महाकाल मंदिर में VIP दर्शन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन पर रोक लगाने की लंबे समय से मांग हो रही है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि किसी भी मंदिर में वीआईपी दर्शन होंगे या नहीं, इसका फैसला करने का अधिकार अदालत को नहीं है। इस तरह की याचिका को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

3 जजों की बेंच ने की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने ये फैसला सुनाया है। जस्टिस महादेवन और जस्टिस जॉयमाला बागची भी इस बेंच का हिस्सा थे। याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी ने इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी याचिका दायर करते हुए वीआपी दर्शन पर रोक लगाने की मांग की थी। मगर, हाईकोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

VIP दर्शन पर उठाए सवाल

याचिकाकर्ता का कहना था कि महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी लोगों को आसानी से एंट्री मिल जाती है। वो महाकाल शिवलिंग पर जल चढ़ाकर पूजा-पाठ भी करते हैं, लेकिन आम जनता को इसका अधिकार नहीं है। उन्हें दूर से ही दर्शन करके वापस लौटना पड़ता है, जो पूरी तरह से गलत है।

कोर्ट में याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कहा कि गर्भगृह में सभी के लिए नियम समान होने चाहिए। उन्होंने कहा, "ये अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। गर्भगृह में जाने के नियम सभी के लिए बराबर होने चाहिए। वीआईपी दर्शन के नाम पर नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता है। अगर कोई वीआईपी व्यक्ति कलेक्टर के आदेश में गर्भगृह में जाता है, तो आम जनता को भी ये अधिकार मिलना चाहिए।"

CJI ने दी प्रतिक्रिया

CJI सूर्यकांत ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, "गर्भगृह में किसे जाना चाहिए और किसे नहीं, इसका फैसला अदालत नहीं कर सकती है। हम न्याय की बात कर रहे हैं। हो सकता है ये न्याय का मामला हो, लेकिन इसपर जिम्मेदार लोग ही फैसला ले सकते हैं, न कि अदालत। अगर अदालत ये तय करने लगे कि मंदिर में कौन जाएगा और कौन नहीं, तो कोर्ट का भार बहुत बढ़ जाएगा।"

CJI सूर्यकांत ने कहा-

अगर अनुच्छे 14 की बात हो रही है, तो कल अनुच्छेद 19 की भी मांग होगी। अभी आप गर्भगृह में जाने का अधिकार मांग रहे हैं, कल कहेंगे कि मुझे मंत्र पढ़ना है, क्योंकि अनुच्छेद 19 के तहत हमारे पास बोलने का अधिकार है।

याचिका में क्या की गई मांग?

एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने साफ किया है कि उनकी याचिका भेदभाव पर आधारित है। गर्भगृह में या तो सबकी एंट्री बंद कर देनी चाहिए, या सभी को गर्भगृह में जाने की इजाजत होनी चाहिए। कुछ चुनिंदा लोगों को खास तवज्जो देना गलत है।


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रिकॉर्ड तोड़ भीड़! माघ मेले में 54 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, ‘हर-हर गंगे’ से गूंजी संगम नगरी

संगम की रेती पर आस्था का महासैलाब उमड़ पड़ा है। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद लाखों श्रद्धालु ‘हर-हर गंगे’ के जयघोष के साथ त्रिवेणी संगम में मकर संक्रांति का पुण्य स्नान कर रहे हैं। प्रशासन के अनुमान के मुताबिक, आज संगम तट पर 1.5 से 2 करोड़ श्रद्धालुओं के डुबकी लगाने की संभावना है।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चप्पे-चप्पे पर एटीएस कमांडो तैनात हैं और एआई आधारित कैमरों से पूरे मेला क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है। वहीं, कल्पवासियों की तपस्या और हठयोगियों की साधना ने मेले के वातावरण को अलौकिक बना दिया है। मकर संक्रांति के इस पावन अवसर पर संगम नगरी में श्रद्धा, शक्ति और सुरक्षा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।


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केदारनाथ मंदिर से व्हाइट हाउस तक… जम्मू में दिखेंगे 14 विश्वप्रसिद्ध स्मारक

फ्रांस का एफिल टावर, मिस्र का ग्रेट स्फिंक्स ऑफ गीजा, अमेरिका का व्हाइट हाउस और इटली का कोलोसियम देखने के लिए अब विदेश जाने या भारी खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर, आगरा के ताज महल और गुजरात के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सहित दुनिया के 14 प्रसिद्ध स्मारक अब जम्मू में ही देखने को मिलेंगे।

इसके लिए लोगों को ज्यादा इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा। जम्मू के भगवती नगर में वंडर पार्क का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। यहां सरदार वल्लभभाई पटेल की 40 फीट ऊंची प्रतिमा सहित कई स्मारकों का आधे से अधिक निर्माण पूरा हो चुका है। पार्क के मार्च–अप्रैल तक बनकर तैयार होने की उम्मीद है।

यह वंडर पार्क श्री अमरनाथ यात्रा के आधार शिविर से मात्र 400 मीटर की दूरी पर बनाया जा रहा है। इसका निर्माण जम्मू स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत दिल्ली की एक कंपनी द्वारा किया जा रहा है। गुजरात और महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से आए कारीगर निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं। स्थानीय विधायक अरविंद गुप्ता ने बताया कि पार्क के निर्माण पर करीब नौ करोड़ रुपये की लागत आएगी और इसे 31 मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

पार्क में जिन प्रमुख स्मारकों का निर्माण किया जा रहा है, उनमें ग्रेट स्फिंक्स ऑफ गीजा (मिस्र), अंगकोर वाट मंदिर (कंबोडिया), एफिल टावर (फ्रांस), कोलोसियम (इटली), व्हाइट हाउस (यूएसए), स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (गुजरात), ताज महल (उत्तर प्रदेश), केदारनाथ मंदिर (उत्तराखंड), अखनूर किला (जम्मू), क्रीमची मंदिर (ऊधमपुर) और रियासी जिले का रेलवे आर्च ब्रिज शामिल हैं।

देश-दुनिया के प्रसिद्ध स्मारकों के साथ इस पार्क में जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की भी झलक देखने को मिलेगी। यहां ऊधमपुर का क्रीमची मंदिर, अखनूर किला और रियासी में बने विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च ब्रिज का स्मारक भी आकर्षण का केंद्र होगा।


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वैष्णो देवी कॉलेज विवाद: मान्यता रद्द, अब श्राइन बोर्ड के संविधान संशोधन पर जोर

श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने एमबीबीएस सीटों को लेकर पिछले 45 दिनों से चल रहे आंदोलन की सफलता पर सभी समर्थकों का आभार जताया है। साथ ही समिति ने साफ किया कि उनका संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है और जम्मू के साथ भेदभाव के खिलाफ उनकी आवाज आगे भी जारी रहेगी।

समिति ने कहा कि उनकी अगली लड़ाई अब श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के संविधान में संशोधन को लेकर होगी, ताकि भक्तों द्वारा चढ़ाई गई राशि का किसी भी तरह से दुरुपयोग न हो और इसका उपयोग केवल सनातन धर्म से जुड़े कार्यों में ही किया जाए।

श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीटों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा कॉलेज की मान्यता रद्द किए जाने के साथ ही समाप्त हो गया है। मंगलवार रात आए इस फैसले के बाद बुधवार को समिति के सदस्यों ने जम्मू में विजय रैली निकालकर अपनी खुशी जाहिर की।

हिंदू संगठनों ने मनाई जीत

समिति से जुड़े युवा राजपूत सभा, बजरंग दल सहित अन्य हिंदू संगठनों ने इसे जम्मू की जीत बताते हुए जश्न मनाया। इससे पहले समिति के संयोजक सेवानिवृत्त कर्नल सुखवीर सिंह मनकोटिया के नेतृत्व में कोर ग्रुप ने गीता भवन, परेड जम्मू में पत्रकार वार्ता कर आंदोलन की सफलता और आगे की रणनीति पर विस्तार से जानकारी दी।

मनकोटिया ने कहा कि 45 दिनों तक चले इस लंबे आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने में समाज के हर वर्ग की एकजुटता निर्णायक रही। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि श्राइन बोर्ड की यूनिवर्सिटी में पाई गई अनियमितताओं के चलते एनएमसी द्वारा मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द किया जाना न्याय की जीत है। मनकोटिया ने कहा कि देश में एक ऐसी संवेदनशील सरकार है, जो करोड़ों भक्तों की आस्था और जनभावनाओं का सम्मान करना जानती है।

श्राइन बोर्ड के संविधान में संशोधन की मांग

इस दौरान मनकोटिया ने देशभर के सनातनियों और सभी समर्थकों का दिल से धन्यवाद किया। उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से अपील की कि वे श्राइन बोर्ड को स्पष्ट निर्देश दें, ताकि भविष्य में संस्थान के भीतर सनातन धर्म की परंपराओं और संस्कृति का पूर्ण सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।

समिति ने मांग की कि श्राइन बोर्ड के संविधान में आवश्यक संशोधन को लेकर उपराज्यपाल जल्द फैसला लें। समिति ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि धर्म और मर्यादा की रक्षा करना है और इसके लिए प्रशासन को हर संभव सहयोग देने को वह हमेशा तैयार है।


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उत्तराखंड की परंपरा: गंगा घाटों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक, जुर्माना ₹10

हरिद्वार व ऋषिकेश को पवित्र सनातन नगरी घोषित कर हर की पैड़ी समेत सभी गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित करने को लेकर सरकार ने मंथन तेज कर दिया है।

हरिद्वार में धार्मिक मर्यादा का पालन कराने की पुरानी नियमावली के अध्ययन में सामने आया है कि यह पाबंदी नयी नहीं है। हरिद्वार नगर पालिका उपविधि (सन् 1953) में यह लिखा है सरकारी कार्य से आने वाले अधिकारियों को छोड़कर अहिंदुओं को हर की पैड़ी क्षेत्र व कुशावर्त घाट में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

नगर पालिका उपविधि में उल्लेख है कि प्रांतीय म्युनिसिपैलिटी एक्ट 1916 की धारा 299(1) के अंतर्गत नियम तोड़ने पर दस रुपये तक का अर्थदंड भी लगाया जाएगा।

यदि बार-बार नियम का उल्लंघन जारी रहा तो पहली बार के बाद प्रतिदिन पांच रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा। नगर पालिका उपविधि के आधार पर ही श्री गंगा सभा समेत अन्य संगठनों की मांग है कि यह व्यवस्था हरिद्वार व ऋषिकेश के सभी गंगा घाटों पर नए सिरे से लागू की जाए।

ब्रिटिश शासन से हुआ समझौता भी आधार

सन 1916 में पं. मदन मोहन मालवीय और ब्रिटिश शासन के मध्य हुए समझौते को भी तीर्थ नगरी की पवित्रता बनाए रखने का आधार बनाया जा रहा है।

यह कहा जा रहा है कि अंग्रेजी हुकूमत के दौर में भी गैर-हिंदुओं के घाटों पर प्रवेश पाबंदी के नियम तय किए गए थे। अब इन नियमों का पालन कराने के लिए नयी व्यवस्था बनाई जाए।

तब सीमित थे घाट, उन्हीं का उल्लेख

नगर पालिका उपविधि (1953) में हरिद्वार के पांच से सात गंगाघाटों पर अहिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध समेत अन्य बाध्यताओं का प्रविधान किया गया है, अब सभी 105 घाटों में प्रवेश पर इस तरह के प्रतिबंध की मांग की जा रही है।

मांग करने वाले संगठनों का कहना है कि उस समय पांच से सात गंगा घाट ही थे, लेकिन अब घाट बढ़कर 105 हो चुके हैं। इसलिए सभी पर एक समान व्यवस्था लागू होनी चाहिए।

मांस विक्रेता को दुकान पर नाम-पता लिखना होगा

हर की पैड़ी, अन्य गंगा घाटों, पार्किंग स्थलों व मेला भूमि में शराब व मांस परोसने की घटनाओं पर भी श्री गंगा सभा ने चिंता जताई है। मांस बिक्री को लेकर भी नगर पालिका उपविधि (1953) में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि ज्वालापुर क्षेत्र के अलावा किसी अन्य स्थान पर मांस बेचने का लाइसेंस मंजूर नहीं होगा। मांस विक्रेता को अपनी दुकान पर पूरा नाम, पता और बेचे जा रहे मांस के प्रकार का स्पष्ट उल्लेख करना होगा।



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पौष पूर्णिमा पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, माघ मेला के पहले दिन दिखा महाकुंभ सा नजारा

पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर्व के साथ माघ मेले का शुभारंभ हो गया है। ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु संगम सहित सभी घाटों पर स्नान के लिए उमड़ पड़े। घाटों पर हर-हर गंगे के जयघोष गूंजते रहे और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। श्रद्धालुओं और कल्पवासियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

श्रद्धालु स्नान के साथ ध्यान, पूजन-अर्चन कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मां गंगा से प्रार्थना कर रहे हैं। भक्ति भाव से सराबोर इस वातावरण में पूरे दिन श्रद्धा का यह क्रम जारी रहने की उम्मीद है। अब तक हजारों श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। वहीं जिलाधिकारी मनीष वर्मा के अनुसार सुबह छह बजे तक करीब तीन लाख श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके थे।

माघ मेले में पांच एसडीएम की तैनाती

महाकुंभ में तैनात रहे पांच पीसीएस अधिकारियों को माघ मेला क्षेत्र में तैनात किया गया है। शासन स्तर से शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी कर सूची भी जारी कर दी गई। ये सभी अधिकारी शनिवार से मेला क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे।

इन अधिकारियों में रामपुर में एसडीएम पद पर तैनात आनंद कुमार कनौजिया शामिल हैं, जो महाकुंभ में सेक्टर आठ के प्रभारी थे। चंदौली में तैनात एसडीएम विजय त्रिवेदी को भी माघ मेला क्षेत्र भेजा गया है, वे महाकुंभ में अखाड़ा क्षेत्र सेक्टर-19 के मजिस्ट्रेट थे। इसके अलावा महाकुंभ में सेवा दे चुके एसडीएम अमित त्रिपाठी, लाल सिंह यादव और रमेश पांडेय को भी माघ मेला की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


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नए साल पर आस्था के रंग में रंगा दिल्ली-एनसीआर, मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

नव वर्ष 2026 की शुरुआत दिल्ली-एनसीआर में आस्था और विश्वास के माहौल के साथ हुई। साल के पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर पहुंचे और ईश्वर के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। सुबह से ही लोग परिवार के साथ पूजा-अर्चना में जुटे नजर आए, जिससे धार्मिक स्थलों पर विशेष रौनक देखने को मिली।

ठंड और हल्के कोहरे के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद के प्रमुख मंदिरों में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। यह फोटो स्टोरी नए साल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में देखने को मिली उसी आस्था, सकारात्मकता और श्रद्धा को दर्शाती है, जिसके साथ लोगों ने नए वर्ष का स्वागत किया।

झंडेवाला देवी मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

नए साल के पहले दिन दिल्ली के प्रसिद्ध झंडेवाला देवी मंदिर में श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने परिवार के साथ दर्शन कर नए वर्ष के लिए सुख, शांति और खुशहाली की कामना की। भक्ति और उल्लास से भरे इन पलों ने नए साल की शुरुआत को खास बना दिया।

फरीदाबाद में भक्तों ने की सुख-समृद्धि की कामना

फरीदाबाद में भी नए साल के पहले दिन धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। सिद्ध पीठ श्री हनुमान मंदिर में भक्तों ने शिवलिंग पर जलाभिषेक कर नए वर्ष के लिए मंगलकामनाएं कीं। मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के दौरान शांति और सकारात्मकता का वातावरण बना रहा।

नोएडा में दिखा आस्था और श्रद्धा का रंग

नए साल के अवसर पर नोएडा में भी आस्था का विशेष माहौल देखने को मिला। सेक्टर-20 स्थित हनुमान मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। लोगों ने भगवान शिव की पूजा कर परिवार और समाज के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। ठंड के बावजूद मंदिर परिसर में उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा साफ महसूस की गई।

लाल किले पर नए साल का जश्न

नए साल के मौके पर दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर भी उत्साह और उमंग देखने को मिली। बड़ी संख्या में लोग परिवार और दोस्तों के साथ यहां पहुंचे और नए साल के पहले दिन को यादगार बनाया। हल्के कोहरे और ठंड के बीच लाल किले के आसपास उमड़ी भीड़ ने जश्न के माहौल को और खास बना दिया।

अन्य धार्मिक स्थलों पर भी रही भीड़

नव वर्ष के अवसर पर दिल्ली के कल्काजी मंदिर, अलीपुर स्थित खाटू श्याम दिल्ली धाम और प्रीत विहार के गुफा वाले शिव मंदिर में सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। वहीं, लोटस टेंपल में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने के कारण कुछ समय के लिए प्रवेश गेट बंद करने पड़े। लोगों ने श्रद्धा और विश्वास के साथ नए साल की शुरुआत करते हुए सुख, शांति और खुशहाली की कामना की।.


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नए साल की शुरुआत आस्था के साथ, कैंची धाम-जागेश्वर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़

साल 2026 के पहले दिन उत्तराखंड के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। लोगों ने भगवान के आशीर्वाद के साथ नए साल की शुरुआत की। कैंची धाम और जागेश्वर धाम सहित प्रदेश के विभिन्न प्रमुख मंदिरों में दर्शन के लिए सुबह से ही लंबी कतारें लगी रहीं। ठंड के बावजूद स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ बाहर से आए पर्यटक भी बड़ी संख्या में मंदिरों में पहुंचे।

जागेश्वर धाम समेत धार्मिक स्थलों पर उमड़ा आस्था का सैलाब

साल 2025 को विदाई देने के बाद नए साल के पहले दिन जागेश्वर धाम और गोलू मंदिर चितई में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। नंदा देवी, पातालदेवी समेत मुख्यालय के अन्य मंदिरों में भी सुबह से दर्शन का सिलसिला जारी रहा। पर्यटन स्थलों पर भी चहल-पहल देखने को मिली। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र धार्मिक स्थलों पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

कैंची धाम में ठंड के बीच श्रद्धालुओं की कतारें

नए साल के पहले दिन कैंची धाम में भी भक्तों की लंबी लाइन देखने को मिली। स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आए श्रद्धालुओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर नए साल में सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।

हल्द्वानी और आसपास के मंदिरों में भीड़

नववर्ष के अवसर पर हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों के प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। कालाढूंगी चौराहे स्थित कालू सिद्ध मंदिर, रानीबाग के शीतला देवी मंदिर, गौलापार के कालीचौड़ और सूर्यादेवी मंदिर में सुबह से भक्त पहुंचते रहे। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना, हवन और आरती में भाग लिया, जिससे मंदिर परिसर जयकारों से भक्तिमय हो उठा। भीड़ को देखते हुए मंदिर समितियों और प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

नैनीताल के नयना देवी मंदिर में नियंत्रित भीड़

नैनीताल में नए साल के पहले दिन नयना देवी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में स्थानीय लोगों और पर्यटकों का आना-जाना लगा रहा। हालांकि इस बार पिछले वर्षों की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या कम रही, जिससे मंदिर परिसर में लंबी कतारें नहीं लगीं। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार सुबह से करीब दो हजार श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। पाषाण देवी मंदिर और हनुमानगढ़ मंदिर में भी भक्तों का आगमन जारी रहा।

रामनगर के गिरिजा देवी मंदिर में उमड़ी भीड़

रामनगर स्थित गिरिजा देवी मंदिर में भी नए साल के पहले दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। रामनगर, काशीपुर, हल्द्वानी, बाजपुर और मुरादाबाद सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कई भक्तों ने कोसी नदी में स्नान के बाद देवी के दर्शन किए। मंदिर और परिसर को फूलों से सजाया गया था, जबकि सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस कर्मी तैनात रहे। भीड़ अधिक होने से प्रसाद विक्रेताओं में भी खासा उत्साह देखने को मिला।


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रामनगरी में CM योगी का बड़ा बयान: ‘पूर्व सरकार ने अयोध्या को लहूलुहान किया’

 साल 2025 के अंतिम दिन अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दूसरी वर्षगांठ मनाई जा रही है। इस मौके पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी रामनगरी पहुंचे हुए हैं।

श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर में 'प्रतिष्ठा द्वादशी' समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व की सरकारों को आड़े हाथों लेते हुए जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों ने अयोध्या के साथ षड़यंत्र करके लहूलुहान किया था।

उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के बाद अयोध्या में रामलला का विराजमान होना और मंदिर का यह भव्य रूप देखकर आनंद और गौरव की अनुभूति कर रहे हैं।

बकौल सीएम, स्वतंत्र होने के अयोध्या ने राम आंदोलन के अनेक पड़ाव देखे हैं। अयोध्या के नाम से एहसास होता है कि जहां कभी युद्ध नहीं हुआ, कोई भी दुश्मन यहां के शौर्य और वैभव के कारण यहां टिक नहीं पाया लेकिन कुछ लोगों ने अपने निहित स्वार्थ से मजहबी जुनून और सत्ता के स्वार्थ में पड़कर अयोध्या को भी उपद्रव और संघर्ष का अड्डा बना दिया था। अब लोग बिना डर के 'जय श्रीराम' कहते हैं, जबकि पहले ऐसा करने पर लाठी मिलती थी।


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संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं का काली सड़क से प्रवेश, त्रिवेणी मार्ग से होगी निकासी

माघ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के सुरक्षित और सुचारु आवागमन को सुनिश्चित करने के साथ-साथ शहरवासियों को जाम जैसी समस्या से बचाने के लिए यातायात पुलिस ने व्यापक योजना तैयार की है। भीड़ प्रबंधन और ट्रैफिक नियंत्रण के लिए विशेष यातायात व्यवस्था लागू की जा रही है।

इस योजना के तहत श्रद्धालुओं को काली सड़क (जवाहरलाल नेहरू मार्ग) के माध्यम से संगम क्षेत्र में प्रवेश कराया जाएगा, जबकि त्रिवेणी मार्ग से उनकी निकासी की जाएगी। इसी यातायात व्यवस्था को लेकर सोमवार को रिजर्व पुलिस लाइंस में पुलिसकर्मियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

यातायात उपनिरीक्षक अवधेश कुमार सिंह ने प्रशिक्षण के दौरान माघ मेले के दौरान लागू किए जाने वाले यातायात नियमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रवेश और निकास मार्गों को अलग-अलग रखने से भीड़ नियंत्रण में मदद मिलेगी और यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहेगी।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान फायर ब्रिगेड की तैयारियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि मेला क्षेत्र में फायर स्टेशन, फायर बाइक और एआई कैमरों की व्यवस्था की गई है, ताकि आग लगने की स्थिति में एक से दो मिनट के भीतर मौके पर पहुंचकर तुरंत काबू पाया जा सके।

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