीर सिंह मनकोटिया के नेतृत्व में कोर ग्रुप ने गीता भवन, परेड जम्मू में पत्रकार वार्ता कर आंदोलन की सफलता और आगे की रणनीति पर विस्तार से जानकारी दी।

मनकोटिया ने कहा कि 45 दिनों तक चले इस लंबे आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने में समाज के हर वर्ग की एकजुटता निर्णायक रही। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि श्राइन बोर्ड की यूनिवर्सिटी में पाई गई अनियमितताओं के चलते एनएमसी द्वारा मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द किया जाना न्याय की जीत है। मनकोटिया ने कहा कि देश में एक ऐसी संवेदनशील सरकार है, जो करोड़ों भक्तों की आस्था और जनभावनाओं का सम्मान करना जानती है।

श्राइन बोर्ड के संविधान में संशोधन की मांग

इस दौरान मनकोटिया ने देशभर के सनातनियों और सभी समर्थकों का दिल से धन्यवाद किया। उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से अपील की कि वे श्राइन बोर्ड को स्पष्ट निर्देश दें, ताकि भविष्य में संस्थान के भीतर सनातन धर्म की परंपराओं और संस्कृति का पूर्ण सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।

समिति ने मांग की कि श्राइन बोर्ड के संविधान में आवश्यक संशोधन को लेकर उपराज्यपाल जल्द फैसला लें। समिति ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि धर्म और मर्यादा की रक्षा करना है और इसके लिए प्रशासन को हर संभव सहयोग देने को वह हमेशा तैयार है।


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उत्तराखंड की परंपरा: गंगा घाटों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक, जुर्माना ₹10

हरिद्वार व ऋषिकेश को पवित्र सनातन नगरी घोषित कर हर की पैड़ी समेत सभी गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित करने को लेकर सरकार ने मंथन तेज कर दिया है।

हरिद्वार में धार्मिक मर्यादा का पालन कराने की पुरानी नियमावली के अध्ययन में सामने आया है कि यह पाबंदी नयी नहीं है। हरिद्वार नगर पालिका उपविधि (सन् 1953) में यह लिखा है सरकारी कार्य से आने वाले अधिकारियों को छोड़कर अहिंदुओं को हर की पैड़ी क्षेत्र व कुशावर्त घाट में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

नगर पालिका उपविधि में उल्लेख है कि प्रांतीय म्युनिसिपैलिटी एक्ट 1916 की धारा 299(1) के अंतर्गत नियम तोड़ने पर दस रुपये तक का अर्थदंड भी लगाया जाएगा।

यदि बार-बार नियम का उल्लंघन जारी रहा तो पहली बार के बाद प्रतिदिन पांच रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा। नगर पालिका उपविधि के आधार पर ही श्री गंगा सभा समेत अन्य संगठनों की मांग है कि यह व्यवस्था हरिद्वार व ऋषिकेश के सभी गंगा घाटों पर नए सिरे से लागू की जाए।

ब्रिटिश शासन से हुआ समझौता भी आधार

सन 1916 में पं. मदन मोहन मालवीय और ब्रिटिश शासन के मध्य हुए समझौते को भी तीर्थ नगरी की पवित्रता बनाए रखने का आधार बनाया जा रहा है।

यह कहा जा रहा है कि अंग्रेजी हुकूमत के दौर में भी गैर-हिंदुओं के घाटों पर प्रवेश पाबंदी के नियम तय किए गए थे। अब इन नियमों का पालन कराने के लिए नयी व्यवस्था बनाई जाए।

तब सीमित थे घाट, उन्हीं का उल्लेख

नगर पालिका उपविधि (1953) में हरिद्वार के पांच से सात गंगाघाटों पर अहिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध समेत अन्य बाध्यताओं का प्रविधान किया गया है, अब सभी 105 घाटों में प्रवेश पर इस तरह के प्रतिबंध की मांग की जा रही है।

मांग करने वाले संगठनों का कहना है कि उस समय पांच से सात गंगा घाट ही थे, लेकिन अब घाट बढ़कर 105 हो चुके हैं। इसलिए सभी पर एक समान व्यवस्था लागू होनी चाहिए।

मांस विक्रेता को दुकान पर नाम-पता लिखना होगा

हर की पैड़ी, अन्य गंगा घाटों, पार्किंग स्थलों व मेला भूमि में शराब व मांस परोसने की घटनाओं पर भी श्री गंगा सभा ने चिंता जताई है। मांस बिक्री को लेकर भी नगर पालिका उपविधि (1953) में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि ज्वालापुर क्षेत्र के अलावा किसी अन्य स्थान पर मांस बेचने का लाइसेंस मंजूर नहीं होगा। मांस विक्रेता को अपनी दुकान पर पूरा नाम, पता और बेचे जा रहे मांस के प्रकार का स्पष्ट उल्लेख करना होगा।



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पौष पूर्णिमा पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, माघ मेला के पहले दिन दिखा महाकुंभ सा नजारा

पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर्व के साथ माघ मेले का शुभारंभ हो गया है। ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु संगम सहित सभी घाटों पर स्नान के लिए उमड़ पड़े। घाटों पर हर-हर गंगे के जयघोष गूंजते रहे और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। श्रद्धालुओं और कल्पवासियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

श्रद्धालु स्नान के साथ ध्यान, पूजन-अर्चन कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मां गंगा से प्रार्थना कर रहे हैं। भक्ति भाव से सराबोर इस वातावरण में पूरे दिन श्रद्धा का यह क्रम जारी रहने की उम्मीद है। अब तक हजारों श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। वहीं जिलाधिकारी मनीष वर्मा के अनुसार सुबह छह बजे तक करीब तीन लाख श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके थे।

माघ मेले में पांच एसडीएम की तैनाती

महाकुंभ में तैनात रहे पांच पीसीएस अधिकारियों को माघ मेला क्षेत्र में तैनात किया गया है। शासन स्तर से शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी कर सूची भी जारी कर दी गई। ये सभी अधिकारी शनिवार से मेला क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे।

इन अधिकारियों में रामपुर में एसडीएम पद पर तैनात आनंद कुमार कनौजिया शामिल हैं, जो महाकुंभ में सेक्टर आठ के प्रभारी थे। चंदौली में तैनात एसडीएम विजय त्रिवेदी को भी माघ मेला क्षेत्र भेजा गया है, वे महाकुंभ में अखाड़ा क्षेत्र सेक्टर-19 के मजिस्ट्रेट थे। इसके अलावा महाकुंभ में सेवा दे चुके एसडीएम अमित त्रिपाठी, लाल सिंह यादव और रमेश पांडेय को भी माघ मेला की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


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