पौष पूर्णिमा पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, माघ मेला के पहले दिन दिखा महाकुंभ सा नजारा

पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर्व के साथ माघ मेले का शुभारंभ हो गया है। ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु संगम सहित सभी घाटों पर स्नान के लिए उमड़ पड़े। घाटों पर हर-हर गंगे के जयघोष गूंजते रहे और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। श्रद्धालुओं और कल्पवासियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

श्रद्धालु स्नान के साथ ध्यान, पूजन-अर्चन कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मां गंगा से प्रार्थना कर रहे हैं। भक्ति भाव से सराबोर इस वातावरण में पूरे दिन श्रद्धा का यह क्रम जारी रहने की उम्मीद है। अब तक हजारों श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। वहीं जिलाधिकारी मनीष वर्मा के अनुसार सुबह छह बजे तक करीब तीन लाख श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके थे।

माघ मेले में पांच एसडीएम की तैनाती

महाकुंभ में तैनात रहे पांच पीसीएस अधिकारियों को माघ मेला क्षेत्र में तैनात किया गया है। शासन स्तर से शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी कर सूची भी जारी कर दी गई। ये सभी अधिकारी शनिवार से मेला क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे।

इन अधिकारियों में रामपुर में एसडीएम पद पर तैनात आनंद कुमार कनौजिया शामिल हैं, जो महाकुंभ में सेक्टर आठ के प्रभारी थे। चंदौली में तैनात एसडीएम विजय त्रिवेदी को भी माघ मेला क्षेत्र भेजा गया है, वे महाकुंभ में अखाड़ा क्षेत्र सेक्टर-19 के मजिस्ट्रेट थे। इसके अलावा महाकुंभ में सेवा दे चुके एसडीएम अमित त्रिपाठी, लाल सिंह यादव और रमेश पांडेय को भी माघ मेला की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


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नए साल पर आस्था के रंग में रंगा दिल्ली-एनसीआर, मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

नव वर्ष 2026 की शुरुआत दिल्ली-एनसीआर में आस्था और विश्वास के माहौल के साथ हुई। साल के पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर पहुंचे और ईश्वर के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। सुबह से ही लोग परिवार के साथ पूजा-अर्चना में जुटे नजर आए, जिससे धार्मिक स्थलों पर विशेष रौनक देखने को मिली।

ठंड और हल्के कोहरे के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद के प्रमुख मंदिरों में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। यह फोटो स्टोरी नए साल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में देखने को मिली उसी आस्था, सकारात्मकता और श्रद्धा को दर्शाती है, जिसके साथ लोगों ने नए वर्ष का स्वागत किया।

झंडेवाला देवी मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

नए साल के पहले दिन दिल्ली के प्रसिद्ध झंडेवाला देवी मंदिर में श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने परिवार के साथ दर्शन कर नए वर्ष के लिए सुख, शांति और खुशहाली की कामना की। भक्ति और उल्लास से भरे इन पलों ने नए साल की शुरुआत को खास बना दिया।

फरीदाबाद में भक्तों ने की सुख-समृद्धि की कामना

फरीदाबाद में भी नए साल के पहले दिन धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। सिद्ध पीठ श्री हनुमान मंदिर में भक्तों ने शिवलिंग पर जलाभिषेक कर नए वर्ष के लिए मंगलकामनाएं कीं। मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के दौरान शांति और सकारात्मकता का वातावरण बना रहा।

नोएडा में दिखा आस्था और श्रद्धा का रंग

नए साल के अवसर पर नोएडा में भी आस्था का विशेष माहौल देखने को मिला। सेक्टर-20 स्थित हनुमान मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। लोगों ने भगवान शिव की पूजा कर परिवार और समाज के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। ठंड के बावजूद मंदिर परिसर में उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा साफ महसूस की गई।

लाल किले पर नए साल का जश्न

नए साल के मौके पर दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर भी उत्साह और उमंग देखने को मिली। बड़ी संख्या में लोग परिवार और दोस्तों के साथ यहां पहुंचे और नए साल के पहले दिन को यादगार बनाया। हल्के कोहरे और ठंड के बीच लाल किले के आसपास उमड़ी भीड़ ने जश्न के माहौल को और खास बना दिया।

अन्य धार्मिक स्थलों पर भी रही भीड़

नव वर्ष के अवसर पर दिल्ली के कल्काजी मंदिर, अलीपुर स्थित खाटू श्याम दिल्ली धाम और प्रीत विहार के गुफा वाले शिव मंदिर में सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। वहीं, लोटस टेंपल में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने के कारण कुछ समय के लिए प्रवेश गेट बंद करने पड़े। लोगों ने श्रद्धा और विश्वास के साथ नए साल की शुरुआत करते हुए सुख, शांति और खुशहाली की कामना की।.


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नए साल की शुरुआत आस्था के साथ, कैंची धाम-जागेश्वर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़

साल 2026 के पहले दिन उत्तराखंड के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। लोगों ने भगवान के आशीर्वाद के साथ नए साल की शुरुआत की। कैंची धाम और जागेश्वर धाम सहित प्रदेश के विभिन्न प्रमुख मंदिरों में दर्शन के लिए सुबह से ही लंबी कतारें लगी रहीं। ठंड के बावजूद स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ बाहर से आए पर्यटक भी बड़ी संख्या में मंदिरों में पहुंचे।

जागेश्वर धाम समेत धार्मिक स्थलों पर उमड़ा आस्था का सैलाब

साल 2025 को विदाई देने के बाद नए साल के पहले दिन जागेश्वर धाम और गोलू मंदिर चितई में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। नंदा देवी, पातालदेवी समेत मुख्यालय के अन्य मंदिरों में भी सुबह से दर्शन का सिलसिला जारी रहा। पर्यटन स्थलों पर भी चहल-पहल देखने को मिली। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र धार्मिक स्थलों पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

कैंची धाम में ठंड के बीच श्रद्धालुओं की कतारें

नए साल के पहले दिन कैंची धाम में भी भक्तों की लंबी लाइन देखने को मिली। स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आए श्रद्धालुओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर नए साल में सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।

हल्द्वानी और आसपास के मंदिरों में भीड़

नववर्ष के अवसर पर हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों के प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। कालाढूंगी चौराहे स्थित कालू सिद्ध मंदिर, रानीबाग के शीतला देवी मंदिर, गौलापार के कालीचौड़ और सूर्यादेवी मंदिर में सुबह से भक्त पहुंचते रहे। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना, हवन और आरती में भाग लिया, जिससे मंदिर परिसर जयकारों से भक्तिमय हो उठा। भीड़ को देखते हुए मंदिर समितियों और प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

नैनीताल के नयना देवी मंदिर में नियंत्रित भीड़

नैनीताल में नए साल के पहले दिन नयना देवी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में स्थानीय लोगों और पर्यटकों का आना-जाना लगा रहा। हालांकि इस बार पिछले वर्षों की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या कम रही, जिससे मंदिर परिसर में लंबी कतारें नहीं लगीं। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार सुबह से करीब दो हजार श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। पाषाण देवी मंदिर और हनुमानगढ़ मंदिर में भी भक्तों का आगमन जारी रहा।

रामनगर के गिरिजा देवी मंदिर में उमड़ी भीड़

रामनगर स्थित गिरिजा देवी मंदिर में भी नए साल के पहले दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। रामनगर, काशीपुर, हल्द्वानी, बाजपुर और मुरादाबाद सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कई भक्तों ने कोसी नदी में स्नान के बाद देवी के दर्शन किए। मंदिर और परिसर को फूलों से सजाया गया था, जबकि सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस कर्मी तैनात रहे। भीड़ अधिक होने से प्रसाद विक्रेताओं में भी खासा उत्साह देखने को मिला।


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रामनगरी में CM योगी का बड़ा बयान: ‘पूर्व सरकार ने अयोध्या को लहूलुहान किया’

 साल 2025 के अंतिम दिन अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दूसरी वर्षगांठ मनाई जा रही है। इस मौके पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी रामनगरी पहुंचे हुए हैं।

श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर में 'प्रतिष्ठा द्वादशी' समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व की सरकारों को आड़े हाथों लेते हुए जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों ने अयोध्या के साथ षड़यंत्र करके लहूलुहान किया था।

उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के बाद अयोध्या में रामलला का विराजमान होना और मंदिर का यह भव्य रूप देखकर आनंद और गौरव की अनुभूति कर रहे हैं।

बकौल सीएम, स्वतंत्र होने के अयोध्या ने राम आंदोलन के अनेक पड़ाव देखे हैं। अयोध्या के नाम से एहसास होता है कि जहां कभी युद्ध नहीं हुआ, कोई भी दुश्मन यहां के शौर्य और वैभव के कारण यहां टिक नहीं पाया लेकिन कुछ लोगों ने अपने निहित स्वार्थ से मजहबी जुनून और सत्ता के स्वार्थ में पड़कर अयोध्या को भी उपद्रव और संघर्ष का अड्डा बना दिया था। अब लोग बिना डर के 'जय श्रीराम' कहते हैं, जबकि पहले ऐसा करने पर लाठी मिलती थी।


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संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं का काली सड़क से प्रवेश, त्रिवेणी मार्ग से होगी निकासी

माघ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के सुरक्षित और सुचारु आवागमन को सुनिश्चित करने के साथ-साथ शहरवासियों को जाम जैसी समस्या से बचाने के लिए यातायात पुलिस ने व्यापक योजना तैयार की है। भीड़ प्रबंधन और ट्रैफिक नियंत्रण के लिए विशेष यातायात व्यवस्था लागू की जा रही है।

इस योजना के तहत श्रद्धालुओं को काली सड़क (जवाहरलाल नेहरू मार्ग) के माध्यम से संगम क्षेत्र में प्रवेश कराया जाएगा, जबकि त्रिवेणी मार्ग से उनकी निकासी की जाएगी। इसी यातायात व्यवस्था को लेकर सोमवार को रिजर्व पुलिस लाइंस में पुलिसकर्मियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

यातायात उपनिरीक्षक अवधेश कुमार सिंह ने प्रशिक्षण के दौरान माघ मेले के दौरान लागू किए जाने वाले यातायात नियमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रवेश और निकास मार्गों को अलग-अलग रखने से भीड़ नियंत्रण में मदद मिलेगी और यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहेगी।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान फायर ब्रिगेड की तैयारियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि मेला क्षेत्र में फायर स्टेशन, फायर बाइक और एआई कैमरों की व्यवस्था की गई है, ताकि आग लगने की स्थिति में एक से दो मिनट के भीतर मौके पर पहुंचकर तुरंत काबू पाया जा सके।

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हरिद्वार में तीन महीनों तक चलेगा अर्धकुंभ, पहली बार होंगे चार अमृत स्नान

शुक्रवार को हरिद्वार स्थित डामकोठी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सभी 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में 2027 अर्धकुंभ को दिव्य और भव्य बनाने के लिए विस्तार से चर्चा की गई। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (निरंजनी) के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि अखाड़ों का मूल दायित्व कुंभ का आयोजन करना है और पूरा देश हरिद्वार के कुंभ को बड़ी आशा से देख रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा कुंभ तैयारियों के शंखनाद की सराहना की।

बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कुंभ आयोजन में संत समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आश्वस्त किया कि सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और मेला व्यवस्थाओं को भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी पुष्टि की कि 13 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ मेले की शुरुआत होगी।

पहली बार चार अमृत स्नान

इस बैठक में अखाड़ा परिषद ने 2027 हरिद्वार अर्धकुंभ के 10 प्रमुख स्नान पर्वों की तिथियों की घोषणा की। खास बात यह है कि इस बार पहली बार चार अमृत स्नान तय किए गए हैं, जिसे सदियों पुरानी परंपराओं में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है। जनवरी से अप्रैल तक चलने वाला यह मेला तीन महीने तक चलेगा।

प्रमुख स्नान तिथियां (2027)

14 जनवरी — मकर संक्रांति

6 फरवरी — मौनी अमावस्या

11 फरवरी — बसंत पंचमी

20 फरवरी — माघ पूर्णिमा

चार अमृत स्नान

6 मार्च — महाशिवरात्रि (पहला अमृत स्नान)

8 मार्च — सोमवती/फाल्गुन अमावस्या (दूसरा अमृत स्नान)

14 अप्रैल — मेष संक्रांति/वैशाखी (तीसरा अमृत स्नान)

20 अप्रैल — चैत्र पूर्णिमा (चौथा अमृत स्नान)

अन्य विशेष पर्व

7 अप्रैल — नव संवत्सर

15 अप्रैल — राम नवमी


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आपदाओं पर आस्था भारी, इस बार चारधाम पहुंचे 1.87 लाख अधिक श्रद्धालु

अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव का असर हेमकुंड साहिब सहित चारधाम यात्रा पर भी देखा गया। इसके बाद वर्षा ऋतु में कई क्षेत्रों में आपदा जैसे हालात पैदा हुए, लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था डगमगाई नहीं। वर्ष 2024 की तुलना में इस बार चारधाम में 1.87 लाख अधिक यात्री पहुंचे, जबकि हेमकुंड साहिब में लगभग 91 हजार श्रद्धालुओं की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र में आई आपदा के कारण गंगोत्री और यमुनोत्री में श्रद्धालुओं की संख्या कुछ कम रही।

इस वर्ष गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट 30 अप्रैल को, केदारनाथ के 2 मई को, बदरीनाथ के 4 मई को और हेमकुंड साहिब के 25 मई को खोले गए। कपाट खुलने से पहले ही पहलगाम में हुए आतंकी हमले से दोनों देशों के बीच तनाव का माहौल बन चुका था, जिससे यात्रा की सुरक्षा पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गई। 15 जून से बारिश का दौर शुरू होने के बाद केदारनाथ और गंगोत्री-यमुनोत्री मार्गों पर कई भूस्खलन जोन सक्रिय हो गए, जिससे यात्रियों के लिए खतरा लगातार बना रहा।

पांच अगस्त को धराली में आई आपदा ने हालात और गंभीर कर दिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर पूरा प्रशासनिक तंत्र राहत और बचाव कार्य में जुट गया, लेकिन इसके बावजूद बदरीनाथ, केदारनाथ और हेमकुंड साहिब की यात्रा सुचारू रूप से संचालित की गई। इसी कारण आपदाओं के बीच भी इन धामों में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

पहली बार कंट्रोल रूम के जरिए पूरी यात्रा की मॉनिटरिंग

हेमकुंड साहिब और चारधाम में इस वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए पुलिस विभाग ने शुरुआत में ही रेंज कार्यालय में यात्रा कंट्रोल रूम स्थापित किया। इसके नोडल अधिकारी पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल राजीव स्वरूप को बनाया गया। सभी धामों के सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड कंट्रोल रूम में मॉनिटर की जाती रही, और किसी भी समस्या की स्थिति में तुरंत टीमें मौके पर भेजी गईं। यात्रा मार्गों पर पुलिस बल, एसडीआरएफ, जल पुलिस, फायर सर्विस, आतंकवादी रोधी दस्ता, बम निरोधक दस्ता और पैरा मिलिट्री फोर्स को तैनात किया गया।

यात्रियों का तुलनात्मक विवरण

यमुनोत्री – 2024: 7,14,755 | 2025: 6,44,637 | कमी: 70,118

गंगोत्री – 2024: 8,15,273 | 2025: 7,58,249 | कमी: 57,024

केदारनाथ – 2024: 16,52,076 | 2025: 17,68,795 | बढ़ोतरी: 1,16,719

बदरीनाथ – 2024: 14,35,341 | 2025: 16,32,981 | बढ़ोतरी: 1,97,640

हेमकुंड साहिब – 2024: 1,83,722 | 2025: 2,74,441 | बढ़ोतरी: 90,719

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बर्फ से ढंका बद्रीनाथ धाम, उत्तराखंड में जमने लगी झील

उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में लगातार बर्फबारी हो रही है। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ धाम में गुरुवार को नवंबर की पहली बर्फबारी दर्ज की गई, जिसके बाद पूरा मंदिर परिसर बर्फ की सफेद चादर से ढँक गया। यहां तापमान गिरकर माइनस 6 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच चुका है।

इसके साथ ही चमोली जिले की प्रसिद्ध शेषनेत्र झील भी जम गई है। पिथौरागढ़ जिले के 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश क्षेत्र में भी भारी बर्फबारी हुई है, जिससे स्थानीय झीलें पूरी तरह जम चुकी हैं। इन दृश्यों को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं।

वहीं राजस्थान में सप्ताहभर बाद सर्दी से राहत मिली है। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान में 1 डिग्री की बढ़ोतरी देखी गई, जिससे कई शहरों में तापमान सिंगल डिजिट से डबल डिजिट में आ गया। अगले दो सप्ताह तक तापमान में गिरावट की संभावना नहीं है। हालांकि, उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण धुंध (स्मॉग) बढ़ने लगी है और दिन में धूप कमजोर पड़ गई है।

मध्य प्रदेश में सर्दी के असर से पिछले दो दिनों में दो लोगों की मौत हो गई है। शुक्रवार को भोपाल, इंदौर सहित सात जिलों में शीतलहर चली। पचमढ़ी में पहली बार पारा 5.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि नर्मदापुरम में विजिबिलिटी घटकर 500 मीटर रह गई।

भारत का तापमान 0.9 डिग्री बढ़ा—अध्ययन

एक अध्ययन के अनुसार पिछले दशक (2015–2024) में भारत का औसत तापमान लगभग 0.9 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है। इस बढ़ोतरी के चलते देश में हीट वेव की अवधि लंबी हो रही है और हर दशक में गर्म दिनों की संख्या में 5 से 10 दिनों तक की वृद्धि हो रही है।

स्टडी में बताया गया है कि 1950 के दशक के बाद से भारत के पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में वर्ष के सबसे गर्म दिन के तापमान में 1.5 से 2 डिग्री सेल्सियस तक इजाफा दर्ज किया गया है। यह रिपोर्ट भारत, नॉर्वे और नेपाल के क्लाइमेट विशेषज्ञों की संयुक्त टीम द्वारा तैयार की गई है।


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संजौली में तनाव: अवैध ढांचे में नमाज़ को लेकर विवाद, इलाके में सुरक्षा बढ़ी

शिमला के संजौली स्थित अवैध मस्जिद से जुड़े मामले को लेकर देवभूमि संघर्ष समिति और अन्य हिंदू संगठनों ने 21 नवंबर को संजौली में प्रदर्शन करने की घोषणा की है। समिति का दावा है कि शुक्रवार को संजौली बाजार बंद रहेगा और लोगों से बच्चों को स्कूल न भेजने की अपील भी की गई है।

प्रदर्शन की घोषणा के बाद जिला और पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। संजौली में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा और वीरवार शाम को ही पुलिस ने इलाके में बैरिकेड्स लगा दिए। भीड़ बढ़ने की स्थिति में ट्रैफिक को ढली से मैहली बाईपास रोड की ओर डायवर्ट किया जाएगा। एसडीएम शहरी ओशीन शर्मा पुलिस दल के साथ सुबह नौ बजे से मौके पर मौजूद रहेंगी। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा के मद्देनजर भीड़ जमा नहीं होने दी जाएगी और सोशल मीडिया पर उत्तेजक पोस्ट या अफवाहों पर नज़र रखने के लिए क्यूआरटी अलर्ट रहेगी। बाजार और संकरी सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस व्यवस्था संभालेगी। किसी को भी बिना कारण रुकने, भीड़ लगाने या भड़काऊ चर्चा की अनुमति नहीं होगी।

तीन दिनों से अनशन पर मदन ठाकुर

हिंदू संघर्ष समिति के नेता मदन ठाकुर तीन दिनों से अनशन पर बैठे हैं और उनकी हालत बिगड़ती बताई जा रही है। उनका कहना है कि वे कोर्ट के आदेशों का पालन करवाने की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं। समिति नेता विजय शर्मा का कहना है कि उन्होंने सत्याग्रह के जरिए प्रशासन को मनाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।

प्रदर्शन के पीछे कारण

गत शुक्रवार को देवभूमि संघर्ष समिति ने कोर्ट द्वारा अवैध घोषित की गई संजौली मस्जिद में अन्य राज्यों से आए मुस्लिमों को नमाज पढ़ने से रोका था, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस हुई थी। संजौली पुलिस ने इस मामले में चार महिलाओं समेत छह लोगों पर एफआईआर दर्ज की है, जिन पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप है। समिति ने मस्जिद का बिजली और पानी का कनेक्शन काटने तथा दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की है।


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हरिद्वार में कार्तिक पूर्णिमा स्नान पर थमे वाहन, डायवर्जन के बावजूद हाईवे से शहर तक जाम

कार्तिक पूर्णिमा स्नान पर्व पर हरिद्वार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लाखों लोग गंगा स्नान के लिए शहर पहुंचे, जिससे दिल्ली-हरिद्वार हाईवे और शहर के मुख्य मार्गों पर लंबा जाम लग गया। वाहनों की लंबी कतारों के बीच हाईवे पर ट्रैफिक रेंगता हुआ चलता रहा। शहर के भीतर भी कई प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति बनी रही।

बहादराबाद से लेकर शांतिकुंज तक वाहन चालक घंटों जाम में फंसे रहे। शंकराचार्य चौक, रोडीवाला, लालतारो पुल, शिव मूर्ति चौक, बस अड्डा और रेलवे स्टेशन के आसपास सबसे अधिक जाम देखा गया। कई यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ी।

सुबह से ही गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हरकी पैड़ी, कुशावर्त घाट, भीमगोड़ा, हरिपुरकलां और कनखल स्थित घाटों पर स्नान और पूजा-अर्चना का दौर पूरे दिन चलता रहा। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते हुए गंगा में आस्था की डुबकी लगाई।

जाम की स्थिति से आमजन को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। कई जगह वाहन चालक घंटों फंसे रहे, जबकि पैदल यात्रियों को भी भीड़ के बीच मुश्किल से रास्ता बनाना पड़ा।

इस बीच, पुलिस प्रशासन ने यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई मार्गों पर डायवर्जन लागू किया। एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने स्वयं हरकी पैड़ी क्षेत्र का निरीक्षण कर सुरक्षा एवं ट्रैफिक व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता हो और किसी भी तरह की अव्यवस्था न होने दी जाए।


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