कश्मीरी गेट: अवैध निर्माण पर चला निगम का हथौड़ा, लेकिन कार्रवाई की 'टाइमिंग' और 'तरीके' पर उठे सवाल!

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता, उपभोक्ता जनघोष: दिल्ली नगर निगम (MCD) के सिटी-एस.पी. जोन (कश्मीरी गेट) में आज अवैध निर्माण के खिलाफ पीला पंजा गरजा। भारी पुलिस बल और निगम कर्मचारियों की मौजूदगी में एक अवैध इमारत को ध्वस्त कर दिया गया। मौके पर मौजूद जूनियर इंजीनियर (JE) वक़ार खान ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में किसी भी अवैध निर्माण को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन इस कार्रवाई ने निगम की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

कार्रवाई में 'पिक एंड चूज' का खेल?

आज जिस बिल्डिंग को जमींदोज किया गया, उसके ध्वस्तीकरण (Demolition) के आदेश 20 नवंबर 2025 को जारी हुए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग के पास वर्ष 2024 और 2025 के 10 से अधिक पुराने ध्वस्तीकरण आदेश पहले से पेंडिंग हैं।

सवाल यह उठता है कि:

    जो आदेश सबसे अंत में आया, उस पर सबसे पहले कार्रवाई क्यों हुई?

    क्या पुराने आदेशों वाली फाइलों पर धूल इसलिए जमी है क्योंकि उन्हें 'विधिक संरक्षण' प्राप्त है?

    क्या यह कार्रवाई केवल 'दिखावे' के लिए है ताकि ऊपरी अधिकारियों और सतर्कता विभाग को शांत रखा जा सके?

JE वक़ार खान की सफाई

मौके पर मौजूद जूनियर इंजीनियर वक़ार खान ने इन सवालों को टालते हुए इसे एक "रूटीन प्रक्रिया" बताया। उन्होंने दावा किया कि निगम की रडार पर सभी अवैध निर्माण हैं और आने वाले दिनों में अन्य संपत्तियों पर भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, पुराने आदेशों पर चुप्पी साधे रखना विभाग की मंशा पर संदेह पैदा करता है।

भ्रष्टाचार या कर्तव्यनिष्ठा?

कश्मीरी गेट जैसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र में अवैध निर्माण का खेल पुराना है। स्थानीय लोगों और आरटीआई कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बिल्डिंग विभाग अक्सर छोटी मछलियों पर जाल डालता है, जबकि 'प्रभावशाली बिल्डरों' की अवैध मंजिलों को अनदेखा कर दिया जाता है। आज की कार्रवाई को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है कि आखिर पुराने 10 आदेशों को दरकिनार कर इसी बिल्डिंग को क्यों चुना गया?

"हमारा काम नियमों का पालन करना है। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी।" > — वक़ार खान, जूनियर इंजीनियर (MCD)


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कश्मीरी गेट: भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ी चार मंजिला इमारत

उपभोक्ता जनघोष: MCD के सिटी-एस.पी. जोन में 'संस्थागत भ्रष्टाचार' का बोलबाला: अवैध निर्माण को 'सेफ पैसेज' देने का आरोप, कमिश्नर से शिकायत

नई दिल्ली | कश्मीरी गेट स्थित लोथियन रोड पर एक विशाल अवैध व्यावसायिक परिसर के निर्माण ने दिल्ली नगर निगम (MCD) के बिल्डिंग विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 'लोकतंत्र फाउंडेशन' की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुश्री सबा मलिक ने निगम आयुक्त और सतर्कता विभाग (Vigilance) को पत्र लिखकर अवर अभियंता (JE) वकार खान और अन्य अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

मुख्य आरोप: नोटिस के बाद भी पूरी हुई बिल्डिंग

सबा मलिक ने अपनी शिकायत में कहा है कि संपत्ति संख्या 2789-2790, लोथियन रोड पर मास्टर प्लान-2021 की धज्जियां उड़ाकर बेसमेंट सहित चार मंजिला अवैध इमारत खड़ी कर दी गई।

दिखावटी कार्रवाई: विभाग ने मई 2025 में 'Show Cause' नोटिस तो जारी किया, लेकिन धारा 344(2) के तहत पुलिस बल का उपयोग कर काम नहीं रुकवाया।

मिलीभगत का संदेह: नोटिस जारी होने के बावजूद निर्माण पूरा होना यह दर्शाता है कि अधिकारियों ने बिल्डर को विधिक संरक्षण (Legal Protection) प्रदान किया।

आर्थिक अपराध: शिकायत में JE और AE के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति की जांच और 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' के तहत FIR दर्ज करने की मांग की गई है।

आम जनता के लिए खतरा

लोकतंत्र फाउंडेशन ने चेतावनी दी है कि अब इस अवैध बिल्डिंग में दुकानें बेची जा रही हैं। यदि इसे तुरंत 'सील' नहीं किया गया, तो भविष्य में खरीदारों की गाढ़ी कमाई डूब सकती है और कानूनी पेचीदगियां बढ़ेंगी।

"यह केवल एक बिल्डिंग का मामला नहीं है, बल्कि पद के दुरुपयोग और वित्तीय जोखिम का है। हमने मांग की है कि उक्त संपत्ति का बिजली-पानी का कनेक्शन काटा जाए और दोषी अधिकारियों पर 'Major Penalty' लगाई जाए।

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अंक ज्योतिष – आपके जन्म की संख्या में छिपे जीवन के राज़

उपभोक्ता जनघोष:  क्या आपने कभी सोचा है कि आपके जन्म की तारीख सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि आपके जीवन की दिशा और स्वभाव की चाबी हो सकती है? यही है अंक ज्योतिष की खूबसूरती।

अंक ज्योतिष (Numerology) एक प्राचीन विज्ञान है, जो मानता है कि हर संख्या एक ऊर्जा रखती है – एक कम्पन, जो हमारे जीवन, व्यक्तित्व और भविष्य को प्रभावित कर सकती है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण होती है आपकी जन्मतिथि। आपकी जन्म की तारीख को जोड़कर निकाला गया मूलांक (Life Path Number) आपके स्वभाव, सोचने के तरीके और जीवन के सफर के कई पहलुओं को बताता है।

कैसे पता करें अपना मूलांक?

मान लीजिए आपकी जन्मतिथि है: 17 जुलाई 1990

तो इसे ऐसे जोड़ते हैं:

1 + 7 + 0 + 7 + 1 + 9 + 9 + 0 = 34

3 + 4 = 7

तो आपका मूलांक हुआ 7

मूलांक और उनका अर्थ (संक्षेप में):

1: जन्मजात लीडर, आत्मविश्वासी, नया करने की सोच

2: भावनात्मक, सहयोगी, शांतिप्रिय

3: रचनात्मक, बोलने में माहिर, खुशमिजाज

4: मेहनती, व्यवस्थित, धरातल से जुड़ा

5: आज़ाद ख्याल, घुमक्कड़, बदलाव पसंद

6: जिम्मेदार, पारिवारिक, प्रेमपूर्ण

7: गहराई से सोचने वाले, रहस्यप्रिय, आध्यात्मिक

8: महत्वाकांक्षी, शक्ति और पैसा आकर्षित करता है

9: सेवाभावी, परोपकारी, दयालु

क्यों करें अंक ज्योतिष को अपनाना?

अक्सर हम खुद को नहीं समझ पाते, या ये नहीं जान पाते कि हमें क्या करना चाहिए, किस दिशा में बढ़ना चाहिए। अंक ज्योतिष हमें खुद को समझने का एक रास्ता देता है – हमारे टैलेंट, कमजोरी, और कर्मों की दिशा तक।

मेरी राय:

मैंने जब खुद अंक ज्योतिष को समझना शुरू किया, तो लगा जैसे कोई मुझे आइना दिखा रहा हो – बिना जज किए, सिर्फ सच्चाई के साथ। आज जब भी कुछ नया शुरू करती हूं, पहले अपने अंकों से सलाह जरूर लेती हूं।

Edit By Priya Singh 

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सी पी एस आर ने किया लेख प्रतियोगिता का आयोजन

उपभोक्ता जनघोष:-  संवाददाता गाजियाबाद: गाजियाबाद के राज नगर एक्सटेंशन में स्थित काउंसिल फॉर पैरानॉर्मल एंड स्पिरिचुअल रिसर्च सोसाइटी में आज लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें सोसाइटी के सभी सदस्यों ने भाग लिया और ज्योतिष, परा विज्ञान, अंक ज्योतिष, हेल्थ जैसे टॉपिक पर अपने अपने लेख लिखे। जिसमें विशाल आमलेकर ( मध्य प्रदेश) ने प्रथम स्थान, मानसी नायडू (गुड़गांव) ने द्वितीय और ऋतिका जैन ( गाजियाबाद) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इन सभी को सोसाइटी के डायरेक्टर वैभव भारद्वाज ने सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया। साथ साथ अन्य सभी भाग लेने वाले सदस्यों को भी सर्टिफिकेट देकर हौसला बढ़ाया। इस अवसर पर सोसाइटी के सभी पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।

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ज्योतिष: विज्ञान या अंधविश्वास?

उपभोक्ता जनघोष: आज के समय में भी जब हम चाँद पर जाने की बात कर रहे हैं, लोग अब भी अपनी ज़िंदगी के फैसले सितारों और ग्रहों की चाल देखकर लेते हैं। ऐसे में एक बड़ा सवाल उठता है — क्या ज्योतिष सच में विज्ञान है या सिर्फ अंधविश्वास?

ज्योतिष क्या है?

ज्योतिष (Astrology) एक प्राचीन विद्या है जिसमें ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति देखकर भविष्य की घटनाओं का अनुमान लगाया जाता है। जन्म कुंडली, राशिफल, ग्रह गोचर जैसे विषय इसी के भाग हैं।

क्यों कुछ लोग इसे विज्ञान मानते हैं?

1. गणनाएं और गणित:

ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति निकालने के लिए खगोलशास्त्र (astronomy) और गणित का उपयोग होता है। कुंडली बनाना और दशा प्रणाली निकालना एक सटीक गणना पर आधारित होता है।

2. अनुभव और प्रैक्टिस:

कई ज्योतिषियों ने वर्षों तक अभ्यास कर कुछ पैटर्न्स पहचाने हैं जो सही साबित होते हैं।

3. मानसिक शांति:

कई लोग मानते हैं कि ज्योतिष से उन्हें दिशा और मानसिक संतुलन मिलता है, खासकर तब जब वे कठिनाइयों में होते हैं।

क्यों कुछ लोग इसे अंधविश्वास कहते हैं?

1. वैज्ञानिक प्रमाण की कमी:

ज्योतिष के दावे किसी भी वैज्ञानिक प्रयोग या प्रमाण पर खरे नहीं उतरते। यह अनुमान और विश्वास पर आधारित होता है।

2. भय फैलाना और लालच:

कुछ नकली ज्योतिषी डर दिखाकर लोगों से पैसा कमाते हैं। इससे ज्योतिष की छवि खराब होती है।

3. सामान्य बातें सब पर लागू:

राशिफल जैसी चीज़ें इतनी सामान्य होती हैं कि किसी भी व्यक्ति पर लागू हो सकती हैं। इससे यह सिर्फ मनोवैज्ञानिक खेल लगता है।

निष्कर्ष

ज्योतिष को न पूरी तरह से विज्ञान कहा जा सकता है, न ही इसे पूरी तरह अंधविश्वास माना जा सकता है। यह एक पारंपरिक विद्या है जो अनुभव, विश्वास और कुछ हद तक गणना पर आधारित है। लेकिन इसका उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए — बिना अंधविश्वास के और बिना किसी डर के।

अगर यह किसी को मानसिक शांति, आत्मविश्वास और दिशा देता है, तो यह उसकी ज़िंदगी का हिस्सा बन सकता है। परंतु किसी भी निर्णय को लेने से पहले तर्क, ज्ञान और समझदारी से काम लेना ज़रूरी है।

Edit by Priya Singh 

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रावण की जन्मभूमि, शिवलिंग की पूजा, मनोकामना होती है पूरी

उत्तर प्रदेश:गौतम बुद्ध नगर (नोएडा):दोस्तों आज हम आपको उस गांव की जानकारी आपसे सााझा करेंगे, जिसका संबंध त्रेतायुग के महा प्रतापी, महा ज्ञानी महापंडित दशानन से है। जी हां हम बात कर दिल्ली से सटे नोएडा के बिसरख गांव की। कहा जाता है इस गांव में स्थित एक मंदिर में स्थापित शिवलिंग त्रेतायुग की है। इस मंदिर में रावण ने भोलेनाथ को बार बार अपना शीश काटकर अर्पित किया। जिसके बाद रावण को  भगवान शिव ने दस सिरों का वरदान दिया था। तब से रावण को  दशानन के नाम से भी जाना जाने लगा। इसी मंदिर में रावण दसों दिशाओं को बांधकर भोलेनाथ का पूजन करता था। सूत्रों के अनुसार कहा ये भी जाता है इस मंदिर में सभी प्रकार की पूजा अर्चना की जाती है। यहां तंत्र मंत्र संबंधित सभी प्रकार की क्रिया की जाती है। यहां पर फाल्गुन ओर श्वावण मास में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले को देखने के लिए लोग दूर दूर से आते है। इस मंदिर में रावण के पिता विश्रवा ऋषि ने ही अष्टभुजी शिवलिंग की स्थापना की थी। नोएडा के बिसरख गांव का उल्लेख शिवपुराण में भी मिलता है। महंत रामदास के अनुसार ये गांव में भगवान राम और रावण की साथ में पूजा करने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है, यहाँ पर रावण ने शिव को अर्पित किए थे अपने शीश, सभी भक्तों की  मनोकामना होती है पूरी,लेकिन इस गांव में रामलीला का आयोजन कभी नहीं किया जाता है। साथ ही इस गांव में रावण का पुतला दहन भी नहीं किया जाता है। आपकों बता दे इस मंदिर में दस शिवलिंग थे। जिसमें एक को छोड़ कर सभी शिवलिंग को अलग अलग दिशा में स्थापित कर दिया था।

मेले में दर्शन को आते दूर दूर से भक्त : 

नोएडा के बिसरख गांव में एक भव्य शिव मंदिर स्थित है। जहां पर फाल्गुन और सावन के महीने में दर्शन-पूजन करने आसपास के इलाकों के साथ-साथ दूर-दूर से भक्त आते हैं। कहा जाता है कि शिव मंदिर में जो अष्टभुजी शिवलिंग विराजमान हैं। जिसकी स्थापना रावण के पिता विश्रवा ऋषि ने कराई थी। इस मंदिर की शिवलिंग की गहराई आज तक रहस्यमई बताई जाती है। कहा जाता है कि बहुत पहले के समय में यहां पर खुदाई भी करवाई गई थी, लेकिन कोई छोर नहीं मिलने पर खुदाई को बंद करवा दिया गया था।

बुद्धिमानी और पराक्रमी का मिला वरदान :

माना जाता है कि रावण भी इसी गांव के अष्टभुजी शिवलिंग की पूजा अर्चना करते थे। इसके बाद रावण की पूजा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने रावण को इसी जगह बुद्धिमान और पराक्रमी होने का वरदान दे दिया था। इस मंदिर के ट्रस्ट के अनुसार, गांव में आज भी खुदाई होने पर कभी-कभी शिवलिंग निकल जाते हैं। इसी वजह से सालों साल गांव में पूजा- अर्चना करने आने भक्तों की भारी भीड़ लगी रहती। इस मंदिर की भव्यता और दिव्यता भी बेमिसाल है।

Story by Vaibhav Bhardwaj 

Photo by Pooja Ranjan

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नोएडा अथॉरिटी करोड़ों अरबों रुपये की अपनी भूमि बचाने में जुटी

उपभोक्ता जनघोष:- नोएडा: सेक्टर104 महर्षि महेश योगी आश्रम की भूमि को अवैध निर्माण कर आवासीय एवं कॉमर्सियल में बेचने की कोशिश की जा रही है लेकिन अब नोएडा अथॉरिटी ने भूमि के बाहर उक्त भूमि अर्जित बताते हुए बोर्ड लगाए है जिससे अवैध निर्माण को रोका जा सके। बता दें कि यह भूमि महर्षि आश्रम का  है जिसको 1987 में जिलाधिकारी महोदय द्वारा जाँच के आधार पर राज्य सरकार के नाम निहित करने का आदेश दिया था। मामला अपर आयुक्त की अदालत में पहुंचा और 2008 में उक्त आदेश को रद्द करते हुए दोबारा मामले की जाँच कर दोबारा सुनने का आदेश पारित कर दिया था सुनवाई के बाद एडीएम कोर्ट ने फैंसला सुनते हुए भूमि को राज्य सरकार को घोषित किया था जिसके बाद मामला आयुक्त महोदय की कोर्ट में चल रहा है और ट्रष्ट द्वारा भूमि को बेचा जा रहा है।

अथॉरिटी की भूमि पर अवैध निर्माण व अतिक्रमण अब नही होगा 

सम्बंधित स्थानीय अवर अभियंता लोकेश कुमार शर्मा ने बताया कि उक्त भूमि जो प्राधिकरण द्वारा अर्जित की गई है, भूमि पर अवैध निर्माण या कब्ज़ा नही होने दिया जायेगा जल्द ही बड़ी कार्रवाही देखने को मिलेगी, हमने उक्त भूमि पर बड़े लगाकर एक बड़ी कार्रवाही का सन्देश दिया है। सवाल यह उठता है कि ट्रष्ट ने भूमि को बेचकर जो धन अर्जित किया है क्या उसपर कोई कार्रवाही हुई है या की जाएगी, गैर क़ानूनी तरीके से भूमि को बेचा गया है जिसमें उस वक़्त के सम्बंधित अधिकारी मोन रहे क्या उनके खिलाफ भी विभागीय जाँच की जाएगी, मामला भ्रष्टाचार एवं पब्लिक हित से भी जुड़ा हुआ है यदि ऐसे में माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल की जाती है तो बड़ा एक्शन देखने को मिल सकता है।  

 यथास्तिथि आदेश की आड़ में भूमि बेचने का बड़ा खेल.....

ट्रष्ट ने स्टे ऑडर की आड़ लेकर भूमि को बेचना शुरू कर दिया और बिना मानचित्र स्वीकृति के आवासीय कामर्शियल मॉल जैसी ऊँची बिल्डिंग बनना शुरू हो गई और अथॉरिटी के सम्बंधित अधिकारी उक्त अवैध निर्माण को रोकते रहे लेकिन बिल्डिंग बनती रहीं। आपको बता दें कि अथॉरिटी स्टे ऑडर को मानते हुए खुद तो रुक गई लेकिन भूमि को ट्रष्ट द्वारा बेचे जाने पर एक सॉफ्ट कार्नर अपनाया जिससे करोड़ों की भूमि का लेनदेन किया गया है उस समय के अधिकारी कागजी कार्रवाही तो करते रहे लेकिन स्टे ऑडर के पालन में खरीद-फरोक्त नही रोकी गई, यदि अथॉरिटी चाहती तो एक ईंट भी उक्त भूमि पर नही लग सकती थी। यथास्तिथि आदेश का मतलब जो जहाँ जैसा है वैसा रहे, उक्त स्टे ऑडर के उल्लंघन करने के आधार पर जिलाधिकारी महोदय द्वारा गुंडा एक्ट व भूमाफिया अनेकों कार्रवाही करते हुए बैनामे रोके जा सकते थे, सथानीय पुलिस को अवैध निर्माण नही होने दिया जाने का आदेश दिया जा सकता था, लेकिन उस समय के सभी सम्बंधित अधिकारीयों द्वारा भमि बेचने वालों के प्रति सॉफ्ट कार्नर रुख अपनाया गया। कार्रवाही नही करना भी भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है, आर्थिक मानसिक नुक्सान जनता का हुआ जिसने भूमि खरीदी और जिन लोगों ने फ्लेट या शॉप खरीदीं हैं।

Edit By Priya Singh 

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बिस्लैरी का नाम अवैध वाटर पैकेजिंग से जुड़ा

उत्तर प्रदेश हापुड: उपभोक्ता जनघोष विशेष स्टोरी- जी.एस.आर बेवरेजस कंपनी जनपद हापुड़ के धौलाना ब्लॉक में स्तिथ है यह कंपनी बिस्लैरी कंपनी की 20 लीटर की बड़ी बोतल की पैकेजिंग करती है जिसकी सप्लाई NCR में बड़े पैमाने पर की जाती है। उपभोक्ता जनघोष टीम की नज़र उक्त मानले पर बनी हुई है जिसकी शिकायत उत्तर प्रदेश राज्य भूजल प्राधिकरण व जिलाधिकारी एवं मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से की गई है पड़ताल में मौके पर कंपनी में जाकर हमने देखा जहाँ पर बिस्लैरी की बड़ी बोलों की पैकेजिंग की जा रही थी, तभी हमारी मुलाक़ात संचालक महोदय से हुई।

सवाल: क्या आपके पास बिस्लैरी के नाम से पैकेजिंग करने की अनुमति है।  

जवाब: जी नही हमारे पास 20 लीटर की बोतल वाटर पैकेजिंग की अनुमति है।

सवाल: मतलब आपके पास बिस्लैरी के नाम से पैकेजिंग की अनुमति नही है। 

जवाब: हम किसी भी नाम से वाटर पैकेजिंग कर सकते है, हम बहुत लम्बे समय से इस काम में है हमारे पास अनेकों प्रकार की अनुमति हैं। बिस्लैरी के उचाधिकारी भी हमारे काम से बहुत खुश है, खुश होकर हमरी कंपनी में भांगड़ा /डांस करते है। जिसके बाद हमने जिला भूगर्भ जल अधिकारी आशीष गुप्ता से हापुड़ से फोन पर संपर्क किया और UPSIDC के जूनियर इंजिनियर से भी बात की थी।  

सवाल: क्या जी.एस.आर बेवरेजस को बिस्लैरी वाटर पैकेजिंग की अनुमति दी गई है, यदि वाटर पैकेजिंग की अनुमति दी गई तो किस नाम के पैकेजिंग की अनुमति दी गई है। 

जवाब: पता नही देखकर बताता हूँ दोबारा फोन कर लेना, लेकिन कई बार फोन करने के बाद अधिकारी द्वारा फोन नही उठाया गया है, ऐसा लगता है भ्रष्टाचार के नशे में डूबा हुआ अधिकारी है।

सवाल: UPSIDC द्वारा उक्त भूखण्ड को क्या पदार्थ बनाने के लिए दिया गया है।

जवाब: जूनियर इंजीनियर ने पल्ला झाड़ते हुए क्षेत्रीय कार्यालय से जानकारी लेने की बात कही है।

प्रदूषण नियंतरण बोर्ड के अधिकारीयों से बात करनी अभी बाकी है पैनी खबर की पैनी नज़र उक्त प्रकरण पर बनी रहेगी। 

 उक्त मामले में शिकायतकर्ता एवं संपादक उपभोक्ता जनघोष जानेआलम (जानू चौधरी) से भी हमारी बातचीत हुई। 

सवाल: उक्त मामले की शिकायत आपके द्वारा की गई है आपको इसमें क्या अवैध लगता है और यदि इस एरिया में इसी तरह अवैध पैकेजिंग चलती रही तो भविष्य में क्या नुक्सान होंगें। 

जवाब: देखिये जनपद गाज़ियाबाद और हापुड़ सभी ब्लॉकों में मुरादनगर व धौलाना ब्लॉक सैफ जॉन में बचे है जिसमें से धौलाना ब्लॉक को भी केन्द्रीय भूमि जल प्राधिकरण (CGWA) ने पूर्व में सेमी क्रेटिकल घोषित किया था, यानि अधिसूचित क्षेत्र से कुछ ठीक माना था, उत्तर प्रदेश कानून 2019 के बाद स्टेट ने सैमी क्रेटिकल का कॉलम हटाकर केवल अधिसूचित और सैफ जॉन दो कॉलम की सूची बनाई थी, यानी इसी स्तर पर पैकेजिंग होती रही तो यह ब्लॉक भी अधिसूचित घोषित हो जायेगा यानि पानी भूमि से निकालना खतरा हो जायेगा। वाटर पैकेजिंग करने वाली कंपनियों से कारण और सभी औधोगों को नुक्सान और पलायन करना पड़ेगा। 

जवाब:2 देखिये हम डिटेल में जायेंगे तो बहुत लम्बा प्रकरण हो जायेगा, यह कंपनी जो धरती से पानी निकलकर मोटे पैसों का कारोबार कर रही है क्या आपने इस कंपनी वाले से पूछा कि कितने वर्षों से धरती से पानी निकलकर बेच रहे हो, और कितना पानी धरती में रिचार्ज किया है कानून के अनुसार जितना पानी निकालोगे उसका डबल धरती को देना होगा, क्या किसी आस/पास के गाँव में पानी की कोई व्यवस्था की गई है या यहाँ के लोगों के रोजगार की कोई व्यवस्था की है जीरो जवाब मिलेगा आपको। 

यह इस तरह की पैकेजिंग ग्राउंड वाटर एक्ट का उल्लंघन है यानि जिसने अनुमति ली है उसको यह कानून निकाले गए भूजल को, किसी भी नाम या रूप से व्यवसायिक उपयोग या लाभ के लिए बेचने से प्रतिबंधित करता है। इसी तरह इसी एरिया में ओसियन बेवरेज व सतगुरु इटरप्राइजेज द्वारा मशहूर जैन शिकंजी की बोतल की अवैध पैकेजिंग की जा रही थी किसका संज्ञान लेते हुए मामले को गंभीर मानते हुए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश को नोटिस जारी करते हुए जिलाधिकारी हापुड़ एवं प्रदूषण नियंतरण की कमैटी बनाकर जाँच करने के आदेश दिए है यह इतना गंभीर विषय है।

सवाल: उक्त मामले में आपका अगला कदम क्या होगा 

जवाब: यदि जिलाधिकारी/अध्यक्ष जिला भूगर्भ जल प्रबन्धन परिषद् ने उक्त मामले पर संज्ञान नही लिया तो मेरे द्वारा NGT के सामने मामला पहुंचेगा और जैन शिकंजी वाले मेरे केस में इस मामले को सुनने की प्रार्थना NGT से की जाएगी। पैनी खबर का यह स्टोरी करने के लिए धन्यवाद अन्यथा मुझे ऐसा लगता है कि मीडिया ने ऐसे जनहित के मुद्दों पर काम करना बंद ही कर दिया है।

स्टोरी पर हमारी टीम की नज़र बनी रहेगी और प्रदूषण नियंतरण बोर्ड के सम्बंधित अधिकारी से बात करने के बाद स्टोरी प्रकाशित की जाएगी।

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वैश्विक सैन्य मंच पर भारत की बढ़त: चौथी सबसे बड़ी शक्ति का अनावरण

मुंबई उपभोक्ता जनघोष:  भू-राजनीतिक जटिलताओं से भरी दुनिया में, भारत चौथी सबसे बड़ी सैन्य शक्ति के रूप में खड़ा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता के प्रति इसकी अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।  भारत की सैन्य शक्ति के केंद्र में न केवल इसकी विविध संस्कृति और समृद्ध विरासत है, बल्कि इसकी विशाल आबादी भी है, जो रंगरूटों का एक मजबूत पूल प्रदान करती है।  कठोर भर्ती प्रक्रियाएँ यह सुनिश्चित करती हैं कि सेना अत्यधिक समर्पित और कुशल व्यक्तियों से बनी है।

 सेना, नौसेना और वायु सेना को मिलाकर, भारत की सशस्त्र सेनाएं समन्वित और एकीकृत तरीके से काम करती हैं, जिससे राष्ट्रीय रक्षा के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की अनुमति मिलती है।  यह त्रि-सेवा संरचना विभिन्न प्रकार की सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयारी सुनिश्चित करती है।  भारत की सैन्य ताकत का एक प्रमुख चालक इसका आधुनिकीकरण करने का निरंतर प्रयास है, जिसमें रक्षा अनुसंधान और विकास में पर्याप्त निवेश के साथ अत्याधुनिक हथियार और उपकरण प्राप्त होते हैं, जिससे सशस्त्र बलों की प्रभावशीलता और चपलता बढ़ती है।

भारत की परमाणु क्षमताएं इसकी रक्षा रणनीति का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो संभावित विरोधियों के खिलाफ एक विश्वसनीय निवारक के रूप में कार्य करती है।  भू-राजनीतिक रूप से, दक्षिण एशिया में भारत की रणनीतिक स्थिति क्षेत्रीय स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो पड़ोसी देशों और उससे आगे के देशों के साथ मजबूत राजनयिक संबंधों द्वारा समर्थित है।

आतंकवाद के मौजूदा खतरे के जवाब में, भारत के सशस्त्र बलों ने आंतरिक सुरक्षा और वैश्विक आतंकवाद विरोधी प्रयासों के प्रति प्रतिबद्धता दिखाते हुए विशेष इकाइयों और आतंकवाद विरोधी अभियानों के माध्यम से अनुकूलनशीलता और प्रभावशीलता का प्रदर्शन किया है।  संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में सक्रिय रूप से शामिल होकर, भारत संघर्ष से जूझ रहे क्षेत्रों में स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए, सैनिकों और विशेषज्ञता दोनों का योगदान देता है।

 विस्तृत समुद्र तट के साथ, भारतीय नौसेना समुद्री हितों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।  एक आधुनिक और मजबूत बेड़ा पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में शक्ति प्रदर्शित करते हुए, खतरों का प्रभावी ढंग से जवाब देने की क्षमता सुनिश्चित करता है।  इसी तरह, विमान के बहुमुखी बेड़े से सुसज्जित भारतीय वायु सेना, हवाई श्रेष्ठता बनाए रखती है - जो रक्षात्मक और आक्रामक दोनों अभियानों के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व है।

 मित्र राष्ट्रों के साथ रणनीतिक गठबंधन भारत की रक्षा क्षमताओं को और बढ़ाते हैं, साझा खुफिया जानकारी, संयुक्त अभ्यास और उभरती सुरक्षा चुनौतियों के लिए समन्वित प्रतिक्रियाओं में सहयोग को बढ़ावा देते हैं।  दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सैन्य शक्ति बनने की भारत की यात्रा लचीलेपन, रणनीतिक योजना और अनुकूलन क्षमता की कहानी है।  जैसे-जैसे वैश्विक गतिशीलता विकसित हो रही है, भारत की सैन्य ताकत घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर एक सुरक्षित और स्थिर भविष्य को आकार देने में आधारशिला के रूप में खड़ी है।

Edit By Priya Singh 


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नेता कोई भी हो, सबके भाषणों से गायब हैं जनता के असल मुद्दे ‘

मुल्क में नए किस्म की सियासत यानी मुद्दाविहीन राजनीति का दौर चल पड़ा है जिसमें सियासी दलों को तो फायदा हो रहा है। पर इस चलन से आवाम का कितना नुकसान हो रहा है, ये राजनेता अंदाजा नहीं लगा सकते। दरअसल, जनहित की राजनीति में मुद्दा जहां महंगाई-रोजगार का होना चाहिए, वहां धर्म-समुदाय के नाम पर जनता को आपस में भिड़ाया जा रहा है। कमोवेश, मौजूदा समय के पांच राज्यों के चुनावी हुड़दंग में चकल्लस ऐसी ही मची हुई है। चुनावी मौसम को चुनावी हुड़दंग इसलिए कहा जाने लगा है क्योंकि आमजन के मुद्दों के जगह अब सिर्फ बिना वजह का शोर होता है। सियासी भाषणों से जमकर ड्रामा हो, उसकी पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी होती है जिसका मुख्यालय दिल्ली है।


राजधानी में सियासी पार्टियों के जितने के भी मुख्यालय हैं वहां आजकल इसी की पाठशाला लगती है। सप्ताह में करीब दो बार प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश में चुनावी सभा करने पहुंच रहे हैं। वहां कुछ ऐसा बोलकर चले आते हैं जिससे माहौल एकाध दिनों तक चर्चाओं में रहता है। पिछले सप्ताह शाहजहांपुर में योगी को यूपी का उपयोगी बोल आए थे और उसके पिछले सप्ताह लाल टोपी बोलकर हंगामा कटवा दिया था। यूपी चुनाव में इस समय लाल टोपी, जालीदार टोपी, धर्म-धर्मांतरण, जिन्ना आदि के मसले ही तो गर्म हैं। दालों का रेट आसमान छू रहा है, ईंधन की कीमतें, रोजमर्रा की वस्तुएं आपे से बाहर हैं, बावजूइ इसके कोई राजनेता बोलने को राजी नहीं है।


बहरहाल, चुनाव जैसे-जैसे अपने रंगत में आता जा रहा है, कोरोना भी जोर मारने लगा है। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने करीब दर्जन भर राज्यों में रात्रि कर्फ्यू लगाया है जिनमें ज्यादातर वो राज्य हैं जिनमें चुनाव नहीं हैं। सिर्फ उत्तर प्रदेश में रात्रि कर्फ्यू की घोषणा हुई है। कहीं भाजपा की जबरदस्त तैयारियों पर कोरोना पानी ना फेर दे। चुनाव कहीं वर्चुअल तरीके से ना कराने पड़ जाएं। दिल्ली में बीते एक सप्ताह से रोजाना कोरोना संक्रमण के केस बढ़ रहे हैं। दिल्ली ही क्या पूरे देश में यही हाल है। संक्रमणों और मरने वालों की संख्या में भी एकाएक बढ़ोतरी हुई है। कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन ने अपने शुरुआती चरण में ही हंगामा बरपा दिया है। इसलिए दिल्ली में मुख्य चुनाव आयोग के कार्यालय में सुगबुगाहट इस बात है कि शायद चुनाव आगे बढ़ाए जाएं, इसको लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त बीते दिनों उत्तराखंड के दौरे पर पहुंचे। पंजाब भी जाने वाले हैं और आज उत्तर प्रदेश गये हैं। जहां सभी जिलों के एसपी-डीएम के साथ बैठक करके स्थिति का जायजा लेंगे। चुनाव कराने के मुताबिक अगर उनसे फीडबैक अच्छा नहीं मिला तो कुछ महीनों के लिए चुनाव टाले भी जा सकते हैं। ऐसा भी हो सकता है बिहार विधानसभा चुनाव की तरह प्रचार वर्चुअल कराने का निर्णय लिया जाए। 


कोरोना की स्थिति आगे क्या रहने वाली है, किसी को पता नहीं? चिकित्सकों में भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। वो तीसरी लहर का अंदाजा अक्टूबर के आसपास लगा रहे थे। डब्ल्यूएचओ ने भी यही तुक्का मारा था, हालांकि उनका अनुमान पहली लहर में भी धराशायी हुआ था। लेकिन पिछली दोनों लहरों की टाइमिंग ठीक से देखें, तो दोनों का आगमन एक ही वक्त पर हुआ था। होली त्योहार के तुरंत बाद कोरोना ने एकदम जोर पकड़ा था। शुरुआत इन्हीं दिनों यानी दिसंबर-जनवरी से होनी आरंभ हुई थी, जो धीरे-धीरे बढ़ती गई। इस हिसाब से तो मार्च-अप्रैल के लिए हमें अभी से सतर्क होना चाहिए। केंद्र सरकार और राज्यों की हुकूमतों को अभी से कमर कस लेनी चाहिए। चिकित्सा तंत्र की उन दिनों परीक्षा होती है, उन्हें अपनी तैयारियों को अभी से दुरुस्त करना चाहिए। मौसम चुनावी है इसलिए उन राज्यों को सबसे ज्यादा गंभीर होना चाहिए, जहां चुनाव हैं। विशेषकर उत्तर प्रदेश को, जहां सियासी दलों की रैलियों में एक साथ लाखों लोगों जुट रहे हैं। क्योंकि ऐसी गलती हम पश्चिम बंगाल चुनाव में पहले कर चुके हैं। वहां बढ़ते कोरोना के बीच चुनाव संपन्न हुए थे। चुनाव खत्म होते ही पाबंदियां लगा दी गई थीं, लेकिन तब तक संक्रमण बुरी तरह फैल चुका था। यही हाल इस वक्त यूपी में है, लेकिन इस बात की कोई परवाह नहीं कर रहा। बेशक, वहां रात्रि कर्फ्यू लगा दिया है जो कोरोना रोकने का विकल्प कतई नहीं हो सकता।


स्थिति चाहे कैसी भी हो, चुनावी रैलियों में बड़े नेताओं को भीड़ चाहिए। भीड़ जुटाने का दबाव अब सिर्फ कार्यकर्ताओं के कंधों पर नहीं होता। जिले के पटवारी, तहसीलदार, लेखपाल, ग्राम प्रधान, रोजगार सेवक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी लगाया जाता है। रैली से पूर्व गांव के बाहर बसों को तैनात किया जाता है, उन्हें खचाखच भरने की जिम्मेदारी इन सरकारी मुलाजिमों की ही होती है। ये बात तो काफी समय से तय हो चुकी है कि अब चुनावी रैलियों में जुटने वाली भीड़ वास्तविक नहीं होती, वह लालच देकर बुलाई जाती है। मतदाताओं को पैसे भी दिए जाते हैं, जिस जिले में रैली होती है भीड़ के लोग स्थानीय नहीं, बल्कि अन्य जिलों के होते हैं। बंगाल में इसको लेकर हंगामा भी कटा था। ममता बनर्जी सार्वजनिक रूप से भाजपा पर आरोप लगाती रहीं थीं कि उनकी रैलियों में दिखने वाले चेहरे बंगाली नहीं हैं बल्कि बहारी हैं। दरअसल, ये तस्वीरें गंदी सियासत की परिभाषा को बताने के लिए पर्याप्त हैं। साफ-सुधरी राजनीति के लिए राजनेताओं को इन हथकंड़ों से तौबा करनी चाहिए।


-डॉ. रमेश ठाकुर-






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