केदारनाथ की बर्फीली वादियों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, पहले ही दिन टूटे रिकॉर्ड

हिमालय की गोद में बसे पवित्र धाम में आस्था, प्रकृति और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब भगवान केदारनाथ के कपाट खुलने के साथ ही पूरे धाम में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। बर्फ से आच्छादित पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित मंदिर का दिव्य स्वरूप हर किसी को मंत्रमुग्ध कर रहा है।

ये है आंकड़ा

पहले ही दिन हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। केदारनाथ यात्रा के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि पहले ही दिन 38 हजार भक्तों ने बाबा केदार के दर्शन किए। इससे पहले 2025 में 30 हजार से ज्यादा भक्त पहले ही दिन केदारनाथ धाम पहुंचे थे।

साल 2020 व 2021 में कोविड के चलते भक्तों की संख्या सीमित रही, जबकि 2022 में लगभग 20 हजार भक्त पहले दिन दर्शन को पहुंचे थे। 2023 में यह संख्या बढ़कर करीब 24 हजार और 2024 में 29 हजार पहुंची थी। 2025 में तीस हजार से ज्यादा भक्तों ने पहले दिन दर्शन किए थे। जबकि इस साल 38 हजार तीर्थयात्रियों ने धाम में माथा टेका।

 51 क्विंटल फूलों से सजाया गया धाम

कपाटोद्घाटन के पावन अवसर पर श्री केदारनाथ मंदिर को 51 क्विंटल से अधिक देशी-विदेशी फूलों से भव्य रूप से सजाया गया। रंग-बिरंगे फूलों की साज-सज्जा ने मंदिर की अलौकिक सुंदरता को और भी निखार दिया। केदारपुरी की फिजाओं में गूंजते वैदिक मंत्रोच्चार, घंटियों की ध्वनि और शंखनाद ने वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक बना दिया, मानो स्वयं देवताओं का आगमन हो रहा हो।

इस समय केदारनाथ धाम के चारों ओर की पर्वत चोटियां पूरी तरह बर्फ से ढकी हुई हैं, जो इस पावन स्थल की सुंदरता में चार चांद लगा रही हैं। सफेद बर्फ की चादर के बीच विराजमान बाबा केदार का मंदिर किसी स्वर्गिक दृश्य से कम प्रतीत नहीं हो रहा। श्रद्धालु न केवल भगवान के दर्शन कर रहे हैं, बल्कि हिमालय की इस अद्भुत प्राकृतिक छटा का भी भरपूर आनंद ले रहे हैं।

पहले दिन ही केदारपुरी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। मंदिर परिसर से लेकर हेलीपैड तक लंबी कतारें लगी रहीं। भक्त घंटों इंतजार कर बाबा के दर्शन के लिए उत्साहित नजर आए। कई श्रद्धालु आसपास जमी बर्फ के बीच खेलते और तस्वीरें खिंचवाते हुए इस यादगार पल को संजोते दिखे।

देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस अनुभव को अविस्मरणीय बताया। महाराष्ट्र से आए कुलदीप महर ने कहा कि बाबा के दर्शन के साथ-साथ प्रकृति की अद्भुत छटा ने उनके मन को अत्यंत आनंदित कर दिया। वहीं गुजरात से आए संदीप पटेल ने कहा कि बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियों के बीच स्थित मंदिर का दृश्य उन्हें स्वर्ग जैसी अनुभूति करा रहा है, जिसे वह जीवनभर नहीं भूल पाएंगे।

कपाट खुलने के साथ ही केदारनाथ यात्रा ने जोर पकड़ लिया है और केदार घाटी एक बार फिर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह से सराबोर हो उठी है। प्रशासन द्वारा व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के प्रयास जारी हैं, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और सुगम तरीके से बाबा केदार के दर्शन कर सकें। इस दिव्य और अलौकिक वातावरण में बाबा केदार के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मिक शांति का अनमोल अनुभव बन रहे हैं।


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केदार घाटी में फिर लौटी आस्था और आजीविका की रौनक, टूटा सन्नाटा

शीतकाल में बर्फ की सफेद चादर में छह महीने तक शांत पड़ी केदार घाटी एक बार फिर जीवंत हो उठी है। बाबा केदार के धाम के कपाट खुलते हीं पूरी घाटी में आस्था, उत्साह और आर्थिक गतिविधियों का संगम देखने को मिल रहा है। जहां कुछ दिन पहले तक सन्नाटा पसरा था, वहीं अब हर ओर “हर-हर महादेव” के जयघोष और यात्रियों की चहल-पहल गूंज रही है।

इससे पहले मंगलवार को डोली के शीतकालीन गद्दीस्थल से केदारपुरी पहुंचते ही घाटी का नजारा पूरी तरह बदल गया है। अगस्त्यमुनि से लेकर गुप्तकाशी, फाटा, सीतापुर, सोनप्रयाग और गौरीकुंड तक हाईवे किनारे दुकानें सजी हैं।

व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों को नया रूप दिया है और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हैं। केवल केदारघाटी में ही पचास हजार से अधिक व्यापारी इस यात्रा से सीधे तौर पर जुड़े हैं, जो आने वाले छह महीनों में लाखों तीर्थयात्रियों की सेवा में जुटे रहेंगे।

पार्किंग स्थल वाहनों से अभी से फुल

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर भी रौनक साफ झलकने लगी है। पैदल मार्ग पर छोटी-छोटी दुकानें यात्रियों के लिए चाय, नाश्ता और जरूरी सामान उपलब्ध करा रही हैं। सोनप्रयाग और गौरीकुंड की पार्किंग स्थल वाहनों से अभी से फुल हो गए हैं। बाजारों में दिनभर यात्रियों और स्थानीय लोगों की आवाजाही बनी हुई है। यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन भी पूरी तरह सक्रिय है। हर प्रमुख चौराहे और पड़ाव पर सुरक्षा बल तैनात हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

केदारनाथ यात्रा यहां के लोगों के लिए केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवनयापन का मुख्य आधार भी है। छह महीने चलने वाली यह यात्रा स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों, ढाबा संचालकों, घोड़ा-खच्चर मालिकों और छोटे दुकानदारों के लिए सालभर की आय का प्रमुख स्रोत है। इसी अवधि में होने वाली कमाई से वे अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं और पूरे वर्ष की आर्थिक जरूरतें पूरी करते हैं।

यात्रा के सुचारु संचालन में घोड़ा-खच्चरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जिले के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से भी इनका आगमन जारी है। सोनप्रयाग और गौरीकुंड में बड़ी संख्या में घोड़ा-खच्चर पहुंच चुके हैं। इस बार लगभग 8 हजार घोड़ा-खच्चरों के यात्रा मार्ग पर तैनात होने का अनुमान है, जो बुजुर्गों और असमर्थ यात्रियों के लिए सहारा बनेंगे।

व्यापारियों को बेहतर सीजन की उम्मीद

स्थानीय व्यापारियों में इस बार यात्रा को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। होटल एसोसिएशन केदार घाटी के महासचिव मनोज सेमवाल के अनुसार, “हर साल की तरह इस बार भी सभी को यात्रा से बड़ी उम्मीदें हैं। यही समय होता है जब सभी लोग अपनी सालभर की आर्थिक स्थिति मजबूत करते हैं।” वहीं, गौरीकुंड के व्यापारी मायाराम गोस्वामी का कहना है कि यह यात्रा न केवल स्थानीय बल्कि अन्य जिलों के हजारों लोगों की आजीविका से जुड़ी है।

अगले छह महीने तक गूंजेगी घाटी

डोली के केदारपुरी पहुंचते ही केदार घाटी में धार्मिक उत्साह और आर्थिक गतिविधियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं। अब आने वाले छह महीनों तक यह पूरी घाटी श्रद्धालुओं के जयघोष, दुकानों की रौनक और व्यापारिक गतिविधियों से गुलजार रहेगी। प्रशासन और स्थानीय लोग मिलकर यात्रा को सफल और सुरक्षित बनाने में जुटे हुए हैं, ताकि हर श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर सुखद अनुभव लेकर लौट सके।


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गूंजेगा ‘हर-हर महादेव’! गौरीकुंड से निकलेगी डोली, 22 को खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट

पांचवें ज्योतिर्लिंग बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली यात्रा सोमवार को गौरीकुंड स्थित गौरामाई मंदिर पहुंच गई। इस दौरान सेना के बैंड की मधुर लहरियों और हजारों भक्तों के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

22 अप्रैल को खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट

केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को सुबह आठ बजे खोले जाएंगे। रविवार को डोली यात्रा विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी होते हुए फाटा पहुंची थी। इस मौके पर पंच केदार सेवा सांस्कृतिक मंच की ओर से भजन संध्या का आयोजन किया गया। जबकि, होटल एसोसिएशन केदारघाटी ने विशाल भंडारा आयोजित किया। सोमवार को सुबह आठ बजे मुख्य पुजारी ने बाबा को भोग लगाया।


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चारधाम यात्रा आज से शुरू, 18.25 लाख श्रद्धालुओं ने कराया रजिस्ट्रेशन

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा शनिवार से विधिवत शुरू हो रही है। पुष्कर सिंह धामी ऋषिकेश से 10 बसों को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के लिए रवाना करेंगे। ये श्रद्धालु 19 अप्रैल को कपाट खुलने के समय मौजूद रहेंगे। इस साल यात्रा को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है, अब तक करीब 18.25 लाख श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं, जबकि पिछले साल यह संख्या 23 लाख थी।

यात्रियों की सुविधा के लिए ऋषिकेश और हरिद्वार में ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन काउंटर भी शुरू कर दिए गए हैं। सबसे पहले मध्य प्रदेश के शहडोल से आए 100 श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया, जो यमुनोत्री और गंगोत्री के दर्शन करेंगे।

यात्रा के दौरान कुछ अहम नियम भी लागू किए गए हैं। बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक रहेगी, जबकि हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन धर्म के लोग दर्शन कर सकेंगे। केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में गंगाजल और फूल चढ़ाने की अनुमति नहीं होगी, और विशेष पूजा का समय भी रात 11 बजे से सुबह 4 बजे के बीच तय किया गया है।

यात्रा मार्ग पर वाहनों की आवाजाही सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक ही रहेगी। प्रशासन ने पूरे रूट को 16 सुपर जोन में बांटकर 54 हजार वाहनों के लिए 118 पार्किंग की व्यवस्था की है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 80 भूस्खलन संभावित स्थानों को चिन्हित किया गया है, जहां इमरजेंसी टीमें तैनात रहेंगी।

इसके अलावा, केदारनाथ की पैदल यात्रा से पहले बुजुर्गों और बीपी के मरीजों की गौरीकुंड में स्वास्थ्य जांच की जाएगी। साथ ही 48 हाल्टिंग पॉइंट बनाए गए हैं, जहां किसी आपदा की स्थिति में करीब 1.18 लाख लोगों को सुरक्षित ठहराया जा सकता है।


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चारधाम यात्रा से दो दिन पहले ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के लिए विधिवत रूप से आज सुबह यानी 17 अप्रैल से ऑफ लाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. आगामी 19 तारीख से यमुनोत्री धाम, गंगोत्री धाम खुल रहे हैं, जबकि आगामी 22 अप्रैल को केदारनाथ जी धाम और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ जी धाम के कपाट खुल जाएंगे. प्रशासन ने ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए कुल 20 काउंटर बनाए हैं.

रजिस्ट्रेशन स्थल पर तैनात कर्मचारियों को दिए आवश्यक निर्देश 

रिपोर्ट के मुताबिक रजिस्ट्रेशन स्थल पर पहुंचकर जिलाधिकारी ने हर प्रक्रिया का खुदनिरीक्षण किया और वहां तैनात कर्मचारियों को निर्देश दिया. देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन स्थल किसी भी प्रकार की अव्यवस्था का शिकार न होना पड़े इसलिए उनके लिए एक अलग से काउंटर बनाए गए है. जिलाधिकारी ने बताया कि यात्रियों की सुविधा के लिए रजिस्ट्रेशन स्थल पर 20 काउंटर बनाए गए हैं.

पहले दिन काफी कम संख्या में श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन के लिए पहुंचे

गौरतलब है शुक्रवार सुबह 8 बजे से शुरू हुए ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में अपेक्षानुसार चारधाम यात्रियों की कम ही रही. चूंकि अभी गंगोत्री ओर यमनोत्री धाम के ही कपाट खुल रहे है, जैसे ही केदारनाथ बद्रीनाथ धाम के कपाट खुल जाएंगे तो संभवतया रजिस्ट्रेशन स्थल पर काफी संख्या में यात्रियों की बढ़ने की उम्मीद है. हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में पहले दिन काफी कम संख्या में श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन के लिए पहुंचे. 

22 मार्च को केदारनाथ और 23 मार्च को बद्रीनाथ के खुलेंगे कपाट

चारधाम यात्रा का रजिस्ट्रेशन हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान से शुरू किया है. अभी यमनोत्री धाम गंगोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल से खुल रहे है, उसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथजी फिर 23 को बद्रीनाथजी के कपाट खुल जाएंगे. जिला प्रशासन देश के विभिन्न क्षेत्रों से ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए आए चारधाम यात्रियों के लिए सभी व्यवस्थाओं को उपलब्ध करवा रही है. आगामी यात्रा के लिए होटल्स में बड़ी संख्या में बुकिंग़ हो गई है.

19 अप्रैल से शुरू हो रहे गंगोत्री धाम ओर यमनोत्री धाम के कपाट खुल रहे हैं

उल्लेखनीय है 19 अप्रैल से शुरू हो रहे गंगोत्री धाम ओर यमनोत्री धाम के कपाट खुल रहे है. 17 अप्रैल से शुरू हुए ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए ऋषिकुल मैदान में बनाए गए रजिस्ट्रेशन स्थल पर जिला प्रशासन द्वारा पूरी तैयारी कर ली गई है. मौके पर वॉलेंटियर्स, पुलिस बल, फायर विभाग और प्रशासन का अमला मौजूद है, सामान्य दिन, वीकएंड और पर्व के लिए भी पूरी व्यवस्था की गई है. 

ऋषिकेश में पहले दिन 100 यात्रियों ने कराया ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन

ऋषिकेश जिले में भी आज चार धाम यात्रा के ऑफलाइन रजिस्ट्रेश शुरू हुआ, जहां सुबह-सुबह ही 100 से अधिक रजिस्ट्रेशन दर्ज हो गए. ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन कराने वालों में ज्यादातर तीर्थ यात्री मध्य प्रदेश के थे. रजिस्ट्रेशन के साथ ही तीर्थ यात्रा के लिए निकल पड़े. ऋषिकेश में रजिस्ट्रेशन के लिए कुल 34 काउंटर तैयार किए गए हैं, जिसमें से चार धाम यात्रा ट्रांजिट कैंप में 24 और ISBT में 6 और गुरुद्वारा में 4 काउंटर शामिल है.


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सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर सरकार का यू-टर्न: फैसले को बताया गलत

सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने मंगलवार को केरलम के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को एंट्री देने का आदेश जारी रहे या नहीं इस पर पहले दिन की सुनवाई की।

केंद्र ने कहा- सबरीमाला मामले में गलत फैसला दिया गया था। उसे गलत कानून घोषित किया जाना चाहिए। मासिक धर्म आयु की महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक बरकरार रखी जाए। धार्मिक आस्था के मामले में अदालत को दखल नहीं करना चाहिए।

सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा इस मामले में 'अनुच्छेद 17' दलील पर किस तरह पेश किया जाए, यह मेरी समझ से बाहर है। एक महिला होने के नाते मैं यह कहना चाहूंगी कि ऐसा नहीं हो सकता कि हर महीने 3 दिन तक तो महिला को 'अछूत' माना जाए और चौथे दिन अचानक कोई 'अछूतपन' न रह जाए।

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अगर कोई सामाजिक बुराई है, जिसे धार्मिक प्रथा का नाम दे दिया गया हो तो अदालत उनके बीच फर्क कर सकती है कि वह एक सामाजिक बुराई है या कोई अनिवार्य धार्मिक प्रथा है।

इस पर केंद्र ने कहा कि संवैधानिक दृष्टि से इसका जवाब यह होगा कि इसका समाधान अनुच्छेद 25(2)(b) में है, यानी संसद इस पर कानून बना सकती है।

दरअसल, धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव के मुद्दे पर जारी इस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट सबरीमाला के अलावा मस्जिदों में महिलाओं की एंट्री, दाऊदी बोहरा समुदाय में महिला का खतना और दूसरे धर्म में शादी करने वाली पारसी महिलाओं को धार्मिक स्थलों में जाने का अधिकार मिले या नहीं, कोर्ट इस पर भी फैसला करेगा।

सुप्रीम कोर्ट में 50 से ज्यादा रिव्यू पिटीशन

धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव से जुड़े ये सवाल पिछले 26 साल से देश की अलग-अलग अदालतों में पेंडिंग हैं। सुप्रीम कोर्ट में आज से 22 अप्रैल तक 50 से ज्यादा याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई होगी।

सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशनरों और उन्हें सपोर्ट करने वाले 7 अप्रैल से 9 अप्रैल तक, जबकि विरोध करने वाले 14 अप्रैल से 16 अप्रैल तक दलीलें दे सकेंगे।

9 जजों की बेंच के सामने सुनवाई के 5 मुद्दे

1. सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश: 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश का अधिकार दिया था। अब बड़ी पीठ तय करेगी कि यह फैसला सही था या नहीं। इस फैसले के खिलाफ मंदिर के पुजारी और कुछ संस्थाओं ने पुनर्विचार याचिकाएं दायर की हैं।

2. दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं का खतना: दाऊदी बोहरा समुदाय में महिला खतना के मुद्दे पर 2017 में एडवोकेट सुनीता तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट यह तय करेगा कि क्या यह प्रथा मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है?

3. मस्जिदों में महिलाओं का प्रवेश: यास्मीन जुबैर अहमद पीरजादा नाम की महिला ने 2016 में मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट तय करेगा कि क्या मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोका जा सकता है?

4. पारसी महिलाओं का अग्निमंदिर में प्रवेश: 2012 में पारसी महिला गुलरुख एम गुप्ता ने हिंदू व्यक्ति से शादी के बाद अग्नि मंदिर में प्रवेश से रोके जाने के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है, जो तय करेगा कि क्या गैर-पारसी से शादी करने पर पारसी महिला को मंदिर में प्रवेश से रोका जा सकता है।

5. मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े लैंगिक भेदभाव के प्रश्न: धार्मिक गतिविधियों में जेंडर के आधार पर भेदभाव को क्या मौलिक अधिकार का हनन माना जा सकता है?


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हनुमान जयंती पर शोभायात्रा को लेकर हाई अलर्ट, उत्तम नगर में भारी पुलिस फोर्स तैनात; चप्पे-चप्पे पर कड़ा पहरा

राजधानी दिल्ली के जहांगीरपुरी में कुछ ही समय में हनुमान जयंती के अवसर पर शोभायात्रा निकालने वाली है। इसी के मद्देनजर जहांगीरपुरी और उत्तम नगर में पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम कर रखे हैं।

बता दें कि उत्तम नगर में बीते 4 मार्च को एक 26 वर्षीय युवक की हत्या कर दी गई थी। होली पर हुए इस हत्याकांड लेकर तभी से इलाके में तनाव जैसा माहौल बना हुआ है। इसी के चलते पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।

शोभायात्रा के निकलने से पहले ही जहांगीरपुरी में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पूरे इलाके में चप्पे-चप्पे पर पुलिस पहरा है।

कॉलोनी के निवासियों ने इस तनावपूर्ण स्थिति के लिए बाहरी तत्वों को जिम्मेदार ठहराया है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि यहां रहने वाले लोग आपसी सद्भाव के साथ रहना चाहते हैं, लेकिन बाहर से आए कुछ लोग भड़काऊ बयानबाजी कर माहौल को जानबूझकर तनावपूर्ण बना रहे हैं। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे बाहरी लोगों पर नकेल कसी जाए जो शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं।

हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई

घटना के बाद उपद्रव की आशंका को देखते हुए पुलिस ने लगभग 100 लोगों को हिरासत में लिया था। हालिया जानकारी के अनुसार, पुलिस ने इन लोगों को सीधे रिहा करने के बजाय रणनीति के तहत नरेला, जाफरपुर और बवाना जैसे दूरदराज के इलाकों में ले जाकर शाम के समय छोड़ दिया। इस कदम को पुलिस की एक एहतियाती कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है ताकि मुख्य प्रभावित क्षेत्र में भीड़ जमा न हो सके।


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शीतला माता मंदिर में भगदड़, 9 श्रद्धालुओं की जान गई

नालंदा जिले में मंगलवार सुबह शीतला अष्टमी के अवसर पर शीतला माता मंदिर में भीषण भगदड़ मच गई, जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 8 महिलाएं शामिल हैं, जिनकी भीड़ में दबने से मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक पुरुष ने इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया। 

बाकी घायलों को इलाज के लिए मॉडल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे (Nalanda Stampede) के बाद मंदिर परिसर और अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल रहा।

प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मंदिर और मेला को बंद करा दिया है तथा स्थिति को नियंत्रण में लाने के प्रयास जारी हैं। इस हादसे को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की ओर मृतकों के परिजनों के लिए कुल 8 लाख रुपये मुआवजे का एलान किया है। वहीं, घायलों के लिए केंद्र सरकार ने 50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की। जबकि राज्य सरकार ने घायलों का पूरा इलाज कराने की घोषणा की है। 

एक-दूसरे के ऊपर गिर गए श्रद्धालु

घटना उस समय हुई जब चैत्र माह के आखिरी मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे थे। मौके पर मेला भी लगा था, जिससे भीड़ और बढ़ गई थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ को नियंत्रित करने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। दर्शन की जल्दी में धक्का-मुक्की शुरू हो गई और अफरातफरी के बीच कई लोग भीड़ में दब गए।

 हादसे में कई श्रद्धालु घायल भी हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद प्रशासन ने मंदिर और मेला दोनों को बंद करवा दिया है।

दो मृतकों की हुई पहचान

मृतकों में से अब तक दो की पहचान हुई है। सकुन्त बिहार निवासी दिनेश रजक की पत्नी रीता देवी (50) और नूरसराय के मथुरापुर निवासी कमलेश प्रसाद की पत्नी रेखा देवी (45)। अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

रेखा देवी के पुत्र ने बताया कि उनकी मां मेला देखने गई थीं। “हजारों की भीड़ थी। सूचना मिलने पर हम पहुंचे और अस्पताल लाए, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।”

भीड़ के कारण मची भगदड़

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शीतलाष्टमी के अवसर पर सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। मंगला मेला के कारण भीड़ और बढ़ गई थी। इसी दौरान अचानक अफरा-तफरी मच गई और लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे, जिससे भगदड़ की स्थिति बन गई।

मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री ने किया मुआवजे का एलान

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शीतला मंदिर हादसे पर शोक जताया और मृतकों के लिए मुआवजे की घोषणा की। मृतकों को राज्य आपदा प्रबंधन विभाग से 4 लाख रुपये और मुख्यमंत्री राहत कोष से 2 लाख रुपये (कुल 6 लाख रुपये प्रति व्यक्ति) की सहायता राशि देने की घोषणा की है।

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर शोक जताया और केंद्र सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों के लिए 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का एलान किया है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद है। उन्होंने घटना पर दुख जताया और घायलों के जल्द स्वस्थ्य होने की कामना की है। इस तरह केंद्र और राज्य को मिलाकर मृतकों के लिए कुल 8 लाख रुपये और घायलों के लिए 50 रुपये मुआवजे की घोषणा की है  

हर साल उमड़ती है भारी भीड़

मघड़ा स्थित यह मंदिर बिहारशरीफ से करीब 5 किलोमीटर दूर है। शीतला अष्टमी पर यहां विशेष पूजा होती है। परंपरा के अनुसार इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता और एक दिन पहले बना ठंडा भोजन माता को भोग लगाया जाता है। इसी कारण हर वर्ष यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

लापरवाही पर उठे सवाल

हादसे के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा बल और भीड़ नियंत्रण के इंतजाम नहीं किए गए थे।

बताया जा रहा है कि नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति के कार्यक्रम को लेकर जिले के अधिकांश पुलिस बल की तैनाती अन्य जगहों पर थी।

जांच में जुटा प्रशासन

प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


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धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में सार्वजनिक अवकाश की मांग शामिल नहीं', सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक अवसर पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की मांग पर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिले धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार में किसी धार्मिक अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग करने का अधिकार शामिल नहीं है। सार्वजनिक अवकाश घोषित करना सरकार का नीतिगत निर्णय है।

कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि विकासशील राष्ट्र के तौर पर भारत को उत्पादकता और काम की निरंतरता को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने गुरु गोविंद सिंह की जयंती (प्रकाश पर्व) को पूरे देश में सार्वजनिक अवकाश (राजपत्रित अवकाश) घोषित करने की मांग खारिज कर दी।

इतना ही नहीं शीर्ष अदालत ने कहा कि सिख धर्म के सिद्धांत स्मरण, ईमानदार श्रम और नि:स्वार्थ सेवा पर विशेष बल देते हैं। गुरु गोविंद सिंह जी का जीवन साहस, अनुशासन और कर्तव्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का उदाहरण है। गुरु गोविंद सिंह जी के प्रति अगाध सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करते हुए कोर्ट ने कहा कि उनका जीवन न्याय और सांसारिक कर्तव्यों के निर्वहन के लिए एक अथक संघर्ष था।

इस परिप्रेक्ष्य में, उनकी विरासत का सम्मान करने का सबसे उत्तम तरीका शायद यह है कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन किया जाए, न कि केवल श्रद्धा की मांग करके सम्मान का कोई प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया जाए।

कोर्ट ने खारिज की याचिका

ये फैसला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने ऑल इंडिया शिरोमणि सिंह सभा की याचिका याचिका खारिज करते हुए दिया। कोर्ट ने कहा कि रिट याचिका के पीछे की भावना सम्माननीय है परंतु यह अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल रिट में न्यायिक हस्तक्षेप का न्यायोचित आधार नहीं बनती। याचिका में दसवें सिखगुरु, गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व को पूरे देश में राजपत्रित अवकाश घोषित करने की मांग की गई थी।

सार्वजनिक अवकाश घोषित करना कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में- कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक अवकाश घोषित करना पूरी तरह से कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसमें न्यायालय का हस्तक्षेप उचित नहीं है। पीठ ने अनुच्छेद 25 में मिली धार्मिक स्वतंत्रता की दलील ठुकराते हुए कहा कि जहां एक ओर धर्म की स्वतंत्रता हर व्यक्ति को अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने का अधिकार देती है, वहीं दूसरी ओर यह किसी धार्मिक अवसर को पूरे देश में अनिवार्य सार्वजनिक अवकाश के रूप में राज्य से मान्यता दिलाने के अधिकार तक विस्तारित नहीं होती।

कोर्ट ने कहा कि भारत की संघीय संरचना राज्यों को भिन्न निर्णय लेने की अनुमति देती है। राज्यों द्वारा पेश सामग्री ये दर्शाती है कि सार्वजनिक अवकाशों का निर्धारण स्थानीय आवश्यकताओं और सामाजिक सांस्कृतिक कारकों पर आधारित होता है। कोर्ट ने कहा कि ये काम कार्यपालिका के विवेक पर छोड़ना उचित है। अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) तर्कसंगत भिन्नता को स्वीकारता है।

भिन्नता को भेद भाव नहीं माना जा सकता- कोर्ट

कोर्ट ने यह भी माना कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में पहले से ही अनेक धार्मिक अवसरों पर अवकाश दिए जाते हैं। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय परिस्थितियों और सांस्कृतिक आवश्यकताओं के अनुसार छुट्टियां निर्धारित की जाती हैं, जो संघीय ढांचे का हिस्सा है। इसलिए इसमें भिन्नता को भेद भाव नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि मांगी गई राहत देने से अलग-अलग समूहों से इसी तरह की मांगों की बाढ़ आ सकती है। नतीजन सार्वजनिक अवकाशों का अव्यवहारिक विस्तार होगा और शासन व प्रशासनिक कामकाज पर बुरा असर पड़ेगा।


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Jagannath Temple में 48 साल बाद रत्नों की गिनती शुरू

Jagannath Temple के रत्न भंडार में रखे खजाने की गिनती और सूची बनाने की प्रक्रिया 48 साल बाद शुरू हो गई है। यह ‘रत्न भंडार’ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के कीमती आभूषणों का भंडार है। मंदिर प्रशासन के अनुसार यह कार्य तय शुभ मुहूर्त (दोपहर 12:09 से 1:45 बजे के बीच) में शुरू किया गया और इसमें केवल अधिकृत लोगों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई।

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मंदिर की दैनिक पूजा-पाठ पर कोई असर नहीं पड़ेगा। श्रद्धालु बाहरी बैरिकेड से दर्शन कर सकेंगे, जबकि अंदरूनी हिस्से में फिलहाल प्रवेश बंद रखा गया है। तय नियमों के अनुसार सबसे पहले रोजाना उपयोग होने वाले गहनों की गिनती होगी, इसके बाद बाहरी कक्ष और अंत में भीतरी कक्ष को खोला जाएगा।

इससे पहले 1978 में हुई गिनती में बड़ी मात्रा में सोना, चांदी और रत्न दर्ज किए गए थे। इस बार आधुनिक तकनीक की मदद से हर वस्तु की पहचान की जा रही है और उसकी डिजिटल फोटो भी ली जा रही है। सोने, चांदी और अन्य वस्तुओं को अलग-अलग रंग के कपड़ों में लपेटकर विशेष बक्सों में सुरक्षित रखा जा रहा है। इस प्रक्रिया में मंदिर सेवक, सरकारी बैंक अधिकारी, रत्न विशेषज्ञ और Reserve Bank of India के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।

सुरक्षा के लिहाज से सख्त इंतजाम किए गए हैं। मजिस्ट्रेट रोजाना रत्न भंडार की चाबी लेकर आएंगे और काम खत्म होने के बाद उसी दिन वापस जमा करेंगे। पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी की जा रही है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

गौरतलब है कि 2018 में रत्न भंडार की चाबी गुम होने के कारण इसे खोला नहीं जा सका था, जिसके बाद काफी विवाद हुआ था। बाद में जांच बैठाई गई, लेकिन चाबी का कोई स्पष्ट पता नहीं चल पाया। हाल ही में 2024 में खजाने को बाहर निकालने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी, जिसके बाद अब विस्तृत गिनती और दस्तावेजीकरण का काम किया जा रहा है।


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